अमेरिकी वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लुटनिक ने भारत को मक्का आयात नहीं कर पाने पर अफसोस जताते हुए कहा है कि भारत की 140 करोड़ की आबादी है, फिर भी वह हमसे एक बुशल मक्का नहीं खरीद रहा। एक बुशल का मतलब 25.40 किलो होता है।
उन्होंने कहा, “भारत शेखी बघारता है कि उसके पास 1.4 अरब लोग हैं, फिर भी वह हमसे एक बुशल मक्का क्यों नहीं खरीदता? क्या यह बात आपको बुरी नहीं लगती कि वह हमें सब कुछ बेचता है, और हमारा मक्का नहीं खरीदता? वह हर चीज़ पर टैरिफ लगाता है। या तो आप इसे मान लीजिए, वरना दुनिया के सबसे बड़े उपभोक्ता के साथ व्यापार करना आपके लिए मुश्किल हो जाएगा।”
राष्ट्रपति ट्रंप का जिक्र करते हुए ल्यूटनिक ने कहा, “वे ( ट्रंप ) कहते हैं कि हमारे साथ वैसा ही व्यवहार करो जैसा हम तुम्हारे साथ करते हैं। हमने वर्षों की गलतियों को सुधारा है। इसलिए हम चाहते हैं कि टैरिफ दूसरी तरफ हो। हम इसे ठीक करेंगे।” यही राष्ट्रपति का आदर्श वाक्य है।
.@mikeallen asks on The Axios Show if the U.S. is “pissing away valuable relationships” with steep tariffs against allies.@howardlutnick: “India brags that they have 1.4 billion people. Why won’t their 1.4 billion people buy one bushel of U.S. corn?” pic.twitter.com/SPZUJLzWEM
लेकिन लुटनिक की बात आंशिक रूप से गलत हैं, क्योंकि भारत ने 2024-25 में कुछ अमेरिकी मक्का खरीदा था। रिपोर्टों के अनुसार, भारत ने 1100 टन अमेरिकी मक्का का आयात किया। ये 1100 टन 2024-25 में भारत के कुल मक्का आयात का छोटा-सा हिस्सा था। कुल आयात 0.97 मिलियन टन हुआ, जिसका अधिकांश हिस्सा म्यांमार और यूक्रेन से आता है।
इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, भारत ने 2024-25 में म्यांमार से 0.53 मिलियन टन और यूक्रेन से 0.39 मिलियन टन मक्के का आयात किया।
भारत अमेरिका से अधिक मक्का क्यों नहीं आयात करता?
भारत की मक्के की घरेलू माँग उसकी तीव्र आर्थिक वृद्धि के साथ लगातार बढ़ रही है। भारत मुख्य रूप से पशुधन और मुर्गी पालन उद्योग में चारे के लिए और इथेनॉल उत्पादन उद्योग के लिए कच्चे माल के रूप में मक्के का आयात करता है। म्यांमार और यूक्रेन भारत के पारंपरिक रूप से मक्के के सबसे बड़े निर्यातक रहे हैं।
लगभग सभी अमेरिकी मक्का आनुवंशिक रूप से संशोधित फसलों से प्राप्त होता है। भारत जीएम फसलों के आयात की अनुमति नहीं देता है। इससे अमेरिका के ज्यादातर मक्के की किस्में भारत में आयात नहीं की जा सकती।
भारत मक्के के आयात के लिए टैरिफ दर कोटा (TRQ) लागू करता है। सीमित मात्रा में आयात कम शुल्क पर किया जा सकता है, लेकिन इससे अधिक मात्रा पर 50% शुल्क लगता है, जिससे अमेरिकी मक्का महँगा हो जाता है।
रूस से युद्ध से पहले यूक्रेन और म्यांमार भारत को सस्ती कीमत पर मक्का बेचते रहे हैं। म्यांमार से आयात करने पर माल ढुलाई शुल्क कम लगता है। इसके अलावा, भारत सरकार पारंपरिक रूप से अपनी ‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति के तहत म्यांमार से आयात को प्राथमिकता देती रही है।
मोदी सरकार में आत्मनिर्भरता पर पूरा जोर है। भारत सरकार दूर-दराज़ के देशों से महँगे कृषि आयात से बचने की कोशिश करती है। यहाँ तक कि जब अमेरिका से गैर-जीएम मक्के की छोटी खेप उपलब्ध होती है, तब भी उनकी गैर-जीएम स्थिति प्रमाणित करना और भारत की सख्त फाइटोसैनिटरी आवश्यकताओं को पूरा करना भारतीय आयातकों के लिए मुश्किल होता है।
अमेरिका भारत को मक्का क्यों बेचना चाहता है?
अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा मक्का उत्पादक है। दुनिया का लगभग एक-तिहाई मक्का यहाँ पैदा होता है। अच्छी पैदावार होने पर घरेलू खपत के काफी ज्यादा मक्का इनके पास बच जाता है। अगर निर्यात ठीक से नहीं होता है, तो घरेलू बाजार में अतिरिक्त मक्का होगा, जिससे मक्का की कीमतें गिरेंगी और मक्का किसानों को नुकसान होगा।
अमेरिका में मक्का उत्पादन ज्यादा होने की वजह से वह जापान, मेक्सिको और दक्षिण कोरिया जैसे कई देशों के साथ अमेरिका की व्यापार वार्ताओं और समझौतों में अक्सर मक्का निर्यात को शामिल करता है।
यूएस ग्रेन्स काउंसिल और नेशनल कॉर्न ग्रोअर्स एसोसिएशन जैसे कृषि लॉबी और कमोडिटी समूह अमेरिकी सरकार पर नए निर्यात बाज़ार खोलने, घरेलू किसानों को खुश रखने और ज़मीन की कीमतें ऊँची रखने के लिए जबरदस्त दबाव डाल रहे हैं। अमेरिका में इलेक्ट्रिक वाहनों का चलन बढ़ता जा रहा है। इससे घरेलू स्तर पर इथेनॉल उत्पादन के लिए मक्के की माँग और खपत में कमी आ रही है।
इसके अलावा, बड़े एशियाई बाजारों में मक्का निर्यात के लिए अमेरिका को ब्राजील, अर्जेंटीना जैसे देशों से कड़ी प्रतिस्पर्धा करनी पड़ रही है।
चीन अमेरिका के मक्के का सबसे बड़ा आयातक देश रहा है। चीन ने अमेरिका से 2022 में करीब 5.21 अरब डॉलर का मक्का आयात किया। 2024 में ये घटकर मात्र 33.1 करोड़ डॉलर रह गया। डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा टैरिफ लगाए जाने के बाद चीन के आयात में भारी गिरावट आई है। रिपोर्टों के मुताबिक, 2025 के पहले 7 महीनों में, चीन ने केवल 24 लाख डॉलर का अमेरिकी मक्का आयात किया है।
इसलिए, अमेरिका को अपने मक्का के निर्यात के लिए एक नए और पर्याप्त बड़े बाजार की सख्त जरूरत है। वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लुटनिक का रोना धोना इसी को लेकर है। ये अमेरिकी मक्का को भारत में नहीं बेच पाने को लेकर हताशा ज्यादा लगता है, व्यापार संतुलन को लेकर बेचैनी कम।
(ये लेख मूल रूप से अंग्रेजी में लिखा गया है, इसे पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें)
पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर शाहिद अफरीदी ने भारत की मोदी सरकार पर जहर उगला है और राहुल गाँधी की तारीफ की है। राहुल गाँधी की सोच को शाहिद अफरीदी ने सकारात्मक बताया और कहा कि वे पाकिस्तान से बातचीत करने को तैयार है। शाहिद अफरीदी ने भारत की तुलना इजरायल से भी की है।
पाकिस्तानी मीडिया के साथ एक इंटरव्यू में बोलते हुए अफरीदी ने कहा, “अगर आप राहुल गाँधी को देखें तो वे बहुत सकारात्मक सोच वाले व्यक्ति हैं। वे चाहते हैं कि बातचीत आगे बढ़े… लेकिन ये लोग… मेरा मतलब है। क्या एक इजराइल काफी नहीं है कि आप दूसरा बनाने की कोशिश कर रहे हैं।”
After Hafiz Saeed now Shahid Afridi ( Terror apologist & India hater ) praises Rahul Gandhi… Not surprised! Everyone who hates India finds an ally in Rahul Gandhi & Congress
शाहिद अफरीदी ने भारत की मोदी सरकार पर भी हमला बोलते हुए कहा, “भारत भी पाकिस्तान के साथ वैसा ही बर्ताव कर रहा है, जैसे गाजा के साथ इजरायल करता है। जब तक इनके टॉप लीडर है, ऐसा ही चलता रहेगा।” अफरीदी ने मोदी सरकार पर सत्ता में बने रहने के लिए हिंदू-मुस्लिम की राजनीति करने का भी आरोप लगाया।
शाहिद अफरीदी के भारत-विरोधी बयान
ये वही शाहिद अफरीदी है जो अक्सर भारत विरोधी और हिंदू विरोधी बयान देते रहते है। हाल ही में पहलगाम आतंकी हमले के बाद शाहिद अफरीदी ने जहरीला बयान दिया था। शाहिद आफरीदी ने कहा था कि भारत खुद ही अपने लोगों को मरवाता है। इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर अफरीदी को लोगों ने जमकर लताड़ा था।
शाहिद अफरीदी की हमेशा से ही इस्लामी कट्टरपंथी वाली सोच रही है। कई बार अफरीदी ने बयान दिए हैं बहन-बेटियों को इस्लामी कानून के तौर-तरीकों पर ही चलना चाहिए। एक बार शाहिद अफरीदी की बेटी भारत में टीवी सीरियल देख रही थी। बेटी ने हिंदू आरती का सीन देखकर खुद भी आरती की तरह हाथ घुमाने लगी। तभी इस्लामी कट्टरपंथ सोच वाले शाहिद अफरीदी ने टीवी फोड़ डाला था।
मध्यप्रदेश के धार में बनने वाले पीएम मित्र पार्क यानी मेगा इंटीग्रेटेड टेक्सटाइल रीजन एपेरल पार्क का भूमिपूजन पीएम मोदी के 75वें जन्मदिन के मौके पर किया जा रहा है। प्रधानमंत्री इसका भूमिपूजन करने जा रहे हैं। ये योजना देश के 7 राज्यों के 7 जिलों में शुरू हो रहा है। इससे लाखों लोगों को रोजगार मिलगा और बड़ी संख्या में विदेशी निवेशक आकर्षित होंगे।
एमपी के धार के पीएम मित्र पार्क की खासियत
धार जिले के भैंसोला गाँव में प्रधानमंत्री मेगा इंटीग्रेटेड टेक्सटाइल रीजन एपेरल पार्क का भूमिपूजन हो रहा है। यह देश का सबसे बड़ा पीएम मित्र पार्क होगा, जिसमें कपास से परिधान तक की पूरी वैल्यू चेन विकसित होगी। ये करीब 2000 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है। इससे करीब 6 लाख किसान सीधे उद्योग से जुडेंगे। भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर, सागर समेत तमाम केन्द्रों में टेक्सटाइल सेक्टर बुस्ट और विस्तारित होगा।
भोपाल के सतगढ़ी में 61 हेक्टेयर पर रेडीमेड गारमेंट पार्क भी बनाया जा रहा है। एक गारमेंट कॉन्प्लेक्स इंदौर के परदेशीपुरा में बन रहा है। इसमें 4 ब्लॉक और 184 यूनिट होंगे। इससे मुरैना के मेगा फुटवियर और एक्ससेरीज कलस्टर को भी मदद मिलेगी
बिजली-पानी समेत विश्वस्तरीय सुविधाएँ मिलेगी
पार्क में विश्वस्तरीय सुविधाएँ होंगी। यहाँ पावर सप्लाई के लिए 220 केवी का बिजली सब स्टेशन बनेगा। 20 एमएलडी क्षमता वाली वाटर सप्लाई डोरस्टेप तक मिलेगी। स्काडा की मॉनिटरिंग होगी। हाउसिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाएगा। पानी, सौर ऊर्जा संयंत्र की खास व्यवस्था के साथ-साथ श्रमिकों और महिला कर्मचारियों को घर और सामाजिक सुविधाएँ दी जाएँगी। पार्क को इंडियन ग्रीन इंडस्ट्रियल टाउनशिप का सर्टिफिकेट भी दिया जाएगा।
अब तक 27109 करोड़ रुपए के निवेश का प्रस्ताव
अभी भूमिपूजन हो रहा है, लेकिन एमपी के पीएम मित्र पार्क को अब तक 27109 करोड़ रुपए के निवेश का प्रस्ताव मिल चुका है। इससे हजारों रोजगार सृजित होने की उम्मीद बँधी है। दरअसल मध्यप्रदेश में टैक्सटाइल इंडस्ट्री के लिए जरूरी कपास का उत्पादन बड़े पैमाने पर होता है। राज्य 40 फीसदी जैविक कपास का उत्पादन करता है। इंदौर, धार, खरगोन, खंडवा जैसे मालवा क्षेत्र के जिले कपास उत्पादन के लिए अहम हैं।
पीएम मित्र पार्क से जुडेंगे ये इंस्टीट्यूट
मध्यप्रदेश के पीएम मित्र पार्क से NIFT नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी , NID (नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन) IITDM (इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, डिजाइन एंड मैन्युफेक्चरिंग) और ग्लोबल स्किल पार्क भी जुड़े होंगे।
कहाँ-कहाँ बन रहा पीएम मित्र पार्क
केन्द्र ने 7 राज्यों के 7 शहरों में पीएम मित्र पार्क स्थापित करने को मंजूरी दी है। इसमें एमपी का धार, उत्तर प्रदेश का लखनऊ, महाराष्ट्र का अमरावती, तमिलनाडु का विरुधनगर, तेलंगाना का वारंगल, गुजरात का नवसारी, कर्नाटक का कलबुर्गी शामिल है।
तमिलनाडु में हो चुका है पीएम पार्क का शुभारंभ
तमिलनाडु के पियोनियर में सबसे पहले पीएम मित्र पार्क योजना की शुरुआत 22 मार्च 2024 को हुई। ये विधुरनगर के ई कुमारालिंगापुरम गाँव के 1052 एकड़ में बना है। इसपर 2000 करोड़ रुपए लागत का अनुमान है। परियोजना से 19000 करोड़ रुपए के निवेश की उम्मीद है। साथ ही 2 लाख से ज्यादा लोगों को रोजगार मिलने का अनुमान है। राज्य के आर्थिक विकास के साथ-साथ देश के विकास में ये योजना अहम साबित होगा। तमिलनाडु राज्य उद्योग संवर्धन निगम यानी (SIPCOT) इस ऐतिहासिक परियोजना के लिए मास्टर डेवलपर की भूमिका निभा रहा है।
5F विजन पर आधारित है योजना
पीएम मित्र पार्क वस्त्र उद्योग में कताई, बुनाई, प्रोसेसिंग, प्रिंटिंग से लेकर कपड़े बनाने तक की पूरी प्रक्रिया शामिल होगी। ये 5F विजन- ‘फार्म से फाइबर, फाइबर से फैक्ट्री, फैक्ट्री से फैशन और फैशन से फॉरेन’ पर आधारित है। इसका मतलब है खेत से कपास और धागा पैदा करना, धागे को कारखाने में ले जाना, कारखानों से फैशन ट्रेंड बनना और फिर से विदेश भेजना। इन सब से लाखों रोजगार पैदा होने की उम्मीद है।
2023 में वस्त्र उद्योग को लेकर पीएम मोदी ने की थी घोषणा
पीएम मोदी ने 2023 में घोषणा की थी मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, तेलंगाना,कर्नाटक, महाराष्ट्र, गुजरात में पीएम मित्र मेगा टेक्सटाइल पार्क स्थापित किए जाएँगे। इसके लिए अत्याधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर दिया जाएगा और इसके माध्यम से करोड़ों का निवेश उद्योगपतियों से करवाया जाएगा।
‘मेक फॉर द वर्ल्ड’ का बेहतरीन उदाहरण
केन्द्र सरकार ने 2021-22 से 2027-28 तक सात पीएम मेगा एकीकृत वस्त्र क्षेत्र यानी पीएम मित्र पार्क स्थापित करने के लिए 4445 करोड़ रुपए को मंजूरी दी है। ये योजना ‘मेक इन इंडिया’ और ‘मेक फॉर द वर्ल्ड’ का बेहतरीन उदाहरण है। ये देश को वस्त्र उद्योग के महाशक्ति बनने की यात्रा में मील का पत्थर साबित होगा। इस योजना से वस्त्र उद्योग में क्रांति आएगा। पूँजी निवेश होगा और रोजगार के नए अवसर बड़ी संख्या में पैदा होंगे। ये महत्वाकांक्षी परियोजना देश के आर्थिक समृद्धि में योगदान देगा और वैश्विक मंच पर वस्त्र निर्माण के क्षेत्र में स्थिति को और मजबूत करेगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर 17 सितंबर 2025 से स्वस्थ नारी सशक्त परिवार अभियान शुरू होने जा रहा है। अभियान का उद्देश्य महिलाओं और बच्चों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ देकर उन्हें सशक्त बनाना है। प्रधानमंत्री खुद इस अभियान की शुरुआत करेंगे।
पीएम इस कार्यक्रम की शुरुआत बिहार से करेंगे। इसके लिए राज्य के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने अभियान की सफलता के लिए सभी तैयारियों की समीक्षा की। मंत्री ने बैठक में कहा कि अभियान 17 सितंबर से 02 अक्टूबर 2025 तक पीएम के जन्मदिन के मौके पर आयोजित ‘सेवा पखवाड़ा’ के तहत शुरू किया जाएगा। इसके तहत कई जनकल्याणकारी कार्यक्रम होंगे।
शिविर में महिलाओं और बच्चों की होगी स्वास्थ्य जाँच
स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने बताया कि स्वस्थ नारी सशक्त परिवार अभियान के दौरान महिला स्वास्थ्य जाँच, मातृ और शिशु देखभाल, जागरूरकता और व्यवहार परिवर्तन, निक्षय मित्र अभियान, रक्तदान के करीब 75,000 शिविर आयोजित किए जाएँगे। ये शिविर सदर अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) और आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में लगाए जाएँगे।
इन शिविरों में महिलाओं, किशोरियों और बच्चों को विशेष टीकाकरण के साथ-साथ स्त्री रोग, बाल रोग और अन्य बीमारियों की जाँच और उपचार से जुड़ी सेवाएँ प्रदान की जाएँगी। साथ ही ENT, दाँत और आँखों की जाँच की सुविधा भी उपलब्ध होगी और जरूरतमंदों को चश्मा भी दिया जाएगा। शिविरों में आने वाले सभी मरीजों का आभा ID से ऑनलाइन पंजीकरण कराया जाएगा।
इसके अलावा 9 से 14 साल की बच्चियों को सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए HPV टीका भी लगाया जाएगा। इसके साथ 591 स्थलों पर आयुष्मान कार्ड बनाने के लिए समर्पित स्टॉल लगाए जाएँगे, जहां लाभार्थी आसानी से अपना आयुष्मान कार्ड बनवा सकेंगे।
आँगनवाड़ी में मनाया जाएगा पोषण माह
स्वस्थ नारी सशक्त परिवार अभियान के तहत देशभर के आँगनवाड़ी केंद्रों में पोषण माह भी मनाया जाएगा, जिसमें महिलाओं और बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य जागरूकता पर ध्यान दिया जाएगा। इस दौरान महिलाओं और बच्चों को संतुलित आहार, स्वच्छता और स्वस्थ जीवनशैली से जुड़ी जानकारी दी जाएगी।
इनमें महिलाओं को जागरूक किए जाएगा कि कैसे चीनी और खाद्य तेलों में 10 प्रतिशत की कमी के साथ मोटापा कम कर सकते हैं। इसके अलावा छोटे बच्चों की देशखभाल और शिशु के आहार से संबंधित आचरण पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। महिलाओं को मासिक धर्म स्वच्छता और पोषण की जानकारी दी जाएगी। साथ टेक होम राशन (THR) वितरित किया जाएगा।
BJP अध्यक्ष जेपी नड्डा की अभियान से जुड़ने की अपील
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने एक्स पर पोस्ट में स्वस्थ नारी सशक्त परिवार अभियान से जुड़ने की अपील की। जेपी नड्डा ने निजी अस्पतालों, स्वास्थ्य विशेषज्ञों और अन्य स्टेक होल्डर्स से भी इस राष्ट्रव्यापी अभियान में भाग लेने की अपील की है।
Hon’ble Prime Minister Shri @NarendraModi ji will launch the Swasth Nari Sashakt Parivar Abhiyaan on 17th September 2025. This initiative aims to strengthen healthcare services for women and children across India, ensuring better access, quality care, and awareness.
उन्होंने कहा, “विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए हम सभी को मिलकर प्रयास करने होंगे। भारत को सर्वोपरि मानते हुए, आइए हम इस सामूहिक प्रयास का हिस्सा बनें।”
बिहार में RJD की माई-बहिन मान योजना के नाम पर महिलाओं के साथ ठगी किए जाने का गंभीर मामला सामने आया है। दरभंगा जिले में गुड़िया देवी नामक से 2500 रुपए हर महीने मिलने का लालच देकर 200 रुपए की ठगी की गई है। पुलिस ने महिला की शिकायत पर इस मामले में विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव समेत 4 नेताओं के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है।
माई-बहिन योजना के नाम पर महिलाओं को कैसे ठगा?
ऑपइंडिया ने इस मामले में पीड़िता गुड़िया देवी से बातचीत की है। गुड़िया देवी आशा कार्यकर्ता हैं और पशुपालन का काम करती हैं। उन्होंने इस पूरी घटना को सिलसिलेवार तरीके से बताया है। उन्होंने बताया कि 2-3 दिन पहले RJD का एक कार्यकर्ता उनके पास आया था और उसने माई-बहिन योजना का फॉर्म भरने को कहा था।
गुड़िया देवी ने हमें बताया, “एक आदमी आया और RJD कार्यकर्ता बोलकर हमसे जानकारी माँगने लगा। कहने लगा कि माई-बहिन योजना का फॉर्म भरवा लीजिए, आपको अगले महीने से 2500 रुपए, हर महीने मिलने शुरू हो जाएँगे।”
उन्होंने बताया, “उसने हमसे हमारा मोबाइल लिया और आधार कार्ड व बैंक खाता माँगा। उसने फॉर्म भरने के बाद OTP आने की बात कही थी।” गुड़िया ने आगे बताया, “इसके बाद उसने कहा कि आपको इस फॉर्म के 200 रुपए देने होंगे।”
जब गुड़िया ने उसे ऑनलाइन पैसे देने की बात कही तो युवक ने इनकार कर दिया। इसके बाद गुड़िया ने उसे 200 रुपए नकद दिए जिन्हें लेते ही वह चला गया। कुछ देर बाद जब गुड़िया के पति मिथलेश घर आए तो उन्होंने इसकी जानकारी अपने पति को दी।
गुड़िया ने कहा, “मेरे पति यह बात सुनकर गुस्सा हो गए कि यह फ्रॉड हो सकता है। उन्होंने इस मामले की शिकायत पुलिस में देने को कहा जिसके बाद हमने तेजस्वी यादव और अन्य लोगों के खिलाफ शिकायत दी।”
‘अब धमका रहे RJD के लोग, बाहर जाने में भी लग रहा डर’
गुड़िया ने बताया कि शिकायत देने के बाद अब RJD के लोग उन्हें शिकायत वापस लेने के लिए धमका रहे हैं। गुड़िया ने कहा, “मैं आशा वर्कर का काम करती हूँ और मुझे घर से बाहर जाना पड़ता है। अब मुझे घर से बाहर निकलने में भी डर लगा रहा है कि कहीं हमारे ऊपर कोई हमला ना कर दे।”
गुड़िया ने अपनी शिकायत में कहा, “घर आए लोगों ने मुझसे और महिलाओं को बुलाने कहा था और सभी महिलाओं से आधार कार्ड, मोबाइल नंबर और 200 रुपया देने को कहा था।”
गुड़िया द्वारा दी गई शिकायत
शिकायत नहीं लेंगे वापस: गुड़िया के पति
गुड़िया के पति मिथलेश ऑटो चालक हैं। मिथलेश ने ऑपइंडिया से कहा, “मैं ऑटो चलाता हूँ तो बाहर रहना होता है। मुझे भी बाहर जाने में खतरा है, लोगों का दबाव भी है लेकिन अब शिकायत वापस नहीं लेंगे।”
उन्होंने गुस्से भरे लहजे में कहा, “अगर गुंडों से डरकर शिकायत वापस लेनी होती तो शिकायत क्यों ही करते।” उनका कहना है कि उन्हें आधार कार्ड के नंबर माँगने पर शक हुआ था और इससे फ्रॉड होने का पूरा खतरा था।
वहीं, पीड़ित परिवार का कहना है कि गाँव के अन्य लोगों के साथ भी ऐसा फ्रॉड किया गया है लेकिन वो डरे हुए हैं और डर से बाहर आकर अपनी बात नहीं कह पा रहे हैं।
FIR में तेजस्वी के अलावा किसका नाम?
दरभंगा जिले के सिंघवाड़ा थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318 (4), 3 (4) के तहत पुलिस ने FIR दर्ज की है। पुलिस ने इसमें नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के साथ-साथ मशकुर अहमद उस्मानी (पूर्व प्रत्याशी जाले विधान सभा), संजय यादव (सांसद राज्यसभा) और ऋषि मिश्रा (पूर्व विधायक जाले) को आरोपित बनाया है।
FIR में गुड़िया के हवाल से लिखा गया है, “पति (मिथलेश) के बताने पर हम लोगों को पता चला की हम लोग ठगे गए है और उसके पीछे RJD के बड़े कद्दावर नेता का हाथ है उनके ही द्वारा मासूम जनता को ठगने की योजना बनाई गई है।”
पुलिस द्वारा दर्ज की गई FIR का हिस्सा
पुलिस ने क्या बताया?
ऑपइंडिया ने इस मामले में सिंघवाड़ा थाने के SHO बसंत कुमार से भी बात की है। बंसत कुमार ने बताया कि FIR दर्ज कर मामले की जाँच शुरू कर दी गई है। उनका कहना है कि जल्द से इससे जुड़े लोगों से पूछताछ की जाएगी। पुलिस को इस मामले में और पीड़ित मिलने का भी शक है।
पहले भी मिली हैं माई-बहिन योजना को लेकर शिकायतें
बिहार में इस योजना के लॉन्च होने के बाद से ही यह विवादों में है। कभी इसे लेकर RJD-कॉन्ग्रेस में राजनीति रस्सा-कशी की शिकायतें मिलीं तो कहीं लोगों को बरलाए जाने के आरोप लगे हैं। इससे पहले सामने आया था कि आरजेडी और कॉन्ग्रेस ने माई बहिन मान योजना के फॉर्म भरवाने के लिए जिन लोगों को काम पर लगाया है, उनके पास कोई अथॉरिटी नहीं है।
ये लोग बिहार में लोगों के पास जाकर उनसे आधार कार्ड माँग रहे थे, NDA के नेताओं ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई थी। जिसके बाद यह योजना लगातार विवादों में है। इसे बीजेपी के नेताओं ने बड़ा घोटाला बताया है।
असम पुलिस ने आय से अधिक संपत्ति रखने के आरोप में असम सिविल सेवा (ACS) की एक अधिकारी नूपुर बोरा को गिरफ्तार कर लिया है। मुख्यमंत्री की स्पेशल विजलेंस सेल के अधिकारियों की एक टीम ने बोरा के गुवाहाटी स्थित आवास पर छापेमारी कर 90 लाख रुपए से अधिक नकद और करीब 1 करोड़ रुपए के गहने जब्त किए थे।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बारपेटा में उनके किराए के घर से 10 लाख रुपए जब्त किए गए हैं। 2019 में असम सिविल सेवा की अधिकारी बनीं गोलाघाट निवासी नूपुर बोरा वर्तमान में कामरूप जिले के गोरोइमारी में सर्कल अधिकारी के तौर पर तैनात थीं। इससे पहले वह बारपेटा और कार्बी आंगलोंग में सर्कल ऑफिसर के तौर पर काम कर चुकी हैं।
हिंदुओं की जमीन मुस्लिमों को देने का आरोप
नूपुर बोरा पर आरोप है कि उन्होंने बारपेटा में तैनाती के समय करोड़ों रुपए की जमीन के दस्तावेज अवैध रूप से ट्रांसफर किए थे। आरोप है कि बोरा ने सरकारी और सत्रा (धार्मिक ट्रस्ट) की जमीन भी संदिग्ध लोगों के नाम की थी।
इनमें से अधिकतर जमीनें हिंदुओं की थी जिन्हें मुस्लिमों के नाम किया गया था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने सरकारी जमीनों को अवैध रूप से संदिग्ध घुसपैठियों के नाम पर दर्ज करवा दिया थी। साथ ही, बोरा के बारपेटा और गोलाघाट में कई बैंक लॉकर हैं और उनकी भी अब सतर्कता अधिकारियों द्वारा जाँच की जा रही है।
क्या बोले CM हिमंता?
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा, “सरकार को सूचना मिली है कि यह अधिकारी हिंदुओं की जमीन एक विशेष समुदाय को हस्तांतरित कर रही थी।” सीएम ने कहा कि नूपुर बोरा पर जमीन की अनियमितताओं को लेकर मिली शिकायतों के चलते पिछले छह महीनों से नजर रखी जा रही थी।
उन्होंने कहा, “अधिकारी ने हिंदुओं की जमीन को संदिग्ध लोगों को ट्रांसफर किया था। जिसके चलते उन पर नजर रखी जा रही थी। उन्होंने बारपेटा में तैनाती के दौरान पैसों के जमीन ट्रांसफर का काम किया था।”
असम सरकार की एक अधिकारी के खिलाफ अवैध धन प्राप्त करने के मामले में कार्रवाई जारी है।
सरकार को सूचना मिली है कि यह अधिकारी हिंदुओं की ज़मीन एक विशेष समुदाय को हस्तांतरित कर रही थी। pic.twitter.com/giYYtf0z7r
स्पेशल विजिलेंस सेल ने बोरा से जुड़े लोगों के ठिकानों पर भी छापेमारी शुरू कर दी है। सेल ने बोरा के कथित सहयोगी लाट मंडल सुरजीत डेका के बारपेटा स्थित आवास पर भी छापेमारी की है। डेका पर आरोप है कि उसने बोरा के साथ मिलकर कई बारपेटा में कई जमीनें खरीदी थीं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुलिस इस मामले में आगे की जाँच कर रही है, और भ्रष्टाचार के इस मामले में बोरा से जुड़े अन्य लोगों की संलिप्तता को लेकर भी जाँच हो सकती है।
अमेरिका की जेल में बंद ‘लेडी अलकायदा’ आफिया सिद्दीकी की रिहाई की माँग नए सिरे से की जा रही है। वह एक पाकिस्तानी न्यूरोसाइंटिस्ट हैं, जिस पर अमेरिकी सैनिकों पर गोलीबारी करने, अमेरिकी सैनिकों को मारने की कोशिश करने और एक हमले की साजिश रचने का दोषी पाया गया था। उसे 86 साल जेल की सजा मिली थी। वह फिलहाल टेक्सास के फोर्ट वर्थ के जेल में बंद है।
‘लेडी अल-क़ायदा’ आफिया सिद्दीकी कौन है?
कभी एमआईटी से प्रशिक्षित एक प्रतिभाशाली न्यूरोसाइंटिस्ट आफ़िया सिद्दीकी की कहानी जिहाद, आतंकी साजिशों और 86 साल की अमेरिकी जेल की सजा तक पहुँच चुकी है। हालाँकि पाकिस्तान उसे अपने ‘मुल्क की बेटी’ कहता है। उसकी रिहाई को लेकर चल रहे इस्लामी दुष्प्रचार और वैश्विक अभियानों को भी उसने शह दी है।
एक पाकिस्तानी न्यूरोसाइंटिस्ट से लेकर कुख्यात ‘लेडी अलकायदा’ बनने के बावजूद वह पाकिस्तानी नेताओं और मानवाधिकार संगठनों का समर्थन हासिल करती रही हैं। सिद्दीकी को 2010 में न्यूयॉर्क कोर्ट ने अफगानिस्तान में अमेरिकी अधिकारियों की हत्या के प्रयास का दोषी पाया था।
ऑपरेशन सिंदूर में करारी हार के बाद जब अप्रैल 2025 में पाकिस्तानी फील्ड मार्शल असीम मुनीर अमेरिका गए, तो पाकिस्तान के आफिया समर्थकों को उम्मीद थी कि वह राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के सामने उसकी रिहाई की बात करेंगे। लेकिन मुनीर ने इस मुद्दे को नहीं उठाया।
قوم کی عزت، فیلڈ مارشل جنرل عاصم منیر کے ہاتھ میں ہے۔
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन ने भी इससे पहले आफ़िया सिद्दीकी को माफी देने से इनकार कर दिया था। अमेरिकी सरकार ने इस्लामाबाद उच्च न्यायालय को सूचित किया कि सिद्दीकी की क्षमा याचिका को खारिज कर दी गई है।
पाकिस्तान में आफिया सिद्दीकी के मामले की सुनवाई के लिए गठित इस्लामाबाद उच्च न्यायालय की बेंच को भंग कर दिया गया , क्योंकि न्यायमूर्ति इनाम अमीन मिन्हास ने याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया और एक बड़ी पीठ के गठन करने का अनुरोध किया। यह याचिका आफिया सिद्दीकी की बहन फौजिया सिद्दीकी ने दायर की थी। इससे पहले, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और उनके मंत्रिमंडल को पिछली अदालती आदेशों का पालन करने और मामले में अपना जवाब दाखिल नहीं करने पर अवमानना नोटिस जारी किया गया था।
मानवाधिकार उल्लंघन की शिकार या इस्लामी आतंकवादी?
आफिया सिद्दीकी पाकिस्तानी मूल की 52 वर्षीय आतंकवादी हैं। कराची में जन्मी सिद्दीकी 1990 में छात्र वीजा पर अमेरिका आई थीं। उसने एमआईटी से जीव विज्ञान में स्नातक और 2001 में ब्रांडीज विश्वविद्यालय से तंत्रिका विज्ञान में पीएचडी की। आफिया की माँ एक इस्लामी शिक्षिका और राजनीतिज्ञ थी और उनके पिता एक न्यूरोसर्जन थे। बोस्टन में आफ़िया सिद्दीकी अल-किफा केंद्र सहित इस्लामी ‘धर्मार्थ संस्थाओं’ के साथ जुड़ गई, जिसका संबंध अलकायदा से पाया गया था। सिद्दीकी ने 9/11 के इस्लामी आतंकवादी हमले के बाद भी अमेरिका विरोधी बयान दिया था। उसने जिहाद के प्रति अपना समर्थन भी व्यक्त किया था।
एफबीआई ने सिद्दीकी और उनके तत्कालीन पति अमजद खान से कुछ किताबों की खरीदारी को लेकर पूछताछ की थी। दोनों ने नाइट विज़न गॉगल्स, विस्फोटकों से संबंधित मैनुअल, बॉडी आर्मर और ‘द एनार्किस्ट्स आर्सेनल’ सहित 45 किताबें खरीदी थी। एफबीआई को दिए इंटरव्यू में अमजद खान ने दावा किया कि उन्होंने ये किताबें शिकार के लिए लाया था। एफबीआई जाँच के दौरान, आफिया और उसके पति का तलाक हो गया और वह अपने तीन बच्चों के साथ पाकिस्तान लौट आई।
सिद्दीकी और उसके बच्चे मार्च 2023 में पाकिस्तान के कराची में गायब हो गए। पाकिस्तानी अधिकारियों ने उसके कथित अल-कायदा संबंधों पर पूछताछ के लिए उसे हिरासत में लेने की बात मानी थी। लेकिन बाद में उसकी अलकायदा से जुड़े होने की बात से इनकार कर दिया। मई 2004 में, अमेरिकी एफबीआई ने आफिया सिद्दीकी को पहली महिला ‘मोस्ट-वांटेड’ आतंकवादी बताते हुए अलर्ट जारी किया। एफबीआई के मुताबिक वह एक अलकायदा आतंकवादी और कूरियर थी।
2003 और 2008 के बीच उसका ठिकाना बदलता रहा। सिद्दीकी का समर्थन करने वाली एक पत्रकार, यवोन रिडले ने दावा किया कि आफिया का अपहरण किया गया और बगराम एयर बेस पर गुप्त तरह से रखकर प्रताड़ित किया गया। हालाँकि अमेरिकी न्याय विभाग ने कहा कि वह अल-कायदा जिहादी आतंकवादी और 9/11 के मास्टरमाइंड खालिद शेख मोहम्मद के परिवार के साथ अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमावर्ती इलाकों में छिपी थी।
सिद्दीकी ने बाद में खालिद शेख के भतीजे से निकाह कर ली। उसका नाम अम्मार अल-बलूची है। आफिया की बहन फौजिया सिद्दीकी ने निकाह से इनकार किया, लेकिन पाकिस्तानी और अमेरिकी खुफिया एजेंसियों, अल-बलूची के परिवार और खुद आफिया ने निकाह की पुष्टि की।
2008 में अफगान अधिकारियों ने उसे हिरासत में ले लिया। न्याय विभाग के अनुसार, उसके पास से कई चीजें मिलीं। इनमें हमले का जिक्र करते हुए हाथ से लिखा हुआ एक नोट भी शामिल था। उसके पास से अमेरिका के प्लम आइलैंड, एम्पायर स्टेट बिल्डिंग, स्टैच्यू ऑफ़ लिबर्टी, वॉल स्ट्रीट और ब्रुकलिन ब्रिज जैसे कई अहम इमारतों की लिस्ट भी थी।
2008 में एफबीआई के विशेष एजेंट मेहताब सैयद के अनुसार, अफगानिस्तान राष्ट्रीय पुलिस के अधिकारियों ने सिद्दीकी को एक लड़के के साथ गजनी के गवर्नर के परिसर में देखा था। अफगानिस्तीनी पुलिस ने सिद्दीकी से स्थानीय बोलियों, दारी और पश्तो में पूछताछ भी की, लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया। चूँकि सिद्दीकी उर्दू में बात कर रही थी, इसलिए अधिकारियों को लगा कि वह विदेशी है।
एएनपी अधिकारियों ने उसके पर्स की तलाशी ली। इसमें कई विवादित दस्तावेज मिले। इसमें विस्फोटकों, रासायनिक और जैविक हथियारों के निर्माण से संबंधित थे। आफिया सिद्दीकी के दस्तावेजों में न्यूयॉर्क सहित संयुक्त राज्य अमेरिका के अहम स्थलों की जानकारी भी थी।
सिद्दीकी के सामानों में अमेरिकी सैन्य संपत्तियों से जुड़ी जानकारी और एक गीगाबाइट डिजिटल मीडिया स्टोरेज डिवाइस (थंब ड्राइव) मिले। उसके पास बोतलों में भरे हुए जेल और लिक्विड कैमिकल भी मिले।
18 जुलाई 2008 को, दो FBI एजेंट और एक अमेरिकी सैन्य दुभाषिया सिद्धीकी से मिलने अफगानिस्तान पहुँचे। इस दौरान अमेरिकी अधिकारी की राइफल छीनकर उसे अधिकारी पर ही तान दिया और अंग्रेजी में चिल्लाते हुए कहा कि ‘यहाँ से निकल जाओ’ और गोली चला दी।
इस दौरान सिद्दीकी को काबू में करने के लिए पैर पर गोली मारी गई। वह ‘अल्लाहु अकबर’ कहते हुए अधिकारियों पर लात-घूँसे से हमला करने की कोशिश कर रही थी। वह अंग्रेजी में चिल्ला रही थी कि वह अमेरिकियों को मारना चाहती है। उसने कहा, “मैं आप सभी अमेरिकियों को मार डालूँगी।”
आफिया सिद्दीकी के बेहोश होने के बाद उसे डॉक्टर के पास ले जाया गया। सिद्दीकी पर हत्या के प्रयास, हमले और हथियार रखने को लेकर केस दर्ज किया गया।
वेबसाइट पर आफिया सिद्दीकी की स्टोरी, लेख और तस्वीर मौजूद हैं। इसमें बताया गया है कि कैसे एक शिक्षित पाकिस्तानी-मुस्लिम महिला के साथ ‘जुर्म’ हो रहा है। इसमें बताया गया है कि कुरान कंठस्थ करने वाली ‘हाफिजा’ आज जेल में बंद है। अमेरिकी अधिकारियों ने ‘आतंकवाद के विरुद्ध युद्ध’ के नाम पर ‘पीड़ित’ किया और ‘अत्याचार’ का शिकार बनाया। ऐसा ही एक वेबसाइट ‘द आफिया फाउंडेशन’ भी है।
2023 में, फ़ौजिया सिद्दीकी और वकील क्लाइव स्टैफोर्ड स्मिथ ने कहा कि आफ़िया ‘अमेरिका के लिए कोई विशेष महत्व नहीं रखती’ और पाकिस्तान सरकार ने उसे वापस लाने के लिए पर्याप्त प्रयास नहीं किए। स्मिथ ने तो आफ़िया की जगह शकील अफ़रीदी को लाने की भी वकालत की थी। अफरीदी अलकायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन का पता लगाने में अमेरिका की मदद करने के आरोप में कई वर्षों से पाकिस्तान की जेल में बंद हैं। लादेन 2012 में एबटाबाद में मारा गया था। पाकिस्तानी सरकार ने आफिया- अफरीदी की ‘अदला-बदली’ के लिए कोई कोशिश नहीं की।
वर्तमान में, आफ़िया आंदोलन आफ़िया सिद्दीकी की जेल से रिहाई के लिए शुरू किया गया है। इसे सोशल मीडिया, साक्षात्कारों, सेमिनारों, जागरूकता अभियानों और दूसरे माध्यमों से चलाया जा रहा है। मजेदार बात यह है कि इस्लामी आतंकवादी ग्रुप, इस्लामी समर्थक ग्रुप, इस्लामी समर्थक ‘मानवाधिकार’ ग्रुप सिद्दीकी की कैद को ‘अन्याय’ और ‘अपमान’ बता रहे हैं, वहीं आफिया का परिवार अलकायदा या किसी भी इस्लामी आतंकवादी समूह से उसके संबंधों से पूरी तरह इनकार कर रहा है।
आफिया सिद्दीकी एक घोर यहूदी विरोधी हैं। अपने मुकदमे के दौरान भी उन्होंने यह दावा करके कार्यवाही में बाधा डाली कि उनके खिलाफ एक यहूदी साजिश रची जा रही है। उन्होंने जूरी सदस्यों के डीएनए परीक्षण की भी माँग की। उन्होंने कहा कि अगर जस्टिस इजराइली या ‘जायोनी’ है, तो मुकदमा निष्पक्ष नहीं होगा।
इस्लामवादी आफ़िया सिद्दीकी की रिहाई की माँग तेज
पाकिस्तान और अमेरिका, दोनों में कई ‘मानवाधिकार’ समर्थक ग्रुप और इस्लामी संगठन आफ़िया सिद्दीकी को ‘पीड़ित’ बताते हैं। 2022 में सिद्दीकी की रिहाई की माँग करने वाले व्यक्ति अकरम ने टेक्सास में एक यहूदी पूजास्थल पर आतंकी हमला किया था। ये हमला 15 जनवरी 2022 को कोलीविले में बेथ इजराइली धर्मसमाज में हुआ था। इस दौरान कई यहूदियों को बंधक बना लिया गया और इन बंधकों को मुक्ति के एवज में आफिया सिद्दीकी की जेल से रिहाई की माँग की गई।
आतंकियों ने सिद्दीकी को कैद किये गए फेडरल मेडिकल सेंटर कार्सवेल के पास मौजूद यहूदी पूजा स्थल को निशाना बनाया था। जिहादी अकरम ने जब चार लोगों को बंधक बनाया, उस वक्त यहूदी कार्यक्रम का सीधा प्रसारण हो रहा था। अकरम ने वहाँ खड़े होकर जिहादी भाषण दिए। करीब 10 से 11 घंटे के बाद अमेरिकी अधिकारियों ने आतंकियों पर काबू पाया और बंधकों को सुरक्षित बचा लिया गया। इस दौरान अमेरिकी पुलिस ने अकरम को गोली मारी।
एफबीआई ने इसे आतंकी और यहूदी-विरोधी के साथ-साथ इस्लामी जिहादी कट्टरपंथियों द्वारा किया गया अपराध बताया अकरम की छानबीन के दौरान आफिया सिद्दीकी से जुड़ी जानकारी भी पुलिस के हाथ लगी।
2014 में, इस्लामिक स्टेट (आईएसआईएस) ने अमेरिकी बंधकों, पत्रकार जेम्स फोले और मानवाधिकार कार्यकर्ता कायला मुलर के बदले सिद्दीकी की रिहाई की माँग की थी। हालाँकि अमेरिका ने हमेशा इन प्रस्तावों को खारिज कर दिया और फोले और मुलर दोनों को अलग-अलग घटनाओं में आईएसआईएस जिहादियों ने मार डाला।
‘काफ़िरों’ को मारने की कसम खाने वाले इस्लामी आतंकवादी समूहों ने सिद्दीकी की रिहाई की माँग की है और उसे मुस्लिम ‘पीड़ित’ बताया है। इस्लामवादियों के प्रति सहानुभूति रखने के लिए अंतर्राष्ट्रीय ‘मानवाधिकार’ समूहों ने भी सिद्दीकी की रिहाई की वकालत की है।
यहाँ तक कि पाकिस्तानी सरकारों और नेताओं ने भी सिद्दीकी की रिहाई की वकालत की है। पाकिस्तानी सीनेट ने 2018 के एक प्रस्ताव में ‘लेडी अल-क़ायदा’ आफ़िया सिद्दीकी को ‘पाकिस्तान की बेटी’ कहा था।
2010 में तत्कालीन प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी से लेकर पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ तक ने सिद्दीकी की रिहाई के लिए अमेरिका से पैरवी की है। अलकायदा आतंकवादी की रिहाई के लिए प्रस्ताव, बयानबाजी और आग्रह वर्षों से पाकिस्तान की रणनीति रहे हैं। पिछले वर्ष पाकिस्तान के सीनेटरों का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल सिद्दीकी की रिहाई की माँग के लिए अमेरिका गया था।
साल 2024 में, प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन को मानवीय आधार पर उसकी रिहाई के लिए एक पत्र लिखा था। हालाँकि, बाइडेन ने शरीफ़ के अनुरोध को अस्वीकार कर दिया।
इस साल जुलाई में, पाकिस्तानी विदेश मंत्री इशाक डार ने आफ़िया सिद्दीकी के मामले की तुलना जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के मामले से करके विवाद खड़ा कर दिया था और इसे ‘उचित प्रक्रिया’ का मामला बताया था।
हाल ही में, आफ़िया सिद्दीकी के वकील क्लाइव स्टैफ़ोर्ड स्मिथ ने कहा कि वह न्यूयॉर्क में एक नई अपील दायर करने की योजना बना रहे हैं। उनका दावा है कि उन्हें घटना के वीडियो सबूत मिले हैं जो कथित तौर पर अभियोजन पक्ष के आरोपों को खारिज करते हैं।
वकील क्लाइव स्टैफ़ोर्ड स्मिथ और आफिया सिद्दीकी
इसके अलावा, जिहादी समूहों, पाकिस्तान सरकार, अमेरिका और ब्रिटेन स्थित ‘मानवाधिकार’ और इस्लामी समूहों जैसे सीएआईआर, एमनेस्टी इंटरनेशनल, केज इंटरनेशनल, कोड पिंक आदि ने ‘लेडी अल-कायदा’ की रिहाई की वकालत की है।
गौरतलब है कि टेक्सास सिनेगॉग हमले से ठीक दो महीने पहले, सीएआईआर इंटरनेशनल (अमेरिकी-इस्लामिक संबंध परिषद) ने सिद्दीकी की रिहाई की माँग की थी और उसके समर्थन में कार्यक्रम और रैलियाँ आयोजित की थी। सीएआईआर टेक्सास डीएफडब्ल्यू सिद्दीकी के समर्थन में कई ऑनलाइन और ऑफलाइन अभियान चलाता है और सजा के खिलाफ उनकी कानूनी लड़ाई के लिए धन भी जुटाता है।
ऑपइंडिया ने पहले सीएआईआर इंटरनेशनल की हिंदू-विरोधी प्रवृत्ति, क्राउडफंडिंग घोटाले की आरोपित ‘पत्रकार’ राणा अय्यूब के प्रति उनके समर्थन और बेहद हिंदू-विरोधी ‘डिसमेंटलिंग ग्लोबल हिंदुत्व’ सम्मेलन को उनके समर्थन के बारे में रिपोर्ट छापी थी।
2022 में, रटगर्स विश्वविद्यालय और नेटवर्क कॉन्टैगियन रिसर्च इंस्टीट्यूट (एनसीआरआई) ने एक रिपोर्ट प्रकाशित किया। इसमें दिखाया गया कि टेक्सास में यहूदी पूजास्थल पर हमले से पहले ‘फ्री आफ़िया मूवमेंट’ को लेकर ट्विटर पर अभियान चलाया गया। अलजजीरा और क्रिसेंट इंटरनेशनल जैसे इस्लामी प्रचार माध्यम भी आफ़िया सिद्दीकी के पक्ष में बोल रहे हैं।
आफ़िया सिद्दीकी की बहन डॉ. फ़ौज़िया सिद्दीकी भी ‘आफ़िया मूवमेंट’ चला रही हैं। उनकी वेबसाइट के अनुसार, “आफिया मूवमेंट एक अंतरराष्ट्रीय पहल है जो डॉ. आफिया सिद्दीकी के लिए न्याय और स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए समर्पित है, जो एक पाकिस्तानी-मुस्लिम महिला है और वर्तमान में अमेरिकी संघीय जेल में 86 साल की अन्यायपूर्ण सजा काट रही है।”
(यह लेख मूल रूप से अंग्रेजी में लिखा गया है। इसे पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें)
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (15 सितंबर 2025) को जामनगर गुजरात में रिलायंस फाउंडेशन के वंतारा को क्लीन चिट दे दी है। कोर्ट ने कहा कि इस ‘ग्रीन्स जूलॉजिकल रेस्क्यू एंड रिहैबिलिटेशन सेंटर’ द्वारा जानवरों को लिया जाना कानून के दायरे में है।
इससे पहले वंतारा में कथित अनियमितताओं के आरोपों की जाँच के लिए विशेष जाँच दल (SIT) का गठन किया गया था। कोर्ट ने उसकी रिपोर्ट पर भी यह फैसला दिया है।
जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस पी.बी. वराले की बेंच ने कहा कि रिपोर्ट में साफ है कि सभी जानवरों की खरीद जिसमें हाथी भी शामिल हैं नियमों और कानून के हिसाब से की गई है। जस्टिस मित्तल ने रिपोर्ट पढ़ते हुए कहा, “जानवरों की खरीद पूरी तरह नियमानुसार की गई है।”
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार कोर्ट ने साफ कर दिया कि SIT को जाँच में कहीं भी गड़बड़ी नहीं मिली चाहे जानवर भारत के अंदर से लाए गए हों या विदेश से लिए गए हों।
बेंच ने कहा कि उन्होंने सुनवाई से पहले रिपोर्ट को अच्छे से नहीं पढ़ा क्योंकि वे इसे खुले तौर पर अदालत में ही देखना चाहते थे। सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे जो वंतारा की तरफ से पेश हुए और याचिकाकर्ता के वकील मौजूद थे।
जस्टिस मित्तल ने कहा कि जानवरों की खरीद नियमानुसार की गई है और कोर्ट रिपोर्ट को आदेश का हिस्सा बनाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि आदेश चैंबर में पारित किए जाएँगे और उसके बाद मामला बंद कर दिया जाएगा।
रिपोर्ट सार्वजनिक करने को लेकर वकीलों ने उठाए सवाल
मेहता और साल्वे दोनों ने कोर्ट से कहा कि SIT की रिपोर्ट को सार्वजनिक न किया जाए। उन्होंने कहा कि पहले से ही तरह तरह की बातें चल रही हैं और रिपोर्ट सार्वजनिक होने पर और ज्यादा अटकलें शुरू हो जाएँगी। साल्वे ने कहा कि जानवरों की देखभाल से जुड़ी कुछ गोपनीय बातें होती हैं। जस्टिस मित्तल ने कहा कि कोर्ट आदेश लंच के समय चैंबर में देगा और उसके बाद मामला बंद कर दिया जाएगा।
साल्वे ने कहा, “जब कमेटी आई तो वंतारा का पूरा स्टाफ मौजूद था सब कुछ दिखाया गया। लेकिन कुछ देखभाल से जुड़ी बातें होती हैं कि जानवरों को कैसे रखा जाता है। इस पर काफी पैसा और विशेषज्ञ लगाए गए हैं। यह सुविधा विश्व स्तर की है। लेकिन एक नकारात्मक कहानी बनाने की कोशिश चल रही है। अगर पूरा रिकॉर्ड बाहर आ गया तो कल न्यूयॉर्क टाइम्स या टाइम्स मैगजीन जैसी जगहों पर और लेख छपेंगे।”
जस्टिस मित्तल ने सख्त लहजे में कहा कि अब जबकि स्वतंत्र विशेषज्ञों ने सब कुछ जाँच लिया है तो बेवजह शक नहीं उठने दिया जाएगा। उन्होंने कहा, “हम कमेटी की रिपोर्ट से संतुष्ट हैं उन्होंने विशेषज्ञों की मदद से जाँच की है और जो रिपोर्ट दी है हम उसी पर चलेंगे। सभी विभाग रिपोर्ट की सिफारिशों पर कार्रवाई करने को स्वतंत्र हैं और अब कोई बार बार सवाल नहीं उठा सकेगा।”
कोर्ट ने कहा- अब वंतारा पर खत्म हो विवाद
बेंच ने यह भी कहा कि सिर्फ विवाद खड़ा करने के लिए आरोप नहीं लगाने चाहिए। जस्टिस मित्तल ने कहा, “कुछ चीजें देश का गर्व होती हैं उन पर बेवजह हल्ला नहीं मचाना चाहिए। देश के लिए अच्छी चीजें हो रही हैं तो हमें खुश होना चाहिए। अगर हाथियों की खरीद कानून के हिसाब से है तो इसमें दिक्कत क्या है।”
उन्होंने कहा कि मंदिरों में भी हाथी उत्सव और दशहरा जैसे जुलूसों में इस्तेमाल होते हैं और अगर यह परंपरा स्वीकार है तो फिर जब हाथी कानूनन किसी रेस्क्यू और रिहैबिलिटेशन सेंटर में लाए जाते हैं तो आपत्ति क्यों उठाई जाती है।
कोर्ट ने मंदिर के हाथी को शिफ्ट करने पर दाखिल एक नई याचिका भी स्वीकार नही की और कहा कि यह मामला पहले ही SIT की रिपोर्ट में कवर हो चुका है। बेंच ने SIT की तेजी से जाँच पूरी करने की सराहना की और कहा कि उसके सदस्यों को उनके काम के लिए सम्मान राशि दी जानी चाहिए।
इसके साथ ही कोर्ट ने साफ कर दिया कि वंतारा से जुड़े जानवरों की खरीद पर चल रहा विवाद अब खत्म होना चाहिए क्योंकि कहीं कोई गड़बड़ी नहीं पाई गई है।
क्या है वंतारा के विवाद की कहानी?
वंतारा को लेकर विवाद इस साल तब शुरू हुआ जब यह सवाल उठे कि जानवर खासकर हाथियों को रिलायंस फाउंडेशन के इस सेंटर में कैसे लाया जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स और कुछ एनजीओ ने आरोप लगाया कि जानवरों को यहाँ लाने में वन्यजीव संरक्षण कानून 1972 और अंतरराष्ट्रीय संधियों जैसे CITES का पालन नहीं किया जा रहा है।
जुलाई में कोल्हापुर के एक मंदिर से महादेवी नाम की हथिनी को जामनगर लाए जाने के बाद विवाद और बढ़ गया। 25 अगस्त 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने जाँच के लिए SIT बनाने का आदेश दिया जिसकी अगुवाई अपने पूर्व जज जस्टिस जे चेलमेश्वर को सौंपी गई।
इस SIT में उत्तराखंड और तेलंगाना हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस राघवेन्द्र चौहान, मुंबई पुलिस के पूर्व कमिश्नर हेमंत नगराले और वरिष्ठ कस्टम अधिकारी अनीश गुप्ता शामिल थे। एसआईटी को तुरंत जांच करके 12 सितंबर तक रिपोर्ट देने का आदेश दिया गया था।
एसआईटी को कई मुद्दों पर जाँच करनी थी जैसे वन्यजीव कानून और आयात निर्यात नियमों का पालन हुआ या नहीं, जानवरों की देखभाल के मानक क्या हैं, पानी और कार्बन क्रेडिट जैसे संसाधनों का दुरुपयोग तो नहीं हुआ, आर्थिक गड़बड़ी और तस्करी तक के आरोपों की भी जाँच की जानी थी।
कोर्ट ने उस समय कहा था कि याचिकाएँ ज्यादातर मीडिया रिपोर्ट्स और शिकायतों पर आधारित हैं और इनमें ठोस सबूत नहीं हैं। लेकिन आरोप गंभीर होने के कारण उसने तथ्य जानने के लिए जाँच कराना जरूरी समझा है।
अब जब SIT ने कोई गड़बड़ी नहीं पाई और सुप्रीम कोर्ट ने मामला बंद कर दिया तो अब मुद्दा फिर से वंतारा के काम पर जाएगा जिसे दुनिया के सबसे बड़े जानवरों के बचाव और पुनर्वास केंद्रों में गिना जाता है।
वंतारा ने रिपोर्ट पर क्या कहा?
वंतारा ने SIT की रिपोर्ट का स्वागत किया है। वंतारा ने कहा, “SIT की रिपोर्ट और SC का आदेश यह स्पष्ट करता है कि वंतारा के पशु कल्याण मिशन पर उठाए गए संदेह और आरोप निराधार थे। सत्य की पुष्टि न केवल वंतारा के सभी सदस्यों के लिए राहत है बल्कि एक आशीर्वाद भी है।”
वंतारा ने अपने बयान में कहा, “हम जीवन भर पशु और पक्षियों की रक्षा और देखभाल करुणा के साथ करते रहेंगे। जब हम जानवरों की देखभाल करते हैं, तो हम मानवता की आत्मा की भी देखभाल करते हैं।”
वंतारा में क्या-क्या है?
जामनगर स्थित वंतारा करीब 12.14 किमी में फैला है जो करीब 3000 एकड़ है। यह मुकेश अंबानी के बेटे अनंत अंबानी का ड्रीम प्रोजेक्ट है। भारत सरकार द्वारा वंतारा को ‘कॉरपोरेट’ श्रेणी में पशु कल्याण के लिए सर्वोच्च राष्ट्रीय पुरस्कार ‘प्राणी मित्र’ से सम्मानित किया जा चुका है।
इसका मकसद घायल जानवरों को बचाना और लुप्तप्राय जानवरों को बचाना है। यहाँ जानवरों की देखभाल के लिए हजारों कर्मचारी और डॉक्टर मौजूद हैं। वनतारा में एशिया का पहला वन्यजीव अस्पताल भी है, जिसमें CT स्कैन और MRI यूनिट्स हैं। साथ ही, यहाँ दुनिया का सबसे बड़ा और भारत का इकलौता पशु वन्यजीव क्वारंटाइन सेंटर भी है।
इसके अलावा वंतारा 48 से अधिक प्रजातियों के लिए दुनिया का सबसे बड़ा संरक्षण और प्रजनन केंद्र भी है। इसमें 2,000 से अधिक प्रजातियों और 1.5 लाख से ज्यादा बचाए गए संकटग्रस्त जानवर रहते हैं।
भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक रिश्ते पिछले कुछ महीनों से काफी तनावपूर्ण हो चुके थे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत से आने वाली चीजों पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने का ऐलान किया था, जिससे दोनों देशों की बातचीत रुक गई। लेकिन अब लगता है कि हालात बदल रहे हैं। अमेरिकी मुख्य वार्ताकार ब्रेंडन लिंच सोमवार रात (15 सितंबर 2025) से दिल्ली में हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, मंगलवार (16 सितंबर 2025) से दोनों देशों के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को लेकर बातचीत फिर से शुरू हो जाएगी। यह छठे दौर की वार्ता से पहले की तैयारी वाली मीटिंग होगी। भारत की तरफ से मुख्य वार्ताकार राजेश अग्रवाल हैं, जो वाणिज्य विभाग के स्पेशल सेक्रेटरी हैं। यह कदम दिखाता है कि अमेरिका अब नरम रुख अपना रहा है, जबकि भारत सरकार कड़ी सौदेबाजी करके अपने हितों की रक्षा करेगी।
भारत-अमेरिका में कैसे और कब बढ़ा तनाव, जानें- पूरी टाइमलाइन
सबसे पहले तो समझते हैं कि यह तनाव कैसे शुरू हुआ। इस साल मार्च में भारत और अमेरिका ने द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) की बातचीत शुरू की थी। मकसद था कि अक्टूबर-नवंबर 2025 तक पहले चरण को पूरा कर लिया जाए। तब तक पाँच दौर की वार्ता हो चुकी थी। लेकिन मुख्य समस्या यह थी कि अमेरिका भारत के कृषि और डेयरी बाजारों में घुसना चाहता था।
भारत ने साफ मना कर दिया, क्योंकि ये सेक्टर यहाँ लाखों लोगों की आजीविका का आधार हैं। साथ ही अमेरिकी डेयरी में जानवरों को GMO (जेनेटिकली मॉडिफाइड) फीड देने की बात है, जो भारत की संस्कृति, स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए ठीक नहीं लगती। भारत ने कहा कि हम अपने किसानों और छोटे डेयरी उत्पादकों को खतरे में नहीं डाल सकते।
इसके जवाब में ट्रंप प्रशासन ने पहले 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया। फिर भारत के रूस से तेल खरीदने की वजह से और 25 प्रतिशत जोड़ दिया, कुल 50 प्रतिशत हो गया। यह टैरिफ 27 अगस्त से लागू हो चुके हैं। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका के साथ व्यापार घाटा होने वाले देशों पर ऐसा ही करना पड़ेगा, ताकि ‘फेयर ट्रेड’ हो।
लेकिन भारत ने इन टैरिफ को ‘अनुचित’ बताया। इससे भारत का अमेरिका को निर्यात कम हो गया, खासकर कपड़ा, ज्वेलरी और फार्मा जैसी चीजों का। राजनीतिक स्तर पर भी तनाव बढ़ा। ट्रंप और उनके अधिकारियों ने भारत की व्यापार नीतियों की आलोचना की। छठा दौर 25-29 अगस्त को होना था, लेकिन टैरिफ की वजह से टल गया।
अब हाल ही में दोनों तरफ से नरमी के संकेत मिले हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्रंप के भारत-अमेरिका रिश्तों को ‘स्पेशल’ बताने पर धन्यवाद दिया। उन्होंने X (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट किया कि वे ट्रंप के विचारों की सराहना करते हैं और भारत-अमेरिका का रिश्ता एक व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी है। ट्रंप ने भी कहा कि मोदी के साथ उनका दोस्ताना रिश्ता हमेशा रहेगा और चिंता की कोई बात नहीं।
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने पिछले हफ्ते कहा कि दोनों देश सक्रिय संवाद में हैं और गिरावट तक डील हो सकती है। यह दिखाता है कि ट्रंप के सख्त तेवर अब काम नहीं आ रहे, इसलिए अमेरिका ने अपना मुख्य वार्ताकार भेजने का फैसला किया। भारत सरकार भी खुश है, क्योंकि इससे साफ है कि हमारी कड़ी नीति के सामने अमेरिका को झुकना पड़ रहा है।
ब्रेंडन लिंच की दिल्ली यात्रा इसी नई शुरुआत का हिस्सा है। वे अमेरिका के सहायक व्यापार प्रतिनिधि (दक्षिण और मध्य एशिया) हैं। उनका काम है इस क्षेत्र के 15 देशों के साथ अमेरिकी व्यापार नीति बनाना और लागू करना। इसमें भारत-अमेरिका व्यापार नीति फोरम का प्रबंधन भी शामिल है।
किन मुद्दों पर हैं मतभेद, अमेरिका को चाहिए भारतीय बाजार
लिंच मंगलवार को भारतीय अधिकारियों से मिलेंगे और बातचीत को आगे बढ़ाने की कोशिश करेंगे। लेकिन चुनौतियाँ अभी भी बरकरार हैं। अमेरिका अभी भी कृषि और डेयरी में एंट्री चाहता है, लेकिन हाल की रिपोर्ट्स के मुताबिक, वे अब बड़े बाजार की बजाय प्रीमियम चीज जैसे ब्लू-वेन, आर्टिसनल या पाउडर्ड चीज पर फोकस कर रहे हैं। भारत में ये चीजें सिर्फ 2-5 प्रतिशत अमीर लोगों द्वारा इस्तेमाल होती हैं।
भारत पहले से ही लिथुआनिया, एस्टोनिया, इटली और यूके से थोड़ी मात्रा में ऐसी चीज इंपोर्ट करता है, जिस पर 30-40 प्रतिशत ड्यूटी लगती है। पिछले वित्तीय वर्ष में करीब 10.8 मिलियन डॉलर की ऐसी चीजें आईं। अगर अमेरिका इसी छोटे सेगमेंट तक सीमित रहे, तो भारत सहमत हो सकता है, क्योंकि इससे हमारे छोटे किसानों को नुकसान नहीं होगा।
एक और मुद्दा है GMO वाले कृषि उत्पाद। भारत ने हमेशा GMO फूड को मना किया है, स्वास्थ्य और पर्यावरण की वजह से। लेकिन बातचीत में एक बीच का रास्ता निकल सकता है। पहले दौरों में चर्चा हुई थी कि भारत GMO कॉर्न को इथेनॉल बनाने के लिए इंपोर्ट करने की इजाजत दे सकता है। चूँकि ये सीधे इंसानों के खाने के लिए नहीं है, इसलिए सख्त नियम लागू नहीं होंगे।
इसी तरह GMO एनिमल फॉडर की भी बात चली। अगर अमेरिका इन छोटे समझौतों पर राजी हो जाता है, तो भारत भी कुछ रियायत दे सकता है। लेकिन 50 प्रतिशत टैरिफ हटाने का कोई साफ संकेत अभी नहीं है। शायद अगर बातचीत अच्छी चली, तो धीरे-धीरे टैरिफ कम हो जाएँ। भारत की तरफ से साफ है कि हम अपने संवेदनशील सेक्टरों की रक्षा करेंगे, लेकिन विन-विन सॉल्यूशन ढूँढेंगे।
भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता बेहद महत्वपूर्ण
इस बातचीत का महत्व बहुत बड़ा है। भारत और अमेरिका दोनों को एक-दूसरे से फायदा है। अमेरिका के लिए भारत एक बड़ा बाजार है और एशिया में रणनीतिक साझेदार। भारत के लिए अमेरिका तकनीक, निवेश और चीन के खिलाफ बैलेंस का स्रोत है। पिछले महीनों का तनाव दोनों को नुकसान पहुँचा रहा था। भारत का निर्यात प्रभावित हुआ, अमेरिका को भी भारतीय बाजार से वंचित रहना पड़ा।
अब अगर दोनों तरफ समझदारी बरती गई, तो अक्टूबर-नवंबर तक पहले चरण का समझौता हो सकता है। मोदी सरकार कड़ी सौदेबाजी करेगी, ताकि भारत के हित सुरक्षित रहें। ट्रंप प्रशासन को भी लग रहा होगा कि सख्ती से ज्यादा फायदा बातचीत से है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह डील सीमित लेकिन सार्थक हो सकती है, बिना किसी की लाल लकीर पार किए।
भारत सरकार का रुख साफ है। हम रूस से तेल खरीदना जारी रखेंगे, क्योंकि ऊर्जा सुरक्षा जरूरी है। लेकिन अमेरिका के साथ रिश्ते भी महत्वपूर्ण हैं। पीयूष गोयल ने कहा है कि हम संतुलित और पारस्परिक फायदे वाला समझौता चाहते हैं।
अगर अमेरिका प्रीमियम प्रोडक्ट्स पर अड़े रहता है और GMO को गैर-खाद्य उपयोग तक सीमित रखता है, तो रास्ता निकल सकता है। भारत पहले से ही कई देशों के साथ ऐसे समझौते कर चुका है। यह वार्ता न सिर्फ व्यापार को पटरी पर लाएगी, बल्कि दोनों देशों के बीच विश्वास बढ़ाएगी। वैश्विक हालात में जैसे चीन का बढ़ता प्रभाव, दोनों को एक-दूसरे की जरूरत है। लिंच की यात्रा इसी दिशा में एक बड़ा कदम है। उम्मीद है कि कल की मीटिंग से सकारात्मक परिणाम निकलेंगे।
अब देखते हैं कि क्या अमेरिका टैरिफ हटाने को तैयार होता है। अभी तो कोई पक्का ऐलान नहीं, लेकिन अगर भारत छोटी रियायतें देता है, जैसे प्रीमियम चीज इंपोर्ट बढ़ाना, तो अमेरिका भी पीछे हट सकता है। भारत के लिए यह मौका है कि हम अमेरिका को ‘फेस-सेविंग’ दें, लेकिन अपने किसानों की रक्षा करें।
कुल मिलाकर यह बातचीत भारत-अमेरिका रिश्तों में नया मोड़ ला सकती है। ट्रंप के सख्त तेवर अब पीछे छूट रहे हैं और व्यावहारिक दृष्टिकोण आगे आ रहा है। अगर सब ठीक रहा, तो यह डील दोनों देशों के लिए फायदेमंद साबित होगी।
कौन हैं अमेरिका के मुख्य वार्ताकार ब्रेंडन लिंच?
ब्रेंडन लिंच अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (USTR) के सहायक व्यापार प्रतिनिधि हैं, जो दक्षिण और मध्य एशिया के लिए जिम्मेदार हैं। उनका जन्म अमेरिका में हुआ और उन्होंने बोस्टन कॉलेज से बीएस की डिग्री हासिल की, उसके बाद जॉर्ज वाशिंगटन यूनिवर्सिटी से एमबीए किया।
साल 2013 में वे USTR में शामिल हुए, जहाँ पहले कृषि मामलों के ऑफिस में काम किया। वहाँ उन्होंने अमेरिकी कृषि उत्पादों के हितों को बढ़ावा दिया और कई देशों जैसे ताइवान, इजराइल, मध्य अमेरिका, कैरिबियन, मैक्सिको, कनाडा और रूस के साथ द्विपक्षीय वार्ताएँ कीं।
बाद में वे भारत के डायरेक्टर बने, जहाँ भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों का प्रबंधन किया। फिर डिप्टी असिस्टेंट के रूप में प्रमोशन मिला, जहाँ उन्होंने कृषि, मैन्युफैक्चरिंग, सर्विसेज और इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी जैसे सेक्टरों में नेगोशिएशंस हैंडल कीं। मार्च 2023 से वे एक्टिंग असिस्टेंट थे और 2024 में स्थाई रूप से इस पद पर नियुक्त हुए।
लिंच का मुख्य काम इस क्षेत्र के 15 देशों (जैसे भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान आदि) के साथ अमेरिकी व्यापार नीति बनाना और लागू करना है। वे यूएस-इंडिया ट्रेड पॉलिसी फोरम को मैनेज करते हैं और ट्रेड एंड इन्वेस्टमेंट फ्रेमवर्क एग्रीमेंट्स (TIFAs) के तहत गतिविधियों का समन्वय करते हैं।
USTR जॉइन करने से पहले वे यूएस इंटरनेशनल ट्रेड कमीशन में इंटरनेशनल ट्रेड एनालिस्ट थे, जहाँ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स का आर्थिक विश्लेषण किया और कॉन्ग्रेस कमेटियों व USTR को व्यापार बाधाओं पर सलाह दी। लिंच को दक्षिण एशिया के विशेषज्ञ के रूप में जाना जाता है, खासकर भारत के साथ डीलिंग में।
यूएस ट्रेड प्रतिनिधि कैथरीन ताई ने उनकी 10 साल की सेवा की तारीफ की है। उनकी यात्राएँ और वार्ताएँ अमेरिकी हितों को मजबूत करने पर फोकस्ड रहती हैं लेकिन वे समझौतावादी रुख के लिए भी मशहूर हैं।
कर्नाटक के वाल्मीकि कॉरपोरेशन घोटाले में सोमवार (15 सितंबर 2025) को CBI कार्रवाई की। CBI ने बेंगलुरु और आंध्र प्रदेश में 16 जगहों पर छापेमारी की। छापेमारी में सरकारी योजना से करोड़ों रुपए कॉन्ग्रेस सरकार में मंत्री रहे बी नागेंद्र और उनके करीबी लोगों तक पहुँचाने के सबूत मिले हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, CBI की जाँच में सामने आया कि वाल्मीकि कॉरपोरेशन के अलावा अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग और कर्नाटक जर्मन टेक्निकल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (KGTTI) के फंड्स का भी गलत इस्तेमाल किया गया है। अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग से ₹2.17 करोड़ बैंक ऑफ बड़ोदा, सिद्धैया रोड शाका से निकाले गए हैं।
इतनी रकम फर्जी कंपनियाँ M/s SKR Infrastructure और M/s Golden Establishment के जरिए M/s Dhanalaxmi Enterprises के खाते में ट्रांसफर की गई हैं। यह कंपनी कॉन्ग्रेस सरकार में पूर्व मंत्री बी नागेंद्र के करीबी नेक्कांति नागराज के नाम पर है। इनमें से ₹1.20 करोड़ नागेंद्र की बहन, बहनोई और पर्सनल एसिस्टेंट के खाते में भी भेजे गए हैं।
इसी तरह KGTII से ₹64 लाख रुपए भी अलग-अलग फर्जी ट्रस्ट और कंपनियों के जरिए पूर्व मंत्री एमटीबी नागराज के भाई एन रविकुमार और भाँजे एन यशवंत चौधरी तक पहुँचाए गए।
कर्नाटक हाईकोर्ट ने CBI को इन सभी आरोपों की जाँच की अनुमति दे दी है। हाईकोर्ट ने भी साफ कहा कि सरकारी योजनाओं का पैसा निजी लाभ के लिए इस्तेमाल करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
क्या है पूरा मामला ?
यह पूरा मामला साल 2024 में सामने आया। जब यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के DGM ने मामले में शिकायत की थी। शिकायत में बताया गया कि फरवरी 2024 से मई 2024 के बीच करीब ₹84.63 करोड़ फर्जीवाड़े के जरिए ट्रांसफर कर गायब किए गए हैं।
शिकायत के बाद 3 जून 2024 को मामले में CBI ने जाँच शुरू की। इसके बाद नवंबर 2024 में बीजेपी विधायक बसनगौड़ा आर पाटिल ने कर्नाटक हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर कर माँग की कि मामले में CBI फाइन रिपोर्ट कोर्ट में पेश करे और जाँच के दौरान भी स्टेटस रिपोर्ट जमा करे। तब से हाईकोर्ट भी मामले पर नजर बनाए हुए है।