राज्य सरकार द्वारा तैयार किए गए इस रिपोर्ट का नाम दिया गया है- “उत्तर प्रदेश में आए पाकिस्तान, अफगानिस्तान एवं बांग्लादेश के शरणार्थियों की आपबीती कहानी” - इस रिपोर्ट में शरणार्थियों की निजी कहानियाँ और अनुभव भी समाहित हैं।
दिल्ली में होने वाली विपक्ष की बैठक में ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कॉन्ग्रेस के बाद अब मायावती की बहुजन समाज पार्टी, अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी और शिवसेना ने भी शामिल होने से इनकार कर दिया है।
“भारत में दो करोड़ मुस्लिम घुसपैठिए हैं। अकेले पश्चिम बंगाल में एक करोड़ घुसपैठिए हैं। तुम यहाँ आते हो, हमारा खाना खाते हो, यहाँ रहते हो और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाते हो। क्या यह तुम्हारी जमींदारी है? हम तुम्हें लाठियों से मारेंगे, गोली मारेंगे और तुम्हें जेल में डाल देंगे।”
इस प्रोपेगेंडा के असर क्या होंगे यह गर्भ में नहीं है। सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक लोग इनके प्रोपेगेंडा का गुर्दा छील रहे हैं। छीलते रहेंगे। छीलने की रफ्तार जब चरम पर पहुँचेगी तो धुक-धुक धुका रहे इन संस्थानों की फड़-फड़ फड़ाहट खुद-ब-खुद दफन हो जाएगी।
"आज सारे कॉन्ग्रेसी पूरे देश में सीएए का विरोध कर रहे हैं। केंद्र ने जो किया, गाँधी जी भी ऐसा ही चाहते थे। राहुल बाबा, आप गाँधी जी की भी नहीं सुनोगे। गाँधी जी ने आश्वासन दिया था कि पाक से भगाए गए लोग यहाँ आएँगे तो उन्हें नागरिकता मिलेगी।"
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि अरविन्द केजरीवाल अपने घर में बैठ कर हिन्दू-मुस्लिम की राजनीति कर रहे हैं। यातायात ठप्प है, शिक्षा व्यवस्था ठप्प है। शाहीन बाग़ के लोगों ने CAA विरोधी प्रदर्शन के ख़िलाफ़ सड़क पर उतर कर प्रदर्शन किया। उन्होंने पूछा कि क्या हिन्दुओं की भावनाओं का कोई महत्व नहीं?
CAA के विरोध-प्रदर्शन के दौरान इस तरह के पोस्टर्स को देखकर हँसी आती है। ऐसे प्रदर्शनकारियों के बारे में यही कहा जा सकता है कि उन्हें CAA के बारे में पहले पढ़ लेना चाहिए, ताकि उन्हें सच्चाई का पता चल सके। अगर उन्होंने CAA से जुड़ी जानकारी को पढ़ा होता तो वे इस तरह के बचकाने सवाल ही न पूछते।
"सीएए और एनआरसी को अलग-अलग देखने की जरूरत है। पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान के दुखी लोगों को यदि भारत में सुविधाएँ मिलती हैं तो इसमें बुराई क्या है।"
जब एक पत्रकार ने अरुंधति से पूछा कि क्या विरोध-प्रदर्शन के कुछ परिणाम निकलेंगे तो उन्होंने जवाब देने से इनकार कर दिया। उम्मीद जताई कि 'सभी लोग आज़ाद हो जाएँगे।' कहा कि विरोध कर रहे लोग कभी भी पीछे नहीं हटेंगे।
मुल्तान डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन ने फ़ैसला लिया है कि जो भी वकील बार काउंसिल का चुनाव लड़ेगा, उसे एक एफिडेविट देना होगा। इस एफिडेविट के माध्यम से उम्मीदवारों को इस्लाम के प्रति अपनी आस्था की शपथ लेनी होगी।