ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की ओर से दाखिल अपनी याचिका में यह भी कहा गया कि धार्मिक प्रथा को चुनौती देने वाली जनहित याचिका उस व्यक्ति द्वारा दायर नहीं की जा सकती, जो उस धार्मिक संप्रदाय का हिस्सा नहीं है।
इस वीडियो में आफरीन फातिमा देश की सर्वोच्च न्यायिक संस्था सुप्रीम कोर्ट और सरकार की मंशा पर सवाल खड़े करते हुए देखी जा रही है। वीडियो में आफरीन फातिमा सुप्रीम कोर्ट द्वारा राम मंदिर और अफजल गुरु की फाँसी के फैसलों पर संदेह जताते हुए...
छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल ने मीसा पेंशन को यह कहते हुए बंद कर दिया कि ये स्वतंत्रता सेनानी हैं, तो फिर पेंशन क्यों दिया जाए, जिसे लेकर बीजेपी ने राज्य सरकार के फैसले के ख़िलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की बात कही है।
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की वकील को हडकाते हुए ये भी कहा कि वे सुप्रीम कोर्ट का कोई फैसला दिखाएँ, जिसमें जेल के अच्छे आचरण के कारण फाँसी की सज़ा को कम किया गया हो।
अटॉर्नी जनरल ने पीठ के सामने एक-एक कर ऐतिहासिक घटनाक्रम का ब्योरा दिया। साथ ही कश्मीर का भारत में विलय और जम्मू कश्मीर संविधान सभा के गठन के बारे में विस्तार से बताया।
"वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह ने जिस तरह से मुझसे सवाल किया। ये मानव अधिकारों के नाम पर समाज को धोखा देना है। बच्चियों के साथ हो रहे अपराधों का मज़ाक बनाना है। ये मानव अधिकारों के नाम पर बिज़नेस चलाते हैं और सिर्फ़ और सिर्फ़ मुजरिमों को सपोर्ट करते हैं।"
"भारत माता से आज़ादी, कश्मीर से आज़ादी एक तरह के अलगाववादी नारे हैं, जिनकी CAA के ख़िलाफ़ प्रदर्शन में कोई जगह नहीं होनी चाहिए। इस तरह के नारे देश पर सवाल खड़े करते हैं और CAA के ख़िलाफ़ चल रहे मज़बूत आंदोलन को कमज़ोर करने का काम करते।"
कपिल सिब्बल ने सुनवाई पूरी नहीं होने तक इस को निलंबित करने की मॉंग की। साथ ही कहा कि सुनवाई के लिए संविधान पीठ का गठन होना चाहिए। चीफ जस्टिस की अगुआई वाली पीठ ने कहा कि केंद्र की पूरी बात सुने बिना वे एकतरफा आदेश नहीं दे सकते हैं।
सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ वकील हैं इंदिरा जय सिंह। उन्होंने निर्भया की माँ को सलाह दिया कि वो सोनिया गाँधी का अनुसरण करें। उन्होंने अपने पति के हत्यारों के लिए मौत की सज़ा नहीं माँगी। ठीक उसी तरह से निर्भया की माँ भी सब कुछ भुलाकर अपनी बेटी के बलात्कारियों को माफ कर दें।
अब्दुल्ला आजम स्वार से 2017 में विधायक चुने गए थे। बीते साल हाईकोर्ट ने उनके निर्वाचन को रद्द कर दिया था। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई 25 मार्च को होगी।