लोकतंत्र की दुहाई देकर राहुल गॉंधी के लिए पहली कतार में सीट मॉंगने का कोई मौका जाया नहीं करने वाली कॉन्ग्रेस के निशाने पर अब लोकतांत्रिक मूल्य हैं। स्वतंत्रता दिवस के जश्न के मौके पर लाल किले से सोनिया-राहुल का गायब रहना और प्रणब मुखर्जी को भारत रत्न से नवाजे जाने के समारोह से उनकी दूरी बानगी भर।
सत्य पाल मलिक ने आरोप लगाया कि अपने साथ प्रतिनिधिमंडल लाकर राहुल गाँधी मामले का राजनीतिकरण कर रहे हैं। यही नहीं, उन्होंने इससे घाटी में उपद्रव फैलने और आम लोगों के लिए दिक्कतें खड़ी होने की आशंका भी जताई।
राज्यपाल मलिक ने कहा कि मुठ्ठी भर लोग माहौल ख़राब करने में लगे हैं। उन्होंने कहा, “मैंने राहुल गाँधी को यहाँ आने का न्योता दिया है। मैंने उनसे कहा है कि मैं आपके लिए विमान भेजूँगा ताकि आप स्थिति का जायजा लीजिए और तब बोलिए। आप एक जिम्मेदार व्यक्ति हैं और आपको ऐसे बात नहीं करनी चाहिए।
राहुल ने बरसों पहले कहा था, "कॉन्ग्रेस एक परिवार है जिसमें तेजी से बदलाव की जरूरत है। सोच-समझकर, प्यार से और सबकी सुनकर बदलाव करना है।" इसलिए राहुल का उत्तराधिकारी चुनने के लिए कॉन्ग्रेसियों ने तेजी से बदलाव करते हुए उनकी मॉं को चुन लिया है।
कॉन्ग्रेस के भीतर कुछ लोगों का मानना है कि पार्टी अध्यक्ष के रूप में अगर कोई ग़ैर-गाँधी पद पर आसीन होगा तो पार्टी टूट जाएगी। बता दें कि पार्टी के अध्यक्ष पद के लिए ज्योतिरादित्य सिंधिया, सचिन पायलट और मिलिंद देवड़ा जैसे नाम भी इस दौड़ में शामिल थे।
देश की सबसे पुरानी पार्टी में अध्यक्ष पद पर इतनी माथापच्ची तब हो रही है जब राहुल गॉंधी ने लोकसभा चुनाव के नतीजों के तत्काल बाद इस्तीफे की पेशकश कर दी थी। मान-मनौव्वल से भी वे नहीं माने और तीन जुलाई को अपना इस्तीफा सार्वजनिक कर दिया। इसके बाद वयोवृद्ध मोतीलाल वोरा को अंतरिम अध्यक्ष बनाने की खबर आई जिसे वोरा ने खुद नकार दिया।
राहुल गाँधी ने प्रणब मुखर्जी को बधाई देने के लिए यहाँ तक कि एक ट्वीट भी नहीं किया है। हाल ही में एनडीटीवी के पत्रकार रवीश कुमार को मैगसेसे अवॉर्ड मिला था, तब राहुल ने उन्हें ट्वीट कर बधाई दी थी।
“जम्मू-कश्मीर को 2 हिस्सों में बाँटकर, जनता के द्वारा चुने हुए प्रतिनिधियों को जेल में डालकर और संविधान का उल्लंघन करके देश को एकजुट नहीं रखा जा सकता। देश उसकी जनता से बनता है न कि जमीन के टुकड़ों से। सरकार द्वारा शक्तियों का दुरुपयोग राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंंभीर खतरा साबित हो सकता है।”
विपक्ष की पहली कतार में मुलायम सिंह यादव, सोनिया गाँधी, सुदीप बंदोपाध्याय और माहताब जैसे नेताओं को जगह मिली है। दूसरी कतार में फारूक़ अब्दुल्ला, सुप्रिया सुले, अखिलेश यादव, व अन्य नेता नजर आएँगे।
बकौल राहुल उनका पारिवारिक उपनाम मालवीय था। बीएसएफ में कार्यरत उनके पिता को अच्छे आचरण की वजह से साथी 'गाँधी' कहकर पुकारते थे। बाद में पिता ने इसे ही उपनाम बना लिया और इस तरह राहुल मालवीय से गॉंधी हो गए।