Thursday, April 2, 2026
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न्यूजीलैंड में भारत के साथ FTA का विरोध, डेयरी प्रोडक्ट्स और फार्मिंग का मुद्दा उठा रहा वहाँ का विपक्ष: US से भी इसी मुद्दे पर गतिरोध, समझिए- क्यों पीछे नहीं हट रही मोदी सरकार

भारत-न्यूजीलैंड FTA में भारत अपनी नीति पर चलते हुए देश के किसानों का पूरा ख्याल रखा है। इस पर 2026 के पहली तिमाही में हस्ताक्षर होने की उम्मीद है। इस समझौते के बाद न्यूजीलैंड का बाजार भारत के सारे सामानों के लिए खुल जाएगा और वह भी बगैर टैक्स के।

भारत और न्यूजीलैंड के बीच FTA को लेकर सहमति बन गई है। इस पर 2026 के पहली तिमाही में हस्ताक्षर होने की उम्मीद है। इस समझौते के बाद न्यूजीलैंड का बाजार भारत के सारे सामानों के लिए खुल जाएगा और वह भी बगैर टैक्स के। अमेरिकी टैरिफ का भारत के जिन उद्योगों पर सबसे ज्यादा असर पड़ा है वे हैं कपड़ा, जूट, ज्वैलरी आदि। इन उद्योगों को भी नया बाजार मिलेगा, रोजगार बढ़ेंगे। 2047 तक विकसित भारत के संकल्प को इससे मजबूती मिलेगी।

भारत में अगले 5 सालों में होगा 1.6 लाख करोड़ का निवेश

न्यूजीलैंड से समझौते के बाद सभी प्रोडक्ट के लिए बाजार पूरी तरह खुल जाएगा। टैक्स नहीं होने पर ये सस्ते मिलेंगे। जाहिर है ये बिकेंगे भी। इससे इन उद्योगों को काफी फायदा होगा। इन उद्योगों में मजदूरों की ज्यादा जरूरत होती है इसलिए भारत में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। न्यूजीलैंड ने अगले 5 सालों में भारत में 20 बिलियन डॉलर यानी 1.6 लाख करोड़ रुपए से अधिक के निवेश का भरोसा दिया है। भारत से न्यूजीलैंड को जो भी सामान निर्यात होंगे उनपर टैरिफ नहीं लगेगा। इसका फायदा दूसरे उद्योगों को भी होगा।

मोदी सरकार ने अपनी पॉलिसी न बदलते हुए किसानों के हितों का पूरा ख्याल रखा है। भारत न्यूजीलैंड के ज्यादातर प्रोडक्ट पर टैरिफ नहीं लगाएगा, लेकिन डेयरी प्रोडक्ट जैसे घी,दूध, दही, बटर,पनीर आदि के अलावा सब्जी, चना, मटर, मीट, चीनी, ज्वैलरी, तांबा और एल्यूमीनियम जैसे सेक्टर्स पर कोई टैरिफ कम नहीं करेगा। भारत ऐसा कर किसानों के साथ- साथ व्यापारियों को भी राहत देना चाहता है।

50 फीसदी टैरिफ लगाए जाने के बावजूद अमेरिका के साथ भी व्यापार समझौते को लेकर लगातार बातचीत हो रही है, लेकिन भारत ने साफ कर दिया है कि किसानों के हित को कभी भी अनदेखा नहीं किया जाएगा। जबकि अमेरिका अपने माँसाहार मवेशियों के दूध, चीज, बटर और दूसरे प्रोडक्ट भारत में खपाना चाहता है। भारत इसके लिए तैयार नहीं है।

न्यूजीलैंड के माँस, ऊन, कोयला, लकड़ी टैरिफ फ्री

कुछ ऐसी ही स्थिति न्यूजीलैंड के साथ भी है। यहाँ की डेयरी प्रोडक्ट के लिए भारत अपना टैरिफ कम करने को तैयार नहीं है। इसका न्यूजीलैंड में विरोध हो रहा है। लेकिन न्यूजीलैंड से आने वाले माँस, ऊन, कोयला और लकड़ी के सामान पर कोई टैरिफ नहीं लगेगा। इसके अलावा कीवी, सेब,चेरी, एवोकैडो और शहद पर भारत टैरिफ में छूट देगा, इसका न्यूजीलैंड को फायदा होगा। भारत में लोगों को ये चीजें सस्ती मिलेंगी।

छात्रों से लेकर पेशेवरों तक को फायदा

जो छात्र पढ़ाई के लिए न्यूजीलैंड जाना चाहते हैं, उन्हें काफी फायदा होने जा रहा है। साइंस और टेक की पढ़ाई करने वाले ग्रेजुएशन और मास्टर छात्रों को कोर्स के बाद 3 साल और पीएचडी करने के बाद 4 साल जॉब कम से कम कर सकेंगे। इसके अलावा हर साल करीब 5000 भारतीय प्रोफेशनल्स को अस्थायी नौकरी वीजा दिये जाएँगे। इससे आईटी, हेल्थकेयर, इंजीनियरिंग, आयुष डॉक्टर, संगीत के टीचर, योग के टीचर को खास तौर पर फायदा मिलेगा। न्यूजीलेंड सालाना 1000 वर्क एंड हॉलीडे वीजा भी देगा।

न्यूजीलेंड में क्यों हो रहा विरोध?

न्यूजीलैंड एक कृषि प्रधान देश है। यह दुनिया के सबसे बड़े डेयरी निर्यातक देशों में एक है। हालाँकि समझौते के तहत ऊन पर टैरिफ नहीं लगेगा, लेकिन माँस, दूध, दही, बटर वगैरह पर भारत ने अपनी नीति के अनुरूप टैरिफ कम नहीं की है। इसके अलावा भारतीयों को इमीग्रेशन छूट दिए जाने पर चिंता जताई जा रही है।

विदेश मंत्री विंस्टन पीटर ने भारत के साथ हुए नए मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की आलोचना करते हुए इसे ‘बुरा सौदा’ करार दिया है। उनके मुताबिक, इसमें भारत को बहुत कुछ दिया गया है, खासकर इमिग्रेशन में और बदले में न्यूजीलैंड के लोगों को डेयरी सहित काफी क्षेत्रों में कुछ नहीं मिला है।

पीटर ने कहा कि उनकी पार्टी न्यूजीलैंड फर्स्ट इस समझौते के सख्त खिलाफ है। संसद में इससे संबंधित बिल के खिलाफ वोट करेंगे। पीटर्स का मानना है कि यह समझौता न तो ‘मुक्त’ है और न ही ‘निष्पक्ष’। उन्होंने चिंता जताई कि यह न्यूजीलैंड के आर्थिक और मजदूरों के हितों की ठीक से रक्षा नहीं करता।

पीटर्स ने आरोप लगाया कि नेशनल पार्टी ने समझौते को जल्दीबाजी में निपटाने के चक्कर में क्‍वालिटी से समझौता किया। उनकी पार्टी ‘न्यूजीलैंड फर्स्ट’ चाहती थी कि सरकार तीन साल का पूरा समय लेकर बेहतर शर्तों के साथ समझौता करे। बजाय इसके कि वे जल्दबाजी में ‘घाटे का सौदा’ कर लिया। पीटर्स ने कहा, ‘दुर्भाग्य से इन बातों पर ध्यान नहीं दिया गया।’ उन्होंने आगे कहा, ” प्रधानमंत्री की नेशनल पार्टी ने न्यूजीलैंड के लोगों और भारतीयों दोनों के लिए फायदेमंद हों, ऐसा निष्पक्ष सौदा करने के लिए काफी होमवर्क करना था, लेकिन प्रधानमंत्री की पार्टी ने ‘घाटे वाला सौदा’ करना पसंद किया।”

न्यूजीलेंड के विदेश मंत्री ने कहा कि इस टर्म में विदेश मंत्री के तौर पर ऑस्ट्रेलिया और पैसिफिक के बाहर हमारा पहला दौरा भारत का था और हम इस साल वहाँ से लौटे हैं। और हमारे कहने पर, विदेश मंत्रालय और व्यापार मंत्रालय ने भारत में हमारे पोस्ट और वेलिंगटन में हेड ऑफिस, दोनों जगह भारत-NZ रिश्तों को आगे बढ़ाने के लिए दिए जा रहे रिसोर्स में काफी बढ़ोतरी की है।

हम भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर को लंबे समय से जानते हैं, और एक इंटरनेशनल स्टेट्समैन और न्यूज़ीलैंड-भारत रिश्तों के चैंपियन के तौर पर उनके लिए बहुत सम्मान रखते हैं।

पीएम क्रिस्टोफर ने समझौते का किया समर्थन

न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने समझौते को न्यूजीलैंड के लिए फायदेमंद बताया। उन्होंने कहा कि भारत का विशाल बाजार न्यूजीलेंड की जनता के लिए नए अवसर लेकर आएगा। इससे आर्थिक विकास होगा, बेरोजगारी घटेगी और नए अवसर पैदा होंगे। उन्होंने कहा कि 2022 के चुनाव में जनता से किए गए वादे के मुताबिक उन्होंने इस समझौता के लिए अपनी सहमति दी है। इस पर 2026 के पहले तिमाही में हस्ताक्षर हो जाएगा।

पीएम मोदी ने एफटीए पर सहमति बनने के बाद न्यूजीलेंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर से बात की। पीएम मोदी ने एक्स पर इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सिर्फ 9 दिनों में FTA पर सहमति बनना भारत के लिए बड़ी उपलब्धि है।

न्यूजीलैंड सातवाँ ऐसा देश होगा जिसके साथ भारत FTA करने जा रहा है। केन्द्रीय मंत्री पीयूष गोयल के मुताबिक, यह भारत की पहली ऐसी डील है, जिसमें वार्ता करने वाली टीम में सभी महिलाएँ थी। ज्वाइंट सेक्रेटरी पेटल ढिल्लों ने इस टीम का नेतृत्व किया। ये भी एक रिकॉर्ड है कि मात्र 9 महीने में इस डील को फाइनल किया गया। अब तक भारत ने 7 देशों के साथ एफटीए किया है। साथ ही, कई देशों के अलावा यूरोपीय यूनियन, अफ्रीकन यूनियन के साथ बड़ी डील की है।

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रुपम
रुपम
रुपम के पास 20 साल से ज्यादा का पत्रकारिता का अनुभव है। जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा। जी न्यूज से टेलीविज़न न्यूज चैनल में कामकाज की शुरुआत। सहारा न्यूज नेटवर्क के प्रादेशिक और नेशनल चैनल में टेलीविज़न की बारीकियाँ सीखीं। सहारा प्रोग्रामिंग टीम का हिस्सा बनकर सोशल मुद्दों पर कई पुरस्कार प्राप्त डॉक्यूमेंट्री का निर्माण किया। एडिटरजी डिजिटल हिन्दी चैनल में न्यूज एडिटर के तौर पर काम किया।

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