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हेलो वामपंथियों, लो मिल गया रिजवान! तरुण हत्याकांड से लोगों का ध्यान भटकाने का अब कम करो प्रयास

द्वारका जिले के डीसीपी ने खुद पोस्ट करके इस सवाल का जवाब दिया। उन्होंने बताया कि जिस रिजवान को 'लापता' बताया जा रहा है, वह दरअसल इस मामले के मुख्य आरोपितों में से एक है। उसे गिरफ्तार किया जा चुका है और जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के आदेश पर ऑब्जर्वेशन होम भेज दिया गया है। यानी उसके गायब होने की कहानी पूरी तरह झूठी और भ्रामक है।

दिल्ली के उत्तम नगर में हुए तरुण हत्याकांड को लेकर सोशल मीडिया पर अब एक नया नैरेटिव गढ़ने की कोशिश तेज हो गई है। पहले जहाँ हिंदू लड़के की हत्या मामले में असली पीड़ित मुस्लिम परिवार को दिखाने की गई। वहीं अब ध्यान ज्यादा भटकाने के लिए यह दावा फैलाया जा रहा है कि 4 मार्च को हुए विवाद के बाद मुस्लिम परिवार का 14 साल का लड़का रिजवान भी ‘गायब’ है। उसका कहीं कोई पता नहीं चल पा रहा है।

इस नैरेटिव को हवा देने में कई तथाकथित सेकुलर और इस्लाम के नाम पर राजनीति और पत्रकारिता करने वाले कई चेहरे खुलकर सामने आ गए हैं। RJ सायमा से लेकर जहीर इकबाल की पत्नी सोनाक्षी सिन्हा तक ने एक जैसा अभियान चलाते हुए सोशल मीडिया पर सवाल उठाया- “हेलो दिल्ली पुलिस, रिजवान कहाँ है?”

सवाल को उठाने का मकसद साफ है। पढ़ने वाले के मन में यह बैठाना कि उत्तम नगर की घटना में सिर्फ हिंदू परिवार ने ही अपना बेटा नहीं खोया, बल्कि आरोपित मुस्लिम परिवार का भी एक बच्चा लापता है। पुलिस को टैग करने की रणनीति इसलिए अपनाई गई ताकि आरोपों को गंभीरता का रंग दिया जा सके। आम पाठक को लगे कि जब सीधे पुलिस से सवाल किया जा रहा है तो शायद बात में दम होगा।

इस अभियान में AIMIM से जुड़े नेता वारिस पठान से लेकर कई बड़े सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और इस्लामी कट्टरपंथी शामिल हैं। देख सकते हैं कैसे सबने लगभग एक जैसे शब्दों में ट्वीट कर इस कहानी को आगे बढ़ाने की कोशिश की।

हालाँकि, यह नैरेटिव ज्यादा देर टिक नहीं पाया क्योंकि द्वारका जिले के डीसीपी ने खुद पोस्ट करके इस सवाल का जवाब दिया। उन्होंने बताया कि जिस रिजवान को ‘लापता’ बताया जा रहा है, वह दरअसल इस मामले के मुख्य आरोपितों में से एक है। उसे गिरफ्तार किया जा चुका है और जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के आदेश पर ऑब्जर्वेशन होम भेज दिया गया है। यानी उसके गायब होने की कहानी पूरी तरह झूठी और भ्रामक है।

दिलचस्प बात यह है कि जैसे ही पुलिस ने रिजवान के गायब होने के हल्ले पर सच्चाई सामने रखी, वैसे ही यही भीड़ दोबारा नया राग अलापने लगी। सवाल उठाया गया कि आखिर 14 साल के बच्चे को गिरफ्तार करने की जरूरत ही क्या थी।

सोशल मीडिया पर सक्रिय जाकिर अली त्यागी ने भी इसी सुर में लिखा कि परिवार के अनुसार वह ‘मासूम’ अभी 13–14 साल का है और उसे भी नहीं छोड़ा गया। उनके मुताबिक एक अकेले तरुण नाम के युवक की हत्या के आरोप में इतने लोगों- खासकर महिलाओं और बच्चों को घसीटना गलत है।

यह तर्क अपने आप में अजीब है। क्या किसी अपराध में शामिल व्यक्ति को सिर्फ इसलिए छोड़ दिया जाना चाहिए क्योंकि उसकी उम्र कम है या वह किसी खास परिवार से आता है? अगर पुलिस के पास सबूत हैं कि रिजवान इस हत्या में शामिल था, तो कानून के मुताबिक उसे हिरासत में लिया जाना स्वाभाविक है।

दरअसल समस्या यह है कि कुछ लोग भीड़ हिंसा के उस पैटर्न को जानबूझकर नजरअंदाज करते हैं, जिसे देश कई बार देख चुका है। दिल्ली दंगों में बुर्का पहने महिलाओं की भीड़ द्वारा पुलिस पर हमला करने की घटनाएँ सामने आई थीं। कश्मीर में पत्थरबाजी के दौरान बच्चों को भीड़ का हिस्सा बनाकर आगे किया गया। ऐसे उदाहरण बताते हैं कि कट्टरपंथी तत्व भीड़ तैयार करते समय उम्र और लिंग की परवाह नहीं करते।

उत्तम नगर की घटना में भी 4 मार्च को होली के दिन हुई हिंसा को लेकर कई चश्मदीद अपने बयान दे चुके हैं। पुलिस की जाँच जारी है और अन्य आरोपितों की भूमिका खंगाली जा रही है। लेकिन इन सबके बीच ये वर्ग लगातार कोशिश कर रहा है कि असली मुद्दे से ध्यान भटक जाए। इनकी चिंता तरुण की हत्या पर नहीं, उसके परिवार के लिए नहीं, बल्कि आरोपितों के बचाव में है।

आज तरुण की हत्या पर संदेह करना साफ बताता है कि इस सेकुलर जमात के लिए सामने दिख रहा सच कोई महत्व नहीं रखता, इन्हें सिर्फ मजहब देखकर आवाज पीड़ित के लिए आवाज उठानी है। लेकिन ऐसे लोग ध्यान रखें, नैरेटिव कितना भी गढ़ा जाए, लेकिन तथ्य नहीं बदलते।

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विशेषता
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मीडिया में 7+ वर्षों का सफर। ETV भारत, इंडिया न्यूज़, सुदर्शन न्यूज़, MH1 और दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में कार्य किया। डेस्क, ग्राउंड रिपोर्टिंग, एंकरिंग और सोशल मीडिया, हर प्लेटफॉर्म पर सक्रिय भूमिका निभाई। वर्तमान में ऑपइंडिया के साथ जुड़ी हूँ।

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