इस वीडियो में आफरीन फातिमा देश की सर्वोच्च न्यायिक संस्था सुप्रीम कोर्ट और सरकार की मंशा पर सवाल खड़े करते हुए देखी जा रही है। वीडियो में आफरीन फातिमा सुप्रीम कोर्ट द्वारा राम मंदिर और अफजल गुरु की फाँसी के फैसलों पर संदेह जताते हुए...
वास्तविकता आज बुरका पहनकर शाहीन बाग़ में अल्लाह हू अकबर के नारे लगाते हुए पत्रकारों की सामूहिक लिंचिंग कर रही है। सेकुलर शाहीन बाग़ आज ला इलाहा इल्लल्लाह और अल्हम्दुलिल्लाह का स्वर बोल रहा है, और क्योंकि यह स्वर क्रांतिजीवों, JNU-मतावलम्बियों के श्रीमुख से निकला है, इसलिए प्रोग्रेसिव लिबरल भी उनकी हाँ में हाँ मिलाता नजर आ रहा है।
अपनी प्रोफाइल में SFI से ताल्लुक बताने वाला हिमांशु सिंह और अभिराम, अगर कश्मीरी हिन्दुओं के साथ खड़े हैं तो वो फ्री कश्मीर के पोस्ट को ‘दिल’ क्यों दे रहे हैं? अगर वो दीपिका की श्रद्धांजलि सभा में शांति बना कर कुछ मिनट सुन लेते तो क्या वो खड़ा रहना नहीं कहलाता? दरअसल वामपंथी गुंडों का सारा अजेंडा बाहर आ चुका है और...
शाहीन बाग़ में चल रहे CAA-विरोधी प्रदर्शन में आज न्यूज़ नेशन के वरिष्ठ पत्रकार दीपक चौरसिया के साथ वहाँ प्रदर्शन कर रहे गुंडों ने बदसलूकी की। यही नहीं, उनके साथ हाथापाई करने के बाद उनका कैमरा भी तोड़ दिया गया।
जब से क्रांति कुमार उर्फ़ केके दिल्ली के मशहूर 'विष-विद्यालय' से अपनी सदियों से चली आ रही पीएचडी पूरी कर गाँव लौटा था, तब से वो बुझा-बुझा सा रहने लगा था। गाँव में न गंगा ढाबा का सस्ता किन्तु लजीज खाना था, ना ही सस्ते हॉस्टल और ना ही ढपली बजाने के लिए किसी तरह की कोई सब्सिडी।
दीपिका को चुप कराने के लिए जब इस्लामिक नारे लगाए गए, तब वह अपनी सीनियर रहीं आकृति रैना का पत्र पढ़ रही थीं। हिंदू कॉलेज में राजनीति विज्ञान की छात्रा रहीं आकृति ने पत्र में अपने ही परिवार के विस्थापन की कहानी लिखी थी।
जेएनयू ने कहा है कि आरटीआई में एक 'ख़ास जगह' को लेकर जानकारी माँगी गई थी। अब जेएनयू ने इस आरटीआई के जवाब को लेकर स्पष्टीकरण जारी किया है। जेएनयू ने कहा है कि आरटीआई में किसी 'स्पेसिफिक लोकेशन' के लिए जानकारी माँगी गई थी।
केरल के वज़ूर NSS कॉलेज में वामपंथी गुंडागर्दी और आतंक के लिए कुख्यात SFI ने ABVP कार्यकर्ताओं पर कायराना हमला किया है। वामपंथी गुट SFI की निरंतर चली आ रही ऐसी हरकतों की वजह से कैम्पस में लगातार माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है।
कोमल शर्मा का आरोप है कि JNU में हुए हमले को लेकर चैनल ने उन्हें कथित तौर पर एक आरोपित के रूप में पेश करके बदनाम किया है। इसके साथ ही कोमल ने मीडिया संस्थानों और दिल्ली पुलिस को भी पत्र लिखकर इस मामले में ध्यान रखने को कहा है।