Thursday, April 9, 2026
Homeरिपोर्टअंतरराष्ट्रीयचीन की कम्युनिस्ट सरकार ने कब्रिस्तानों को लेकर बनाए नए नियम, यहाँ 'दफनाना' बहुत...

चीन की कम्युनिस्ट सरकार ने कब्रिस्तानों को लेकर बनाए नए नियम, यहाँ ‘दफनाना’ बहुत महँगा: जानें- क्या हैं ‘बोन एश अपार्टमेंट’, जिन पर लगा बैन

चीन के कई रिहायशी इलाकों में छोटे छोटे फ्लैट्स हैं, जहाँ अंतिम संस्कार के लिए रखी गई अस्थियाँ और कब्र मिले हैं। इन घरों की खिड़कियाँ और दरवाजे बंद हैं। खिड़कियों में पर्दे लगे मिले, ताकि कोई अंदर का दृश्य नहीं दिख सके। फिर भी पड़ोसियों ने जब मेहनत कर अंदर झाँका तो नजारा काफी डरावना लगा। कमरे में मोमबत्तियाँ जल रही थी। काली फोटो के सामने एक ताबूत रखा हुआ था। इसमें हड्डियाँ थी। कब्रिस्तान के खर्च से बचने के लिए खाली फ्लैट्स को 'हड्डियों वाला घर' बना दिया गया था।

दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश चीन इनदिनों एक अलग तरह की समस्या से जूझ रहा है। यहाँ अंतिम संस्कार के लिए कब्रिस्तान की भारी कमी हो गई है। हालात यह है कि घर सस्ते हैं, लेकिन कब्रिस्तान में जगह मिलना कई गुणा महँगा।

नतीजा यह है कि चीनी छोटे-छोटे फ्लैट खरीद कर उन्हें मुर्दे रखने की जगह में तब्दील कर रहे हैं। इस पर अंकुश लगाने के लिए चीन ने 30 मार्च को नया कानून लागू किया है। इसके तहत रिहायशी इलाकों के घरों में मुर्दों को या उनकी अस्थियों को रखना गैरकानूनी करार दिया गया है।

रिहायशी इलाकों में बना ‘बोन एश अपार्टमेंट’

चीन के कई रिहायशी इलाकों में छोटे छोटे फ्लैट्स मिले हैं, जहाँ अंतिम संस्कार के लिए रखी गई अस्थियाँ और कब्र मिले हैं। इन घरों की खिड़कियाँ और दरवाजे बंद हैं। खिड़कियों में पर्दे लगे मिले, ताकि कोई अंदर का दृश्य नहीं दिख सके। फिर भी पड़ोसियों ने जब मेहनत कर अंदर झाँका तो नजारा काफी डरावना लगा। कमरे में मोमबत्तियाँ जल रही थी। काली फोटो के सामने एक ताबूत रखा हुआ था। इसमें हड्डियाँ थी। कब्रिस्तान के खर्च से बचने के लिए खाली फ्लैट्स को ‘हड्डियों वाला घर’ बना दिया गया था।

चीन में मुर्दों पर महँगाई की मार

शंघाई जैसे बड़े शहर में भी रियल स्टेट की कीमत गिरी है, लेकिन कब्रिस्तान में जगह कई गुणा ज्यादा महँगा हो गया है। एक रिपोर्ट के मुताबिक,2020 में एक व्यक्ति के अंतिम संस्कार का खर्च औसत सैलरी वाले व्यक्ति के 6 महीने की कमाई के बराबर थी। आखिर आम आदमी इसे कैसे वहन करे। इसलिए शहर से बाहर बने सस्ते फ्लैट्स को मुर्दों के ताबूत को रखने के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं।

क्या है नया नियम

चीन के अंतिम संस्कार से जुड़े नए नियम में साफ किया गया है कि इंसानी अवशेषों या मुर्दों को सिर्फ तय सरकारी कब्रिस्तानों पर ही दफनाया जा सकता है। अब फ्लैट या किसी भी दूसरे घरों को ताबूत रखने या अस्थियों को रखने के लिए बिल्कुल इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।

अंतिम संस्कार के नए नियम के मुताबिक, अंतिम संस्कार को एक सामाजिक कार्य के तौर पर परिभाषित किया गया है। बेसिक और सप्लीमेंट्री, दोनों सर्विसेज के लिए एक ‘टू-टियर कैटलॉग’ सिस्टम शुरू करने की बात कही गई है। नए नियमों के कैटलॉग में जरूरी चीजों की फीस लिखी गई है। इसके अलावा किसी भी एक्स्ट्रा आइटम या फीस लेने पर रोक है। इसमें किसी भी कमर्शियल कब्रिस्तान की मनाही है। नए नियम में जिंदगी का आखिरी सफर इज्जतदार और सही तरीके से हो, इस पर ध्यान दिया गया है।

दरअसल चीन में जन्मदर काफी घट गया है और यह बुजुर्गों का देश बन गया है। इसलिए मौतों की संख्या भी काफी बढ़ गई है। ऐसी स्थिति में कब्रिस्तान में जगह कम पड़ गए हैं। इसलिए डिमांड ज्यादा है। कीमतों पर कंट्रोल करने के लिए सरकार ने नए नियम बनाए हैं। चीनी अधिकारियों ने रेजिडेंशियल फ्लैट के अंदर दाह संस्कार की राख रखने पर बैन लगा दिया है, क्योंकि दफ़नाने के बढ़ते खर्च की वजह से कुछ परिवारों को दूसरे इंतज़ाम करने पड़े हैं।

चीनी समाज में सही तरीके से दफनाना एक जरूरी जिम्मेदारी मानी जाती है। यह पुरखों के प्रति सम्मान दिखाता है और कल्चरल वैल्यू से भी जुड़ा है। हालाँकि तेजी से हो रहे शहरी विकास और बढ़ती बुज़ुर्ग आबादी की वजह से मौजूद जमीन पर दबाव बढ़ गया है, जिससे चीनी समाज जूझ रहा है।

अब जमीन पर पेड़ों के नीचे और समुद्र में दफनाने को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 6 फीसदी से ज्यादा अंतिम संस्कार इस तरीके से हो रहा है।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

TOI ने मोदी सरकार के असली बयान से की छेड़छाड़, ईरान-अमेरिका सीजफायर की खबर में जबरन घुसाया ‘पाकिस्तान’ का नाम: पढ़िए कैसे किया खेल

अमेरिका-ईरान के बीच सीजफायर का भारत ने खुले दिल से स्वागत किया। लेकिन TOI ने अपनी रिपोर्ट में भारत की कूटनीति से ज्यादा पाकिस्तान की वकालत की।

गौरव गोगोई ने इंटरनेट पर मौजूद खाली घरों की तस्वीरों को ‘चुराया’, कहा- इसे मेरे दोस्त ने दुबई से भेजा: नेटीजन्स भड़के, पूछा- क्या...

गौरव गोगोई ने फिर झूठे दावे कर फेक फोटो साझा की। उन्होंने कहा कि ये तस्वीर दुबई से दोस्त ने भेजी, लेकिन असलियत में यह Google से चुराई गई हैं।
- विज्ञापन -