'जय भीम', 'चक दे इंडिया', 'शेरनी', 'चंद्रकांता' और 'काबुलीवाला' - इन सब में क्या कॉमन है? सभी में असली कहानी से छेड़छाड़ कर के हिन्दुओं को बदनाम किया गया।
'जय भीम' में सिर्फ हँसिया छाप वाले ही वनवासियों के हक़ की आवाज़ उठाते दिखते हैं। मुख्य विलेन के घर में माँ लक्ष्मी की तस्वीर होती है। हिंदी बोलने पर थप्पड़ पड़ते हैं।
फिल्म के तेलुगु और तमिल दोनों संस्करणों में हिंदी विरोधी भावनाओं को बढ़ावा दिया गया है। इन दोनों संस्करणों में, राज हिंदी में बोलने वाले व्यक्ति को थप्पड़ मारते हैं।