ये JNUSU छात्र बिना किसी विरोध के उन मासूम आम छात्रों के साथ ये सब करने में कामयाब रहे, क्योंकि उस दौरान आसपास एक भी AVBP के छात्र नहीं थे। नकाबपोश चेहरे वाले वहाँ कई छात्र खड़े थे। हम में से कई लोग संदेह कर रहे थे कि उनमें से कुछ हमारे छात्र नहीं हो सकते हैं और कुछ जामिया मिलिया के हो सकते हैं।
"यहाँ विचारधारा थोपने का काम होता है, हेल्दी डिबेट की कोई बात ही नहीं बची है। सभी को वामपंथी विचार को ही अपना विचार बनाने के लिए दबाव बनाया जाता है। आप उनसे अलग रहेंगे तो वामपंथी छात्र और यहाँ के कई वामपंथी प्रोफ़ेसर आपका यहाँ रहना मुश्किल कर देंगे।"
JNU हिंसा वाले दिन और संबंधित जगह पर जो 800 मोबाइल नंबर सक्रिय थे, उनके कॉल डिटेल और लोकेशन के आधार पर इनकी पहचान की गई है। इन 3 आरोपितों में एक महिला और दो पुरुष हैं। क्राइम ब्रांच को तीनों नकाबपोशों से जुड़ी जानकारी मिली है।
इसी तरह छात्र संघ की वर्तमान अध्यक्ष कॉमरेड आइशी घोष और पूर्व अध्यक्ष गीता कुमारी का भी वीडियो वायरल हुआ। वीडियो में दोनों को नकाबपोश गुंडों के साथ देखा जा सकता है। इन्हीं वामपंथी गुंडों ने आतंक मचाया। फिलहाल आप कॉमरेड चुनचुन के वीडियो को देखिए।
पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता ने दीपिका की तारीफ़ की। उन्होंने दीपिका को एक बहादुर महिला बताया। आसिफ गफूर ने दावा किया कि दीपिका पादुकोण विपरीत परिस्थितियों में भी बहादुर की तरह खड़ी हुईं। उन्होंने कहा कि मानवता सबसे ऊपर होना चाहिए।
फायदे के लिए कंट्रोवर्सी पैदा करना बॉलीवुड का पुराना ट्रेंड है। दीपिका का जेएनयू जाना भी इससे अलग नहीं है। 'उनलोगों' को नाराज़ करने का रिस्क नहीं लेने वाला बॉलीवुड पब्लिसिटी के लिए बहुसंख्यकों की भावना से भी खेलता रहता है।
पाक के विदेश मंत्री ने कहा कि छात्रों और प्रोफेसरों की पिटाई की जा रही है। जेएनयू में छात्रों पर हमले से पता चलता है कि भारत में असहिष्णुता तेज़ी से बढ़ रही है। पाक मंत्री ने आरोप लगाया कि पुलिस ने आरएसएस के साथ मिल छात्रों को पीटा।
इन घटनाओं में एक वर्ग तो वह होता है जो सुनियोजित ढंग से शामिल होता है और एक वर्ग वह होता है जो कि जाने-अनजाने में घटनाओं में शामिल तो हो जाता है लेकिन इसके बाद कानूनी कार्यवाई में फँसने के बाद वह अपने आप को निर्दोष बताते हुए पहले तो दर-दर की ठोकरें खाता है और फ़िर अपनी ही आँखों से अपने भविष्य को चौपट होते हुए भी देखता है।
सोचिए उस एसिड अटैक विक्टिम के बारे में अब। सोचिए कि दीपिका के एक गलत कदम (विषय के लिए गलत, फिल्म के लिए मास्टरस्ट्रोक) से उन तमाम लोगों को कैसा लग रहा होगा जिसने इस विषय को ले कर उम्मीद बनाई थी। ये एक राजनैतिक विषय नहीं है। ये घोर सामाजिक विषय है।