Friday, April 3, 2026
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पहले ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के वक्त रोया रोना, अब मैच का हल्ला देख उगल रही जहर: प्रोपेगेंडा ‘बीबी’ आरफा खानम शेरवानी की ‘मौकापरस्ती’ फिर हुई एक्सपोज

आरफा ने ट्वीट में लिखा, "ध्यान से सुनिए, उन दो गुजरातियों के लिए हर भावना, हर धर्म से बड़ा धंधा है।" ये मैच दुबई में खेला गया, जहाँ भारत ने पाकिस्तान को हराया, लेकिन हैंडशेक न करने और नेशनल एंथम की गलती से विवाद हो गया।

आज के दौर में सोशल मीडिया और मीडिया के कुछ हिस्से ऐसे हो गए हैं, जहाँ राष्ट्र विरोधी तत्वों को खुला मैदान मिला हुआ है। इनमें से एक प्रमुख नाम है आरफा खानम शेरवानी का। खुद को अवॉर्ड-विनिंग जर्नलिस्ट बताने वाली यह महिला ‘द वायर’ नामक वामपंथी प्रोपेगैंडा पोर्टल की सीनियर एडिटर है। लेकिन असलियत में वह इस्लामी कट्टरपंथ और वामपंथी विचारधारा के मिश्रण से भारत को कमजोर करने का काम करती नजर आती है।

आरफा खानम शेरवानी की मिक्स्ड विचारधारा हमेशा से राष्ट्र विरोधी रही है, जो देश की एकता, हिंदू संस्कृति और राष्ट्रीय सुरक्षा को निशाना बनाती है। इसी तरह इसकी इस्लामी कट्टरपंथ भी भारत की संप्रभुता के खिलाफ काम करता है।

आरफा खानम शेरवानी इन दोनों का ऐसा कॉकटेल है, जो हर मौके पर भारत विरोधी ट्वीट्स से सुर्खियाँ बटोरती है। शेरवानी की प्रोफाइल से साफ दिखता है कि वह भारत सरकार, हिंदू समुदाय और राष्ट्रीय हितों के खिलाफ लगातार जहर उगलती रहती है।

आरफा खानम शेरवानी ने रविवार (14 सितंबर 2025) को एक्स पर लिखा, “ध्यान से सुनिए, उन दो गुजरातियों के लिए हर भावना, हर धर्म से बड़ा धंधा है। अब समझना और सहना आसान होगा।” यह ट्वीट भारत-पाकिस्तान क्रिकेट मैच के संदर्भ में है, जहाँ वह क्रिकेट प्रशासकों की आड़ में देश के शीर्ष नेताओं पर हमला बोल रही है।

पहले वह मैच न खेलने पर खेल भावना की दुहाई दे रही थीं, लेकिन मैच होने पर गुजरातियों को निशाना बनाया। कमेंट बॉक्स में उनके पुराने ट्वीट्स के स्क्रीनशॉट्स हैं, जो पाकिस्तान समर्थन और युद्ध विरोधी हैं। यह ट्वीट न सिर्फ भारत विरोधी है, बल्कि गुजराती समुदाय को टारगेट करके हिंदू विभाजन की कोशिश है।

आरफा की एक्स प्रोफाइल (@khanumarfa) को स्कैन करें तो दर्जनों ऐसे ट्वीट्स मिलते हैं, जो भारत सरकार और राष्ट्रीय हितों के खिलाफ हैं। ऐसा ही विवाद 24 अप्रैल 2021 का है, जब उसने सीधे ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ लिखा। यह ट्वीट भारत-पाकिस्तान तनाव के बीच आया, जब पूरा देश पाकिस्तान को दुश्मन मान रहा था। राष्ट्रवादी विचार से यह खुला तौर पर देशद्रोह है, क्योंकि पाकिस्तान ने हमेशा भारत पर आतंकी हमले करवाए हैं। आरफा का यह स्टैंड साफ करता है कि वह पाकिस्तान की तरफदारी करती हैं।

आरफा के ट्वीट का वायरल हो रहा स्क्रीनशॉट

फिर आया 2025 का ऑपरेशन सिंदूर। यह भारतीय सेना का एक सफल मिशन था, जिसमें जम्मू-कश्मीर के पहलगाम हमले का बदला लेते हुए पाकिस्तान में 9 आतंकी ठिकानों को तबाह किया गया। 28 निर्दोषों की मौत, जिनमें 24 हिंदू थे, का बदला लिया गया। लेकिन आरफा ने एक्स पर विलाप शुरू कर दिया: “Peace is Patriotism. War is destruction. Borders don’t bleed – people do. Stop the war. Deescalate Now.” यह ट्वीट पाकिस्तानी प्रोपेगैंडा का आईना है।

यही नहीं, एक पैनल डिस्कशन में आरफा ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान मारे गए लोग आतंकी नहीं, बल्कि आम नागरिक थे। उसने ऑपरेशन के नाम ‘सिंदूर’ पर भी उंगली उठाई, जो हिंदू परंपरा का प्रतीक है। पाकिस्तान के लोगों को ‘परेशान’ बताकर उसने दुश्मन देश का एजेंडा चलाया।

शिवलिंग को डस्टबिन बताने से गौमूत्र पर तंज तक, हिंदू विरोध से भरी है X टाइम लाइन

आरफा की प्रोफाइल में हिंदू विरोधी कंटेंट भरा पड़ा है। 1 अगस्त 2024 को उन्होंने ‘बाहुबली’ फिल्म का आइकॉनिक पोस्टर शेयर किया, जहां प्रभास शिवलिंग उठा रहा है, लेकिन उन्होंने शिवलिंग को डस्टबिन से रिप्लेस कर दिया। कैप्शन था ‘विजन 2047’। यह हिंदू धर्म का अपमान है, जिसके खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज हुई। राष्ट्रवादी नजरिए से, यह हिंदुत्व को कुचलने की कोशिश है। पहले भी उन्होंने भगवान राम को दलितों पर अत्याचार करने वाला कार्टून शेयर किया। ‘गौमूत्र’ और ‘गोबर’ पर तंज कसते हुए ट्वीट्स किए, जो पुलवामा हमलावर आदिल डार के शब्दों से प्रेरित हैं।

ऑपइंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, 9 जून 2024 को रियासी में 2 साल के हिंदू बच्चे टीटू की हत्या पर आरफा चुप रहीं। लेकिन 2015 में सीरिया के मुस्लिम बच्चे एलन कुर्दी और 2016 में रोहिंग्या बच्चे की मौत पर मातम मचाया। दो दिन बाद भी टीटू पर कोई ट्वीट नहीं, बल्कि उसने पूछा कि संसद में एक भी मुस्लिम सांसद या मंत्री क्यों नहीं? यह ‘मुस्लिम ब्रदरहुड’ की थ्योरी है, जहाँ हिंदू पीड़ितों की अनदेखी होती है।

इसने 2022 में PFI जैसे इस्लामी संगठनों के इवेंट्स में स्पीच दी, जहाँ हिंदुत्व को खतरा बताया। 2023 में सिद्दीक कप्पन की रिहाई पर मुस्लिम विक्टिम कार्ड खेला था।

इन सब से साफ है कि आरफा हिंदू संस्कृति को नीचा दिखाती हैं, जबकि इस्लामी कट्टरता को बचाती हैं। राष्ट्रवादी विचार से, यह हिंदू फोबिया है, जो देश की सांस्कृतिक एकता को तोड़ता है।

इस्लामी प्रोपेगैंडा की प्रोपेगेंडा मशीनरी का हिस्सा है आरफा

आरफा खानम शेरवानी का जन्म उत्तर प्रदेश के एक मुस्लिम परिवार में हुआ था। वह अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) की पूर्व छात्रा हैं, जो खुद एक ऐसा संस्थान है जहाँ से कई बार कट्टरपंथी विचारधारा को बढ़ावा मिलता देखा गया है।

एएमयू के संस्थापक सर सैयद अहमद खान को याद करते हुए आरफा ने कई बार ट्वीट किया है कि मुस्लिम समुदाय को उनके जैसे लीडर की जरूरत है। लेकिन सर सैयद अहमद खान वही शख्स थे, जिसने ‘टू नेशन थ्योरी’ का विचार दिया था, जिसके चलते भारत का बँटवारा हुआ। आरफा का यह स्टैंड साफ दिखाता है कि वह भारत की एकता से ज्यादा इस्लामी अलगाववाद को महत्व देती हैं।

आरफा खानम शेरवानी की प्रोफाइल स्कैन करने पर साफ है कि वह मौका परस्त हैं। कभी पाकिस्तान जिंदाबाद, कभी ऑपरेशन सिंदूर पर शांति की दुहाई, कभी हिंदू प्रतीकों का अपमान।

ऑपइंडिया ने उसके कई प्रोपेगैंडा को एक्सपोज किया है, जो अभी भी जारी है। राष्ट्रवादी भारत को ऐसे तत्वों से सावधान रहना चाहिए। सरकार को ऐसे लोगों पर कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि देश की एकता बनी रहे। आरफा जैसे लोग ‘पोस्टर गर्ल’ नहीं, बल्कि प्रोपेगैंडा मशीन हैं, जो वामपंथी विचारधारा और इस्लामी कट्टरपंथ के जरिए भारत को कमजोर करना चाहती हैं। समय है कि सच्चाई सामने आए और राष्ट्रहित सर्वोपरि हो।

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श्रवण शुक्ल
श्रवण शुक्ल
I am Shravan Kumar Shukla, known as ePatrakaar, a multimedia journalist deeply passionate about digital media. I’ve been actively engaged in journalism, working across diverse platforms including agencies, news channels, and print publications. My understanding of social media strengthens my ability to thrive in the digital space. Above all, ground reporting is closest to my heart and remains my preferred way of working. explore ground reporting digital journalism trends more personal tone.

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