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North East

हथियार सप्लायर साजिद अली की गिरफ्तारी से पूर्वोत्तर में जिहादी-उग्रवादियों की साँठगाँठ हुई उजागर

भारतीय सेना और असम राइफल्स के जवानों ने असम के डिब्रूगढ़ जिले में NSCN(K) के प्रमुख हथियार सप्लायर साजिद अली को धर-दबोचा।

यू तिरोत सिंह: तीर-भालों और तलवारों से अंग्रेजों की ईंट से ईंट बजाने वाला राजा

सीमित संसाधनों के बावजूद यू तिरोत सिंह चार सालों तक अंग्रेजों से लड़ते रहे। जख्मी होने के बावजूद झुके नहीं।

हथिनी, गाय के बाद अब तेंदुए को मारकर निकाला नाखून और दाँत, लटका कर गाँव में घुमाया: असम में 6 गिरफ्तार

इसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में देख सकते हैं कि लोग किस तरह से तेंदुए को उलटा लटकाकर पूरे इलाके में...

म्यांमार ने भारत को सौंपे नॉर्थ-ईस्ट के 22 उग्रवादी: NSA अजीत डोभाल के प्रयासों ने दिखाया रंग

म्यांमार ने नॉर्थ-ईस्ट के 22 उग्रवादी भारत को सौंपे हैं। NSA अजीत डोभाल के नेतृत्व में संचालित ऑपरेशन के कारण यह मुमकिन हो पाया है।

निजामुद्दीन मरकज़ का असर नॉर्थ इस्ट तक फैला: अरुणाचल में आया पहला मामला, मणिपुर में दूसरे की पुष्टि

कोरोना के कहर से अब तक बचा उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में भी अब कोरोना के मामले लगातार सुनने को मिल रहे हैं। अब वहाँ कोरोना संक्रमण के पॉजिटिव केसों की पुष्टि हो रही है। मणिपुर में कोरोना वायरस के दूसरे मामले की पुष्टि हुई है।

जिसे हर सरकार ने नकारा, उस पूर्वोत्तर में खोले विकास के नए द्वार: एक्ट ईस्ट पॉलिसी का दिखने लगा असर

उत्तर-पूर्व के रहवासियों की समृद्धि भारत के विकास की धुरी है। यह भारत की एकता, अखण्डता, शांति और सुरक्षा की आधारशिला है। विगत कुछ वर्षों से पूर्वोत्तर में बुनियादी अवसंरचना, समावेशी विकास और शान्ति-वार्ता के स्तर पर तीव्र परिवर्तन दिखाई दे रहा है।

असम के ‘फॉरेस्ट मैन ऑफ इंडिया’ जादव पायेंग कॉमनवेल्थ के ‘पॉइंट्स ऑफ़ लाइट’ अवार्ड से सम्मानित

जादव मोलाई पायेंग एक पर्यावरणविद और जोरहाट के वानिकी कार्यकर्ता हैं, जिन्हें लोकप्रिय नाम 'फ़ॉरेस्ट मैन ऑफ इंडिया' से भी जाना जाता है। कई दशकों के दौरान, उन्होंने ब्रह्मपुत्र नदी के एक सैंडबार पर पेड़ लगाए और उन्हें जंगल में बदल दिया। इन्होंने अपनी मेहनत और दृढ़ इच्छाशक्ति से केवल मिट्टी और कीचड़ से भरी जमीन को फिर से हरा-भरा कर दिया।

भारत अद्भुत है, अफ्रीका को इससे सीखना चाहिए: नॉर्थ-ईस्ट का दौरा कर चकित हुए केविन पीटरसन

केविन पीटरसन असम के काजीरंगा नेशनल पार्क भी पहुँचे। वहाँ पर गैंडों की संख्या को देखते हुए उन्होंने इसे 'वन हॉर्न नेशन' कहा। उन्होंने लिखा कि ये भारत अद्भुत है। पीटरसन ने कहा कि पिछले 15 वर्षों में उन्हें इस देश ने काफ़ी कुछ दिया है।

वेद-रामायण-महाभारत के भारतीय परम्पराओं वाले उत्तर-पूर्व को अंग्रेजों ने कैसे बनाया बर्बर और क्रूर

अंग्रेजों की औपनिवेशिक, विभाजनकारी तथा जनजातीय नीतियों और ईसाई शिक्षा ने यह गढ़ा कि इस क्षेत्र की सभी जनजातियाँ मंगोल हैं, क्रूर, जंगली तथा हिंसक हैं। परन्तु उनमें प्रचलित अनेक रीतियाँ, लोक-मान्यताएँ, जीवन-मूल्य तथा परम्पराएँ शेष भारत की परम्पराओं से लेशमात्र भी अलग नहीं हैं। इसका उल्लेख वेदों से लेकर महाभारत और रामायण तक में...

ईसाई नहीं बनने की सजा… 34000 वैष्णव हिंदुओं को अपने ही देश में 23 साल रहना पड़ा शरणार्थी बन कर!

कश्मीरी पंडितों जितनी ही दर्दनाक कहानी है ब्रू लोगों की। 23 वर्षों तक उनके पास न घर, न जमीन, न चिकित्सा और न ही उनके बच्चों को अभी तक कोई शैक्षिक सुविधा ही प्राप्त हुई। क्यों? क्योंकि ये वैष्णव हिन्दू हैं, अत्यन्त राष्ट्रवादी हैं और इन्हें ईसाई बनना मंजूर नहीं था। लेकिन इन्होंने इसकी भारी कीमत चुकाई।

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