ट्रंप प्रशासन और क्लाउड एआई (Claude AI) बनाने वाली कंपनी एंथ्रोपिक के बीच का विवाद अब आर-पार की जंग में बदल गया है। सरकार ने कंपनी पर देशव्यापी फेडरल बैन लगाने के साथ ही उसे पेंटागन की ब्लैकलिस्ट में भी डाल दिया है। इसके अलावा, राज्य स्तर पर भी कंपनी पर दबाव बढ़ाया जा रहा है। माना जा रहा है कि इन सख्त कदमों का मकसद एंथ्रोपिक को उसके AI सुरक्षा नियमों (Safety Restrictions) को हटाने के लिए मजबूर करना है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 27 फरवरी को ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक लंबी पोस्ट के जरिए एंथ्रोपिक (Anthropic) पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की और इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया। उनके इस स्टैंड का युद्ध सचिव पीट हेगसेथ ने भी समर्थन किया। दोनों नेताओं का मानना है कि एंथ्रोपिक द्वारा अपने AI पर लगाई गई पाबंदियाँ एक निजी कंपनी द्वारा यह तय करने की अस्वीकार्य कोशिश है कि अमेरिका युद्ध कैसे लड़ेगा।
"THE UNITED STATES OF AMERICA WILL NEVER ALLOW A RADICAL LEFT, WOKE COMPANY TO DICTATE HOW OUR GREAT MILITARY FIGHTS AND WINS WARS! That decision belongs to YOUR COMMANDER-IN-CHIEF, and the tremendous leaders I appoint to run our Military.
— The White House (@WhiteHouse) February 27, 2026
The Leftwing nut jobs at Anthropic… pic.twitter.com/aIEx92nnyx
व्हाइट हाउस और एंथ्रोपिक के बीच विवाद इस बात पर नहीं है कि कंपनी अमेरिकी सेना के साथ काम करेगी या नहीं। कंपनी के मुताबिक, वह पहले से ही उनके साथ बड़े स्तर पर जुड़ी हुई है। असली लड़ाई उन ‘सुरक्षा नियमों’ (guardrails) को लेकर है, जिन्हें सेना पूरी तरह हटाना चाहती है। इसमें बड़े पैमाने पर घरेलू जासूसी और ऐसे पूरी तरह स्वायत्त हथियार (autonomous weapons) शामिल हैं, जिनमें इंसानी नियंत्रण की जरूरत नहीं होती।
एंथ्रोपिक का कहना है कि ये दोनों ही इस्तेमाल खतरनाक हैं, लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ हैं और आज की AI तकनीक के लिए सुरक्षित नहीं हैं। हालाँकि, अमेरिकी राष्ट्रपति कंपनी के इस तर्क से सहमत नहीं हैं।
गतिरोध किस वजह से शुरू हुआ?
एंथ्रोपिक के CEO डारियो अमोदेई ने एक बयान में कहा कि उनका AI मॉडल ‘क्लाउड’ पहले से ही अमेरिकी युद्ध विभाग और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के साथ इंटेलिजेंस विश्लेषण, ऑपरेशनल प्लानिंग और साइबर ऑपरेशंस जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में लगा हुआ है। उन्होंने यह भी दावा किया कि कंपनी ने राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में अपने मुनाफे तक की परवाह नहीं की और चीनी कम्युनिस्ट पार्टी से जुड़ी कंपनियों पर रोक लगाने के साथ-साथ चिप निर्यात के कड़े नियमों का समर्थन किया।
इसके बावजूद, युद्ध विभाग चाहता है कि एंथ्रोपिक अपने सुरक्षा नियमों (safeguards) को हटाए और ‘किसी भी कानूनी उपयोग’ की अनुमति दे। युद्ध सचिव हेगसेथ ने साफ कर दिया है कि सरकार किसी भी सप्लायर की शर्तें स्वीकार नहीं करेगी और राष्ट्रीय सुरक्षा की कानूनी जरूरतें ही एकमात्र पैमाना होनी चाहिए।
एंथ्रोपिक की रेड लाइन्स, मास सर्विलांस और सभी AI हथियार
एंथ्रोपिक के CEO डारियो अमोदेई ने अपने बयान में दो मुख्य श्रेणियों के बीच एक स्पष्ट रेखा खींची है, जिसमें पहली श्रेणी है- बड़े पैमाने पर घरेलू जासूसी (Mass Domestic Surveillance)। एंथ्रोपिक का तर्क है कि AI के जरिए बड़े स्तर पर की जाने वाली जासूसी बुनियादी स्वतंत्रता के लिए नए किस्म के खतरे पैदा करती है। कंपनी का कहना है कि कानून अभी AI की उस क्षमता के मुकाबले बहुत पीछे है, जिससे वह बिखरे हुए और सामान्य से लगने वाले डेटा को आपस में जोड़कर किसी भी व्यक्ति के जीवन की एक बेहद निजी और पूरी तस्वीर खुद-ब-खुद तैयार कर सकता है। संक्षेप में कहें तो, उन्हें डर है कि फ्रंटियर एआई मॉडल्स के कारण सरकार की आंतरिक जासूसी करने की शक्ति कई गुना बढ़ जाएगी, जो नागरिकों की गोपनीयता के लिए खतरनाक है।
‘इंटरनल ड्रैगनेट’ (Internal dragnet) का सीधा मतलब एक ऐसे व्यापक निगरानी तंत्र से है जिसका निशाना विदेशी दुश्मन नहीं, बल्कि देश के अपने ही नागरिक होते हैं। इसका अर्थ यह है कि सरकार AI जैसे शक्तिशाली हथियारों का इस्तेमाल करके बड़े पैमाने पर आम नागरिकों का डेटा इकट्ठा और विश्लेषण करती है, ताकि उनकी हर गतिविधि, संपर्क और व्यवहार पर नजर रखी जा सके। आसान भाषा में कहें तो यह किसी खास अपराधी की जाँच करने के बजाय पूरी जनता पर फेंके गए एक विशाल मछली पकड़ने वाले जाल जैसा है।
दूसरी श्रेणी पूरी तरह से स्वायत्त हथियार (Fully Autonomous Weapons) हैं- यानी ऐसे सिस्टम जो बिना किसी इंसानी दखल के खुद निशाना चुनते हैं और हमला करते हैं। एंथ्रोपिक का मानना है कि आज की AI तकनीक इतनी भरोसेमंद नहीं है कि उसे ऐसे हथियारों की कमान सौंपी जा सके। इसके अलावा, बिना मानवीय निगरानी के इन सिस्टमों पर वह सूझबूझ दिखाने का भरोसा नहीं किया जा सकता जो एक प्रशिक्षित सैनिक दिखाता है। खबरों के मुताबिक, एंथ्रोपिक ने इस तकनीक को सुरक्षित बनाने के लिए रिसर्च में मदद की पेशकश की थी, लेकिन सरकार ने उसे ठुकरा दिया।
कंपनी का स्टैंड यह नहीं है कि स्वायत्त हथियारों की कभी जरूरत ही नहीं पड़ेगी। उनका तर्क सिर्फ इतना है कि फिलहाल न तो तकनीक उतनी तैयार है और न ही इसकी निगरानी का कोई ठोस ढाँचा मौजूद है। ऐसे में एक छोटी सी गलती के परिणाम भी बेहद विनाशकारी हो सकते हैं।
ट्रंप का आदेश, तुरंत रोक और छह महीने का चरणबद्ध समापन
पेंटागन की समय सीमा समाप्त होने के बाद, राष्ट्रपति ट्रंप ने ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक पोस्ट के जरिए सभी संघीय एजेंसियों को एंथ्रोपिक (Anthropic) की तकनीक का इस्तेमाल तुरंत बंद करने का आदेश दिया है। इस आदेश के तहत युद्ध विभाग और उन अन्य एजेंसियों के लिए छह महीने की समय सीमा (Phase out) तय की गई है जहाँ एंथ्रोपिक के टूल्स सिस्टम का हिस्सा बन चुके हैं। इस कदम का मकसद सरकारी कामकाज में बिना किसी बड़ी बाधा के, कंपनी को सिस्टम से तेजी से बाहर करना है।
ट्रंप ने जिस टकरावपूर्ण भाषा का इस्तेमाल किया, उसमें स्पष्ट रूप से एक राजनीतिक लहजा झलकता है। उन्होंने एंथ्रोपिक पर युद्ध विभाग को धमकाने (strong arm) का आरोप लगाया और उसे एक ‘कट्टरपंथी वामपंथी’ (radical left) कंपनी करार दिया। ट्रंप ने चेतावनी दी कि यदि कंपनी ने इस ‘फेज-आउट’ प्रक्रिया के दौरान सहयोग नहीं किया, तो वे राष्ट्रपति पद की ‘पूरी शक्ति’ का उपयोग करेंगे, जिसके ‘बड़े नागरिक और आपराधिक परिणाम’ हो सकते हैं।
राजनीतिक बयानबाजी अपनी जगह है, लेकिन इसका व्यावहारिक असर बिल्कुल साफ है। एक ऐसी कंपनी जो कभी संवेदनशील सरकारी प्रणालियों का हिस्सा थी, अब उसे पूरे संघीय इकोसिस्टम से बाहर करने के लिए सरकारी स्तर पर बड़े पैमाने पर अभियान शुरू कर दिया गया है।
सप्लाई चेन रिस्क लेबल, कॉन्ट्रैक्टर इकोसिस्टम के लिए मौत का गला घोंटने वाला है
ट्रंप द्वारा एंथ्रोपिक पर किए गए हमले यहीं नहीं रुके। युद्ध सचिव हेगसेथ ने घोषणा की है कि युद्ध विभाग अब एंथ्रोपिक को ‘राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सप्लाई चेन का खतरा‘ (supply chain risk) घोषित करेगा। इसके साथ ही यह भी आदेश दिया गया है कि अमेरिकी सेना के साथ काम करने वाला कोई भी ठेकेदार (contractor), सप्लायर या पार्टनर अब एंथ्रोपिक के साथ किसी भी तरह का व्यावसायिक लेन-देन नहीं कर सकेगा।
This week, Anthropic delivered a master class in arrogance and betrayal as well as a textbook case of how not to do business with the United States Government or the Pentagon.
— Secretary of War Pete Hegseth (@SecWar) February 27, 2026
Our position has never wavered and will never waver: the Department of War must have full, unrestricted…
इसे विवाद के सबसे बड़े मोड़ के रूप में देखा जा सकता है। यह केवल सरकार द्वारा अपना खुद का उपयोग बंद करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह रक्षा ठेकेदारों और सैन्य विक्रेताओं के विशाल नेटवर्क को स्पष्ट संदेश है कि वे एंथ्रोपिक (Anthropic) के साथ किसी भी व्यावसायिक स्तर पर संपर्क नहीं रख सकते। एंथ्रोपिक के अनुसार, इस तरह का कड़ा रुख ऐतिहासिक रूप से केवल अमेरिकी दुश्मनों के खिलाफ अपनाया जाता रहा है, और किसी अमेरिकी कंपनी के खिलाफ इसका इस्तेमाल अभूतपूर्व है।
व्यावहारिक रूप से, यह लेबल एक ‘चोक पॉइंट’ (दम घोंटने वाले कदम) की तरह काम करता है। अमेरिका की अधिकांश बड़ी कंपनियाँ प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से पेंटागन को अपनी सेवाएँ बेचती हैं। यदि इन कंपनियों को एंथ्रोपिक के साथ व्यापार करने से रोक दिया जाता है, तो एंथ्रोपिक की साझेदारियाँ, वितरण चैनल, क्लाउड व्यवस्थाएँ और तकनीक को जोड़ने वाली सभी कड़ियाँ पूरी तरह ठप हो सकती हैं।
पार्टनर्स पर दबाव, डाइवेस्टमेंट की अफवाहें और इंडस्ट्री के लिए डरावना मैसेज
केवल एंथ्रोपिक ही अकेली ऐसी कंपनी नहीं है जो व्हाइट हाउस के भारी दबाव और गुस्से का सामना कर रही है। कुछ रिपोर्टों के अनुसार, युद्ध सचिव हेगसेथ अब एनवीडिया, अमेजन और गूगल जैसी दिग्गज टेक कंपनियों पर भी दबाव बना रहे हैं कि वे एंथ्रोपिक से अपने शेयर वापस लें और अपनी साझेदारियाँ खत्म करें। इसके पीछे का तर्क सीधा है- अगर एंथ्रोपिक को ‘सप्लाई चेन के लिए खतरा’ माना जाता है, तो रक्षा क्षेत्र से जुड़ी कोई भी बड़ी कंपनी जोखिम उठाने के बजाय एंथ्रोपिक से नाता तोड़ना ही सुरक्षित समझेगी।
यह कदम केवल खरीदारी से जुड़ा फैसला नहीं है, बल्कि एक दबावकारी अभियान है। इसे अमेरिकी सरकार, खासकर सैन्य अनुबंधों (military contracts) के साथ काम करने वाले पूरे एआई उद्योग के लिए एक चेतावनी के रूप में देखा जाना चाहिए। संदेश साफ है: या तो सरकार की शर्तों पर कॉन्ट्रैक्ट साइन करें, या फिर ऐसी ब्लैकलिस्ट का सामना करें जो दूसरी कंपनियों को भी आपसे दूर रहने पर मजबूर कर देगी।
एंथ्रोपिक का जवाब, कोर्ट में चुनौती और हार मानने से इनकार
एंथ्रोपिक ने स्पष्ट कर दिया है कि वह ‘सप्लाई चेन रिस्क’ के इस टैग को अदालत में चुनौती देगा। कंपनी ने इस कदम को कानूनी रूप से गलत बताया है और चेतावनी दी है कि यह सरकार के साथ काम करने वाली किसी भी अमेरिकी कंपनी के लिए एक खतरनाक मिसाल पेश करता है। कंपनी ने यह भी कहा है कि वह अन्य प्रदाताओं के साथ तालमेल बिठाने में मदद करेगी ताकि सैन्य योजनाएँ और ऑपरेशन प्रभावित न हों, लेकिन उसने साफ कर दिया है कि वह अपनी नैतिकता और सिद्धांतों के खिलाफ जाकर उन दो सुरक्षा नियमों (safeguards) को नहीं हटा सकती।
दूसरे शब्दों में, एंथ्रोपिक अलग होने की प्रक्रिया (offboarding) में सहयोग की पेशकश तो कर रहा है, लेकिन अपने सिद्धांतों से समझौता करने को तैयार नहीं है।
एंथ्रोपिक से परे यह क्यों मायने रखता है
यह पूरा घटनाक्रम केवल एंथ्रोपिक और अमेरिकी सरकार के बीच के टकराव तक सीमित नहीं है। ट्रंप प्रशासन का तर्क है कि सेना के पास अपने द्वारा खरीदे गए उपकरणों पर पूरा नियंत्रण होना चाहिए और कोई भी निजी कंपनी उनके उपयोग पर अपनी शर्तें नहीं थोप सकती। दूसरी ओर, एंथ्रोपिक का मानना है कि कुछ क्षमताएँ इतनी खतरनाक हैं कि उन्हें फिलहाल अनुमति नहीं दी जा सकती, खासकर तब जब एआई अभी भी गलतियाँ करने और ‘भ्रम’ (hallucinations) पैदा करने के लिए कुख्यात है। जब मामला देश के नागरिकों की जासूसी करने या मशीनों को जानलेवा फैसले लेने की छूट देने का हो, तो मानवीय निगरानी की कमी विनाशकारी साबित हो सकती है।
राष्ट्रीय सुरक्षा के समर्थकों को भी इस उदाहरण (precedent) पर विचार करने की जरूरत है। यदि कोई सरकार किसी घरेलू कंपनी को सिर्फ इसलिए ‘सप्लाई चेन का खतरा’ बताकर ब्लैकलिस्ट कर देती है क्योंकि उसने जासूसी या स्वायत्त हथियारों का हिस्सा बनने से मना कर दिया, तो यह एक साफ संकेत है कि नैतिकता पर निजी क्षेत्र की असहमति को सरकारी खरीद की शक्ति के जरिए कुचला जाएगा।
सबसे चिंताजनक बात तीखी बयानबाजी नहीं, बल्कि इसके पीछे का तरीका (mechanism) है। ‘सप्लाई चेन रिस्क’ का लेबल अब केवल कॉन्ट्रैक्ट विवाद सुलझाने का जरिया नहीं रह गया है। इसे किसी भी संस्था को रक्षा क्षेत्र के पूरे इकोसिस्टम से अलग-थलग करने के लिए डिजाइन किया गया है। इस तरह का इस्तेमाल राष्ट्रीय सुरक्षा खरीद को एक ऐसे हथियार में बदल देता है, जो ताकत के दम पर पूरे एआई उद्योग की दिशा बदल सकता है।
सिद्धांतों की जंग: एंथ्रोपिक बनाम अमेरिकी सरकार
एंथ्रोपिक का दावा है कि उसने अपनी पूरी पहचान ‘एआई सुरक्षा’ (AI Safety) के दम पर बनाई है, और उसने घरेलू स्तर पर बड़े पैमाने पर जासूसी और बिना मानवीय निगरानी वाले पूर्ण स्वायत्त हथियारों के इस्तेमाल को लेकर अपनी ‘लक्ष्मण रेखा’ खींच दी है। इसके जवाब में ट्रंप प्रशासन ने कंपनी पर दोतरफा कड़ा प्रहार किया है- पहला, पूरी संघीय सरकार में इसके उपयोग पर तत्काल रोक का आदेश, और दूसरा, पेंटागन द्वारा इसे ‘सप्लाई चेन के लिए खतरा’ घोषित करना। यह कदम एंथ्रोपिक को रक्षा अर्थव्यवस्था से जुड़े तमाम पार्टनर्स और ठेकेदारों से पूरी तरह काटने की क्षमता रखता है।
फिलहाल, वाशिंगटन का संदेश बिल्कुल स्पष्ट और कड़ा है। या तो कोई एआई कंपनी सरकार की शर्तों पर सेना को असीमित पहुँच दे, या फिर एक ‘दुश्मन’ की तरह बर्ताव झेलने के लिए तैयार रहे, जिसके परिणाम उसके व्यापार का दम घोंट सकते हैं।
(मूल रूप से ये रिपोर्ट अंग्रेजी भाषा में अनुराग द्वारा लिखी गई है। अंग्रेजी की रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें)


