जुलाई के अंत में बिजनौर के पंचमुखी हनुमान मंदिर में दो युवक मूर्तियों को तोड़ने की कोशिश करते पकड़े गए थे। दोनों ने माथे पर टीका लगा रखा था ताकि किसी को उन पर शक न हो।
"चिन्मयानंद ने उसका बलात्कार किया और जब उसने खुद को बचाने का प्रयास किया तो चिन्मयानंद द्वारा उसके कपड़े फाड़ दिए गए। चिन्मयानंद के आश्रम के सुरक्षा गार्ड सहित 4 लोगों ने इस बात की पुष्टि की है कि..."
वह बंगलौर के आर्मी हॉस्पिटल में बतौर पैरामेडिक कार्यरत था। रिटायर होने के बाद उसने 2 नर्सिंग होम खोले और स्वास्थ्य केंद्र में नौकरी करने लगा। वह आयुष्मान भारत योजना के तहत सरकार से ₹14 लाख प्राप्त कर चुका है। जानिए कैसे रंगदारी के एक मामले ने खोली फ़र्ज़ी डॉक्टर की पोल!
प्रणव एआई 161 फ्लाइट से लंदन रवाना होने वाला था। लखनऊ के अंसल टाउनशिप घोटाले में उसके पिता सुशील अंसल सहित तीन अन्य निदेशकों के गिरफ़्तारी की क़वायद लखनऊ पुलिस की ओर से पहले से ही शुरू कर दी गई थी।
अवैध असलाह बनाने का सारा सामान हापुड़, गढ़मुक्तेश्वर और किठौर से ख़रीदा जाता था। असलाह तैयार होने के बाद हापुड़, बुलंदशहर, नोएडा, गाजियाबाद, अमरोहा, गजरौला, मुजफ्फरनगर, शामली, बागपत, मेरठ, सहारनपुर आदि जिलों में सप्लाई की जाती थी।
श्वेता की सहेली बरखा सोनी सेक्स रैकेट के रुपए को सुरक्षित रखने के लिए एनजीओ चलाती थी। बरखा नई दिल्ली में कॉन्ग्रेस मुख्यालय के बार-बार चक्कर लगाती थी। इसके सबूत उसके फेसबुक वॉल पर भरे हैं। कॉन्ग्रेस पार्टी के कई प्रमुख चेहरों के साथ उसकी तस्वीरें हैं।
रतलाम का सेंट जोसेफ कॉन्वेंट स्कूल। यहीं 10वीं में पढ़ती है - गायत्री। एक दिन गायत्री का रेप होता है और रतलाम सुलग उठता है, प्रशासन हिल जाता है। वो इसलिए क्योंकि गायत्री का जिस जुबैर खान ने रेप किया, वो उसका क्लासमेट है। क्योंकि इस रेप ने स्कूली छात्र-छात्राओं के भरोसे को तोड़ा है।
इस मामले में मीडियाकर्मी हनी ट्रैप रैकेट के शिकार नहीं थे, बल्कि दलाल थे। मीडियाकर्मियों ने कथित तौर पर पीड़ित नौकरशाहों, मंत्रियों और रैकेट की सरगना श्वेता जैन के बीच सौदा करवाने में दलाल के तौर पर मदद की थी।
पूछताछ के दौरान शाहिद खाकान अब्बासी ने कुछ सवालों को जवाब देने से इनकार कर दिया। उनके इस बर्ताव से नैब का एक अधिकारी गुस्से में आ गया। उसने आपा खोते हुए, पूर्व प्रधानमंत्री से मारपीट की। मारपीट के बाद उसने गुस्से में पानी से भरा ग्लास अब्बासी पर फेंक दिया।
इतना सब कुछ सहने के बाद भी पीड़ित बच्ची का दिल अपने माँ-बाप का बुरा सोच कर सिहर उठता है। वो सोचती है कि अगर उसके पिता को सज़ा हुई तो घर का गुज़ारा कैसे चलेगा। घर में बीमार बूढ़ी दादी है, माँ है - इन सबको कौन देखेगा!