झारखंड पेपर लीक मामले में हेमंत सोरेन सरकार का बचाव करने की कोशिश कर रहे न्यूज पिंच के संस्थापक अभिनव पांडे इन दिनों चर्चा में हैं। दरअसल राँची में हजारों छात्र JPSC सिविल सर्विसेज और JSSC-CGL परीक्षाओं के दौरान धांधली, पेपर लीक और प्रश्नपत्रों के छेड़छाड़ के साथ-साथ OMR शीट के खिलाफ जवाबदेही की माँग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के पूरे समय कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के कार्यकर्ताओं की भाषा बोलने वाले अभिनव, झारखंड के छात्र प्रदर्शन के मामले में आक्रमक नहीं दिखे। पेपर लीक जैसे मुद्दे यहाँ भी हैं और विरोध करने वाले छात्र ही हैं। लेकिन हेमंत सरकार से सवाल पूछने के बजाए अभिनव पांडे परीक्षा में हुई गड़बड़ियों पर सोरेन सरकार के रुख और उसकी कार्रवाइयों की जानकारी देने लगे।
CJP के प्रदर्शनों के दौरान NEET पेपर लीक को हथियार बनाया गया, भले ही मोदी सरकार ने तुरंत कार्रवाई करते हुए दोषियों को गिरफ्तार किया, एनटीए के पदाधिकारियों को निलंबित किया और शिक्षा मंत्री ने भी इस्तीफा दिया। इतना ही नहीं दोबारा परीक्षा आयोजित किया गया। उसके रिजल्ट आए यानी NEET यूजी 2026 को फिर से आयोजित कराने और समय पर परिणाम सुनिश्चित करने तक, सरकार ने छात्रों के भविष्य को जोखिम में न डालने के लिए हर संभव प्रयास किया।
एक रील के कैप्शन में लिखा था, “जनता सरकार के नाक तक पहुँची…लाठीचार्ज के बाद से ही Dharmendra Pradhan के इस्तीफे की उल्टी गिनती शुरू हो गई थी…”
मोदी सरकार ने जो त्वरित कदम उठाए और दोबारा सफलतापूर्व परीक्षा करवाए, उसकी जानकारी देना तो दूर अभिनव पांडे ने ‘पत्रकार’ होने का ढोंग भी छोड़ दिया। वह जंतर-मंतर पर पूर्णकालिक ‘कार्यकर्ता’ बन गए (बेशक, छात्रों की भलाई के नाम पर) और उतने ही उकसाने वाले कैप्शन के साथ भड़काऊ वीडियो पोस्ट करने लगे। एक समय पर, वह विपक्षी दलों के प्रवक्ता की तरह बोलने लगे थे।
अपने सोशल मीडिया प्रभाव का उपयोग करते हुए अभिनव पांडे ने कॉकरोच जनता पार्टी के एजेंडे को अंजाम तक पहुँचाने में मदद की। एक अन्य रील का कैप्शन था, “Gen-G छात्र जीत गए, हमने कहा था Modi सरकार को झुकना पड़ेगा।”
यह ‘पत्रकारिता’ नहीं, बल्कि सीधी राजनीतिक तरफदारी है। इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि CJP समर्थकों ने सच के उनके संस्करण को रिपोर्ट करने के लिए उनकी सराहना की।
एक अन्य रील के कैप्शन में कहा गया, “इस्तीफा दिया नहीं, छात्रों ने कलेजे पर चढ़कर लिया…Dharmendra Pradhan के इस्तीफे के बाद Jantar Mantar पर क्या माहौल?।”
अपने नैरेटिव को और आगे बढ़ाने के लिए, न्यूज़ पिंच द्वारा एक प्रदर्शनकारी को मंच दिया गया, जिसने दावा किया, “‘इस्तीफा छीना गया, वो लड़ाई हारे हैं'”
लेकिन अभिनव पांडे की यह नौटंकी यहीं खत्म नहीं हुई। उन्होंने वामपंथी-इस्लामवादी बयानबाज़ी को भुनाया कि किसी न किसी तरह भारत के विचार में सभी का योगदान है और यह किसी के बाप का नहीं है। एक और रील का कैप्शन था, “CJP Protest में Gen Z ने तय कर दिया है कि देश किसी पार्टी की जागीर नहीं, सरकार युवाओं की है।”
न्यूज पिंच को कॉकरोच जनता पार्टी से अलग करना व्यावहारिक रूप से असंभव हो गया। दोनों ने मिलकर एक दुर्भावनापूर्ण नैरेटिव फैलाने और युवाओं को गुमराह करने का काम किया। इस ‘न्यूज आउटलेट’ ने पार्टी के प्रचार अंग के रूप में काम किया।
इस सब के बावजूद, न्यूज पिंच के सह-संस्थापक सौरभ त्रिपाठी में अन्य पत्रकारों को ‘गोदी मीडिया’ कहकर नीचा दिखाने की कोशिश की थी।
अभिनव पांडे और झारखंड पेपर लीक संकट
लेकिन स्थिति की विडंबना यहीं खत्म नहीं हुई। रविवार (2 अगस्त) को, अभिनव पांडे ने एक ट्वीट किया जिसमें बताया गया कि झारखंड सरकार चल रहे पेपर लीक संकट से निपटने के लिए किस तरह सक्रिय रूप से कदम उठा रही है।
वर्तमान मुख्यमंत्री की तारीफ के पुल बाँधते हुए उन्होंने कहा, “जंतर मंतर से सबक ले रही हेमंत सोरेन सरकार। अब तक किसी तरह के बल प्रयोग को मना किया है। छात्रों के धरने के बीच कई एक्शन हुए हैं।”
अभिनव ने आगे दावा किया, “भर्ती गड़बड़ी में शामिल 11 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। JPSC अध्यक्ष का इस्तीफा हो चुका है। JPSC अध्यक्ष से लगातार 3 दिन से 8-8 घंटे की पूछताछ। 14वीं JPSC की परीक्षा टल गई है। मेंस रद्द…JPSC अध्यक्ष और पूर्व चीफ सेक्रेटरी ख्यांगते की गिरफ्तारी संभव…”

जब इस ‘निष्पक्ष पत्रकार’ का हेमंत सोरेन सरकार का पीआर (PR) काम पूरा हो गया, तो उसने दावा किया, “जिस छात्र का ORM लीक हुआ, उसकी गिरफ़्तारी हुई। वो आजसू नेता का बेटा है। NDA का घटक दल है आजसू”।”
संतुलन बनाने की कोशिश करते हुए अभिनव पांडे ने लिखा, “अब छात्रों की माँग है कि पूरे मसले की CBI जाँच हो, फिलहाल CID जाँच कर रही है। ध्वस्त भर्ती प्रणाली में विश्वास की बहाली के लिए @HemantSorenJMM जी जाँच क्यों अनुशंसित नहीं कर रहे हैं? और सवाल ये भी कोई भी भर्ती आपके राज्य में बिना विवाद के पूरी क्यों नहीं हो पाती?”
जब नेटिज़न्स ने ध्यान दिलाया कि अभिनव पांडे का ‘एक्टिविस्ट मोड’ नदारद है, तो वह जल्द ही अपने सह-संस्थापक सौरभ त्रिपाठी के साथ स्थिति को संभालने (फायरफाइटिंग) के मोड में आ गए।
अखिलेश जी, आप बच्चों के बड़े शुभचिंतक नज़र आ रहे हैं. पर ये क्या, आपका ही अख़बार बच्चों को आवाज़ नहीं दे पा रहा. फ्रंट पेज में एक भी लाइन नहीं है.
— Saurabh Tripathi (@Saurabh_Pinch) August 2, 2026
थोड़ा ट्वीट अपने अख़बार और अपने संपादकों को टैग करके भी करिए. चलिए ये काम मैं कर देता हूँ.@shekharkahin जी आपको अपने रिपोर्टर की… https://t.co/uGhcblwgS1
लेकिन यह अंतर साफ और बेशर्म करने वाला था। हालाँकि न्यूज पिंच के संस्थापकों ने झारखंड छात्र विरोध प्रदर्शन के बारे में बात जरूर की (गैर-भाजपा शासित राज्य में छात्रों की दुर्दशा के प्रति उदासीन होने के आरोप से बचने के लिए), लेकिन उनके तेवर और तीव्रता में भारी बदलाव आया था।
हेमंत सोरेन सरकार पर अपने शिक्षा मंत्री को हटाने के लिए दबाव बनाने या इस्तीफे की माँग करने वाला कोई अभियान नहीं चलाया गया। यह कवरेज और जवाबदेही की माँग न केवल ढीली थी, बल्कि नाममात्र के बराबर थी।
दरअसल ‘जंतर-मंतर का एक्टिविस्ट’ न केवल राँची में शारीरिक रूप से अनुपस्थित था, बल्कि सोशल मीडिया पर भी थोड़ा नरम रुख अख्तियार किए हुए था।
यह एजेंडा-संचालित पत्रकारिता का एक सटीक उदाहरण है जहाँ सहूलियत के हिसाब से चुनिंदा गुस्सा, अपनी पसंद की चीजें चुनना (cherry-picking) और अतिशयोक्ति का इस्तेमाल किया जाता है।
दूसरी तरफ ‘निष्पक्ष’ दिखने और पार्टी या विचारधारा के समर्थकों को नाराज न करने की उम्मीद में इस मुद्दे पर चालाकी भरी चुप्पी, दूरी और ठंडा रवैया अपनाया जाता है।
मुझे स्वीकार करना होगा कि न्यूज पिंच के अभिनव पांडे ने वास्तव में इस कला में महारत हासिल कर ली है। वैसे भी वे अपनी अहसानफरामोशी और दिमागी कसरत (mental gymnastics) के लिए जाने जाते हैं।


