अरुण ने लिखा, “मैं तुझसे वादा करता हूँ एहसान फरामोश नारायण राणे कि तेरे मरने के बाद काशी में तेरी अस्थियाँ विसर्जित नहीं करने दूँगा। तेरी आत्मा सदियों तक भटकते रहेगी।”
इसके तहत भारत सहित दुनिया भर के छात्रों को सनातन हिन्दू धर्म की पुरातन विद्या, परंपरा, युद्ध कौशल और धर्म-विज्ञान, वैदिक परंपरा में पारंगत किया जाएगा। 2 साल के इस कोर्स के लिए 40 सीटें निर्धारित हैं।
काशी की महाशिवरात्रि, रंगभरी एकादशी, चिता भस्म की होली के बाद एक और ऐसी प्राचीन परंपरा जो अपने आप में अनूठी है वह है मणिकर्णिका घाट महाश्मशान में बाबा मसाननाथ के दर पर नगरवधुओं का नृत्य।