अरुण जेटली को अगस्त 9, 2019 को साँस लेने में तकलीफ होने के कारण एम्स में भर्ती कराया गया था। इसके बाद उन्हें आईसीयू में शिफ्ट कर दिया गया था और वह कुछ दिनों से लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर थे।
भाजपा के उपाध्यक्ष ने कहा कि वहाँ के लोगों की मानसिकता में सकारात्मक बदलाव आ रहा है। नेताओं को उम्मीद है कि देश भर से डेटा एकत्र होने के बाद देश भर में नए सदस्यों की संख्या लगभग 5 करोड़ तक बढ़ जाएँगे।
उत्तराखंड के वरुण गहलोत कॉन्ग्रेस के साथ लंबे समय से जुड़े हुए थे। उन्होंने अपने 25 साथियों के साथ बीजेपी की सदस्यता ली। इनमें कॉन्ग्रेस की पूर्व सांसद प्रतिनिधि शीतल जोशी, कोमल सिंह भी शामिल हैं।
पूर्व केंद्रीय मंत्री और बीजेपी सांसद विजय गोयल का कहना है कि संत रविदास के मंदिर को दोबारा बनाया जाना चाहिए। सांसद ने इस मंदिर के निर्माण के लिए ‘गुरू रविदास जयंती समारोह समिति’ को अपनी एक महीने की सैलरी देने की भी बात कही है।
कर्नाटक के हुबली में उमा भारती ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया था। उनके ख़िलाफ़ अदालत में मामला दर्ज किया गया था। बाद में कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार ने यह मामला फिर से खोल दिया, जिस कारण उमा भारती ने इस्तीफा दिया और गौर मुख्यमंत्री बने।
नीरज शेखर के आने से बिहार से लगे पूर्वांचल के क्षेत्रों में भाजपा और बढ़त बना सकती है। कहा जा रहा है कि 2019 लोकसभा चुनाव में सपा ने उन्हें बलिया से टिकट नहीं दिया, जिसके बाद से ही वे पार्टी ने नाराज़ चल रहे थे।
नड्डा ने बताया कि सितंबर से देशभर के आठ लाख बूथों पर चुनाव कराए जाएँगे। इसके बाद अक्टूबर में मंडल स्तर पर प्रतिनिधियों का चुनाव होगा। उम्मीद है कि 15 दिसंबर तक सभी राज्यों में संगठन के चुनाव की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी।
‘‘टेलीफोन टैपिंग के मुद्दे पर कॉन्ग्रेस विधायक दल के नेता सिद्दरमैया समेत कई नेताओं ने कहा कि इसकी जाँच होनी चाहिए और सच्चाई सामने आनी चाहिए, इसलिए मैंने सीबीआई जाँच का आदेश देने का फैसला किया है।”
जेएनयू का नाम बदलने का सुझाव पहली बार नहीं आया है। इससे पहले 2016 में भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा था कि जेएनयू ऐसे लोगों का अड्डा बनती जा रही है जो देश के खिलाफ साजिश में शामिल है। उन्होंने इसका नाम बदल कर सुभाष चन्द्र बोस यूनिवर्सिटी रखने की मॉंग की थी।
शाजिया इल्मी को भारत विरोधी नारों से आपत्ति हुई तो वह प्रदर्शनकारियों के बीच पहुँच गईं और उन्हें समझाने की कोशिश की। जब प्रदर्शनकारी नहीं माने, तो वे भी इंडिया जिंदाबाद के नारे लगाने लगीं।