भारत के राष्ट्रीय अभिलेखागार की होम पॉलिटिकल विभाग की फ़ाइल संख्या जनवरी 1920/77 के अनुसार कॉन्ग्रेस ने अमृतसर को अपने अधिवेशन के लिए जानबूझकर चुना, जिससे एक खास राजनैतिक मकसद को पूरा किया जा सके। दस्तावेज के अनुसार जवाहरलाल नेहरू के पिता मोतीलाल नेहरू के नेतृत्व वाली कॉन्ग्रेस उन खूनी धब्बों से ब्रिटिश सरकार को बचाने का प्रयास कर रही थी, जिनके निशान आजतक अमृतसर में मौजूद हैं।
सारी सभा में हलचल मच गई। रौद्र रूप धरे गुरु गोविन्द सिंह की इस माँग के बाद जो लोग आए, उन्होंने न सिर्फ़ अपनी बहादुरी से देश को गौरवान्वित किया बल्कि जाति-पाती के बंधनों को तोड़ने में भी अहम भूमिका निभाई। एक व्यक्ति आगे आया। गुरु गोविन्द सिंह उसे तम्बू में ले गए और खचाक...!
“मंजू देवी ने अपने 5 बच्चों को भूखमरी के कारण गंगा नदी में नहीं डुबाया है।" इससे पहले भदोही पुलिस ने मंजू के घर में बने खाने का फोटो पोस्ट करते हुए लिखा था कि मंजू के घर में खाना बना है। फोटो से स्पष्ट है कि भूखमरी के कारण बच्चों को नदी में नहीं डुबाया गया है।
"यह झूठ है। कृपया ऐसे न्यूज पोस्ट न करें, जो इस संकट के समय में लोगों में दहशत पैदा करे। हमें एकत्रित होकर लड़ने की जरूरत है और इस महामारी से अवगत कर लोगों को मदद करनी चाहिए… घबराने की जरूरत नहीं है।"
इंटेलिजेंस ब्यूरो के मल्टी एजेंसी सेंटर (मैक) ने कई मोबाइल टावरों की मदद से 14 मार्च से लेकर 22 मार्च तक का एक बड़ा डेटा निकाला। इसके बाद आधिकारिक रजिस्टरों के माध्यम से, आईबी ने भारत के विभिन्न राज्यों से तबलीगी जमात में आए लगभग 4,000 सदस्यों के मोबाइल नंबरों और घरों/निवास स्थानों का पता लगाया, जो 13 मार्च से मरकज की बैठक में शामिल हुए थे।
शव को 45-60 मिनट की अवधि तक 800-1200 डिग्री सेल्सियस के तापमान पर जलाया जाएगा। मुस्लिम समुदाय के तमाम विरोध के बावजूद भी स्वास्थ्य मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह शवों के अंतिम संस्कार के आखिरी फैसले को परिवार और मजहब पर छोड़ने की इस माँग को कोरोना वायरस के संक्रमण की असीमित क्षमता को देखते हुए रद्द कर रहे हैं।
तथ्य यह है कि नवाब द्वारा दान देना तो दूर, गोरखनाथ मंदिर को दो बार मुस्लिम आक्रान्ताओं द्वारा नष्ट किया गया था। सबसे पहले इसे अलाउद्दीन खिलजी ने 14वीं सदी में नष्ट किया था। जिससे यह साबित होता है कि यह मंदिर 18वीं शताब्दी से भी पहले का है। इसके बाद फिर 18वीं सदी में भी...
पुलिस पर हमले के बाद ये लोग गुरुद्वारे में छिप गए थे। अंदर से गोलीबारी भी की। पुलिसवालों को वहाँ से चले जाने के लिए कहा। गालियाँ और धमकी दी। बाद में कमांडो टीम ने गुरुद्वारे से 7 आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया।
ये तथाकथित वैज्ञानिक ध्रुव राठी की तरह हैं। यूट्यूबर ध्रुव राठी 'फिलीपींस को आज़ादी कैसे मिली' से लेकर 'कोरोना वायरस कैसे काम करता है' तक, हर मामलों का विशेषज्ञ माना जाता है। तभी उसकी तुलना 'राजा बाबू' फिल्म के गोविंदा से होती है।