हिन्दी में कहें तो हताश कॉन्ग्रेस के लिए हाथ-पाँव मारकर, नदी में विसर्जन का नारियल निकालने के चक्कर में मरे हुए आदमी की काई जमी खोपड़ी का भी मिल जाना एक उपलब्धि ही है।
कृष्णक मन्ने सिकंदराबाद के जाने-माने नेताओं में से एक हैं। उनका कहना है कि 2014 के चुनावों में उन्हें सिकंदराबाद से उम्मीदवार घोषित किया था लेकिन आखिरी समय में उनके नाम को वापस ले लिया गया था।
पश्चिम बंगाल के कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोमेन नाथ मित्रा ने कहा कि वाम मोर्चे ने 15 मार्च को पश्चिम बंगाल में 25 लोकसभा सीटों पर अपने कैंडिडेट की घोषणा की, जिसमें पश्चिम बंगाल की कॉन्ग्रेस के साथ कोई चर्चा नहीं की गई।
मैनपुरी से सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव चुनाव लड़ने वाले हैं। कन्नौज से डिंपल यादव सपा से ताल ठोकेंगी। वहीं फ़िरोज़ाबाद से वरिष्ठ सपा नेता रामगोपाल यादव के बेटे अक्षय यादव को टिकट दिया गया है। अजित सिंह और जयंत सिंह के ख़िलाफ़ भी कॉन्ग्रेस उम्मीदवार नहीं उतारेगी।
कॉन्ग्रेस की मानसिकता का स्तर लगातार गिरता जा रहा है जो उसकी दिमागी रूप से विक्षिप्त होने की दशा को भी उजागर करता है। सोशल मीडिया पर पुरानी तस्वीर को शेयर करना ख़ुद कॉन्ग्रेस के लिए ही भारी पड़ गया, जब लोगों ने इस पर जमकर तंज कसे।
पाटीदार नेता हार्दिक पटेल के कॉन्ग्रेस से जुड़ने के बाद पार्टी ने अपनी गुजरात इकाई की वेबसाइट पर उनकी सेक्स टेप की तस्वीरों को लगाकर अपने नए नेता का स्वागत किया। खबर तो यही है लेकिन कॉन्ग्रेस के नेता कह रहे हैं कि वेबसाइट हैक हुई है। सच्चाई क्या है...
खबर ये भी है कि पूर्व मुख्यमंत्री ओमन चांडी, केपीसीसी प्रमुख एवं वर्तमान सांसद मुल्लापल्ली रामचंद्रन और वरिष्ठ नेता वीएम सुधीरन सहित कई वरिष्ठ कॉन्ग्रेसी नेताओं ने लोकसभा चुनाव लड़ने में अनिच्छा जाहिर की है जिससे कॉन्ग्रेसी नेतृत्व की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
अगर इसी तरह से कॉन्ग्रेस में शामिल हुए नए नेताओं को बधाई दी जाती रही, तो अब कोई यह अनुमान लगा ही सकता है कि कॉन्ग्रेस के अधिकांश नेता अब डूबते जहाज से क्यों कूद कर किनारा ढूँढ रहे हैं।