JNU वामपंथी की हालिया गतिविधियों के तार अगर एक सिरे से जोड़ते हुए देखा जाए, तो पता चलता है कि ये कोई विद्यार्थी या नेता या समाजवादी नहीं, बल्कि सिर्फ और सिर्फ एक शहरों में रहने वाला अनपढ़, कूप-मण्डूक, गतानुगतिक है, जिसे किसी भी हाल में क्रांति की तलाश थी और समय आने पर उसने अपनी क्रांति को परिभाषित भी कर डाला है, जिसका उदाहरण ऑन डिमांड आस्तिकता वाली शेहला राशिद है।
आज देश की बड़ी-बड़ी परीक्षाएँ कम्प्यूटर के माध्यम से होती हैं। ऐसे में इस कदम का विरोध करना केवल मूर्खता को दर्शाता है। लेकिन अगर इसके बावजूद किसी पढ़े- लिखे समुदाय की ‘भीड़’ को इससे शिक्षा व्यवस्था में खतरा नज़र आता है, तो हर विरोध प्रदर्शन का एक तरीका होता है।
प्रधानमंत्री मोदी की चुनावी जीत में सहायता के लिए यह अकादमिक समूह विभिन्न विषयों पर चर्चाओं और राजनीतिक बहसों का आयोजन करने के अलावा इंटरनेट के माध्यम से विभिन्न ऑनलाइन मंचों पर अपनी बात लेखों के द्वारा रखेगा।
पूर्व मुख्यमंत्री ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि शिक्षा देने वाला कोई शख़्स ऐसा कैसे हो सकता है? अगर वह वाकई शिक्षित हैं तो? या फिर जानबूझकर कश्मीरियों को कष्ट पहुँचाना चाहती हैं। विडंबना यह है कि वह लॉ गवर्नेंस की अध्यापिका हैं।
आशुतोष कुमार रॉय ने कहा है कि प्रोफेसर ने मनमाने तरीके से उनके रिसर्च के पाठ्यक्रम को बदलने के लिए सुझाव दिया था। उन्होंने हिंदी को सांप्रदायिक भाषा बताने पर रिसर्च करने और इसका समर्थन करने को दबाव बनाया था।
केजरीवाल का कहना है कि चुनाव से पहले बिना मंजूरी के कोर्ट में चार्जशीट फाइल करने की वजह से काफी सवाल उठ रहे हैं। इसलिए उन्हें फाइल के अध्ययन की जरूरत है।
जेएनयू राष्ट्र विरोधी नारेबाज़ी के मामले में मामले 'टुकड़े-टुकड़े गैंग' के सदस्यों के ख़िलाफ़ दायर की गई दिल्ली पुलिस की चार्जशीट पर होने वाली सुनवाई एक बार फिर 28 फ़रवरी तक के लिए टल गई है।
तीसरे आरोपित उमर गुल ने कहा था कि फेसबुक के ज़रिए उसे इस कार्यक्रम की जानकारी मिली थी। लेकिन अक़ीब व मुज़ीब की तरह ही उमर गुल भी पहले से ही लगातार फ़ोन पर संपर्क में थे।