"आज सारे कॉन्ग्रेसी पूरे देश में सीएए का विरोध कर रहे हैं। केंद्र ने जो किया, गाँधी जी भी ऐसा ही चाहते थे। राहुल बाबा, आप गाँधी जी की भी नहीं सुनोगे। गाँधी जी ने आश्वासन दिया था कि पाक से भगाए गए लोग यहाँ आएँगे तो उन्हें नागरिकता मिलेगी।"
"सीएए और एनआरसी को अलग-अलग देखने की जरूरत है। पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान के दुखी लोगों को यदि भारत में सुविधाएँ मिलती हैं तो इसमें बुराई क्या है।"
देश में बलात्कार की कुल 33,356 घटनाएँ दर्ज की गई। इनमें से करीब 16 फीसदी मध्य प्रदेश में हुई। राज्य में बलात्कार का शिकार होने वाली लड़कियों में 2,841 की उम्र 18 साल से कम थी।
भगवा आतंकवाद की थ्योरी गढ़ने वाले दिग्विजय सिंह विवादित टिप्पणियों को लेकर खासे मशहूर रहे हैं। पिछले दिनों उन्होंने कहा था कि भाजपा के लोग आईएसआई के लिए जासूसी करते हैं। उन्होंने भगवा पहनकर बलात्कार किए जाने की बात भी कही थी।
तिरंगा यात्रा में 'भारत माता की जय' के नारे लग रहे थे। एक और बात जानने लायक है कि जिस कुरैशी मोहल्ले में पत्थरबाजी और हमला हुआ है, उसी जगह पर एक वर्ष पूर्व भी ऐसी घटना हुई थी। उस दौरान राजपूत समाज के एक समारोह पर हमला किया गया था।
यूनिवर्सिटी ने मंडल का पक्ष जानने के लिए उनके पास कई स्पीड पोस्ट व ईमेल भेजे लेकिन उनकी तरफ़ से कोई जवाब नहीं आया। मंडल ने एक बार भी जवाब देना ज़रूरी नहीं समझा। इसीलिए, अब निर्णय लिया गया है कि उन्हें भविष्य में लेक्चर के लिए आमंत्रित नहीं किया जाएगा।
अतिथि विद्वान 28 दिन से धरने पर हैं। कफन ओढ़कर प्रदर्शन कर चुके हैं। खून से दीया जला चुके हैं। शहर की सड़कों पर शू पॉलिश कर विरोध जता चुके हैं। लेकिन, कमलनाथ कैबिनेट का मतभेद है कि मिटता नहीं।
सेवादल की बैठक में कॉन्ग्रेस ने सावरकर पर विवादित पुस्तिका बॉंटी है। इसमें दावा किया गया है कि सावरकर ने 12 साल की उम्र में एक मस्जिद पर पथराव किया। अल्पसंख्यक महिलाओं के साथ बलात्कार करने के लिए हिंदुओं को प्रोत्साहित किया।
कॉन्ग्रेस चाह कर भी नेहरू-गाँधी से ऊपर नहीं उठ पा रही। स्टेडियम, हॉस्टल, अस्पताल, सरकारी योजनाओं में इनके नाम के राजनीतिक इस्तेमाल के बाद अब जनता पर इनको थोपने की योजना। कमलनाथ सरकार ने MPPSC के परीक्षा पाठ्यक्रम में बदलाव करते हुए इसमें भी नेहरू को घुसा दिया।
पद यात्रा, मुंडन, धरना-प्रदर्शन के बाद ही शुरू हो पाई नियुक्ति प्रक्रिया। फिर भी मेरिट लिस्ट में आईं आरक्षित वर्ग की महिलाओं को नहीं दिया नियुक्ति पत्र। अतिथि विद्वान भी भविष्य को लेकर सशंकित।