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नाखून उखाड़े, कील ठोंकी, नंगा किया: डायन बता स्कॉटलैंड में मार डाले गए 2500, एक्ट हटा पर 285 साल बाद भी इल्जाम कायम

सन 1590 में जिलीस डनकन नामक एक गरीब लड़की पर कुछ लोगों ने डायन होने का इल्जाम लगाया और फिर उंगली मोड़ने वाले औजार से उसकी उंगली कुचल डाली। फिर उसे रस्सी से बांधा गया और नंगा करके शरीर को छील दिया गया...

सदियों पहले स्कॉटलैंड में कुछ औरतों को डायन और कुछ पुरुषों को जादू-टोना करने वाला कहकर उन्हें मारने का जघन्य अपराध हुआ। कभी उनके नाखून उखाड़े गए, कभी गला घोंटा गया तो कभी उन्हें जिंदा जलाया गया। तमाम प्रताड़नाओं को सहने के बाद सैंकड़ों पीड़ितों ने दम तोड़ा और कई गिरफ्तार हुए। अब सदियों बाद ‘द विचिस ऑफ स्कॉटलैंड’ नामक समूह ने ये माँग उठाई है कि उन पीड़िताओं पर लगे ‘डायन होने के’ इल्जामों को खत्म किया जाना चाहिए। इस संबंध में इस समूह ने स्कॉटलैंड संसद तक अपनी याचिका दी है, जिसे समर्थन भी मिला है।

डेलीमेल की रिपोर्ट के अनुसार, सन् 1590 में जिलीस डनकन नामक एक गरीब लड़की की चीखों ने सबको दहला दिया था। मगर, एडिनबर्ग के पूर्व में स्थित एक शहर ट्रानेंट के अधिकारी और उसकी टीम को उस लाचार लड़की पर दया नहीं आई। उन्होंने उस पर जादू-टोना करने वाली डायन होने का इल्जाम मढ़ा और फिर उंगली मोड़ने वाले औजार से उसकी उंगली कुचल डाली। फिर उसे रस्सी से बांधा गया और नंगा करके शरीर को छील दिया गया। उसके साथ ये बर्बरता करने वालों ने अपनी क्रूरता को जायज ठहराने के लिए दावा किया था कि गिलिन के गले में शैतान का निशान था।

मौजूदा जानकारी बताती है कि स्कॉटलैंड में एक समय में डायन बताकर या जादू-टोना करने वाले कहकर, करीब 4000 लोगों (84% महिलाएँ) को गिरफ्तार किया गया था और इनमें 2500 से ज्यादा की हत्या कर दी गई थी। ये पूरा आँकड़ा 1563 से 1736 के बीच का है। ये वहीं अंतराल है जब विचक्राफ्ट एक्ट स्कॉटलैंड में अस्तित्व में आया और बाद में उसे वापस ले लिया गया। इस एक्ट के आने के पीछे की वजह थी किसी अनहोनी का किसी दूसरे पर इल्जाम मढ़ा जा सके।

इस एक्ट के तहत तमाम लोग मारे गए। एक बुजुर्ग महिला एग्नेस सैंपसन को लेकर बताया जाता है कि उन्हें नींद की समस्या थी जिसकी वजह से उनकी मति भ्रमित हो जाती थी। अधिकारियों ने इस बुजुर्ग को भी गिरफ्तार किया और इन्हें होने वाली हैलुसिनेशन की समस्या को सबूत के तौर पर पेश किया कि वो डायन हैं। बाद में उन्हें कोठरी में बंद करके दीवार से चिपका कर रखा गया। साथ ही उनके मुँह में चार नुकीले काँटे डाले गए।

एक डॉ जॉन थे जो पेशे से स्कूल मास्टर थे उन्हें भी जादू टोना करने के आरोप में पकड़ा गया था। इसके बाद उन्हें नाखून नोच दिए गए और उनकी जगह लोहे की कील घुसा दी गई। बाद में उंगली तोड़ने वाले औजार से उनकी उंगली भी कुचल दी गई और पैर को ऐसे जूतों में फंसा दिया गया जिसे पिंडली की हड्डियों को कुचलने के लिए डिजाइन किया गया था। ये तीनों बर्बरता साल 1591 की बाते हैं जिनके शरीर को भीड़ के सामने कैसलहिल में जलाया गया। इनके अलावा ऐसे कई लोग थे जिन्हें जिंदा जला दिया गया।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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