इससे साबित इतना ही होता है कि समाज में एक सम्प्रदाय के कुछ लोगों की सामूहिक संवेदनहीनता हर ऐसे मौके पर दिख जाती है। इस्लामोफोबिया का भाव आकाश से नहीं टपकता। यही वो मौके हैं जब वैसे लोग सोचने लगते हैं कि ये किस तरह के लोग हैं?
इससे पहले, साल 2010 में नसरीन को दुष्प्रचार करने और देश की सुरक्षा को खतरे में डालने के आरोप में जेल भेजा गया था। हालाँकि, नसरीन ने इन आरोपों से इनकार किया था। 6 साल की सजा काटने के बाद उन्हें रिहा कर दिया गया था।
बानगियों की कमी नहीं है यह जानने के लिए कि आखिर एक सेक्युलर समाज में ऐसी क्या कमी है जो अलगाववादियों को वह मंज़ूर नहीं, और जिससे कश्मीर को आज़ाद कराने के लिए बुरहान वानी और आदिल डार ने जान लेने और देने में कोई संकोच नहीं किया।
कश्मीर में अलगाववाद को बल मिलता है पैन-इस्लामिज़म से, जो खिलाफत आंदोलन के या उससे भी पूर्व के उस विचार से प्रभावित है, जिसमें दुनिया के सभी मुस्लिमों को राष्ट्रीय सीमाओं से परे एक झंडे के नीचे खड़े होने को अपना आदर्श मानता है।
"जब किसी मुस्लिम आदमी के लिए बहु-विवाह की बात कही जाती है तो उसमें निष्पक्षता की शर्तों का भी पालन होना चाहिए, और अगर ऐसा नहीं होता है, तो एक से अधिक बीवियाँ हराम हैं।"
पुलवामा में हुए आतंकी हमले और उसके बाद भारत की जवाबी कार्रवाई में आतंकियों के मारे जाने के बाद ऐसे कई लोगों को गिरफ़्तार किया जा चुका है। इन लोगों ने बलिदानी जवानों का मज़ाक बनाने से लेकर आतंकियों की पैरवी तक की थी।
मुस्लिम कन्याओं की शादी के लिए शहर के नामी काज़ी वसीम मीनाई को बुलावाया गया था, लेकिन उन्होंने यह कह कर विवाह स्थल पर आने से इनकार कर दिया कि पिछले 3 सामूहिक विवाह कार्यक्रमों की बकाया राशि उन्हें नहीं मिली है।
"ससुराल वालों ने मेरी बहन को जबरन इंजेक्शन लगा कर, उसके ससुर के साथ हलाला की 'रस्म' पूरी करवाई। अगले 10 दिनों तक, बुजुर्ग व्यक्ति ने मेरी बहन के साथ लगातार बलात्कार किया।"
अगर पोप और शीर्ष इमाम के बीच का चुम्मा-बंधन पूरा हो तो पोप को हिन्दू मंदिरों पर ईसाई कट्टरवादियों द्वारा किए जा हमले और ननों के यौन शोषण पर भी चुप्पी तोड़नी चाहिए।
Nike वाला डिज़ाइनर हिजाब किसी विशेष धर्म की कुरीतियों को बढ़ावा देना नहीं तो और क्या है कि अब दौड़ के मैदान में भी एक लड़की 'खिलाड़ी' बनकर नहीं बल्की 'मुस्लिम खिलाड़ी' बनकर दौड़ेगी।