नेहरू से लेकर सोनिया तक कॉन्ग्रेस हिंदू घृणा में सनी रही। फिर भी राम की मर्यादा का पालन कर उसके नेताओं को न्योता दिया गया। पर उसने वही चुना जो उसकी नियति है।
वैष्णव समाज में रामानुज की परंपरा में ही संत रामानंदाचार्य हुए, जिन्होंने विशिष्टाद्वैत सिद्धांत को आगे बढ़ाया। अहं का त्याग और समर्पण - रामानंदी भक्ति धारा इन्हीं पर आधारित है। रामलला एक बालक हैं, इसीलिए संरक्षक बन कर पुजारी पूजा करेंगे।
वाइब्रेंट गुजरात समिट में रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने 'मोदी है तो मुमकिन है' का मतलब समझाया है। बताया कि कैसे भारत पर सबका भरोसा बढ़ा है।
अयोध्या में 'कुम्भ मॉडल' लागू करने का आदेश देते हुए कहा गया है कि मेहमानों के स्वागत, साज-सज्जा और आतिशबाजी का इंतजाम हो, सभी सरकारी भवनों को निखारा जाए।