कल को हो सकता है कि कोई उसके समुदाय के बारे में लिख दे। इस तरह से तो सभी आपस में जाति को लेकर लड़ बैठेंगे। उन्होंने 'ये मेरा भारत नहीं' वाले गैंग पर निशाना साधते हुए कहा कि वो लोग देश तो नहीं छोड़ेंगे लेकिन यहाँ रह कर आपस में लड़ते-लड़ाते ज़रूर रहेंगे।
छात्रों ने सिक्योरिटी गार्ड को भी धमकी दी। जब गार्ड ने छात्रों के बात करने के रवैये पर ऐतराज जताया तो एक छात्रा ने उसे चुप रहने की हिदायत देते हुए कहा कि सिक्योरिटी गार्ड बात नहीं करेगा। छात्रों ने लैब के एंट्रेंस पर पोस्टर भी चिपका रखे थे।
प्रोफेसरों ने छात्रों से कहा कि जो हो रहा है उसे होने दो और जैसा विश्वविद्यालय प्रशासन चाहता है, वैसा करो। प्रोफेसरों ने धमकी देते हुए कहा- "हम लोग तो बाहर बैठे रहेंगे फिर भी हमें रुपए मिलते रहेंगे, तुमलोग अपना सोचो। करियर चौपट कर दिया जाएगा तुम सबका।"
वीसी का पुतला-दहन करने वाले छात्रों ने आरोप लगाया कि कई अन्य विभागों में इसी तरह अयोग्य नियुक्तियाँ की गई हैं, जिनकी जाँच होनी चाहिए। उनका आरोप था कि फ़िरोज़ ख़ान की नियुक्ति की आड़ में वीसी अन्य अयोग्य नियुक्तियों को दबाने का प्रयास कर रहे हैं।
"माता-पिता को पहले कई बार चेतावनी दी गई थी जब बच्चे ऐसे कपड़े पहन रहे थे, जो हमारे ड्रेस कोड में नहीं है। कुछ स्टूडेंट्स ने लेगिंग्स पहनी हुई थी। हमारे स्कूल में एक ड्रेस कोड है और कुछ स्टूडेंट्स ने ऐसे कपड़े पहने जो स्कूल ड्रेस कोड का उल्लंघन करते हैं।"
इशारा साफ़ था, हमारी हैसियत बन्दूक खरीदने की है, हमने चाहा तो पत्रकारों को मार देंगे। इससे पहले भी लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की आज़ादी की दुहाई देने वाले जेएनयू के छात्रों ने रिपब्लिक भारत के मीडियाकर्मियों से काफी बदतमीजी की थी।
छात्रों की संख्या लगभग 8,000 है। कुल ख़र्च 556 करोड़ है। कैलकुलेट करने पर पता चलता है कि जेएनयू हर एक छात्र पर सालाना 6.95 लाख रुपए ख़र्च करता है। क्या इसके कुछ सार्थक परिणाम निकल कर आते हैं? ये जानने के लिए रिसर्च और प्लेसमेंट के आँकड़ों पर गौर कीजिए।
सामान्य जन को JNU के नाम पर न तो समर्थन और न ही विरोध में हाइप क्रिएट करना चाहिए। JNU वो नहीं रहा जिसके लिए उसे 1969 में बनाया गया था। इससे खुद को दूर रखें, आसपास की बेहतरी को देखें तो हमारे आपके अलावा देश के लिए भी बेहतर होगा।
शिक्षकों के प्रति मध्य-प्रदेश सरकार के उदासीन रवैये के खिलाफ लम्बे समय से वहाँ के शिक्षक अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं। 5 सितम्बर को भी कई शिक्षक अपना विरोध जताने के लिए भोपाल में इकठ्ठा हुए थे।