केंद्र सरकार ने खतरे का आकलन करने के बाद पाया कि गाँधी परिवार को किसी तरह का सीधा खतरा नहीं है। बता दें कि राजीव गाँधी की 1991 में हत्या के बाद फैसला किया गया था कि पूर्व प्रधानमंत्रियों को भी एसपीजी सुरक्षा प्रदान की जाएगी।
"कॉन्ग्रेस पार्टी भले ही दस साल आगे की सोच रखने का दावा करती हो मगर सच्चाई यह है कि इस पार्टी के लोग अगले दस मिनट में क्या कर डालेंगे, इसका किसी को कोई अंदाज़ा नहीं। हकीकत यह है कि आप आने वाले समय में एक वेब सीरीज बना सकते हैं कि कैसे कॉन्ग्रेस पार्टी जनता से दूर होती चली गई।"
रीजनल कंप्रेहेंसिव इकनॉमिक पार्टनरशिप (आरसीईपी) और फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स (एफटीए) पर सोनिया के बयान को केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने मनमोहन सिंह का अपमान बताया है। साथ ही उन्होंने पूछा है कि क्या इसका जवाब पूर्व प्रधानमंत्री देंगे।
राहुल के विदेश दौरे को आध्यात्म से जोड़ सुरजेवाला ने सोशल मीडिया में खुद के साथ अपने नेता की भी भद पिटवा ली। किसी ने पूछा आध्यात्म के लिए बैंकॉक कौन जाता है? एक ने तो उन्हें राहुल की आया भी बता दिया।
कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गॉंधी की इस महीने यह दूसरी विदेश यात्रा है। महाराष्ट्र और हरियाणा के विधानसभा चुनावों से ठीक पहले वे बैंकॉक गए थे। इसको लेकर उनकी खासी आलोचना हुई थी।
1996 और 2005 का हरियाणा विधानसभा चुनाव - दोनों बार ओम प्रकाश चौटाला हार गए। दिलचस्प कि दोनों बार चौटाला बतौर मुख्यमंत्री चुनाव लड़ रहे थे। आखिर दोनों उन्हें हराया किसने - रणदीप सुरजेवाला ने। लोग उन्हें जाइंट किलर कहने लगे। लेकिन फिर वो राहुल गाँधी के करीबी हुए और इतिहास गवाह है कि...
पिछले 10-15 सालों में जनता ने इस बात को बखूबी समझा है कि कॉन्ग्रेस पार्टी में सत्ता-सुख की लालसा रखने वाला केन्द्रीय नेतृत्व यानी गाँधी परिवार पर गाहे-बेगाहे भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहते हैं। आरोप लगने से लेकर इसकी सच्चाई आने तक जनता एक मतदाता के रूप में अपना काम कर चुकी होती है। क्यों, क्योंकि खून-पसीना एक कर टैक्स भरने वाली जनता और करे तो क्या करे?
महाराष्ट्र और हरियाणा के चुनावी नतीजों में कुछ भी अप्रत्याशित नहीं है। गॉंधी परिवार प्रचार से दूर रहा। राहुल कम बोले। इसका असर दिखना लाजिमी था। सो, भाजपा की सीटें दोनों जगह घट गईं।
अर्थशास्त्री बनर्जी ने कॉन्ग्रेस को झटका देते हुए कहा है कि वो नहीं मानते हैं कि 'न्याय योजना' एक अच्छी तरह तैयार की गई योजना थी। साथ ही उन्होंने इस योजना की रूपरेखा तैयार करने के लिए ख़ुद को ज़िम्मेदार बताने से भी इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि इसे लागू करने के लिए इनकम टैक्स बढ़ाना होता।
कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने हरियाणा चुनाव से हाथ खींच लिए हैं, इस चुनावी माहौल में हरियाणा के महेंद्रगढ़ में अपनी पहली चुनावी रैली से ठीक पहले ही आखिरी वक़्त पर जनसभा को संबोधित करने नहीं पहुँचीं।