Saturday, September 18, 2021

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हिन्दू-मुस्लिम विवाद

अख्तर शेख ने नाबालिग को रेप के बाद दरगाह में रखा, फिर दोस्त के घर, मीडिया गिरोह ने किया इग्नोर

अख्तर शेख को घटना के 10 दिन बाद यानी 28 मार्च को गिरफ्तार किया गया और जल्द ही जमानत पर रिहा भी कर दिया गया।

हिन्दू त्योहारों पर आम होती इस्लामी पत्थरबाज़ी: ये भी मोदी के मत्थे मढ़ दूँ?

हर आतंकी और उसका संगठन एक ही नारा लेकर निकलता है, काले झंडे पर सफ़ेद रंग से लिखा वाक्य क्या है, सबको पता है। बोल नहीं सकते, वरना 'बिगट' और 'कम्यूनल' होने का ठप्पा तुरंत लग जाएगा। हमने पीढ़ियाँ निकाल दीं कहते हुए कि आतंक का कोई मज़हब नहीं होता।

अल्पसंख्यक ही नहीं बहुसंख्यक भी होते हैं सांप्रदायिक वारदातों के शिकार, छिपाता है मीडिया

हिन्दू आज़ादी से अपने त्यौहार मनाएँ, मुस्लिम बिना व्यवधान से नमाज़ पढ़ें, लेकिन दोनों ही मामलों में अगर कोई बाधा डालने वाला कार्य करता है तो दोनों ही ख़बरों को समान प्राथमिकता दी जाए। एक को छिपाना और एक को विश्व स्तर पर ले जाकर भारत को भीड़तंत्र वाला देश साबित करने का प्रोपेगंडा अब नहीं चलेगा।

हिन्दुओं का अपहरण और लव जिहाद: बंगाल बन रहा है पाकिस्तान की सस्ती फोटोकॉपी

नाबालिग लड़की ने बताया कि दोनों बहनों को शादी करने के लिए धमकाया गया था। साथ ही उनसे कहा गया था कि अगर शादी नहीं की तो माता-पिता समेत परिवार के सदस्यों को मार देंगे और दोनों के चेहरे पर तेजाब फेंक देंगे। इससे दोनों घबरा गईं थीं। यह निकाह कोलकाता के बुर्रा बाजार इलाके की ‘बड़ी मस्जिद’ में कराया गया।

हिंदू लड़कियों का अपहरण कर धर्म परिवर्तन कराने का ठेका लिया है मियाँ मिट्ठू ने

मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि बीते 50 सालों में पाकिस्तान में बसे 90% हिंदू देश छोड़ चुके हैं। ऐसे में भारत में बैठे पाक अकुपाइड पत्रकार के मीडिया गिरोहों को इमरान खान के लिए शान्ति के नोबल पुरस्कार की अपील करने से पहले इस तरह के आँकड़ों पर भी ध्यान देना चाहिए।

गाँधी नहीं, ऑरोबिन्दो-विवेकानंद के मापदण्ड पर तौलिए हिंदुत्व को

गाँधी जी के मापदण्ड पर किसी के हिंदुत्व का, आकलन बंद किया जाए। यदि किसी के हिंदुत्व का आकलन होना है तो वह ऑरोबिन्दो और विवेकानंद के मानक पर किया जाए।

फजरुद्दीन, सलीम, अली ने मिलकर दलित संजय को मार डाला था, 6 महीने से न्याय की आस

चार्जशीट में चार अभियुक्तों का नाम है- फजरुद्दीन, सलीम, सलीम के चाचा अली मोहम्मद और सलीम के पड़ोसी सुमित ने इस जघन्य हत्याकांड को अंजाम दिया है।

दलितों और मुस्लिमों में हिंदुत्व-RSS का डर फैलाने के लिए पाकिस्तान ने बनाया था यह प्लान

इस के तहत भारत में दलित, मुस्लिम, सिख, और क्रिश्चियन समुदाय के लोगों को भड़का कर देश को टुकड़ों में बांटना था। पाक को आंशिक सफलता मीडिया के एक ख़ास वर्ग और लिबरल लॉबी से मिली, जो मोदी सरकार के खिलाफ माहौल बनाने में लगी रहती है।

हिन्दुओं की मौत में अख़लाक़ वाला सोफ़िस्टिकेशन नहीं है

क्या मार दिए गए किसी व्यक्ति को सिर्फ इसलिए न्याय नहीं मिलना चाहिए, क्योंकि उसका नाम अख़लाक़ नहीं बल्कि रामलिंगम है?

झारखण्ड के श्रीराम आश्रम में मजहबी भीड़ का उत्पात: दिव्यांगों, कुष्ठ रोगियों समेत 100 से ज़्यादा लोगों का पलायन

मजहबी भीड़ में से एक व्यक्ति ने लोगों को यह कहकर धमकाया कि पुलिस के जाने के बाद वो एक-एक को मार डालेंगें

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