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‘पूरे सभ्यता का कर दूँगा नाश’ से लेकर ‘लोगों को मारकर आया मजा’ तक: पढ़िए 40 दिन में कितने हिंसक हुए ट्रंप, कभी बौराए हुए थे नोबेल सम्मान के लिए

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को नोबल शांति पुरस्कार चाहिए था। उन्होने दुनियाभर में युद्ध रुकवाने का श्रेय लेते हुए कहा था कि दुनिया का कोई प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति ऐसा नहीं है, जो 8 युद्ध रुकवाए हों। लेकिन युद्ध रुकवाते-रुकवाते उन्होंने वेनेजुएला के राष्ट्रपति को हटा कर उसपर नियंत्रण कर लिया। ग्रीन लैंड को कब्जा करने की धमकी दी, कनाडा को मिलाने की बात कही और ईरान पर हमला कर दिया।

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने 8 युद्ध रुकवाने के नाम पर नोबल शांति पुरस्कार की माँग की थी, लेकिन पुरस्कार नहीं मिला। फिर क्या था, ट्रंप ने दिखाया अपना असली रंग। नोबल देने वाली समिति से लेकर नार्वे, डेनमार्क और दूसरे नाटो के सदस्यों, कनाडा और कई देशों को धमकाते-धमकाते वेनेजुएला और फिर ईरान पर हमलावर हो गए।

ईरान युद्ध के दौरान अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने कभी युद्ध जीत लेने की बात कही, तो कभी ईरान को गालियाँ दी। इतना ही नहीं, उन्होंने एक रात में ईरानी सभ्यता को नष्ट करने और ‘पाषाण युग’ में भेज देने का दावा भी किया। साथ ही, यह भी कहा कि ईरानी हमले का ‘टारगेट’ पूरा कर लिया गया है। रिजीम बदल दिया गया है, क्योंकि सारे बड़े नेता मारे गए हैं। पिछले करीब 40 दिनों में उनके बयान से अंदाजा लगाया जा सकता है कि ‘विश्वशांति के दूत’ बनने वाले ट्रंप का चाल, चरित्र और चेहरा क्या है।

युद्ध की शुरुआत से लेकर सीजफायर तक ट्रंप ने कई विध्वंसक बयान दिए। अमेरिका और इजरायल के हमले में जब ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई की मौत हो गई थी, तो उन्होंने अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि खामेनेई ने उन्हें दो बार मारने की कोशिश की, इसलिए उसे मार दिया।

मोज्तबा खामेनेई के जिंदा रहने की बात कहते हुए कहा था कि नए सुप्रीम लीडर खामेनेई ज्यादा दिनों तक सुरक्षित नहीं रह पाएगा। ट्रंप ने कहा कि जो नए लीडर बन सकते थे वे ज्यादातर मर चुके हैं।

ईरानी युद्धपोत को डुबोने पर ‘मजा’ आया

ईरान का युद्धपोत IRIS डेना जब हिन्द महासागर में श्रीलंका के तट के पास से गुजर रहा था तो अमेरिकी पनडुब्बी ने टॉरपीडो हमले से ईरान के आधुनिक युद्धपोत IRIS डेना को डुबो दिया। अमेरिका ने ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के तहत करीब 46 ईरानी शिप को समुद्र में डुबोने का दावा किया। इस पर राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि उनके सैनिकों को ईरानी शिप पर कब्जा करने से ज्यादा उन्हें डुबोने में मजा आता है।

एक रात में सभ्यता के अंत की धमकी

सीजफायर से पहले 7 अप्रैल 2026 को उन्होंने ईरान को धमकाते हुए कहा था कि आज रात एक पूरी सभ्यता खत्म हो सकती है, जो वापस कभी नहीं आएगी। उन्होंने कहा कि वो ऐसा नहीं चाहते हैं, लेकिन अगर ईरान ने समझौता नहीं किया तो ऐसा ही होगा।

ईरान युद्ध के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने कई बार ईरान को पूरी तरह तबाह करने की धमकी दी। अमेरिकी अल्टीमेटम से 48 घंटे पहले भी उन्होंने कहा कि अगर समझौता नहीं हुआ तो अमेरिका ‘ईरान को उड़ा देगा’।

ट्रंप ने कहा, “हम ईरान के साथ अच्छी तरह बातचीत कर रहे हैं। लेकिन हम किसी नतीजे तक नहीं पहुँचे हैं। समझौते की अच्छी संभावना है। अगर नहीं हुआ, तो मैं वहाँ सब कुछ उड़ा दूँगा।”

गालियाँ देते हुए नरक में भेजने की दी धमकी

राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को 6 अप्रैल को एक बार फिर तबाह करने की धमकी दी। सोशल मीडिया पर गालियाँ देते हुए उन्होंने कहा कि पावर प्लांट डे और ब्रिज डे- दोनों एक साथ मनाएँगे वरना होर्मुज खोल दो। तुम लोगों को नरक में पहुँचा देंगे। ईरान के होर्मुज नहीं खोलने पर गालियाँ दी और ‘पाषाण युग में पहुँचा’ देने की बात कही।

इतना ही नहीं दो हफ्ते के सीजफायर के बाद भी ईरान को धमकाते हुए कहा कि अमेरिकी सेना मध्यपूर्व में रहेगी और असली समझौता नहीं हुआ तो ‘ बड़े और ज्यादा तेज हमले शुरू हो जाएँगे।’

होर्मुज स्ट्रेट को लेकर नाटो देशों को धमकी

उन्होंने होर्मुज खोलने के लिए नाटो देशों से मदद माँगी और जब ज्यादातर नाटो देशों ने मदद देने से इनकार कर दिया तो कहा कि उन्हें नाटो देशों की जरूरत नहीं है। वह अपने दम पर होर्मुज को खुलवा सकते हैं। इसके बाद उन्होंने कहा कि होर्मुज के बगैर भी उनका काम चल सकता है, क्योंकि अमेरिका के पास रूस- चीन से ज्यादा खुद का तेल है और जिन देशों को होर्मुज से तेल मँगवाने की जरूरत है, वे इसके लिए कोशिश करें। अमेरिका को इसकी जरूरत नहीं है।

डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका किसी देश की मदद नहीं करेगा, उन्हें अपने लिए खुद खड़ा होना होगा। इसके अलावा ट्रंप ने अमेरिका से तेल खरीदने का भी विकल्प दिया। लेकिन सीजफायर से पहले ईरान को होर्मुज नहीं खोलने पर पावर प्लांट, तेल ढाँचे को नष्ट करने की धमकी दे डाली थी।

ट्रंप ने युद्ध के दौरान यहाँ तक कहा कि ईरान अमेरिका के लिए बड़ी संख्या में तेल टैंकर भेज रहा है। ट्रंप के मुताबिक ईरान ने पहले 10 और अब कुल 20 बड़े तेल टैंकर अमेरिका को भेज रहा है, जो स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से होकर गुजरेंगे। जबकि ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को इजरायल और अमेरिका के लिए बंद करने की बात कही थी।

पाषाण युग से स्वर्ण युग तक की बात

जो राष्ट्रपति ट्रंप एक हफ्ते पहले ईरान को पाषाण युग में पहुँचा देने की बात कह रहे थे, वे एक हफ्ते में ही पलट गए। ईरान और अमेरिका में दो हफ्ते के सीजफायर के बाद ‘स्वर्ण युग’ की बात कही। इस ऐतिहासिक बदलाव की बात उन्होंने सोशल मीडिया ट्रूथ पर की। राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि दुनिया में तेल की आवाजाही के लिए अहम होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने के लिए कहा है। ईरान इस रास्ते पर अपना नियंत्रण रखेगा।

जिस ट्रंप ने पहले ईरान के बिजली घरों और पूलों को निशाना बनाने के लिए डेडलाइन दी थी, उसने ईरान के पुनर्निमाण की प्रक्रिया शुरू करने और मध्यपूर्व के ‘स्वर्णयुग’ की बात की।

खुद को शांति का दूत बताया था ट्रंप ने

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को नोबल शांति पुरस्कार चाहिए था। उन्होने दुनियाभर में युद्ध रुकवाने का श्रेय लेते हुए कहा था कि दुनिया का कोई प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति उनके नजदीक नहीं हैं, जिन्होंने 8 युद्ध रुकवाए हों।

जिन युद्धों को रुकवाने का जिक्र किया, उसमें पाकिस्तान के खिलाफ भारत का ऑपरेशन सिंदूर भी शामिल है। इसके अलावा कंबोडिया और थाइलैंड. कोसोबो-सर्बिया, कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य और रवांडा, इजरायल-ईरान, मिश्र-इथियोपिया, आर्मेनिया-अजरबैजान शामिल है। इन युद्धों को रुकवाने की बात करते करते उन्होंने 15 से ज्यादा बार ‘ऑपरेशन सिंदूर’ खत्म करवाने की बात की। लेकिन सच यही है कि ऑपरेशन सिंदूर रोका गया था। इसके पीछे पाकिस्तान की गिड़गिड़ाकर युद्धविराम की भीख माँगना था, न की ट्रंप की दखलंदाजी।

शांति पुरस्कार नहीं मिलने के बाद ट्रंप आक्रामक नजर आए। उन्होंने नोबल पुरस्कार देने वाली कमेटी पर सवाल उठाए और नॉर्वे को भी धमकाया। वेनेजुएला के पूर्व राष्ट्रपति और उनकी पत्नी को रातों रात घर से उठाकर अपने देश ले गए और वेनेजुएला को अपने इशारों पर चलने के लिए विवश कर दिया। उन्होंने खुद को कार्यकारी राष्ट्रपति तक घोषित कर दिया। दरअसल ट्रंप की नजर वेनेजुएला के तेल भंडार पर थी, जिस पर अब अमेरिका का नियंत्रण है।

ट्रंप का आक्रामक रवैया उस वक्त भी सामने आया जब उसने ‘रेयर अर्थ मेटल्स’ की बहुलता वाले ग्रीनलैंड पर कब्जा करने के लिए डेनमार्क को अल्टीमेटम दे दिया। उन्होंने नाटो देशों को मजबूर करने की कोशिश की, कि वे अमेरिका का समर्थन करें।

बृहत अमेरिका बनाने की मंशा से उन्होंने कनाडा को अमेरिका में मिलाकर 51वां राज्य बनाने की बात कही। इसका कनाडा में काफी विरोध भी हुआ।

विश्वशांति के लिए पुरस्कार पाने की लालसा रखने वाले ट्रंप ने शांति को काफी पीछे छोड़ दिया। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) से बाहर निकलने की घोषणा कर दी और अमेरिकन फंडिंग रोक दी। विश्वभर को टैरिफ की धमकी देकर अपनी शर्तों पर ट्रेड डील करने वाले राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान पर सीधा आक्रमण भी किया। इजरायल के साथ मिलकर 28 फरवरी को जिस युद्ध की उन्होंने शुरुआत की, उसका मकसद ईरान को परमाणु संपन्न बनने से रोकने का बताया गया। इस दौरान ईरान को ‘जानवर’, ‘पाषाण युग में भेजना’, ‘नरक में भेजना’, तबाह कर देने से लेकर गालियाँ तक दे डाली।

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रुपम
रुपम
रुपम के पास 20 साल से ज्यादा का पत्रकारिता का अनुभव है। जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा। जी न्यूज से टेलीविज़न न्यूज चैनल में कामकाज की शुरुआत। सहारा न्यूज नेटवर्क के प्रादेशिक और नेशनल चैनल में टेलीविज़न की बारीकियाँ सीखीं। सहारा प्रोग्रामिंग टीम का हिस्सा बनकर सोशल मुद्दों पर कई पुरस्कार प्राप्त डॉक्यूमेंट्री का निर्माण किया। एडिटरजी डिजिटल हिन्दी चैनल में न्यूज एडिटर के तौर पर काम किया।

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