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नदी में डुबकी लगवाकर पीलीभीत के सिख बनाए गए ईसाई, छोटे-छोटे बच्चों का भी किया ब्रेनवॉश: स्थानीय बोले- पहले ले जाते हैं चर्च, फिर कहते हैं गुरु ग्रंथ साहिब छोड़ो

अर्जुन सिंह को ईसाई गिरोह से गिफ्ट में एक घर भी मिला है। शायद अब भी उसके इस काम के लिए पैसे मिल रहे हैं। अब उसकी प्रधान पत्नी भी लोगों को ईसाई बनने पर सरकारी सुविधाओं को देने का लालच देने लगी है।

उत्तर प्रदेश का पीलीभीत जिला। इंटरनेशनल बॉर्डर पर पड़ती है पूरनपुर तहसील। यहाँ के तीन गाँव – सिंघाड़ा उर्फ टाटरगंज, भागीरथ और बेल्हा सिख बाहुल्य हैं। करीब 22000 राय सिखों की आबादी वाले इन गाँवों में 3000 से ज्यादा लोग ईसाई बन चुके हैं। साल 2002 से नेपाल के रास्ते शुरू हुआ धर्मांतरण का खेल अब खुलने लगा है। सिख संगठन, हिंदू संगठन लोगों की घर वापसी करा रहे हैं और करीब 700 लोग घर वापसी कर फिर से सिख संगत में लौट चुके हैं। इस बीच, कुछ नाम ऐसे आ रहे हैं, जो इस धर्मांतरण गिरोह से जुड़ी अहम कड़ी हो सकते हैं। ऐसा ही एक नाम है टाटरगंज के प्रधान का पति अर्जुन सिंह का।

भास्कर ने अपनी ग्राउंड रिपोर्ट में बताया है कि टाटरगंज की प्रधान का पति अर्जुन सिंह पहले सिख ही था। वो काफी दबंग है। लोग खूब डरते हैं। वो किसी वजह से ईसाई बन गया। अब लोगों को ईसाई बना रहा है। अर्जुन सिंह टाटरगंज में 4-5 बार ईसाइयों की मीटिंग भी करा चुका है। उसी एक मीटिंग में उसे पादरी का पद दे दिया गया और फिर वो जोर-शोर से ग्रामीणों को ईसाई बनाने में जुट गया।

एक स्थानीय युवक ने बताया, शुरू में कुछ लोग उसके समझाने पर आराम से ईसाई बनने के लिए मान गए। कुछ लोगों ने विरोध किया, तो उन्हें धमकाया गया। उनकी बेटियों से छेड़छाड़ की गई। ईसाई बनने पर इन सब चीजों से बचाने की गारंटी दी गई। उक्त युवक ने बताया कि अर्जुन सिंह को ईसाई गिरोह से गिफ्ट में एक घर भी मिला है। शायद अब भी उसके इस काम के लिए पैसे मिल रहे हैं। अब उसकी प्रधान पत्नी भी लोगों को ईसाई बनने पर सरकारी सुविधाओं को देने का लालच देने लगी है।

एक युवक ने बताया कि पहले तो हमसे गुरु ग्रंथ साहिब को दूर रहने के लिए कहा जाता है और फिर धीरे-धीरे ईसाइयत की तरफ मोड़ दिया जाता है। एक व्यक्ति ने बताया कि उसे नेपाल की सीमा पर शारदा नदी में तीन डुबकी लगवाई गई और ईसाई मजहब में शामिल कर लिया गया। इसकी शुरुआत वो चर्च ले जाने से करते हैं और फिर लालच देकर ईसाई बनाते हैं। पीलीभीत जिले में तैनात रहे एक अधिकारी ने ऑफ कैमरा बताया कि यहाँ धर्मांतरण खूब हुआ है। लालच इसके पीछे बड़ी वजह है।

ऑपइंडिया अपनी पिछली रिपोर्ट में बता चुका है कि सतनाम सिंह नाम का व्यक्ति सबसे पहले ईसाई बना था और फिर पूरे इलाके में धर्मांतरण की झड़ी लग गई। वह चरस की तस्करी करता था। टाटरगंज गाँव के रहले वाले सतनाम सिंह को पास्टर बनाया गया। उसने लालच देकर आसपास के गाँवों में ईसाई धर्मांतरण के इस रैकेट को आगे बढ़ाया।

पीलीभीत के बेल्हा गाँव के गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के सचिव परमजीत सिंह के हवाले से इस रिपोर्ट में बताया गया है कि करीब 150 घरों पर क्रॉस के निशान बने हुए हैं। कुछ घरों में प्रार्थना गतिविधियाँ भी हो रही है। उन्होंने बताया है कि शिकायत के बाद प्रशासन ने घरों के बाहर लगे क्रॉस निशान हटवाने का अभियान शुरू किया है। साथ ही करीब 100 घरों में विशेष तरह के कैलेंडर मिलने की बात कहते हुए धर्मांतरण के लिए दक्षिण कोरिया से पैसा आने की आशंका जताई है।

बता दें कि पीलीभीत के हजारा थाना क्षेत्र के गाँवों जैसे बेल्हा, टाटरगंज, बमनपुरी और सिंघाड़ा में लंबे समय से धर्मांतरण की शिकायतें सामने आ रही थीं। स्थानीय सिख संगठनों का दावा है कि नेपाल से आए पादरियों और कुछ स्थानीय पास्टरों ने आर्थिक लालच और चंगाई सभाओं के जरिए सिखों को ईसाई धर्म अपनाने के लिए प्रेरित किया। ऑल इंडिया सिख पंजाबी वेलफेयर काउंसिल के मुताबिक, पिछले कुछ सालों में 3,000 से ज्यादा सिखों का धर्म परिवर्तन हुआ। इनमें से 160 परिवारों की सूची प्रशासन को सौंपी गई थी।

घर वापसी में जुटे सिख और हिंदू संगठन

इससे पहले, शुक्रवार (23 मई 2025) को बेल्हा और टाटरगंज गाँवों में आयोजित घर वापसी समारोह में सिख समुदाय के लोग बड़ी संख्या में शामिल हुए। विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के इस कार्यक्रम में करीब 500 सिखों की घर वापसी हुई। अब तक कुल 700 सिखों की घर वापसी की बात कही जा रही है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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