Sunday, July 14, 2024
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सरकारें आएँगी, सरकारें जाएँगी… संसद के विशेष सत्र में PM मोदी ने अटल बिहारी वाजपेयी को किया याद, कई बड़े फैसले लिए जाने के दिए संकेत

प्रधानमंत्री ने संसद भवन के भीतर इस बात पर भी प्रकाश डाला कि आजादी के समय भारत के विषय में आशंकाएँ व्यक्त की गई थीं लेकिन संसद ने उन सभी आशंकाओं को झूठ सिद्ध कर दिया।

प्रधानमंत्री मोदी ने सोमवार (18 सितम्बर, 2023) से चालू हुए संसद के 5 दिवसीय विशेष सत्र के पहले मीडिया से बात करते हुए बड़े संकेत दिए। प्रधानमंत्री ने संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी, PMO में मंत्री जितेन्द्र सिंह और कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल के साथ बात करने के बाद मीडिया से कहा कि यह सत्र छोटा लेकिन ‘ऐतिहासिक’ होने वाला है।

प्रधानमंत्री के इस ऐलान से कि यह ऐतिहासिक निर्णयों का सत्र है, राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इस सत्र में ही कोई बड़ा विधेयक सरकार प्रस्तुत करेगी। कयास लगाए जा रहे हैं कि इसी सत्र में UCC, महिला आरक्षण बिल या फिर ‘एक देश एक चुनाव’ से सम्बंधित कोई बड़ा निर्णय सामने आ सकता है। हालाँकि, सदन की कार्यवाही के पहले दिन ऐसी कोई घोषणा होने की सम्भावना कम है क्योंकि आज का दिन लोकसभा अध्यक्ष ने पूरा दिन सांसदों द्वारा वर्तमान संसद भवन से जुड़ी हुई यादों पर बोलने के लिए दिया है।

इसके बाद 19 सितम्बर को गणेश चतुर्थी के दिन संसद की कार्यवाही नए संसद भवन में स्थानांतरित कर दी जाएगी। अभी तक जो भी जानकारी सरकार की तरफ से दी गई है, उसमें कोई भी बिल ऐसा नहीं है जो बड़ी बहस का मुद्दा बने। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसके बाद लोकसभा को संबोधित किया, जहाँ उन्होंने संसद भवन की पिछले 75 वर्षों की यात्रा को रेखांकित किया।

प्रधानमंत्री ने इस दौरान बताया कि संसद प्रारंभ होने से लेकर अब तक 7500 से अधिक व्यक्ति दोनों सदनों में सांसद के रूप में सेवाएँ दे चुके हैं, जिनमें 650 से अधिक महिलाएँ रही हैं। उन्होंने इस दौरान संसद के पूर्व सदस्यों से लेकर वर्तमान सदस्यों तक के योगदान को भी बताया। प्रधानमंत्री ने संसद भवन के भीतर इस बात पर भी प्रकाश डाला कि आजादी के समय भारत के विषय में आशंकाएँ व्यक्त की गई थीं लेकिन संसद ने उन सभी आशंकाओं को झूठ सिद्ध कर दिया।

प्रधानमंत्री ने सदन में काम करने वाले सभी कर्मचारियों का भी धन्यवाद किया कि वह इस संसद को सुचारु रूप से चलाने के लिए लगातार मेहनत करते आए हैं। प्रधानमंत्री ने पंडित नेहरु द्वारा आजादी की मध्यरात्रि पर दिए गए भाषण और पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा ऐतिहासिक भाषण ‘सरकारें आएँगी, सरकारें जाएँगी, लेकिन ये देश रहना चाहिए’ का जिक्र भी लोकसभा में किया।

उन्होंने सांसदों द्वारा बीमारी और कोरोना जैसी विकट परिस्थितियों के बीच काम करने को भी सराहा। प्रधानमंत्री ने वर्ष 2014 के उस लम्हे को भी याद किया जब वह सदन पहुँच कर उसे प्रणाम करके अन्दर गए थे। प्रधानमंत्री ने सदन द्वारा लिए गए बड़े निर्णयों को भी बताया। उन्होंने उत्तराखंड, झारखंड और छत्तीसगढ़ के निर्माण को याद किया। उन्होंने भारत अमेरिका परमाणु समझौते की भी बात की।

प्रधानमंत्री ने कहा कि अनुच्छेद-370 का खात्मा ऐसा कदम था जिसे सदन कभी नहीं भूलेगा। प्रधानमंत्री ने 1965 के युद्ध के दौरान सदन से सैनिकों की हिम्मत बढ़ाने, हरित क्रान्ति लाने और बांग्लादेश के निर्माण को लेकर लिए गए निर्णयों का भी जिक्र किया गया। प्रधानमंत्री ने अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार द्वारा ‘सर्व शिक्षा अभियान’ के प्रारंभ किए जाने के ऐतिहासिक निर्णय को भी याद किया।

मनमोहन सिंह की सरकार के दौरान हुए ‘कैश फॉर वोट’ कांड की याद भी प्रधानमंत्री ने सदन को दिलाई। प्रधानमंत्री के इस भाषण के दौरान विपक्ष ने कई बार शोर मचाने की कोशिश की लेकिन सफल नहीं हुए।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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