Homeदेश-समाज8 लोग (शक्ल देख कर नाम बताने की जरूरत नहीं)… सब गिरफ्तार: वक्फ प्रॉपर्टी...

8 लोग (शक्ल देख कर नाम बताने की जरूरत नहीं)… सब गिरफ्तार: वक्फ प्रॉपर्टी बता हिंदुओं की दुकानों से सड़क पर फेंक दिया था सामान

फारूक मुसानी के नेतृत्व में करीब 20-25 लोगों की भीड़ ने पुरानी दानपीठ इलाके में दो दुकानों के ताले तोड़ दिए और सामान सड़क पर फेंक दिया। इस दौरान उन्होंने दावा किया था कि ये दुकानें वक्फ बोर्ड की संपत्ति हैं

गुजरात के राजकोट में पुलिस ने फारूक मुसानी समेत 8 लोगों को गिरफ्तार किया है, जिन्होंने वक्फ बोर्ड की संपत्ति बताकर हिंदू दुकानदारों की दुकानों पर जबरन कब्जा कर लिया था और उनके सामान को सड़कों पर फेंक दिया था।

इस मामले में पुलिस की कार्रवाई के बारे में जानकारी देते हुए गुजरात के गृह राज्यमंत्री हर्ष सांघवी ने कहा है कि सभी दुकानें खुल चुकी हैं और आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस मामले की गहन जाँच कर रही है और वक्फ बोर्ड के आदेश की वैधता की भी जाँच की जा रही है। उन्होंने जो तस्वीर साझा की है, उसमें आरोपित फारूक और उसके साथी नजर आ रहे हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, दुकानदार वीरेंद्रभाई कोटेचा ने फारूक मुसानी और अन्य के खिलाफ FIR दर्ज कराई थी, जिसमें बताया गया कि यह हमला अचानक किया गया, बिना किसी पूर्व सूचना या नोटिस के। कोटेचा ने कहा कि वक्फ बोर्ड के नियमों के अनुसार, कब्जे के लिए तीन महीने पहले नोटिस दिया जाता है, लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं हुआ। फारूक मुसानी ने 19 दिसंबर 2024 का एक कथित आदेश दिखाया और इसे आधार बनाकर दुकानों पर कब्जा कर लिया।

ये घटना 31 दिसंबर 2024 की रात को घटी थी, जब फारूक मुसानी के नेतृत्व में करीब 20-25 लोगों की भीड़ ने पुरानी दानपीठ इलाके में दो दुकानों के ताले तोड़ दिए और सामान सड़क पर फेंक दिया। इस दौरान उन्होंने दावा किया था कि ये दुकानें वक्फ बोर्ड की संपत्ति हैं और उन्हें खाली करवाना है। हिंदू दुकानदारों ने स्पष्ट किया कि ये दुकानें दशकों से पट्टे पर ली गई हैं और वास्तव में ये जमीन PWD विभाग की है, ना कि वक्फ बोर्ड की।

दुकानदारों ने वक्फ बोर्ड के नाम पर हुई इस गुंडागर्दी से बचाव और न्याय की माँग की थी, जिसके बाद सक्रिय हुए प्रशासन ने उन हिंदू दुकानकारों को दुकानों का कब्जा वापस दिला दिया है। इस मामले में पुलिस ने भरोसा दिलाया है कि ऐसी अवैध गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

बेचे जाने और लीज पर देने का अंतर भूल बैठे हैं अखिलेश यादव, JPNIC ‘बिक गया’ या सिर्फ लीज पर गया? सपा प्रमुख के...

JPNIC विवाद में अखिलेश यादव के ‘बेचने’ के आरोप की पड़ताल पर जानिए योगी सरकार का लीज मॉडल, CAG की आपत्तियां और 265 करोड़ से 865 करोड़ तक कैसे पहुँचा प्रोजेक्ट।

UP में तेजी से बढ़ रही है ‘गो-इकोनॉमी’, दूध के साथ-साथ गोमूत्र भी बन रहा है रोजगार का साधन: शैम्पू, साबुन और ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर...

सवाल उनसे है जो गाय, गोबर और गौमूत्र का नाम सुनते ही मजाक बनाने लगते हैं- जब यही व्यवस्था किसान का खर्च घटाकर उसकी आय बढ़ा रही है और तो उपहास किस बात का है?
- विज्ञापन -