चीनी प्रशासन गर्भपात को मुस्लिमों के ख़िलाफ़ एक हथियार की तरह इस्तेमाल करता है। उनकी मुस्लिम होने की पहचान को समय से पहले ही मिटाया जा रहा है। उनके बच्चों को पैदा होने से पहले ही मारा जा रहा है।
111 पन्नों की उस रिपोर्ट के 6 पन्ने इतने भयावह दास्तानों से भरे पड़े थे कि पूरा देश उबल पड़ा। यौन शोषण, प्रताड़ना, जानवरों से भी बदतर हालात में रहने की मजबूरी। जिम्मेदार बताए गए 71 अधिकारियों पर गाज गिरेगी या फिर होगी लीपापोती?
बीबीसी की रिपोर्ट्स में हिंदू बनाम मुस्लिम ध्यान रखते हुए एकतरफा पत्रकारिता का फर्क़ पहली बार नहीं झलक रहा। बल्कि यदि बीबीसी की वेबसाइट पर जाकर सर्च बॉक्स में इन दोनों (घूँघट और बुर्का ) शब्दों को टाइप किया जाए तो इनके इस पूरे अजेंडे का खुलासा होता है।
एक अख़बार से अपनी तुलना किए जाने और ख़ुद को 'सस्ता' बताने के राज के ट्वीट से भड़की स्वरा ने गुस्से में उन्हें भला-बुरा सुनाया। उन्होंने कहा कि राज उन्हें रोल ऑफर करते हैं और अपनी फ़िल्म का ट्रेलर शेयर करने का निवेदन करते हैं। राज ने कहा कि अगली बार फिर रोल ऑफर करूँगा।
JNU उपद्रव के बाद मीडिया द्वारा खुद को विक्टिम दिखाना। पुलिस-प्रशासन को विलेन बता, सोशल मीडिया पर लिखना। अगर यही सारे पत्रकार नक्सलियों द्वारा गला रेत लाश टाँगने की रिपोर्टिंग करने गए होते तो खबर गायब हो जाती और प्राइम टाइम होता अर्द्धसैनिक बल वाले सरदार की गाली और रिपोर्टरों की चाशनी में लिपटे प्रोपेगेंडा पर।
न्यूजलॉन्ड्री के एक पूर्व कर्मचारी ने CEO अभिनंदन सेखरी के बारे में कहा कि हिन्दुओं पर हुए अपराधों को दबाना, मुसलमानों पर हुए अपराधों में 'हिन्दू कनेक्शन' निकालना, सहकर्मियों को गाली देना, चिल्लाना और आम आदमी पार्टी के लिए अजेंडा चलाना, सेखरी का SoP है।
अकादमी क्रियाकलाप में हज़ारों छात्रों ने भाग लिया, इससे वामपंथी बौखला गए। सीएए पर BJP 3 करोड़ घरों में पहुँच रही है, इससे उन्हें तगड़ा झटका लगा। जेएनयू में हुई हिंसा के पीछे जितने भी फैक्टर्स हैं, उन सबके बारे में समझिए। देखिए लेफ्ट इकोसिस्टम ने कैसे अफवाहें फैलाई।
NDTV अब भले ही वामपंथियों को ख़ुश करने के लिए भाजपा व एबीवीपी को इस हिंसा के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए 1000 लेख लिखे, डैमेज हो चुका है। वो कहते हैं न, सच छिपाए नहीं छिपता। शायद एनडीटीवी पर यही कहावत फिट बैठती है। वामपंथी 'अपने' ही चैनल से निराश हैं।
मुंबई का गेटवे ऑफ इंडिया। रात के 2:15 बजे। विरोध-प्रदर्शन करती भीड़। और 18 सेकंड का विडियो। इसमें 'हिंदुओं से आजादी' का नारा लगा या नहीं - इस पर बवाल। आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल रहा। पुलिस अब जाँच करेगी। लेकिन आप खुद भी सुन कर फैसला कर सकते हैं कि...
रात में जितना भी बवाल होता है, जितनों को चोट लगती है - सबका आरोप ABVP के ऊपर मढ़ दिया जाता है। और खुद JNUSU प्रेसिडेंट की सर फटी तस्वीर से नैरेटिव फिट भी बैठ रहा था वामपंथियों का... लेकिन ट्विस्ट आता है 2 वीडियो के जरिए। एक में भीड़ द्वारा छात्र-छात्राओं को पीटा जाना, दूसरे में मास्क पहने या मुँह ढँकी भीड़ के साथ खुद JNUSU प्रेसिडेंट का होना।