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चीन से किम जोंग उन का जूठा गिलास ले गए अधिकारी, जिस कुर्सी पर बैठा था डिक्टेटर उसकी भी की सफाई: क्यों विदेश में अपना DNA नहीं छोड़ते हैं नेता

उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन हर विदेश यात्रा में अपने साथ पर्सनल टॉयलेट, सिगरेट बट कलेक्टर और क्लीनिंग स्टाफ लेकर चलते हैं ताकि उनका DNA या जैविक सबूत किसी और के हाथ न लग जाए।

उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन की एक वीडियो इन दिनों काफी चर्चा में है, जिसमें उनकी टीम उनके इस्तेमाल किए हुए गिलास, कुर्सी और आसपास की हर चीज को बड़े एहतियात से साफ करती दिख रही है। यह सब चीन में उनकी पुतिन के साथ मुलाकात के बाद हुआ।

दरअसल, यह पहली बार नहीं है- किम हर विदेश यात्रा में अपने साथ पर्सनल टॉयलेट, सिगरेट बट कलेक्टर और क्लीनिंग स्टाफ लेकर चलते हैं ताकि उनका DNA या जैविक सबूत किसी और के हाथ न लग जाए। ऐसा ही कुछ रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की अलास्का यात्रा के दौरान भी देखा गया था। इस सबका मकसद है ‘DNA को हथियार बनने से रोकना।’

किम जोंग की ‘साफ-सफाई टीम’ की नई क्लिप

हाल ही में सामने आए एक वीडियो में साफ देखा गया कि बीजिंग में पुतिन से मुलाकात के बाद किम के स्टाफ ने कमरे की पूरी सफाई की। उनके पीने का गिलास एक ट्रे में ले जाया गया, कुर्सी की पीठ, आर्मरेस्ट और साइड टेबल को कपड़े से पोंछा गया।

रूसी रिपोर्टर अलेक्जेंडर युनाशेव ने बताया कि ‘किम के जाने के बाद उनकी टीम ने हर उस जगह को साफ किया, जहाँ उनके DNA का कोई अंश रह सकता था। दरअसल, ये एक सोची-समझी रणनीति है ताकि कोई भी देश उनके स्वास्थ्य से जुड़ी निजी जानकारी हासिल न कर पाए। यही वजह है कि जब वो किसी होटल में रुकते हैं तो उनके बाल, थूक या उंगलियों के निशान तक साफ किए जाते हैं।

हर दौरे में साथ होता है किम का टॉयलेट

किम अपने हर वाहन में एक निजी शौचालय रखते हैं और यहाँ तक कि जब वे किसी फैक्ट्री या सैन्य प्रतिष्ठान का दौरा करते हैं तो उनके लिए एक खास बाथरूम भी तैयार किया जाता है। इसके अलावा, उनकी टीम हर उस चीज को इकट्ठा कर लेती है, जिसे किम ने छुआ होता है। 2019 में जब वे हनोई गए थे, तो उनकी टीम ने सिगरेट के बचे हुए टुकड़ों और यहाँ तक कि इस्तेमाल की हुई माचिस की तीलियों को भी संभाल कर रखा था।

उनका मानना है कि इन चीजों में मौजूद लार या दूसरे जैविक पदार्थ से उनकी सेहत के बारे में पता लगाया जा सकता है। यहाँ तक कि वे दस्तावेज़ों पर दस्तखत करते समय भी अपनी ही कलम का इस्तेमाल करते हैं, ताकि उनके फिंगरप्रिंट न लिए जा सकें। जब वे किसी होटल में रुकते हैं, तो उनके सहायक उनके कमरे के हर सामान को साफ करते हैं, उनके बाल और लार जैसी हर चीज़ को हटा देते हैं ताकि कोई उनके DNA के नमूने न ले सके।

DNA से खतरा: सिर्फ बीमारी नहीं, ब्लैकमेलिंग का जरिया भी

आज के दौर में DNA से जुड़ी जानकारी बहुत शक्तिशाली साबित हो सकती है। हालाँकि, वैज्ञानिकों का मानना है कि DNA से किसी व्यक्ति को सीधे तौर पर नुकसान पहुँचाना या उस पर हमला करना अभी संभव नहीं है। लेकिन, DNA के ज़रिए किसी व्यक्ति के स्वास्थ्य से जुड़ी गोपनीय जानकारी जैसे – कोई आनुवंशिक बीमारी या कमजोरी का पता लगाया जा सकता है। यह जानकारी बाद में ब्लैकमेल या राजनयिक दबाव बनाने के लिए इस्तेमाल की जा सकती है।

यही वजह है कि दुनिया के बड़े नेता, जैसे जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मेर्ज़ और फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन भी, जब रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मिले तो उन्होंने रूस की तरफ से दिए गए कोरोना टेस्ट को करवाने से मना कर दिया था। ऐसा इसलिए किया गया ताकि उनके नाक के स्वैब के जरिए उनका DNA रूस के हाथ न लगे।

हालाँकि, इस बारे में कोई पुख्ता सबूत नहीं हैं कि रूस या कोई और देश DNA का इस्तेमाल जासूसी या ब्लैकमेलिंग के लिए करता है, लेकिन इस तरह की आशंकाएँ मौजूद हैं। जानकारों का कहना है कि यह सब राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से एक नया मैदान है, जहाँ जैविक जानकारी एक नया हथियार बन सकती है। यह सब दिखाता है कि आने वाले समय में DNA की सुरक्षा एक बड़ा मुद्दा बन सकता है।

पुतिन की सीक्रेट ‘पूप सूटकेस’ डिप्लोमेसी

इससे पहले 15 अगस्त 2025 को अलास्का में हुई बैठक के दौरान पुतिन ने अपना मल एक पूप सूटकेस में इकट्ठा करवाया, जिसे बाद में रूस वापस लाया गया। और 2017 में भी फ्रांस यात्रा के दौरान ऐसा ही किया गया था। उनके स्वास्थ्य के बारे में अफवाहें और विदेशी ताकतों के द्वारा स्वास्थ्य जानकारी लीक होने का डर, पुतिन को यह कदम उठाने के लिए मजबूर करता है।

यह सुरक्षा प्रोटोकॉल सालों से चल रहा है। 1999 में राष्ट्रपति बनने के बाद से पुतिन हर यात्रा में अपने मल को इकट्ठा कर रूस वापस ले जाते हैं, ताकि किसी भी विदेशी देश में उनका स्वास्थ्य सम्बंधित जानकारी न पहुँच सके। पुतिन का स्वास्थ्य कई बार चर्चा में रहा है और उनके बारे में थायराइड कैंसर, पार्किंसोन और दिल के दौरे जैसे कई कयास लगाए गए हैं।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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