“हमारा अनुरोध है कि क्योंकि उन्होंने (वकार अहमद) खुद को मानसिक रूप से अयोग्य और अक्षम साबित कर दिया है, तो उन्हें तुरंत काम करने से रोका जाना चाहिए। हम सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों से अनुरोध करते हैं कि वे उन्हें किसी भी प्रशासनिक या न्यायिक कार्य करने से रोकें। वह 'मानसिक रूप से अस्वस्थ' हैं।”
सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व पाक सेनाध्यक्ष जनरल मुशर्रफ को भगोड़ा बताते हुए कहा कि उसे सज़ा देना मुश्किल है क्योंकि वो भी काफ़ी ताक़तवर है। 167 पेज के फ़ैसले को कोर्ट ने लिखा है कि मुशर्रफ ने हमेशा अपनी बीमारी और सुरक्षा का हवाला देते हुए कोर्ट की कार्यवाही में हिस्सा नहीं लिया।
"दास्तान लाइव रॉक बैंड के समूह ने अपमानजनक (गालियाँ) शब्दों के साथ "ओम" का उच्चारण किया। इसके अलावा, उन्होंने जानबूझकर हिंदू धर्म के लोगों की भावनाओं को आहत किया और सेरेंडिपिटी आर्ट्स फेस्टिवल 2019 के मंच का दुरुपयोग किया।"
सीजेआई ने पूछा कि अगर छात्र पत्थरबाजी करते हैं तो क्या उनके ख़िलाफ़ FIR नहीं होगी? छात्र अगर इस तरह की हरकत करेंगे तो पुलिस क्या करेगी? साथ ही जामिया के छात्रों के वकील को फटकार लगाते हुए कहा कि आपको फैक्ट्स पता होने चाहिए।
"छात्र होने का मतलब यह नहीं है कि वे कानून-व्यवस्था अपने हाथ में ले सकते हैं। हम शांतिपूर्ण प्रदर्शन और अधिकारों के खिलाफ नहीं हैं। लेकिन सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान नहीं पहुॅंचाया जा सकता। ऐसे हालात में पुलिस को कदम उठाना ही होगा।"
अक्टूबर, नवंबर, दिसंबर... एक ही झूठ बार-बार। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर J&K हाई कोर्ट के जजों ने जॉंच कर खोल दी पोल। अब सिद्धार्थ वरदराजन को बताना चाहिए जेलों में बंद करीब 150 नाबालिग कहाँ गए? या फिर पाकिस्तान से हुई किस 'डील' के तहत यह झूठ फैलाया गया।
लोकसभा के बाद बुधवार (11 दिसंबर) को राज्यसभा में लंबी बहस के बाद नागरिकता संशोधन विधेयक 2019 पास हो गया है। इस विधेयक की वोटिंग में कुछ 230 वोट पड़े। जिसमें विधेयक के पक्ष में 125 और विरोध में 105 वोट पड़े थे।
राम जन्मभूमि मंदिर में विघ्न डालने के आज आखिरी दरवाजे भी सुप्रीम कोर्ट ने बंद कर दिए हैं। जमीयत उलेमा ए हिन्द, मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के इशारे पर याचिका डालने वालों, इरफ़ान हबीब-प्रशांत भूषण के लिबरल गिरोह समेत 18 याचिकाएँ सुप्रीम कोर्ट की नई संविधान पीठ ने ख़ारिज कर दी हैं।
याचिका में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को एक आस्था को तरजीह देना वाला बताया गया है। कहा गया है कि हिन्दू पक्ष को जन्मभूमि की ज़मीन देने का आधार केवल आस्था को माना गया है। मस्जिद के पक्ष में पुरातात्विक साक्ष्यों को नज़रंदाज़ कर दिया गया।