रात को करीब 12:30 बजे एक दर्जन से ज्यादा युवक मुन्नूलाल के घर पहुँचे। उनके बेटे सुमित ने जैसे ही दरवाजा खोला युवकों ने हमला बोल दिया। बचाव में आए मुन्नूलाल और उनके छोटे बेटे सचिन को भी युवकों ने पीटा और फरार हो गए।
बंगाल के उपभोक्ता मामलों के मंत्री साधन पांडे ने हत्या के पीछे भाजपा का हाथ बताया। इसके बाद तृणमूल कार्यकर्ताओं ने मनगड़िया की ओर आने वाली सड़कों पर आगजनी की। बराकर बाज़ार बंद करवा दिया।
बच्ची चाचा के घर जाने के बजाए मामा के घर कुर्बानी की कलेजी लेकर पहुँच गई थी, जिससे चाचा नाराज था। पहले उसने उसे डाँटा, फिर मारा और बाद में बोरे में उसका शव भरकर नाले में फेंक आया।
शब्बू के घर के बाहर बिस्किट का रैपर पड़ा था। जिसे देखकर शब्बू और उसकी माँ नसीमा साजिद के भतीजे पर भड़क उठे। जब साजिद की माँ ने इसका विरोध किया तो शब्बू उनके साथ गाली-गलौच पर उतर आया।
बाउंसरों ने न सिर्फ़ विमल के साथ मारपीट की बल्कि 14,600 रुपए भी माँगे। इस घटना में बड़ा मोड़ तब आया जब शनिवार की सुबह वह यमुना पुल पर बेहोशी की हालत में मिला। बाद में उसकी मौत हो गई।
पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस ने बताया कि रात में कुछ बदमाशों ने घर में घुसकर धारदार हथियार से गला रेत कर राकेश सिंह की हत्या कर दी।
पुलिस ने वाराणसी से दबोचे गए बदमाशों के पास से पिस्टल, ज़िंदा कारतूस और तमंचे बरामद किए हैं। बदमाशों ने बताया है कि वे बीजेपी विधायक सुशील सिंह की हत्या की फिराक में थे।
माजिद ने एक सुनसान जगह पर ऑटो रोकी और बुजुर्ग वैज्ञानिक के जेवरात लूट लिए। उसके बाद उसने उनकी गला दबा कर हत्या कर दी। इसके बाद माजिद ने गोविन्दपाल को बुला कर रूप लता की लाश को ठिकाने लगाया।
19 जून की देर रात बच्ची के साथ बलात्कार और फिर उसकी हत्या। 24 जुलाई को कोर्ट में मामले की सुनवाई शुरू हुई। मात्र 6 कामकाजी दिनों (छुट्टियों को छोड़कर) के भीतर गवाहों गवाही ली गई। 8 अगस्त 2019 को दोषी को मौत की सजा सुनाई गई।
इमरान, खालिद और अनवर ने बर्थडे पार्टी को अनुच्छेद 370 से जुड़ा जश्न समझ कर धमकी दी। उसमें कहा कि यहाँ कोई जश्न नहीं होगा। इमरान ने धमकी दी कि यह कश्मीर नहीं पिड़ावा है और यहाँ जश्न नहीं चलेगा।