महिला ने आरोप लगाया कि हिंदुओं को मूर्ति विसर्जन के लिए नहीं जाने देते। पूजा-पाठ में भी मुस्लिम विघ्न डालते हैं। महिला ने आरोप लगाया कि मुस्लिमों का कहना है कि हिंदू लोग 'जय श्री राम' का नारा लगाते हैं, इसलिए उन्हें नहीं दिया जाएगा।
पहली बार नहीं है जब हिंदू संत या धार्मिक संगठन किसी तरह के परोपकारी कार्य कर रहे हो, सालों से ऐसा हुआ, लेकिन वामपंथियों ने कभी उसका प्रचार नहीं होने दिया।
कराची के श्री पंचमुखी हनुमान मंदिर के महंत रामनाथ मिश्रा भी हैं जो खुद को धन्य और सौभाग्यशाली मानते हैं कि उन्हें मृत आत्माओं की शांति के लिए यह महान कार्य करने का अवसर दिया।
कोर्ट ने अब इसी मामले में ये पाया कि प्रतिवादियों को ये साबित करना था कि वादी की बड़ी बेटी अब हिंदू नहीं है, लेकिन वो लोग ऐसा नहीं कर पाए। ऐसे में बेटी को पिता की संपत्ति में अधिकारी होगी।