स्वस्तिका मुखर्जी सिंगापुर में दुकान से सोने का झुमका चुराते हुए पकड़ी गई थी। उस समय यह बंगाली अभिनेत्री एक बंगाली फिल्म महोत्सव के सिलसिले में सिंगापुर में थीं। अभिनेत्री को वहाँ के एक पॉश मॉल के शोरूम में सोने के झुमके चुपके से अपने हैंडबैग में रखते हुए पकड़ा गया था।
JNUSU का कहना है कि वो JNU में तब तक कोई क्लास नहीं चलने देंगे जब तक वाइस चांसलर इस्तीफ़ा नहीं दे देते हैं। इसके जवाब में JNU के प्रोफेसर वैज्ञानिक आनंद रंगनाथन ने ट्वीट करते हुए कहा है कि अगर क्लास में एक भी विद्यार्थी न हुआ तब भी अपना लेक्चर देंगे।
एक वीडियो में सीपीआई नेता डी. राजा की बेटी अपराजिता के हाथ में डंडा है। लेफ्ट विंग के ऐक्टिविस्टिस और छात्र विडियो में मफलर पहने हुए रॉड और डंडे इकट्ठे करते दिख रहे हैं। दूसरे वीडियो में वामपंथी प्रोफेसर बीएस बडोला को सुरक्षाकर्मियों को धमकी देते देखा जा सकता है।
ऑपइंडिया पर ABVP JNU के छात्र मनीष जांगिड़ का वो इंटरव्यू, जिसमें उन्होंने बताया कि कैसे साज़िश के तहत जेएनयू में हिंसा हुई और तुरंत कॉन्ग्रेस व वामपंथी नेता पहुँच गए। उन्होंने राहुल कँवल पर भी बड़ा आरोप लगाया। जेएनयू में कैसे वामपंथी गुंडों को बचाया जा रहा है, जानें मनीष के शब्दों में।
साबित हो चुका है कि अक्षत ABVP का कार्यकर्ता नहीं। 'इंडिया टुडे' की पत्रकार वामपंथियों के साथ कानाफूसी और सेटिंग करते देखी गईं। कँवल की थेथरई का आलम ये है कि वो सीधा कह रहे कि वो सवालों के जवाब नहीं देंगे। फ़र्ज़ी स्टिंग को 'पाथ ब्रेकिंग' बताने के पीछे का सच।
“1930 के नाजी जर्मनी और वर्तमान समय के भारत के बीच क्या अंतर है?” 'The Wire' की पत्रकार आरफा खानम शेरवानी ने ट्विटर पर पूछा ये सवाल तो सोशल मीडिया यूजर ने उन्हें ठीक से समझाया, यहाँ पढ़ें कुछ जवाब....
'इंडिया टुडे' की पत्रकार तनुश्री पांडेय वामपंथी छात्रों के साथ खुसुर-पुसुर करते हुए दिखी थीं। उन्होंने छात्रों को सिखाया था कि उन्हें कैमरे के सामने क्या बोलना है? इसी तनुश्री ने नवंबर 2019 में वामपंथियों के साथ मिल कर रिपब्लिक, ज़ी न्यूज़ और सुदर्शन चैनल के पत्रकारों के साथ बदतमीजी की थी।
इस वीडियो में कुछ बातें जो इंडिया टुडे की रिपोर्टर को कहते सुनी जा सकती हैं, उनमें सर्वर और चेहरे पहचाने जाने के बारे में बातें हैं। युवक इंडिया टुडे की रिपोर्टर से कह रहा है कि CCTV चल नहीं रहा था तो चेहरा पहचान नहीं पाए लेकिन वीसी ने तो कहा सर्वर सेम है, और मेल जा रहे थे।
आख़िर क्या कारण था कि एक संस्कृत विभाग में शोध करने वाले नेत्रहीन छात्र के कमरे में ही उग्र भीड़ ने उनकी जम कर पिटाई कर दी। भीड़ में से एक लड़की ने कहा- "मारो साले को" और रॉड लेकर वो पिल पड़े। जेएनयू हिंसा की कहानी, एक पीड़ित नेत्रहीन छात्र की जुबानी।
अप्रैल 29, 2000। जेएनयू की वो कहानी, जो आज तक दबी हुई है। वहाँ हुए पाकिस्तानी मुशायरे में कारगिल युद्ध के दो सैन्य अधिकारियों को सिर्फ़ इसलिए पीटा गया क्योंकि उन्होंने भारत-विरोधी टिप्पणियों पर आपत्ति जताई थी। उस आयोजन में बड़ी रक़म ख़र्च की गई थी।