आजाद अहमद वानी, मोहम्मद इकबाल राथर और बिलाल अहमद राथर - ये तीनों कश्मीरी हैं। AMU से PhD कर रहे हैं। तीनों UAE गए थे। 18 मार्च को उन्हें क्वारंटाइन के लिए आइसोलेशन वॉर्ड में रखा गया था। मगर वो 19 मार्च को लगभग 9:45 में हॉस्पिटल से फरार हो गए।
केरल के क्वारेंटाइन से फरार हुआ व्यक्ति बोगाईगॉंव रेलवे स्टेशन पर पकड़ा गया। वह असम का रहने वाला है। पकड़े जाने के बाद उसे रेलवे हॉस्पिटल के आइसोलेशन वार्ड में रखा गया है।
टॉप 10 वॉन्टेड आतंकियों में से एक रियाज नाइकू कहता है, “सड़क, पानी, सोशल मीडिया हमारे लक्ष्य नहीं हैं... भारत अनुच्छेद 370 और सोशल मीडिया प्रतिबंध जैसे ट्रिक्स का उपयोग करके डेमोग्राफी को बदलना चाहता है। यह पाकिस्तान और कश्मीर को हथियार उठाने के लिए मजबूर करता है।”
इस पूरे खेल में कई बैंक अधिकारी भी मिले हुए थे क्योंकि उन्होंने आरोपित द्वारा पेश किए गए दस्तावेजों की पुष्टि करने की भी कोशिश नहीं की। अधिकारियों ने लोन ग्रांट करने के लिए नियमों को ताक पर रखा और इसके बाद राथेर ने रुपयों की हेराफेरी की, इसीलिए ये मनी लॉन्ड्रिंग का केस बनता है।
वायुसेना जवानों की हत्या तब की गई जब वे एयरपोर्ट जाने के लिए बस का इन्तजार कर रहे थे। एक मारुति जिप्सी और एक बाइक से 5 आतंकी वहाँ पहुँचे और एके-47 से ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। आतंकियों ने ख़ून से लथपथ जवानों के सामने डांस करते हुए जिहादी नारे भी लगाए थे।
फारुख अब्दुल्ला की सात महीने बाद हुई रिहाई के बाद भी अधिकांश स्थानीय लोग उत्साहित नहीं दिखे। पास में खड़े एक रिक्शा चालक ने कहा कि ये कोई बड़ी बात नहीं है, क्योंकि फारुख अब्दुल्ला ने स्थानीय निवासियों की कभी कोई परवाह ही नहीं की है।
जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद-370 के कुछ प्रावधानों को निष्क्रीय करने और विशेष राज्य का दर्जा समाप्त होने के बाद से घाटी में किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए वहाँ के स्थानीय नेताओं को नजरबंद कर लिया गया था।