कश्मीरी पंडितों जितनी ही दर्दनाक कहानी है ब्रू लोगों की। 23 वर्षों तक उनके पास न घर, न जमीन, न चिकित्सा और न ही उनके बच्चों को अभी तक कोई शैक्षिक सुविधा ही प्राप्त हुई। क्यों? क्योंकि ये वैष्णव हिन्दू हैं, अत्यन्त राष्ट्रवादी हैं और इन्हें ईसाई बनना मंजूर नहीं था। लेकिन इन्होंने इसकी भारी कीमत चुकाई।
“ये जो आप देख रहे हैं वो CAA का विरोध नहीं है। इनको दर्द है अनुच्छेद 370 का, इनको दर्द है राम मंदिर का, इनको दर्द है बालाकोट एयरस्ट्राइक का। लेकिन इतना मैं बता दूँ कि 200 रुपए के बिजली बिल के लिए अपने देश को मत नीलाम करो।"
चारों विद्रोही गुटों का नेतृत्व राजन दईमारी, गोविंदा बसुमतारी, धीरेन बोडो और बी सओरिगरा करते रहे हैं। इनके अलावा एक अन्य बोडो संगठन एबीएसयू के अध्यक्ष प्रमोद बोडो और बोडोलैंड टेरीटोरियल कॉउन्सिल के अध्यक्ष हाग्रामा मोहिलारी ने भी इस करार पर साइन किया।
मुख्यमंत्री प्रेमा खांडू ने बयान जारी कर बताया कि क्राइम ब्रांच ईटानगर ने शरजील के ख़िलाफ़ मामल दर्ज किया है। खांडू ने कहा कि इस तरह के भड़काऊ बयान देकर भारत की क्षेत्रीय अखंडता और सम्प्रभुता को खंडित करने का कोई भी प्रयास बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
ये धमाके तब हुए हैं, जब शाहीन बाग़ विरोध-प्रदर्शन के मुख्य साज़िशकर्ता शरजील इमाम ने असम को शेष भारत से काट कर अलग करने की धमकी दी थी। भारत के 'टुकड़े-टुकड़े' करने की बात करते हुए शरजील ने कहा था कि 'चिकेन्स नेक' वाले क्षेत्र को ब्लॉक कर के पूरे उत्तर-पूर्व को शेष भारत से अलग-थलग कर देने का लक्ष्य होना चाहिए।
NRC का जो विरोध है, वो दरअसल प्रदर्शन है संख्या बल का। वो दिखा रहे हैं कि “देखो, जहाँ-जहाँ हमारी संख्या थोड़ी भी अधिक है, वहाँ-वहाँ हम तोड़-फोड़ कर सकते हैं, आग लगा सकते हैं, पुलिसकर्मी को मार सकते हैं।” उनका संदेश स्पष्ट है कि वो अगर संख्या बल में अधिक हैं तो...
कुछ लोग हिंसा भड़का कर नॉर्थ-ईस्ट को जलाना चाहते हैं। हम आपके लिए वो 11 झूठ लेकर आए हैं, जिसका इस्तेमाल कर के CAA को असम सहित अन्य उत्तर-पूर्वी राज्यों के ख़िलाफ़ बताया जा रहा है। 11 झूठ और उन सभी को काटता हुआ सच का पुलिंदा। इसे नोट कर लें।
महाभारत और स्कन्द पुराण के अनुसार घटोत्कच का विवाह भगवान श्री कृष्ण ने अपने हाथों मारे गए प्राज्ञज्योतिषपुर के राजा नरकासुर की बेटी के साथ तय किया था। इसी तरह अर्जुन के वनवास के समय मणिपुर की राजकुमारी चित्रांगदा से विवाह का भी ज़िक्र मिलता है।
त्रिपुरा में फ़िलहाल 4,389 सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल हैं। नाथ ने कहा कि राज्य सरकार के अधीन आने वाले 147 स्कूलों ऐसे हैं जिनमें अधिकतम 10 बच्चे पढ़ते हैं। बाकी 13 बंद पड़े हैं क्योंकि उनमें एक भी बच्चा नहीं पढ़ता।