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उद्धव ठाकरे के हाथ से खिसक सकती है शिवसेना, पार्टी चुनाव चिह्न पर एकनाथ शिंदे गुट ने किया चुनाव आयोग में दावा

लोकसभा में स्पीकर ने भी उन्हें अलग गुट की मान्यता दे दी है। ऐसे में ठाकरे परिवार के हाथों से शिवसेना की कमान खिसक सकती है क्योंकि पार्टी का नाम और चिह्न शिंदे गुट को मिल सकता है।

महाराष्‍ट्र में सत्ता गँवाने के बाद उद्धव ठाकरे को एक और झटका लग सकता है और इस बार शिवेसना पर उनका दावा ही हाथ से निकलने की सम्भावना नजर आ रही है। दरअसल, शिंदे गुट ने पार्टी चुनाव चिह्न पर अपना दावा पेश किया है। एकनाथ शिंदे समूह ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर शिवसेना के धनुष-बाण चुनाव चिह्न को आवंटित करने की माँग की है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयोग को भेजे एक पत्र में शिंदे गुट ने असली शिवसेना होने का दावा किया है और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर द्वारा दी गई मान्यता का हवाला दिया है।

बता दें कि एकनाथ शिंदे ने मंगलवार (19 जुलाई) को लोकसभा में राहुल शेवाले को पार्टी के फ्लोर लीडर और भावना गवली को मुख्य सचेतक बनाने की घोषणा की थी। लोकसभा अध्यक्ष ने राहुल शेवाले को संसद के लोकसभा में शिवसेना के नेता के रूप में मान्यता भी प्रदान कर दी।

हालाँकि, जिस तरह शिवसेना के एकनाथ शिंदे गुट ने अलग होकर महाराष्ट्र में बीजेपी के साथ सरकार बना ली थी। और खुद को संख्या के आधार पर असली शिवसेना घोषित किया था तभी से ये चर्चा सियासी गलियारों में हो रही थी कि क्या शिव सेना के असली नाम और चुनाव चिन्ह पर शिंदे गुट का कब्जा हो जाएगा?

वहीं अब जिस तरह से शिवसेना के लोकसभा में मौजूद 19 सांसदों में से 12 सांसद, 55 में से 40 विधायक और सैकड़ो पार्षद उद्धव ठाकरे गुट को छोड़कर शिंदे गुट का हिस्सा हैं महाराष्ट्र की सियासत का पूरा दृश्य बदल चुका है। लोकसभा में स्पीकर ने भी उन्हें अलग गुट की मान्यता दे दी है। ऐसे में ठाकरे परिवार के हाथों से शिवसेना की कमान खिसक सकती है क्योंकि पार्टी का नाम और चिह्न शिंदे गुट को मिल सकता है। इस पर अब उनका दावा मजबूत लगता है।

गौरतलब है कि इस समय चुनाव चिन्‍ह पर दावा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को महाराष्ट्र राज्य चुनाव आयोग को स्थानीय निकायों के चुनावों को दो सप्ताह के भीतर अधिसूचित करने का निर्देश दिया है। ऐसे में जब महाराष्ट्र में BMC सहित कई नगर निकायों में चुनाव होने वाले हैं तो चुनाव चिह्न पर अधिकार जरुरी हो जाता है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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