Sunday, July 21, 2024
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सभी तानाशाहों के नाम ‘M’ से हैं तो मोहनदास गाँधी और मोती लाल नेहरू क्या थे? राहुल के ट्वीट पर लोगों ने किया ‘माइनो’ को याद

लोगों ने राहुल गाँधी के नाना और सोनिया गाँधी के पिता, स्टीफन माइनो के बारे में ट्विटर पर सवालों की झड़ी लगा दी। बता दें कि सोनिया गाँधी के पिता स्टीफन माइनो इटली में मुसोलिनी की सेना में एक वफादार सैनिक थे।

कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी ने बुधवार (फरवरी 03, 2021) को एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर अप्रत्यक्ष रूप से निशाना साधा और उनका नाम लिए बिना उनकी तुलना तानाशाहों से करने का प्रयास किया। राहुल गाँधी ने एक ट्वीट किया जिसमें उन्होंने दुनिया के कुछ तानाशाहों के नामों की लिस्ट दी थी।

राहुल ने इस ट्वीट में लिखा कि इतने सारे तानाशाहों के नाम ‘M’ (एम) से ही क्यों शुरू होते हैं। उन्होंने अपने ट्वीट में जिन तानाशाहों के नाम शेयर किए उनमें मार्कोस, मुसोलिनी, मिलोसेविक, हुस्नी मुबारक, मोबुतू, मिकोमबेरो, मुशर्रफ के नाम शामिल थे।

बता दें कि मार्कोस का पूरा नाम फर्डिनेंड इमैनुएल एड्रैलिन मार्कोस था, जो फिलिपींस का राष्ट्रपति बना। उसने देश में सैन्य तानाशाही वाले कई कड़े और बर्बर कानून लागू किए। इसके अलावा, बेनितो मुसोलिनी इटली का एक राजनेता था, जिसने फासीवाद की नींव रखी। स्लोबोदान मिलोशेविच सर्बिया का राजनेता था, जिसे तानाशाह के रूप में जाना जाता है। होस्नी मुबारक मिस्र का, कर्नल जॉसेफ मोबुतु कॉन्गो का, जनरल परवेज मुशर्रफ पाकिस्तान और माइकल माइकल माइकॉम्बेरो बुरुंडी में तानाशाही शासन किया।

सोशल मीडिया पर लोगों ने राहुल गाँधी को उनके ही सवाल पर आड़े हाथों ले लिया। राहुल गाँधी के ट्वीट के बाद लोगों ने सोशल मीडिया पर लोगों ने उनसे पूछा कि ‘एम’ नाम के सभी तानाशाह, तो मोहन दास करम चंद गाँधी, मोती लाल नेहरू और मनमनोहन सिंह कौन? इसके साथ लोगों ने मंडेला, मार्टिन एल किंग, मलाला कई बड़ी समेत महबूबा मुफ्ती, ममता बनर्जी, मुलायम सिंह का भी जिक्र किया। 

ट्वीट वायरल होने के बाद लोगों ने राहुल गाँधी के नाना और सोनिया गाँधी के पिता, स्टीफन माइनो के बारे में ट्विटर पर सवालों की झड़ी लगा दी। बता दें कि सोनिया गाँधी के पिता मुसोलिनी और हिटलर जैसे तानाशाहों से जुड़े हुए थे। स्टीफन माइनो इटली में मुसोलिनी की सेना में एक वफादार सैनिक थे। जिन्होंने मुसोलिनी और इटली के फासीवादी के प्रति खुलकर अटूट वफादारी की घोषणा की थी।

सोशल मीडिया यूजर्स ने यह भी सवाल उठाया कि राहुल गाँधी ने चीनी नेता माओत्से तुंग का नाम क्यों नहीं लिया, जो कुछ वर्षों में लाखों लोगों की मौत का कारण बना। कुछ लोगों ने आश्चर्य व्यक्त किया कि क्या माओ का बहिष्कार चीन में कम्युनिस्ट पार्टी और भारत में कॉन्ग्रेस पार्टी के बीच गुप्त संबंधों का संकेत देता है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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