हैरान करने वाली बात ये है इन चुनावों में पश्चिम बंगाल में माकपा के वरिष्ठ नेता मोहम्मद सलीम की भी जमानत जब्त हुई। सलीम 34 साल सत्ता में रहे हैं। सलीम को सिर्फ़ 14.25 वोट मिले हैं।
इससे पहले शारदा चिट फंड घोटाले मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कोलकाता के पूर्व पुलिस कमिश्नर और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के क़रीबी राजीव कुमार को तगड़ा झटका दिया था।
तृणमूल कॉन्ग्रेस के गुंडों ने बबलू नामक भाजपा कार्यकर्ता को निशाना बनाया। हमले में बबलू बाल-बाल बच गए। पड़ोसियों के पहुँचने के बाद हमलावर बाइक छोड़ भाग खड़े हुए। भाजपा कार्यकर्ता बबलू का अस्पताल में इलाज चल रहा है। ऐसी कई हिंसक वारदातें हुईं।
दोपहर 1 बजे तक 43.6% मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। 3 बजे तक यह आँकड़ा 54.9% तक पहुँच गया। लेकिन कुल वोटिंग हुई सिर्फ़ 61.1% ही। मतलब बाकी 3 घंटों में महज 6% ही वोटिंग। TMC गुंडों की कोई चाल या भारी पड़ गई गुंडई...
मालदा और बशीरहाट में ऐसी घटनाएँ सामने आईं जहाँ कट्टरपंथी, हिन्दुओं के ख़िलाफ़ काफ़ी उग्र होते नज़र आए, जबकि इन्हीं हिंसात्मक हमलों में हिन्दुओं को बचाने की कोशिश में पुलिस महकमा पूरी तरह से विफल रहा।
बंगाल में होती हिंसा पर निर्वाचन आयोग ने चुनाव प्रचार की समय सीमा को कम कर दिया था। इस फैसले के मद्देनजर शुक्रवार (मई 17, 2019) को खत्म होने वाले चुनाव प्रचार की समय सीमा को गुरुवार (मई 16, 2019) की रात 10 बजे तक कर दिया गया है।