2009 की फिल्म 3 इडियट्स का मशहूर गाना “बहती हवा सा था वो, कहाँ गया उसे ढूँढो” इन दिनों सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म इंस्टाग्राम पर खूब इस्तेमाल किया जा रहा है। कई वामपंथी विचारधारा से जुड़े लोग, अभिनेता और कंटेन्ट क्रिएटर इस गाने के साथ भावुक वीडियो बनाकर लोगों से सोनम वांगचुक का समर्थन करने और उन्हें ‘असल जिंदगी’ का फुंसुख वांगडू (Phunsukh Wangdu) बताकर बचाने की अपील कर रहे हैं।
जब राजनीति और दूसरे तरीके लोगों का व्यापक समर्थन नहीं जुटा सके, तब कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने लोगों की भावनाओं को छूने की कोशिश की। सोनम वांगचुक की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल के 17वें दिन इंस्टाग्राम और एक्स जैसे सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म पर बड़ी संख्या में भावुक पोस्ट और रील्स शेयर की गईं। इनमें सोनम वांगचुक को ‘असल जिंदगी का फुंसुख वांगडू’ बताया गया।
इन रील्स में खास तौर पर 3 इडियट्स का गाना ‘बहती हवा सा था वो’ लगाया गया है। साथ ही लोगों से फुंसुख वांगडू को ‘बचाने’ की अपील की जा रही है और केंद्र सरकार से सोनम वांगचुक की माँगों को मानने का दबाव बवाने की कोशिश की जा रही है।
सोनम वांगचुक ने 28 जून को जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) में शामिल होकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की थी। उनकी मुख्य माँग है कि NEET-UG 2026 पेपर लीक और अन्य परीक्षा संबंधी गड़बड़ियों की जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें। इसके अलावा वे लद्दाख को संवैधानिक सुरक्षा देने और वहाँ पर्यावरण संरक्षण के लिए मजबूत कदम उठाने की भी माँग कर रहे हैं।
इसी बीच ‘असल जिंदगी के फुंसुख वांगडू यानी सोनम वांगचुक को मरने मत दो’ नाम से सोशल मीडिया पर एक अभियान चलाया जा रहा है। इसका उद्देश्य पूरे देश से लोगों का समर्थन जुटाना और 20 जुलाई 2026 को संसद की ओर प्रस्तावित मार्च के लिए अधिक से अधिक लोगों को जोड़ना बताया जा रहा है।
सोशल मीडिया पर कई कंटेन्ट क्रिएटर दावा कर रहे हैं कि अविष्कारक (इनोवेटर) सोनम वांगचुक के नाम करीब 400 पेटेन्ट दर्ज हैं। साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि 3 इडियट्स के रैंचो यानी फुंसुख वांगडू की तरह सोनम वांगचुक भी बेहद गरीब परिवार से आते हैं। फिल्म में आमिर खान का किरदार, जिसे शुरुआत में सोनम वांगचुक से प्रेरित बताया गया था, एक गरीब माली के बेटे के रूप में दिखाया गया था।
कई रील्स और सोशल मीडिया पोस्ट में सेनम वांगचुक को 3 इडियट्स के फुंसुख वांगडू का असली रूप बताया जा रहा है। इस दावे को और हवा तब मिली, जब फिल्म में ‘चतुर’ का किरदार निभाने वाले अभिनेता ओमी वैद्य ने भी इस विषय पर वीडियो जारी किया।
ओमी वैद्य ने 15 जुलाई को इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर करते हुए कहा, “मैं नहीं चाहता कि फुंसुख वांगडू की मौत हो। हेलो इडियट्स, पहचाना? मैं ओमी वैद्य हूँ। 3 इडियट्स का चतुर और द ऑफिस का सादिक। आज मैं आपसे एक जरूरी बात कहना चाहता हूँ। मैं अक्सर ऐसे वीडियो नहीं बनाता, इसलिए मेरी बात ध्यान से सुनिए। क्या आप जानते हैं कि 3 इडियट्स का फुंसुख वांगडू असल में लद्दाख के इंजीनियर, इनोवेटर, शिक्षक और समाज सुधारक सोनम वांगचुक से प्रेरित बताया जाता है? मैं उनसे मिल चुका हूँ। वह वाकई एक दिलचस्प इंसान हैं।”
ओमी वैद्य ने आगे कहा, “इस समय सोनम वांगचुक लंबे समय से भूख हड़ताल पर हैं। उनका ब्लड शुगर काफी कम हो गया है। मुझे नहीं पता कि आपने इसके बारे में सुना है या नहीं। यह भी नहीं पता कि मीडिया इस खबर को दिखा रहा है या नहीं। लेकिन यह बहुत जरूरी मामला है। आप उनकी बातों से सहमत हों या नहीं, लेकिन मैं नहीं चाहता कि उनकी मौत हो।”
सोनम वांगचुक के समर्थन में बॉलीवुड के कई कलाकार भी सामने आए हैं। इनमें अनुराग कश्यप, स्वरा भास्कर, श्रेया धनवंतरी, जीनत अमान, अभय देओल, स्वानंद किरकिरे, सोनी राजदान, शबाना आजमी, रत्ना शाह, नसीरूद्दीन शाह सममेत कई अन्य शामिल हैं। इनमें से कई लोगों ने सोनम वांगचुक से अपनी भूख हड़ताल खत्म करने की अपील भी की है।
यहाँ तक कि कुछ मेनस्ट्रीम मीडिया संस्थान भी अपनी रिपोर्ट्स में सोनम वांगचुक को ‘असल जिंदगी का फुंसुख वांगडू’ बता रहे हैं।

सोशल मीडिया पर कई कंटेन्ट क्रिएटर भावुक वीडियो और पोस्ट शेयर कर रहे हैं। इनमें सोनम वांगचुक को ‘असल जिंदगी का फुंसुख वांगडू’, शिक्षा सुधार की लड़ाई लड़ने वाला चेहरा और कई अन्य विशेषणों के साथ पेश किया जा रहा है। ऐसे माहौल में जरूरी है कि दावों और भावनात्मक अपीलों से अलग हटकर तथ्यों और हकीकत की जाँच की जाए।
सोशल मीडिया पर कई कंटेन्ट क्रिएटर भावुक वीडियो और पोस्ट शेयर कर रहे हैं। इनमें सोनम वांगचुक को ‘असल जिंदगी का फुंसुख वांगडू’, शिक्षा सुधार की लड़ाई लड़ने वाला चेहरा और कई अन्य विशेषणों के साथ पेश किया जा रहा है। ऐसे माहौल में जरूरी है कि दावों और भावनात्मक अपीलों से अलग हटकर तथ्यों और हकीकत की जाँच की जाए।
सोनम वांगचुक नहीं हैं फुंसुख वांगडू, न तो उनके पास 400 पेटेंट और न ही उनका पारिवारिक बैकग्राउंड गरीब
फिल्म 3 इडियट्स में फुंसुख वांगडू एक काल्पनिक किरदार है। उसे एक ऐसे प्रतिभाशाली आविष्कारक के रूप में दिखाया गया है, जिसके नाम सैकड़ों पेटेंट हैं। वह एक अलग सोच वाला स्कूल चलाता है और रटकर पढ़ाई करने वाली शिक्षा व्यवस्था को चुनौती देता है।
साल 2009 में फिल्म रिलीज होने के बाद मुख्यधारा के मीडिया और सार्वजनिक चर्चा में सोनम वांगचुक को ‘असल जिंदगी का फुंसुख वांगडू’ कहा जाने लगा। इसकी वजह यह थी कि लद्दाख में वैकल्पिक शिक्षा के क्षेत्र में उनका काम और उनकी संस्था ‘स्टूडेंट्स एजुकेशनल एंट कल्चरल मूवमेंट ऑफ लद्दाख’ (SECMOL) से फिल्म के रैंचो के किरदार के कुछ पहलू प्रेरित बताए गए।
सोनम वांगचुक को ‘आइस स्तूप’ तकनीक विकसित करने का श्रेय भी दिया जाता है। इस तकनीक का उद्देश्य ट्रांस-हिमालयी ऊँचाई वाले गाँवों में वसंत के मौसम में सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराना है।
हालाँकि सोशल मीडिया और कई रिपोर्ट्स में किए जा रहे दावों के विपरीत, सोनम वांगचुक खुद को ‘असल जिंदगी का फुंसुख वांगडू’ नहीं मानते। इस बात की पुष्टि खुद सोनम वांगचुक कई बार कर चुके हैं।
कई साल पहले सोनम वांगचुक ने खुद साफ कहा था कि वह ‘असल जिंदगी के फुंसुख वांगडू’ नहीं हैं। उनका कहना था कि 3 इडियट्स के निर्माताओं ने फिल्म बनाते समय उनसे कोई सलाह या अनुमति नहीं ली थी। वांगचुक ने यह भी आरोप लगाया था कि फिल्म की टीम चुपचाप उनके लद्दाख स्थित स्कूल में शूटिंग करने पहुँची थी।
वांगचुक ने यह भी कहा था कि अगर फिल्म के कुछ हिस्से उनके जीवन से प्रेरित भी हैं, तो भी उन्हें इस बात पर कोई खास गर्व नहीं है। उनका मानना था कि लोगों को उन्हें किसी फिल्म के किरदार से जोड़कर नहीं, बल्कि उनके वास्तविक काम और योगदान के लिए पहचानना चाहिए।
उन्होंने 3 इडियट्स के निर्माताओं को एक पत्र भी लिखा था। इस पत्र में उन्होंने बिना अनुमति उनके जीवन और काम से प्रेरणा लेने पर सवाल उठाए थे।
एक इंटरव्यू में सोनम वांगचुक ने कहा था, “वे लोग चुपचाप मेरे स्कूल में फिल्म की शूटिंग करने आए थे। अगर आप कहें कि फिल्म मेरे काम से प्रेरित है, तो मैं इससे इनकार नहीं करूँगा। बहुत से लोग कहते हैं कि यह फिल्म मेरे जीवन पर आधारित है, लेकिन मैं इससे सहमत नहीं हूँ। सही शब्द यह होगा कि फिल्म मेरे काम या जीवन से प्रेरित या प्रभावित हो सती है। साथ ही मैं नहीं चाहता कि इस देश के लोग किसी बात को सिर्फ इसलिए सच मान लें, क्योंकि उसे किसी फिल्म से जोड़ दिया गया है। इसलिए अगर फिल्म मुझसे प्रभावित भी है तो मुझे इस पर कोई खास गर्व नहीं है। और अगर फिल्म मुझसे प्रेरित नहीं है तो मुझे इसका भी कोई अफसोस नहीं है।”
सोनम वांगचुक ने आगे कहा था, “मैं इस बात से परेशान हो जाता हूँ कि लोग बार-बार मुझसे पूछते हैं, ‘क्या आपका स्कूल वही है जो 3 इडियट्स में दिखाया गया था? क्या आप ही फुंसुख वांगडू हैं?’ मैं साफ करना चाहता हूँ कि नहीं, मैं फुंसुख वांगडू नहीं हूँ। मैं सोनम वांगचुक हूँ। मैं फिल्मों में काम नहीं करता, बल्कि असल जिंदगी में काम करता हूँ। मैं ऐसे नवाचारों पर काम करता हूँ जो भारत से दुनिया तक पहुँचे और देश का नाम रोशन करें।”
बाद में 3 इडियट्स के निर्देशक राजकुमार हिरानी ने भी एक इंटरव्यू में कहा था कि फिल्म के रैंचो या फुंसुख वांगडू का किरदार सोनम वांगचुक से प्रेरित नहीं था। उनके अनुसार, यह किरदार एक ऐसे व्यक्ति से प्रेरित था जो फिल्म बनाने के क्षेत्र में करियर बनाना चाहता था, लेकिन उसे प्रतिष्ठित फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (FTII) में एडमिशन नहीं मिल पाया था।”
इन बयानों से साफ है कि 3 इडियट्स फिल्म का फुंसुख वांगडू और सोनम वांगचुक एक ही व्यक्ति नहीं हैं।
इसी तरह सोशल मीडिया पर किया जा रहा यह दावा भी सही नहीं है कि सोनम वांगचुक के नाम 400 पेटेंट दर्ज हैं। यह दावा फिल्म के काल्पनिक किरदार से जोड़कर फैलाया जा रहा है। अब तक ऐसा कोई विश्वसनीय प्रमाण सामने नहीं आया है कि सोनम वांगचुक के नाम कोई पेटेंट दर्ज है। हालाँकि, वे ‘आइस स्तूप’, सौर ऊर्जा से गर्म होने वाली इमारतों और भारतीय सेना के लिए पोर्टेबल सोलर टेंट जैसी उपयोगी तकनीकों और नवाचारों के विकास के लिए जाने जाते हैं।
कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि सोनम वांगचुक के एक ‘टेंट डिजाइन का पेटेंट’ कराया जा रहा था। हालाँकि, इस बारे में भी कोई स्पष्ट और विश्वसनीय जानकारी उपलब्ध नहीं है। कुल मिलाकर, 3 इडियट्स फिल्म के काल्पनिक किरदार फुंसुख वांगडू की तरह सोनम वांगचुक के नाम 400 पेटेंट होने का दावा सही नहीं है।
सोशल मीडिया पर कई इंफ्लुएंसर अपने वीडियो में जिस ‘400 पेटेंट’ का दावा कर रहे हैं, वह दरअसल फिल्म के काल्पनिक किरदार फुंसुख वांगडू और सोनम वांगचुक को एक ही व्यक्ति मान लेने की वजह से फैल रहा है।
इसी तरह सोशल मीडिया पर एक और दावा भी किया जा रहा है कि जैसे फिल्म में फुंसुख वांगडू एक गरीब परिवार से था, वैसे ही सोनम वांगचुक भी बेहद साधारण या गरीब परिवार से आते हैं।
लेकिन उपलब्ध जानकारी के अनुसार यह दावा भी सही नहीं है। सोनम वांगचुक, लद्दाख के वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता सोनम वांग्याल के बेटे हैं। सोनम वांग्याल वर्ष 1972 के आसपास लेह से विधायक रहे थे। इसके बाद 1975 में वे जम्मू-कश्मीर सरकार में मंत्री भी बने। इसी दौरान उनका परिवार श्रीनगर में रहने लगा था।
रिपोर्ट्स के अनुसार, भूख हड़ताल करने की प्रेरणा भी सोनम वांगचुक को अपने पिता से मिली हो सकती है। वर्ष 1984 में सोनम वांग्याल ने लद्दाख को अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा दिलाने की माँग को लेकर भूख हड़ताल की थी।

बाद में वर्ष 1987 में सोनम वांग्याल को कथित तौर पर पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में कॉन्ग्रेस से निष्कासित कर दिया गया था।
ऐसे में सोशल मीडिया पर सोनम वांगचुक को ‘एक ऐसे जमीनी नायक के रूप में पेश करना, जो बेहद साधारण या गरीब परिवार’ से आगे बढ़े हों, उपलब्ध तथ्यों से मेल नहीं खाता। रिपोर्ट्स के अनुसार, वह आर्थिक रूप से संपन्न और राजनीतिक रूप से प्रभावशाली परिवार से आते हैं।
पिछले कुछ वर्षों में सोनम वांगचुक कई विवादों को लेकर भी चर्चा में हे हैं।
पिछले वर्ष खबरें आई थीं कि इंजीनियर और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने 135 एकड़ जमीन का कई वर्षों तक किराया नहीं चुकाया। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस जमीन की मौजूदा बाजार कीमत करीब 27 से 30 करोड़ रुपए के बीच है। यह भी कहा गया कि उपायुक्त ने लीज की शर्तों के क्लॉज 4(बी) के तहत नोटिस जारी किए थे।
रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया कि लीज समझौते के एक वर्ष के भीतर जमीन पर विश्वविद्यालय स्थापित नहीं किया गया। वहीं, हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव लर्निंग (HIAL) ने विश्वविद्यालय का दर्जा पाने के लिए आवेदन वर्ष 2022 में किया, जबकि जमीन का आवंटन इससे करीब चार साल पहले हो चुका था। इन रिपोर्ट्स के अनुसार, लीज की शर्तों का पालन न करने के बावजूद सोनम वांगचुक के नियामकीय अड़चनों (Regulatory Hurdles) का हवाला दिया।
रिपोर्ट्स के अनुसार, HIAL ने करीब तीन सालों तक लद्दाख ऑटोनॉमस हिल डेवलपमेंट काउंसिल (LAHDC) से संपर्क नहीं किया। इसके बजाए, संस्था ने सीधे लेह के उपायुक्त के माध्यम से प्रक्रिया आगे बढ़ाने की कोशिश की।
कुछ रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया कि HIAL के लिए 14 करोड़ रुपए की प्रीमियम राशि माफ करने का अनुरोध किया गया था। हालाँकि, यह प्रस्ताव LAHDC ने स्वीकार नहीं किया। इसलिए आधिकारिक रिकॉर्ड में किसी भी तरह की छूट दिए जाने का उल्लेख नहीं मिलता।
बाद में जब लद्दाख प्रशासन ने HIAL को आवंटित जमीन का आवंटन रद्द कर दिया, तब सोनम वांगचुक ने इसे केंद्र सरकार की ओर से उनके खिलाफ ‘विच हंट’ बताया।
रिपोर्ट्स के अनुसार, फरवरी 2025 में सोनम वांगचुक जलवायु परिवर्तन से जुड़े एक सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए पाकिस्तान गए थे। उस दौरान सोशल मीडिया पर कई पाकिस्तानी अकाउंट्स ने उनके समर्थन में पोस्ट भी किए थे।
इसके अलावा सोनम वांगचुक और उनकी संस्थाओं के खिलाफ विदेशी फंडिंग नियमों के कथित उल्लंघन को लेकर सीबीआई जाँच भी हुई थी। रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि HIAL के कामकाज में वित्तीय अनियमितताओं और विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (FCRA) के बार-बार उल्लंघन से जुड़े मामले सामने आए थे।
रिपोर्ट्स के अनुसार, HIAL ने स्थानीय दान भी अपने FCRA खाते में जमा किए थे, जिसे FCRA 2010 की धारा 17 का उल्लंघन बताया गया। इसके अलावा यह भी दावा किया गया कि संस्था ने FCRA पंजीकरण के लिए आवेदन करने से पहले ही करीब 1.5 करोड़ रुपए की विदेशी राशि प्राप्त की थी, जो अधिनियम की धारा 11 के विपरीत है। रिपोर्ट्स में यह भी आरोप लगाया गया कि HIAL के कुल 7 बैंक खाते थे, जिनमें से 4 खातों की जानकारी घोषित नहीं की गई थी।
इसी तरह रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया कि सोनम वांगचुक के नाम 9 व्यक्तिगत बैंक खाते थे, जिनमें से 8 का खुलासा नहीं किया गया था। यह आरोप भी लगाया गया कि कॉरपोरेट क्षेत्र की आलोचना करने के बावजूद उन्हें कई निजी कंपनियों और केंद्र सरकार के सार्वजनिक उपक्रमों (PSUs) से कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) के तहत बड़ी राशि मिलती रही।
सोनम वांगचुक पर सितंबर 2025 में लद्दाख में हुई हिंसा भड़काने के आरोप भी लगे थे। रिपोर्ट्स के अनुसार, उस दौरान पुलिस फायरिंग में चार लोगों की मौत हुई थी। इसी वर्ष मार्च में केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत सोनम वांगचुक की नजरबंदी समाप्त कर दी थी। उन्हें लद्दाख में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान गिरफ्तार किया गया था और करीब 6 महीने बाद उनकी नजरबंदी हटाई गई।
सोनम वांगचुक इससे पहले भी कई मुद्दों पर भूख हड़ताल कर चुके हैं। इनमें लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की माँग और अब केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग प्रमुख हैं।
सोशल मीडिया पर इन दिनों 3 इडियट्स और फुंसुख वांगडू से जुड़ी कहानी को तेजी से प्रचारित किया जा रहा है ताकि लोगों की सहानुभूति हासिल की जा सके और यह विषय ज्यादा से ज्यादा वायरल हो। हालाँकि, उपलब्ध बयानों और तथ्यों के अनुसार, सोनम वांगचुक का फिल्म के काल्पनिक किरदार ‘फुंसुख वांगडू’ से सीधा संबंध नहीं है। इसके बावजूद, ‘असल जिंदगी के फुंसुख वांगडू’ और ‘साधारण पृष्ठभूमि’ से निकले शिक्षा सुधारक जैसी छवि भावनात्मक रूप से लोगों को प्रभावित करती है, इसलिए सोशल मीडिया पर इसका व्यापक इस्तेमाल किया जा रहा है।
(मूलरूप से यह रिपोर्ट अंग्रेजी में लिखी गई है, जिसे पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें।)


