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महाराष्ट्र की स्थिति पर बोले संजय राउत- अगर राष्ट्रपति शासन लगा तो ये जनादेश का अपमान होगा

इस दौरान गडकरी ने शिवसेना के 50-50 एजेंडे वाली बात पर भी इंकार किया और कहा कि ऐसा कोई वादा नहीं हुआ था।

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के परिणाम को आए 2 हफ्तों से भी अधिक हो चुके हैं, लेकिन राज्य में सरकार के गठन को लेकर अभी कोई समझौता नहीं हुआ है। ऐसे में अगर आज भी महाराष्ट्र में कोई समीकरण सरकार बनाने की घोषणा नहीं करता तो वहाँ के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ेगा, क्योंकि आज बीते विधानसभा कार्यकाल का आखिरी दिन हैं।

ताजा रिपोर्ट के अनुसार महाराष्ट्र की राजनीति की बदलती आबो-हवा पर राज्यपाल लगातार नजर बनाए हुए हैं और शिवसेना के संजय राउत ने भी इसपर अपना बयान दे दिया है। उन्होनें कहा है कि अगर राज्य में राष्ट्रपति शासन लगता है तो यह जनादेश का अपमान होगा। महाराष्ट्र न तो झुक रहा है और न दिल्ली के सामने कभी झुकेगा।

बता दें इससे पहले भी संजय राउत अपनी पार्टी की ओर से साफ कर चुके हैं कि वे राज्यपाल से मुलाकात नहीं करेंगे और केवल उनके अगले निर्णय तक का इंतजार करेंगे। उनका कहना है कि भाजपा जानबूझकर सरकार के गठन में देरी करवा रही हैं, क्योंकि वह राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाना चाहती हैं।

वहीं कॉन्ग्रेस भी इस बीच शिवसेना की तरह इल्जाम लगा रही है कि उनके विधायकों 50 करोड़ रुपए तक की पेशकश करके तोड़ने का प्रयास चल रहा हैं। जिस कारण वे सभी विधायकों को जयपुर होटल में शिफ्ट कर रहे हैं। जबकि भाजपा इन इल्जामों को खारिज कर रही है।

उधर, उद्धव से मिलने पहुँचे नितिन गडकरी ने शिवसेना के आरोपों पर साफ किया है कि उनकी ओर से विधायकों की खरीदद फरोख्त का कोई सवाल नहीं है, लेकिन अगर भाजपा और शिवसेना के मध्यस्थता की जरूरत पड़ी तो वे उसे करने के लिए तैयार हैं। इस दौरान गडकरी ने शिवसेना के 50-50 एजेंडे वाली बात पर भी इंकार किया और कहा कि ऐसा कोई वादा नहीं हुआ था।

इससे पहले बता दें गुरुवार को राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से महाराष्ट्र भाजपा के प्रतिधिमंडल ने मुलाकात की थी। जिसमें भाजपा प्रदेशाध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल ने महाराष्ट्र की राजनीति पर बात करते हुए कहा था कि जनता ने भाजपा-शिवसेना गठबंधन को बहुमत दिया है। फिर भी सरकार बनाने में देर हो रही है, अब तक सरकार बन जानी चाहिए। उन्होंने बताया था कि इसके लिए वे राज्य में कानूनी विकल्पों और राजनीतिक स्थिति पर चर्चा करने के लिए राज्यपाल से मिले थे। लेकिन उनकी पार्टी के आलाकमान से चर्चा करके ही आगे की रणनीति तय होगी।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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