अपने जिहादी लड़ाकों को वर्क फ्रॉम होम का फरमान सुनाने वाले आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (ISIS) ने कोरोना महामारी को मूर्ति पूजा करने वाले देशों के लिए अल्लाह का जवाब बताया है। आईएसआईएस ने खुदा से अपील की है कि वह नास्तिकों पर कोरोना वायरस का कहर और ज्यादा बढ़ाए।
"हम अफगानिस्तान यह सोचकर आए थे कि 'खलीफा' के हिसाब से इस्लामी जीवन जी सकेंगे। लेकिन जब हम यहाँ पहुँचे, तो हमने महसूस किया कि लोग नमाज पढ़ने तक के लिए भी नहीं जा रहे थे।" आयशा का पति अब्दुल राशिद अब्दुल्ला भी आईएस को लेकर काफी निराश था। इसलिए उसने वहाँ आत्महत्या कर ली।
निमिषा एक डेंटल स्टूडेंट थी। जो केरल के तिरुवनंतपुरम इलाके की रहने वाली थी। इसने बिना अपनी माँ को बताए बेक्सिन नामक एक ईसाई से शादी की थी। बाद में दोनों ने इस्लाम कबूल लिया था और कट्टरपंथियों के बहकावे में आकर कट्टरपंथ की राह पर चल पड़े थे।
महबूब पाशा ने हथियार खरीदे। शरीफ ने अपने घर में इन्हें इकट्ठा किया। मोइदीन और उसके साथी बीते साल ट्रेनिंग के लिए देश से बाहर गए। फिर हिंसक जिहाद छेड़ने के लिए लौट आए। इससे पहले कि वे अपने मॅंसूबे में कामयाब होते दबोच लिए गए।
पुलिस के अनुसार, आईएसआईएस से जुड़े चार मुस्लिम युवक रामनाथपुरम जिले के देवीपट्टनम में आईएस के लिए युवाओं की भर्ती करने और आतंकी संगठन के लिए फंड जुटाने के लिए इकट्ठा हुए थे।
आमिर अल सल्बी के इशारे पर ही इराक और सीरिया में इस्लामिक स्टेट का खिलाफत कायम होने के बाद यजीदी बच्चियों और महिलाओं से रूह कॅंपा देने वाले अत्याचार अंजाम दिए गए थे। उनसे बार-बार रेप किया गया और उन्हें सेक्स स्लेव बनाकर रखा गया।
तीनों आतंकी आपस में बातचीत करने के लिए ऐसे ऐप का इस्तेमाल करते थे, जिसमें कम्युनिकेशन खत्म होते ही टेक्स्ट अपने-आप डिलीट हो जाते थे। इन्हें शहर की दीवारों पर लगे पोस्टरों से बड़े नेताओं की जानकारी जुटानी थी।
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने आईएसआईएस के तीन आतंकियों को गिरफ्तार किया था। ये दिल्ली-एनसीआर और यूपी में आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने की योजना बना रहे थे। जफर अली भी इसी आतंकी मॉड्यूल से जुड़ा है।
अक्टूबर में, एक आतंकी को टीवी समाचार रिपोर्ट में सीरियाई नरकहोल जेल की फ़र्श पर धमाके करते देखा गया था। उसे उसके माता-पिता ने भी देखा था। जैक लेट्स नाम के इस शख़्स का फुटेज भी सामने आया था, जिसमें उसने ख़ुद को "ब्रिटेन का दुश्मन" घोषित कर दिया था।
केरल से युवाओं को आईएस में भेजने वाले अब्दुल्ला ने बड़ी ही चालाकी से अन्य सम्प्रदाय और विचार के लोगों का धर्मांतरण करवाया और फिर उन्हें अपने साथ अफ़ग़ानिस्तान के खोरासन प्रान्त में ले गया। यहाँ तक की उसकी पत्नी सोनिया खुद शादी से पहले ईसाई थी, जिसका नाम बाद में आयशा रख दिया।