"अगर सरकार हमें जमीन देती है तो हम वहाँ पर स्कूल या फिर अस्पताल बनवाएँगे। कोर्ट के फैसले के बाद दोनों समुदाय के बीच पैदा हुई नफरत खत्म हो गई हैं। इसलिए अब वे नहीं चाहते कि हिंदुस्तान में माहौल में बिगड़े। मोदी और योगी सरकार में अमन शांति है..."
राज्यपाल को समर्थन से जुड़े अपेक्षित पत्र को न दिखा पाने की स्थिति में उन्होंने तीसरी सबसे बड़ी पार्टी NCP के प्रमुख शरद पवार को राज्य में सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया। लेकिन, इसकी भी संभावना नहीं है कि NCP सरकार बनाने में...
ख़ुर्शीद ने एक लेख में कहा है कि सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला 'हिन्दू राष्ट्र' को ख़ारिज करता है। अदालत ने फैसले में कहा है कि वहाँ मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाने की बात एएसआई की रिपोर्ट साबित नहीं कर पाई।
"अगर सरकार जमीन देना चाहती है तो हमें हमारी सुविधा के हिसाब से मिलनी चाहिए। आवंटित जमीन 67 एकड़ जमीन में से ही होनी चाहिए। तभी हम यह जमीन लेंगे। नहीं तो हम जमीन लेने की पेशकश को ठुकरा देंगे।"
बाबर के आक्रमण से वर्षों पहले भी अयोध्या एक तीर्थस्थल था और वहाँ पूजा-पाठ होते थे। यह कैसे साबित हुआ? यह साबित हुआ सिखों के पवित्र साहित्य 'जन्म साखी' से। मतलब जन्मभूमि से भारत के लोगों की भावनाएँ जुड़ी थीं, सिर्फ़ हिन्दुओं की नहीं।
"पूरा भारत, चाहे वह हिंदू हो या मुस्लिमों ने खुले दिल से निर्णय को स्वीकार किया। लेकिन ओवैसी एक अलग ही राग अलाप रहे हैं। वह फैसले को खैरात कह रहे हैं। इस तरह के बयानों से आप हिंदू और मुस्लिमों को एक-दूसरे से लड़वाते हैं।"
"सीजेआई रंजन गोगोई ने मिशन असंभव को संभव बना दिया हैं। उनके नेतृत्व में ये हुआ। जिसकी झलक अयोध्या विवाद पर फैसले में पूरी तरह दिखी। आज भारत माता CJI गोगोई को आशीर्वाद दे रही होंगी।"
आरोपित को उसी जगह से गिरफ़्तार किया गया था, जहाँ से उसने घाट को बम से उड़ाने की धमकी दी थी। उत्तराखंड पुलिस ने कहा है कि जाँच जारी है। धमकी भरे कॉल के बाद, इलाके की सुरक्षा बढ़ा दी गई है।
यह दूसरा मजहब यदि सचमुच सहिष्णु है तो तत्काल कम से कम काशी और मथुरा के मंदिरों को खुद खाली करे और हिंदुओं के साथ वहाँ भव्य मंदिर बनवाए। बाकी, 30 हज़ार मंदिरों की तो बात भी नहीं हुई है….
असदुद्दीन ओवैसी ने हैदराबाद में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि यदि बाबरी मस्जिद अवैध थी, तो इसे ढहाने को लेकर लालकृष्ण आडवाणी पर मुकदमा क्यों चल रहा है और अगर यह वैध थी, तो आडवाणी को जमीन क्यों दी जा रही है?