जाँच के दौरान ये बात सामने आई है कि कुछ मंत्रियों के सिफारिशों पर जम्मू कश्मीर बैंक के अध्यक्ष द्वारा अवैध तरीके से नियुक्ति की गई है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) ने इस मामले में महबूबा मुफ्ती से...
महबूबा मुफ़्ती ने केंद्र से सवाल किया कि यात्रियों, पर्यटकों और छात्रों को कश्मीर से जाने को कहा गया है, कश्मीरियों को राहत देने की कोशिश नहीं की जा रही है। कहाँ गई इंसानियत, कश्मीरियत और जम्हूरियत?”
संसद भवन में गृह मंत्रालय की उच्चस्तरीय बैठक जारी है। गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में जारी इस बैठक में एनएसए अजीत डोभाल और गृह सचिव राजीव गाबा भी मौजूद हैं।
केन्द्र सरकार राज्यों को दो तरीके से वित्तीय मदद प्रदान करती है। पहला, अनुदान के जरिए और दूसरा, कर्ज देकर। जम्मू-कश्मीर को केन्द्र से जो पैसा मिलता है उसमें 90 फीसदी अनुदान होता है। अन्य राज्यों को केन्द्र से मिलने वाले पैसे में करीब 70 फीसदी कर्ज होता है।
इस पर शहनवाज हुसैन ने जवाब देते हुए कहा कि खौफ नहीं है आप लोग खौफ फैला रहे हैं। आप सियासी पार्टी हैं या अफवाह फैलाने वाली पार्टी। सेना वहाँ जा रही है तो आप लोगों को डर क्यों लगने लगा।
एडवायजरी के सवाल पर राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने कहा कि अगर यहाँ कुछ होता है तो, पूरे देश में माहौल खराब होगा और हम इसी से बचना चाहते थे। उन्होंने जम्मू-कश्मीर को लेकर फैल रही अफवाहों पर कहा कि मैंने दिल्ली में सभी से बात की है और किसी ने भी इस ओर इशारा नहीं किया है।
भारतीय सेना ने पाकिस्तानी सेना के आरोप का खंडन करते हुए कहा है कि इस प्रकार की प्रतिक्रियाएँ सिर्फ सैन्य ठिकानों और पाकिस्तानी सेना की मदद से आने वाले घुसपैठिए आतंकवादियों के खिलाफ इस्तेमाल की जाती हैं और पाकिस्तान द्वारा भारतीय सेना पर लगाए जा रहे क्लस्टर इस्तेमाल करने के आरोप बेबुनियाद हैं।
क़ाज़ी शिबली को उसके कुछ ऐसे ट्वीट्स पर सवाल उठाने के आरोप में हिरासत में लिया गया है, जिसमें जम्मू-कश्मीर में अतिरिक्त अर्धसैनिक बल के जवानों की तैनाती के संबंध में एक आधिकारिक आदेश की जानकारी शामिल थी।
वारपोरा इलाके में आतंकवादियों की मौजूदगी की सूचना मिलने के बाद सुरक्षा बलों ने शनिवार सुबह घेराबंदी एवं तलाश अभियान शुरू किया। छिपे हुए आतंकवादियों ने सुरक्षा बलों पर गोलियां चलाईं। जवाबी कार्रवाई में एक आतंकवादी मारा गया।
जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल ने बताया कि पिछले पाँच महीनों में घुसपैठ की कोई घटना नहीं हुई है। कुछ खबरों के मुताबिक सेना के अफसरों ने भी इस बात की पुष्टि की है। ऐसे में तो सैनिकों को वापस लेने की बात होनी चाहिए, क्योंकि खतरा घट रहा है फिर 38,000 सैनिकों को वहाँ भेजने की वजह क्या हो सकती है?