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महाराष्ट्र में वोटबैंक के लिए मराठी vs हिंदी विवाद भड़काने की सियासत: ‘नॉर्थ इंडियन’ हिंदी का विरोध, लेकिन ‘फॉरेन मिक्स्ड नॉर्थ इंडियन’ से प्यार, उर्दू का इतिहास जानते हैं आप?

भारत में कुछ राजनीतिक दल फिर से भाषा के नाम पर हंगामा मचाकर अपनी रोटियाँ सेंकने में जुटे हैं। कभी कन्नड़ का मुद्दा, कभी तमिल का, कभी मराठी का तो कभी कुछ और। इन दिनों महाराष्ट्र खासकर मुंबई को भाषाई झगड़े का अड्डा बनाने की कोशिश हो रही है। यहाँ मराठी के सामने हिंदी को जबरदस्ती खड़ा किया जा रहा है, जैसे दोनों में कोई जंग हो। लेकिन अगर गहराई से देखें, तो ये सारा खेल सियासी फायदे और वोटबैंक की राजनीति का हिस्सा है।

सच तो ये है कि महाराष्ट्र में मराठी के अलावा कोंकणी और उर्दू भी खूब बोली जाती हैं और ये दोनों भाषाएँ हिंदी से कहीं ज्यादा प्रचलित हैं। हिंदी ज्यादातर वो लोग बोलते हैं, जो वहाँ रोजी-रोटी कमाने आए हैं।

ये वो मेहनतकश लोग हैं, जिनके लिए भाषा सिर्फ़ एक जरिया है, न कि पहचान का मुद्दा। लेकिन उर्दू? वो तो महाराष्ट्र में सदियों से बोली जा रही है। पुराने शासकों – खासकर मुगलों और उनके बाद के नवाबों के साथ ये भाषा यहाँ आई और उनके संरक्षण में खूब फली-फूली। उर्दू न सिर्फ़ बोली गई, बल्कि प्रशासन और दरबारों की भाषा बन गई।

हालाँकि देश के कई राज्यों में उर्दू को खूब बढ़ावा मिला। बात सिर्फ महाराष्ट्र की नहीं, यूपी से लेकर एमपी, पश्चिम बंगाल, दिल्ली, बिहार और तेलंगाना जैसे राज्यों में भी उर्दू को विशेष दर्जा मिला। लेकिन हिंदी, जो संस्कृत से निकली है और देश की जमीन से जुड़ी है, उसे ‘उत्तर भारतीय’ कहकर बदनाम किया जाता है। हकीकत में हिंदी उतनी ही नॉर्थ इंडियन है, जितनी उर्दू।

दरअसल, उर्दू की उत्पत्ति इस्लामी आक्रमणों के समय हुई थी, जब विदेशी शासकों को स्थानीय जनता से संवाद के लिए एक मिली-जुली भाषा की जरूरत थी। उर्दू में फारसी और अरबी के शब्द शामिल हैं, लेकिन इसकी व्याकरण हिंदी की है। मुगलों और उनके बाद कई शासकों ने इसे बढ़ावा दिया, जिससे यह शासन और प्रशासन की भाषा बनी।

शरीर विदेशी लेकिन आत्मा देसी – व्याकरण पर ध्यान दें

यहाँ ये बताना जरूरी है कि उर्दू का लेखन पूरी तरह से विदेशी लिपि – नस्तालिक में किया जाता है। नस्तालिक लिपि में ही फारसी जैसी भाषा भी लिखी जाती है, तो अब विदेशी बन चुकी पश्तो भी। पश्तो पाकिस्तान से लेकर अफगानिस्तान तक लिखी-बोली जाती है। भारत में उर्दू के अलावा कश्मीरी भी नस्तालिक लिपि में लिखी जाती है।

ये बात रही लिपि की। जो विदेशी है। इसे बढ़ाने वाले मुगल, अफगानी मूल के नवाब-बादशाह रहे। जिन्होंने इसे दरबारी भाषा बनाया, क्योंकि उन्हें आम हिंदूस्तानियों को ‘उच्च पदों’ से फिल्टर करना था। ऐसे में उन्होंने ‘उर्दू’ को खास बताते हुए उसका न सिर्फ संरक्षण किया, बल्कि दरबारी इस्तेमाल के लिए अनिवार्य बनाकर दक्षिण भारत तक भी पहुँचाया। उर्दू को महाराष्ट्र-तेलंगाना-कर्नाटक के कुछ हिस्सों में दक्कनी (दक्षिणी उर्दू) के तौर पर भी जाना जाता है।

वैसे, उर्दू कभी आम जन की भाषा थी भी नहीं। उत्तर भारत में पढ़े-लिखे तबके ने इसे इसलिए अपनाया, क्योंकि ये राजकीय यानी कामकाज की भाषा थी। ये अलग बात है कि इसका व्याकरण हिंदी वाला रहा, तो आम लोग लिखने की लिपि अपनी सुविधानुसार सीखते रहे, लेकिन बोलने-समझने के लिए जरूरी व्याकरण वो हिंदी से ही लेते रहे। वाक्य विन्यास से लेकर सबकुछ। ऐसे में उर्दू का न सिर्फ जन्म उत्तर भारत में हुआ, बल्कि इसका व्याकरण भी हिंदी वाला है।

ऐसे में आम लोग तो अपनी बोलियों-अवधी-ब्रज-रोहिला-बुंदेलखंडी-हरियाणवी-मेवाड़ी-मेवाती का इस्तेमाल करते रहे, लेकिन ‘प्रशासनिक’ कामकाज के लिए उर्दू सीखते रहे। फिर जैसे ही बदशाहों-नवाबों का दौर बीता और उर्दू की अनिवार्यता खत्म हुई, तो लोग अपनी जड़ों, अपनी बोलियों, अपनी भाषा की तरफ लौटने लगे।

हाँ, ये अलग बात है कि अपनी भाषा और अपनी बोलियों की तरफ लौटने वाले लोग ‘गैर मुस्लिम’ ही थे। क्योंकि मुस्लिमों ने इसे अपनी ‘एक्सक्लूसिव’ भाषा बनाए रखी। आज के समय में ऐसे ‘गैर-मुस्लिम’ मुट्ठी भर होंगे, जो स्तरीय उर्दू बोल-लिख पाते होंगे।

लाहौरी सिनेमा वालों ने किया बेड़ा गर्क

हालाँकि मौजूदा समय में उर्दू के कुछ शब्द बेहद प्रचलित हैं। जैसे- शादी, निकाह, जन्नत, काफिर (इसका मतलब बताने की जरूरत तो नहीं), महबूब, महबूबा, मोहब्बत, तकल्लुफ, सनम, कसम, आशिकी, रहम, करम… इत्यादि… इत्यादि। दरअसल, इसके पीछे कल्चरल घुसपैठ बड़ी वजह है, जिसका जरिया बना बॉलीवुड यानी हिंदी सिनेमा।

एक अहम बात जान लीजिए – भारत में मुंबइया सिनेमा से पहले लाहौरी सिनेमा ही प्रचलित था। बॉलीवुड के शुरुआती बड़े नाम या आजादी के बाद बॉलीवुड में नाम कमाने वाले बड़े एक्टर, राइटर, डायरेक्टर… ये सारे लाहौरी सिनेमा से जुड़े थे। सिनेमा लाहौरी और मिजाज लखनउवा। जब दोनों मिले, तो कल्चरल घुसपैठ शुरू हुई। हर आम बोलचाल वाले शब्दों को नफासत से ‘परोसा’ गया। ये नफासत आई कहाँ से? लाहौरी-लखनउवा कोठे वाली तहजीब, मुशायरों वाली तहजीब से।

कपूर खानदान से लेकर खान-पठान तक… सबकी जड़ें पेशावर-लाहौर-दिल्ली-लखनऊ वाली नफासत-सूफियाना रही। उन्होंने अपने सिनेमा में भी ऐसा ही कुछ दिखाया। ‘खुदा का बंदा’ बरक्कत देने वाला रहता था, तो पंडित-धोखेबाज और ठाकुर-बलात्कारी और शोषक।

ऐसे में उस दौर की सिनेमा में उर्दू को नफासत और नजाकत की भाषा के तौर पर दिखाया गया, जिसका इस्तेमाल ‘सलीके’ से रहने वाले या ‘कुलीन’ नवाब टाइप लोग करते रहे। आजादी के बाद के 2 दशकों और फिर सलीम-जावेद के अलावा आजमी, मजरूह सुल्तानपुरी, कादर खान जैसे लोगों ने इसे खूब बढ़ाया।

अल्लाह के बंदों ने जमकर ‘दरियादिली’ दिखाई, तो भगवान के पूजने वाले बलात्कारी बनते रहे। यकीन न हो, तो कुछ पुराना सिनेमा खुद ही देख लीजिए।

एक्सक्लूसिव होते जाना उर्दू की दिक्कत

बहरहाल, आजादी के बाद एक तरफ आम जन उर्दू से दूर अपनी स्थानीय बोली-भाषा, रोजी-रोटी और संपर्क की भाषाओं की तरफ तरफ भागने लगा। तो दूसरी तरफ उर्दू उसी एक्सक्लूसिवनेस की तरफ बढ़ गई, जहाँ से उसके हिस्से आई तारीफे, गुटबंदी, वोटबैंक की ताकत और ‘तहजीबी’ बढ़त।

इसका असर ये हुआ कि तकरीबन सभी पार्टियों में ‘अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ’ या पार्टी के पैरलल ‘अल्पसंख्यक मोर्चा’ बना दिए गए। हर तरह के कार्यक्रम उर्दू में किए जाने लगे। इन कार्यक्रमों से इस्लामी जनता को जोड़ा गया। राज्यों में उर्दू को बढ़ावा देने के लिए अकादमियाँ भी बनाई गई। ‘मदरसे’ जैसे पैरलल सिस्टम भारत में विदेशी भाषा यानी अरबी तो पढ़ाते रहे, लेकिन इस पूरी तालीम का जरिया ‘उर्दू’ बना रहा।

अपनी क्षेत्रीय भाषा पर गर्व करना गलत नहीं, लेकिन दूसरी भाषाओं के अस्तित्व को नकारना या उसे अपमानित करना नैतिकता के लिहाज से कैसे सही हो सकता है? महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु या अन्य किसी भी जगह जितनी लोग हिंदी बोलते हैं उतने उर्दू भी बोलते होंगे।

आम बोलचाल की भाषा हो या फिर साहित्य की। हिंदी की तरह उर्दू का भी प्रयोग है। लेकिन कुछ नेता केवल अपनी राजनीति साधने के लिए हिंदी भाषा सत्ता का प्रतीक मानकर इसके विरोध में जुटे हुए हैं। वहीं एक समुदाय के वोट की लालच में उर्दू को सामाजिक सौहार्द वाली भाषा करके पेश किया जाता है, क्योंकि ऐसी सेकुलर-लिबरल पार्टियाँ उर्दू को मुसलमान की पर्यायवाची बना देते हैं। मुसलमान का मतलब है वोटबैंक… और फिर वोटबैंक के लिए ही उत्तर से लेकर दक्षिण भारत तक के नेता उर्दू को लेकर तुष्टिकरण की राह पकड़ लेते हैं।

उर्दू विशुद्ध नॉर्थ इंडियन, साउथ पर मुगलों-नवाबों ने थोपा

जबकि हकीकत ये है कि उर्दू पर मुस्लिम समुदाय का एकाधिकार नहीं है। ये भाषा भी उत्तरी भारत की भाषा है जैसे हिंदी। बस, ‘गैर मुस्लिम’ लोग अपनी जरूरतों के हिसाब से इसे सीखते हैं। ऐसे में अगर इन नेताओं के लिए उर्दू बाहरी भाषा नहीं है तो फिर पूछा जाना चाहिए कि हिंदी पर इतना बवाल क्यों? क्या सिर्फ इसलिए कि सत्ताधारी पार्टी अन्य भाषाओं की तरह इस भाषा को भी सम्मान देती है और ये बात राजनीति करने वालों को नहीं पसंद आती।

इन सब विवादों के बीच, आपको इस निष्कर्ष की ओर ले जाना चाहता हूँ कि हिंदी न सिर्फ विशुद्ध देसी भाषा है। बल्कि हिंदी की लिपि देवनागिरी भी देसी ही है। संस्कृत से निकली और फिर तमाम स्थानीय भाषाओं की लिपि बनी। मराठी से लेकर बुंदेलखंडी, अवधी से नेपाली तक, मालवा से लेकर राजस्थान तक… सभी भाषाएँ-बोलियाँ देवनागिरी और हिंदी से जुड़ी हैं। वहीं, उर्दू का जुड़ाव ‘मजहब’ विशेष, कोर्ट की भाषा तक सिमट कर रह गई।

कोर्ट वाला मामला इसलिए, क्योंकि अंग्रेजों ने भी अपना शुरूआती कामकाज उर्दू में ही किया और आज भी जमीन या कोर्ट कचहरी से जुड़े 100-150 साल पुराने कागजात उर्दू में ही मिलते हैं। खासकर 1880-98 के बीच अंग्रेजों द्वारा किया गया जमीन की बंदोबस्ती का काम।

झगड़ा खत्म हो सकता है, बशर्ते…

खैर, जमीन-कोर्ट.. ये सबकुछ मुद्दे से भटकना हुआ। मुद्दा ये है कि हिंदी जितनी भारतीय यानी इंडियन है, जिसे द्रविड-मराठी नेता लोग ‘नॉर्थ इंडियन’ बोल रहे हैं, उतनी ही ‘नॉर्थ इंडियन’ भाषा उर्दू भी है। खैर, उर्दू में तो विदेशी जड़ें भी हैं, लिपि की… लेकिन इसका विकास, जन्म, संरक्षण सबकुछ नॉर्थ इंडिया में ही हुआ। बस, लोगों को यही बात समझनी जरूरी है, जो वो समझ नहीं पा रहे या फिर उन्हें समझने नहीं दिया जा रहा। क्योंकि ऐसा समझाने के बाद या तो ‘उर्दू का विरोध’ हिंदी की तरह (वोटबैंक पॉलिटिक्स की वजह से) शुरू हो जाएगा, या फिर हिंदी को भी उर्दू की तरह ‘स्वीकार’ कर लेने से ये झगड़ा ही खत्म हो जाएगा।

चूँकि ऐसा राजनीतिक पार्टियाँ चाहती नहीं है। वो तो देश की आजादी के समय से ही भाषाई, क्षेत्रीय विवाद पैदा कर अपनी राजनीति चमका रही हैं। धर्म के अलावा भाषाई पहचान के नाम पर हुई राजनीति भारत देश की दूसरी सबसे बड़ी समस्या है।

वैसे, भाषाई विवाद की वजह से पाकिस्तान जैसा देश 2 टुकड़े हो चुका है। ऐसे में जरूरत है हमें सबक लेने की। सबको स्वीकार करने की और मिल जुलकर आगे बढ़ने की। तभी देश आगे बढ़ेगा। तमिल भाषा आगे बढ़ेगी। कन्नड़-तेलुगू भी बढ़ेगी। मलयालम, मराठी, कोंकणी भी बढ़ेगी, कश्मीरी-बंगाली भी बढ़ेगी और हिंदी-उर्दू भी।

दिल्ली, कर्नाटक, केरल… झारखंड हो या UP-उत्तराखंड, मुस्लिम भीड़ बनाती रही है हिंदू पत्रकारों को निशाना: मीडिया पर कट्टरपंथियों के हमलों के 14 मामले

दिल्ली के सीमापुरी इलाके की बंगाली बस्ती में शुक्रवार (4 जुलाई 2025) को ऑल इंडिया न्यूज़ की पत्रकार सुप्रिया पाठक और कैमरामैन श्याम पर इस्लामी कट्टरपंथियों की भीड़ ने जानलेवा हमला किया। बुर्का पहने महिलाओं ने न सिर्फ सुप्रिया को पीटा बल्कि उनके बाल भी खींचे।

मुस्लिम भीड़ द्वारा हिंदू पत्रकारों पर हमले की ये घटना ना तो पहली बार हुई है, ना ही इसमें कोई बात ऐसी है, जिसके चलते इसे नई घटना का दर्जा दिया जा सकता हो। यूँ तो अनगिनत घटनाएँ ऐसी रही हैं, लेकिन आइए उदाहरण के तौर पर उनमें से 14 घटनाओं पर विस्तार से चर्चा करते हैं।

सीमापुरी में All India News की पत्रकार सुप्रिया और कैमरामैन श्याम पर मुस्लिम भीड़ का हमला

दिल्ली के सीमापुरी इलाके की बंगाली बस्ती में शुक्रवार (4 जुलाई 2025) की शाम ऑल इंडिया न्यूज़ की पत्रकार सुप्रिया पाठक और उनके कैमरामैन श्याम पर मुस्लिमों की भीड़ ने जानलेवा हमला किया। यह हमला उस समय हुआ जब सरकारी जमीन पर अवैध अतिक्रमण और झुग्गी-झोपड़ी के मुद्दे पर सुप्रिया रिपोर्टिंग करने के लिए तैयार थी और उनके कैमरामैन श्याम बंगाली मार्केट के पास एक मस्जिद के सामने कैमरा लेकर खड़े थे।

मुस्लिम महिलाओं ने सुप्रिया के बाल खींचे, भीड़ ने दोनों को पत्थर और बेल्ट से मारा। इस हमले में सुप्रिया का एक पैर भी टूट गया। हमलावरों ने उनके कैमरा और माइक के साथ-साथ उनका फोन और पर्स भी छीन लिया।

दिल्ली में मुस्लिम भीड़ का हिंदू महिला पत्रकार पर हमला

दिल्ली में बुधवार (2 जुलाई 2025) को एक हिंदू महिला पत्रकार अवैध रुप से रह रहे कुछ मुस्लिमों से बात करने पहुँची थी। इसी बीच मुस्लिमों की भीड़ ने उसे घेर लिया और मारना शुरू कर दिया। कट्टरपंथियों ने महिला पत्रकार पर पत्थरों से हमला किया, जबकि वो केवल रिपोर्टिंग कर रही थी। जब उसने उनके वहाँ अवैध रुप से रहने पर सवाल उठाया तो भीड़ उसे चाकू दिखाकर डराने लगी।

जयपुर में मुस्लिमों के क्षेत्र में रिपोर्टिंग कर रही थी महिला, मुस्लिमों ने सरेआम दी धमकी

राजस्थान के जयपुर में 28 अप्रैल 2025 को एक महिला पत्रकार रिपोर्टिंग करने उस इलाके में पहुँची, जहाँ मुस्लिमों की संख्या हिंदूओं की अपेक्षा अधिक थी। इसी बीच मुस्लिम भीड़ ने महिला पत्रकार को कैमरा बंद करने के लिए कहा, जब उसने ऐसा करने से इंकार किया तो वे उसे धमकी देकर इलाके से भगाने लगे।

दिल्ली में वक्फ प्रदर्शन कर रही भीड़ का सुदर्शन न्यूज के पत्रकारों पर हमला

दिल्ली में 17 मार्च 2025 को मुस्लिम प्रदर्शनकारी वक्फ के विरोध में धरनारत थे। अन्य मीडियाकर्मियों की तरह ही सुदर्शन न्यूज के पत्रकारों ने भी वहाँ इकट्ठा हुए मुस्लिमों से इस बारे में सवाल किया। क्योंकि मुस्लिम जवाब ही नही दे पा रहे थे, इसलिए उन्हें पलट कर पत्रकारों पर ही हमला करना ठीक लगा। और तिलमिलाए कट्टरपंथियों ने सुदर्शन न्यूज के जर्नलिस्ट्स पर हमला कर दिया।

नैनीताल के हल्द्वानी में मुस्लिम भीड़ का अमर उजाला के पत्रकार पर हमला

नैनीताल के हल्द्वानी में 8 फरवरी 2024 को बनभूलपुरा में बने अवैध मस्जिद और मदरसों को गिराने के उद्देश्य से प्रशासनिक टीम पहुँची हुई थी। इस दौरान यहाँ मीडियाकर्मी भी मौजूद थे। अवैध होने के बावजूद मस्जिद को ढहाने के फैसले से नाखुश मुस्लिमों ने न सिर्फ प्रशासनिक समूहों से मारपीट की बल्कि पत्रकारों को भी पीटा।

इनमें वे पत्रकार भी शामिल थे, जिन्होंने कभी इन्ही कट्टरपंथियों के समर्थन में खबरें छापी थी। इस हमले में अमर उजाला के पत्रकार राजेंद्र सिंह बिष्ट भी चोटिल हुए थे। यही नहीं मुस्लिमों ने पुलिस स्टेशनों और पेट्रोल पंप को भी जलाने के साथ-साथ एक पुलिसकर्मी को भी जिंदा जलाने की कोशिश की थी।

उत्तराखंड के हल्द्वानी में चुन-चुन कर हुआ था हिंदू पत्रकारों पर हमला

उत्तराखंड के हल्द्वानी में फरवरी 2024 की हिंसा में दंगा करने वाले मुस्लिमों ने पुलिस प्रशासन और वहाँ रिपोर्टिंग कर रहे हिंदू पत्रकारों की पहचान कर उनपर हमला किया था। समाचारपत्र अमृत विचार के पत्रकार संजय भी इसमें घायल हुए थे। उनकी हालत इतनी नाजुक थी कि कई दिनों तक वे ICU में भर्ती थे।

लखनऊ में मोनिस और एहसान ने काट दी थी पत्रकार की उंगलियाँ

उत्तर प्रदेश के लखनऊ में 29 अप्रैल 2025 को जाने-माने साहसी पत्रकार कवि तिवारी पर मोहम्मद मोनिस, मोहम्मद एहसान और उसके साथियों ने घात लगाकर हमला कर दिया। इन मुस्लिम हमलावरों ने कवि तिवारी पर उस वक्त हमला किया, जब वे मंदिर जा रहे थे।

अचानक हुए इस हमले में उन्हें गंभीर चोटें आई। हमलावरों ने उन पर चाकू से कई बार गंभीर वार किए, जिसके चलते उनकी उंगलियाँ ही नहीं मुँह भी बुरी तरह से कट गया।

झारखंड में मुस्लिमों ने घंटों तक रोके रखी महिला पत्रकार की कार

झारखंड के पाकुड़ में 18 अक्टूबर 2024 को महिला पत्रकार अर्चना अवैध रोहिंग्या और बांग्लादेशियों पर रिपोर्टिंग करने पहुँची थी। जिस समय उसकी कार पाकुड़ से गुजर रही थी। उसी समय मुस्लिमों ने अर्चना के पास पहुँचकर उन्हें धमकी दी। मुस्लिमों ने उनकी कार को रोककर काफी देर हंगामा किया। और उन्हें जाने से रोके रखा। वहाँ किसी तरह अर्चना ने खुद की जान बचाई और निकल पाई।

उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में महिला पत्रकार के साथ मारपीट

उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में 31 मार्च 2024 को मुख्तार अंसारी के निधन के बाद रिपोर्टिंग करने पहुँची महिला पत्रकार अर्चना तिवारी पर मुस्लिम भीड़ ने हमला कर दिया था। यहाँ अर्चना को घेरने की कोशिश की गई। रिपोर्टिंग के दौरान महिला पत्रकार के साथ धक्का-मुक्की भी की गई। इस हमले में अर्चना को चोट भी आई।

दैनिक जागरण के पत्रकार पर मुस्लिम भीड़ का हमला

उत्तरप्रदेश के बुलंदशहर में 10 जुलाई 2024 को दैनिक जागरण के पत्रकार अमित पर मुस्लिम समुदाय के लोगों ने धारदार हथियार से हमला किया था। इसमें उन्हें गंभीर चोटें आई थी। बड़ी मुश्किल से अमित ने मुस्लिम भीड़ से अपनी जान बचाई थी।

रिपोर्टिंग कर रहे पत्रकार पर मुस्लिम भीड़ के इशारे के बाद हमला

सुदर्शन न्यूज का एक पत्रकार 31 अगस्त 2023 को रिपोर्टिंग कर रहा था। इसी बीच एक मुस्लिम व्यक्ति ने उन पर हमला कर दिया। इतना ही नहीं पत्रकार के ऊपर अपनी गाड़ी चढ़ाने की भी कोशिश की। जिसकी वजह से पत्रकार जमीन पर गिर गया था।

कर्नाटक में गोहत्या का खुलासा करने वाली महिला पत्रकार पर मुस्लिम भीड़ का हमला

कर्नाटक में हसन जिले के पेंशन मोहल्ले में 5 दिसंबर 2020 को अवैध रूप से गोहत्या करने वाले गिरोह की सच्चाई सामने लाने वाली एक महिला पत्रकार पर मुस्लिम भीड़ ने हमला कर दिया। भीड़ में शामिल बुर्काधारी महिलाओं ने महिला पत्रकार के साथ दुर्व्यवहार तो किया ही उन्हें जान से मारने की धमकी भी दी।

केरल में रिपब्लिक टीवी की पत्रकार पूजा प्रसन्ना पर मुस्लिम भीड़ का हमला

केरल के पतनमतिट्टा में 17 अक्टूबर 2018 को सबरीमाला मंदिर पर कवरेज के दौरान रिपब्लिक टीवी की पत्रकार पूजा प्रसन्ना पर मुस्लिम भीड़ ने हमला किया था। इस बीच इस्लामी कट्टरपंथियों ने पूजा प्रसन्ना की कार का शीशा तोड़ने की भी कोशिश की।

कर्नाटक में अवैध बूचड़खाने की रिपोर्टिंग करने पर इंडिया टूडे के पत्रकार पर हमला

कर्नाटक के रामनगर जिले के कोडिपल्या गाँव में 10 अगस्त 2018 को अवैध बूचड़खानों के खिलाफ छापेमारी के दौरान इंडिया टुडे के एक पत्रकार रिपोर्टिंग कर रहे थे इसी बीच मुस्लिम भीड़ ने बूचड़खाने के बाहर पत्रकार और पुलिस की टीम कर हमला कर दिया। यहाँ छापेमारी के बाद 71 बछड़ों को छुड़ाया गया था, वहीं 7 आरोपितों के खिलाफ FIR भी दर्ज की गई थी।

सोचने वाली बात है कि आखिर इस्लामी कट्टरपंथियों की ऐसी कौन सी योजना है, जिसको छिपाने की कोशिश में ये इस निर्ममता पर उतर आते हैं। जब किसी अवैध निर्माण के लिए पत्रकार इनसे सवाल करते हैं और इन मुस्लिमों के पास जवाब नहीं होता, तो ये जानलेवा हमला कर अपने गलत मंसूबों की सच्चाई सामने आने से बचाने में जुट जाते हैं।

पत्थर पूजने वाला नहीं होता ‘ईमानदार’, गाली देने वाला मुसलमान ‘बेचारा’ होता है: हैदराबाद में हिंदू दुकानदार के लिए इस्लामी कट्टरपंथी ने उगला जो जहर, उसके बचाव में उतरा ‘मुस्लिम मिरर’

हैदराबाद में हाल ही में एक घटना घटी जिसे ‘मुस्लिम मिरर’ नाम की सोशल मीडिया पर गलत तरीके से दिखाया गया। ‘मुस्लिम मिरर’ ने एक मुस्लिम व्यक्ति को पीड़ित बताया और कहा कि हिंदू लोगों ने उस पर हमला किया।

‘मुस्लिम मिरर‘ लिखता है कि मुस्लिम व्यक्ति पर हमला इसलिए हुआ क्योंकि उसने अपने धर्म की बात कही और दुकानदारों से ज़्यादा पैसे लेने पर सवाल उठाया।

CCTV फुटेज ने बताई सच्चाई

असलियत में CCTV फुटेज कुछ और ही दिखाती है। शुक्रवार (27 जून 2025) की रात हुई इस घटना में मुस्लिम व्यक्ति का एक दुकान मालिक और वहाँ मौजूद ग्राहकों से झगड़ा हुआ। वह कह रहा था कि दुकानदार ने उससे ज्यादा पैसे ले लिए हैं।

झगड़ा तब और बढ़ गया जब उस मुस्लिम व्यक्ति ने हिंदू धर्म के बारे में गलत बातें कहीं। उसने दुकानदार को ‘पत्थर पूजने वाला’ बताया। उसकी इन बातों से वहाँ मौजूद लोग नाराज हो गए और फिर हाथापाई शुरू हो गई।

पुलिस कार्रवाई और झूठी रिपोर्ट

दुकानदार की शिकायत पर पुलिस ने उस मुस्लिम व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया है। उसे 14 दिनों के लिए हिरासत में भेज दिया गया है। ‘मुस्लिम मिरर’ ने अपनी रिपोर्ट में इस घटना के असली तथ्यों को छिपाया और आरोपित व्यक्ति को बेवजह पीड़ित दिखाया, जबकि CCTV फुटेज से साफ है कि विवाद धार्मिक टिप्पणी के कारण ही शुरू हुआ था।

‘शहाबुद्दीन जी अमर रहें’… चंदा बाबू के बेटों को तेजाब से नहलाने वाले गैंगस्टर को RJD नेता तेजस्वी यादव ने दिया सम्मान: Video वायरल, पहले घर जाकर पूछा था परिवार का हाल

राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने 05 जुलाई 2025 को स्थापना दिवस मनाया। बिहार की राजधानी पटना स्थित बापू सभागार में भव्य समारोह आयोजित किया गया। समारोह में पार्टी अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव के साथ उनके बेटे तेजस्वी यादव भी सम्मिलित हुए।

आरजेडी के स्थापना दिवस समारोह में तेजस्वी यादव ने ‘शहाबुद्दीन जी अमर रहे’ के नारे लगाए। उनका साथ देते हुए पार्टी के सभी कार्यकर्ताओं ने तेजस्वी यादव की लय में जोश से नारे को दोहराया।

इसका वीडियो क्लिप भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो को इस्लामी कट्टरपंथी खूब पसंद कर रहे हैं। वहीं, कुछ समर्थक यूँ हैरान है कि आखिर तेजस्वी यादव इससे क्या हासिल करना चाहते हैं। उनके समर्थकों का जानना भी जरूरी है, क्योंकि ऐसा पहली बार नहीं हुआ है।

तेजस्वी यादव पहले मोहम्मद शहाबुद्दीन के लिए दयाभाव दिखा चुके हैं। कुछ दिनों पहले तेजस्वी यादव मोहम्मद शहाबुद्दीन के घर पहुँच गए। यहाँ उसकी बेगम हीना शहाब और बेटे ओसामा शहाब से मुलाकात की। उनके साथ डिनर का आनंद लिया।

इससे तीन साल पहले साल 2021 में तेजस्वी यादव शहाबुद्दीन के बेटी हेरा शहाब के निकाह में शिरकत करने पहुँचे थे। अब्बू के इंतकाल के कुछ समय बाद ही बेटी हेरा शहाब ने निकाह किया था। बताया गया कि शाही अंदाज में निकाह समारोह आयोजित किया गया था।

कौन है शहाबुद्दीन ?

मोहम्मद सैयद शहाबुद्दीन सीवान शहर से पूर्व सांसद था। 90 के दशक में और 21वीं सदी की शुरुआत में उसने शहर में गुंडाराज चलाया। विभिन्न ठेकों का टेंडर हो या फिर मुखिया से लेकर जिला परिषद तक के चुनाव, हर जगह उसकी ही पसंद चलती थी। उसने 1996, 98, 99 और 2004 में यहाँ से सांसद बन कर जीत का चौका लगाया।

मोहम्मद शहाबुद्दीन पर सीधे राजद सुप्रीमो और 15 साल तक बिहार में सत्ता के सर्वेसर्वा रहे लालू प्रसाद यादव का हाथ था। वो राजद की नेशनल एग्जीक्यूटिव कमिटी का हिस्सा था। उसके समर्थक उसे ‘साहेब’ कहकर बुलाते थे। गैंगस्टर शहाबुद्दीन पर अपहरण, हत्या और लूटे के कई मामलों में जेल जा चुका था।

चंदा बाबू के 2 बेटों की तेजाब से नहला कर की हत्या

शहाबुद्दीन ने रंगदारी नहीं देने और उनकी जमीन शहाबुद्दीन के हवाले न करने के कारण चंद्रकेश्वर प्रसाद उर्फ चंदा बाबू के दो बेटों गिरीश और सतीश का अपहरण कर लिया था। इसके बाद उन्हें शहाबुद्दीन के गाँव प्रतापपुर स्थित उसकी कोठी पर ले जाया गया।

फिर अगस्त 16, 2004 को वहाँ जो हैवानियत का नंगा नाच हुआ, उसने पूरे देश को हिला कर रख दिया। वहाँ दोनों भाइयों को तेज़ाब से नहलाया गया और तब तक ऐसा किया गया, जब तक उनकी तड़प-तड़प कर मौत न हो गई।

इस मामले में गवाह थे चंदा बाबू के तीसरे बेटे राजीव रौशन, लेकिन कोर्ट जाते समय उनकी भी हत्या कर दी गई। तीनों बेटों की माँ कलावती की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की गई थी।

लेकिन, इस मामले में शहाबुद्दीन को अभियुक्त बनने में 5 वर्ष लग गए। 2009 में सीवान के तत्कालीन एसपी अमित कुमार जैन के निर्देश पर केस के आइओ ने शहाबुद्दीन, असलम, आरिफ व राज कुमार साह को प्राथमिक अभियुक्त बनाया गया और सभी को उम्रकैद की सजा हुई।

ये मामला स्थानीय कोर्ट और हाईकोर्ट से होते हुए सुप्रीम कोर्ट पहुँचा, जहाँ कुछ ही मिनटों में तत्कालीन सीजेआई रंजन गोगोई ने शहाबुद्दीन की याचिका खारिज कर दी और फैसला बरकरार रखा।

इस मामले में गवाह थे चंदा बाबू के तीसरे बेटे राजीव रौशन, लेकिन कोर्ट जाते समय उनकी भी हत्या कर दी गई। तीनों बेटों की माँ कलावती की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की गई थी।

चंदा बाबू कई सालों तक भय में जीते रहे। उनको डर लगा रहता था कि शहाबुद्दीन उन्हें मरवा देगा। ऐसे में इतने बड़े अपराधी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट तक जाना उनके हार न मानने वाले जज्बे की ओर इशारा करता है। वहीं, शहाबुद्दीन की बीवी हीना शहाब ने इस मामले में केंद्र सरकार को दोषी माना।

मई 2021 में शहाबुद्दीन की कोविड से मौत

शहाबुद्दीन कई मामलों में तिहाड़ जेल में सजा काट रहा था। इसी दौरान कोरोनाकाल का वक्त आया। तिहाड़ जेल में बंद मोहम्मद शहाबुद्दीन कोरोना पॉजिटिव निकला। उसे दिल्ली के एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया गया। हाँ अपराधी और हत्यारे शहाबुद्दीन की 01 मई, 2021 को मौत हो गई।

साल 2021 में मोहम्मद शहाबुद्दीन की मौत के बाद राजद के तेजस्वी यादव ने शहाबुद्दीन से दूरी बनाई। तब शहाबुद्दीन की बीवी हीना शहाब ने लोकसभा चुनाव 2024 निर्दलीय लड़ने का फैसला लिया था।

बाद में तेजस्वी यादव और लालू प्रसाद यादव ने शहाबुद्दीन की बीवी हीना शहाब और बेटे ओसामा शहाब को राजद पार्टी में शामिल कर लिया था। बीवी हीना शहाब ने अपने पति शहाबुद्दीन की जगह सीवान सीट से लोकसभा चुनाव लड़ा, लेकिन उसकी हार के बाद राजद को ये सीट गवानी पड़ी।

अब दोबारा से खबरें सामने आ रही हैं कि शहाबुद्दीन का बेटा ओसामा शहाब बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में दावेदार के तौर पर खड़ा हो रहा है। तेजस्वी यादव का शहाबुद्दीन के घर पहुँचना भी इसका संकेत देता है।

SC-ST ही नहीं, OBC-दिव्यांगजनों को भी सुप्रीम कोर्ट की नौकरियों में मिलेगा आरक्षण: 64 साल बाद नियमों में बदलाव, स्वतंत्रता सेनानियों के आश्रितों को भी मिलेगा कोटा

भारत के चीफ जस्टिस (CJI) ने एक बहुत बड़ा और महत्वपूर्ण फैसला लिया है। अब सुप्रीम कोर्ट अपने स्टाफ की भर्ती में SC\ST के अलावा OBC, दिव्यांजनों, पूर्व सैनिकों और स्वतंत्रता सेनानियों के परिवारों को आरक्षण का फायदा देगा।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह फैसला 64 साल बाद आया है और इसे सामाजिक न्याय की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम माना जा रहा है। यह बदलाव इसलिए किया गया है ताकि सुप्रीम कोर्ट में भी समाज के सभी वर्गों के लोगों को नौकरी के बराबर मौके मिलें। इससे पहले कोर्ट में इस तरह का आरक्षण नहीं था।

क्या है नया फैसला?

यह फैसला चीफ जस्टिस बीआर गवई की अध्यक्षता में लिया गया है। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट ऑफिसर्स एंड सर्वेंट्स (कंडीशन्स ऑफ सर्विस एंड कंडक्ट) रूल्स, 1961 के नियम 4A में बदलाव किया गया है।

सुप्रीम कोर्ट संविधान के अनुच्छेद 146(2) के तहत अपने कर्मचारियों की भर्ती के नियम खुद तय करता है। अब इन सभी आरक्षित वर्गों को केंद्र सरकार द्वारा तय किए गए आरक्षण के अनुसार फायदा मिलेगा।

किसे कितना मिलेगा आरक्षण?

इस नए नियम के तहत OBC को 27%, SC को 15% और ST को 7.5% आरक्षण मिलेगा। यह आरक्षण सीनियर पर्सनल असिस्टेंट, असिस्टेंट लाइब्रेरियन, जूनियर कोर्ट असिस्टेंट, चैंबर अटेंडेंट जैसे पदों के लिए होगा।

OBC के लिए यह फैसला 33 साल बाद आया है। 1992 में इंदिरा साहनी बनाम भारत सरकार केस में सुप्रीम कोर्ट ने OBC को 27% आरक्षण को सही ठहराया था। लेकिन अब तक सुप्रीम कोर्ट की अपनी भर्तियों में OBC को यह फायदा नहीं मिला था।

व्यवस्था होगी और पारदर्शी

राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ वकील पी विल्सन ने इसे एक ‘ऐतिहासिक सुधार’ बताया है। विल्सन ने कहा कि अब सुप्रीम कोर्ट की भर्तियाँ राष्ट्रीय आरक्षण नीति के हिसाब से होंगी।

चीफ जस्टिस गवई ने SC\ST के लिए 200 पॉइंट रोस्टर सिस्टम भी लागू करने की पहल की है। यह सिस्टम आरके सबरवाल बनाम हरियाणा राज्य केस (1995) में सुझाया गया था। इससे आरक्षण व्यवस्था और भी साफ और न्यायसंगत बनेगी।

ग्लास फेंका, मोबाइल मारा और BJP की महिला नेता से की बद्तमीजी: गुजरात में AAP विधायक चैतर वसावा गिरफ्तार

गुजरात के डेडियापाड़ा में आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक चैतर वसावा को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। शनिवार (5 जुलाई 2025) को एक सरकारी बैठक में AAP विधायक की बीजेपी नेता संजय वसावा से बहस हुई, जो मारपीट में बदल गई।

जानकारी के मुताबिक, भाजपा नेता ने चैतर वसावा पर मारपीट और एक महिला पंचायत अध्यक्ष के साथ अभद्र व्यवहार की शिकायत पुलिस में दर्ज करवाई।

बैठक में विवाद की जड़

यह घटना डेडियापाड़ा तालुका पंचायत कार्यालय में हुई। यहाँ एक समन्वय बैठक चल रही थी, जिसमें कई अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौजूद थे। चैतर वसावा ने एक विकास समिति में कुछ लोगों के शामिल होने पर आपत्ति उठाई।

AAP विधायक ने कहा कि विधायक से बिना पूछे समिति बनाई गई थी और इसे तुरंत रद्द किया जाना चाहिए। वसावा का तर्क था कि समिति में किसी व्यापारी को शामिल नहीं करना चाहिए।

मुझ पर पानी का गिलास फेंका- BJP नेता

यह समिति कथित तौर पर बीजेपी नेता संजय वसावा के निर्देश पर बनी थी। इसी बात पर चैतर वसावा और संजय वसावा के बीच कहासुनी इतनी बढ़ गई कि हाथापाई शुरू हो गई। मौजूद अधिकारियों ने बीच-बचाव कर मामला शांत करवाया और पुलिस को बुलाया गया।

संजय वसावा ने चैतर वसावा के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। संजय वसावा ने बताया कि AAP विधायक ने महिला नेता चंपाबेन वसावा के साथ बदतमीजी की, जिसका मैंने विरोध किया था। लेकिन विधायक ने गुस्से में उन पर मोबाइल और पानी का गिलास फेंक दिया।

संजय वसावा ने कहा कि बैठक में विधायक और चंपाबेन वसावा के बहस हो गई थी। इस पर चैतर वसावा को भाषा पर संयम रखने के लिए कहा गया था। लेकिन चैतर वसावा ने गुस्से में आकर हमला कर दिया।

गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई

घटना के बाद चैतर वसावा अपने समर्थकों के साथ थाने पहुँचे, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। उनकी गिरफ्तारी की खबर फैलते ही थाने के बाहर समर्थकों की भीड़ जमा हो गई।

स्थिति को देखते हुए पुलिस ने सुरक्षा बढ़ा दी और विधायक को राजपीपला ले गई। वहाँ भी उनके समर्थक इकट्ठा हो गए, जिन्हें पुलिस को हटाना पड़ा।

पुलिस ने चैतर वसावा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई धाराओं में मामला दर्ज किया है। इनमें हत्या की कोशिश, महिला का अपमान, जानबूझकर चोट पहुँचाना, हथियार से चोट पहुँचाना, आपराधिक धमकी और शांति भंग करने की नीयत से अपमान जैसी गंभीर धाराएँ शामिल हैं।

कहीं चले लाठी-डंडे तो कहीं गाड़ियों में तोड़फोड़… BJP नेता को भी मारा: मुहर्रम में जुलूस के नाम पर कुंभलगढ़ से लेकर कोलकाता तक हिंसा

देशभर में मुहर्रम के जुलूस निकाले जा रहे हैं। इन जुलूसों को लेकर अब विवाद सामने आ रहे हैं। कई जगहों पर मारपीट की घटनाएँ हुई हैं। कुछ जगहों पर मनमानी अनुमति माँगने और गाली-गलौच की शिकायतें मिली हैं। इसे देखते हुए स्थानीय प्रशासन अलर्ट पर है और भारी सुरक्षा बल तैनात किया गया है।

राजस्थान के राजसमंद जिले में कुंभलगढ़ किले में मुहर्रम के जुलूस की अनुमति को लेकर पाँच दिनों से विवाद चल रहा है। मुस्लिम संगठन मुहर्रम का जुलूस निकालने पर अड़े हैं, वहीं हिंदू संगठन इसका विरोध कर रहे हैं।

हिंदू संगठनों का कहना है कि अगर हनुमान जयंती और महाराणा प्रताप जयंती पर किले में जाने की अनुमति नहीं मिलती तो मुहर्रम पर भी ताजियों को अनुमति नहीं मिलनी चाहिए।

05 जुलाई 2025 को हिंदू संगठनों और व्यापारियों ने बाजार बंद कर विरोध प्रदर्शन किया। मौके पर भारी सुरक्षा बल तैनात है।

यूपी के रायबरेली में हिंसा

यूपी के रायबरेली के कुढ़ा गाँव में शुक्रवार (04 जुलाई 2025) रात बिना अनुमति से निकाले गए मुहर्रम के जुलूस के दौरान जमकर विवाद हुआ था। घरों के बाहर से जुलूस निकाला जा रहा था। इसमें शामिल लोगों ने आपत्तिजनक नारेबाजी भी की। लोगों ने विरोध किया तो मुस्लिम लोग उग्र हो गए और हिंसा शुरू कर दी।

उन्होंने लाठी-डंडों और हथियारों से हमला किया। उपद्रवियों ने 4 बाइक, एक ऑटो और एक ट्रैक्टर तोड़ डाले। पुलिस ने पूरे फाजिल गाँव निवासी साजिद अली, सोनू, फूलबाबू, अट्टू, अमरोज, शब्बीर समेत 150 लोगों के खिलाफ मारपीट, तोड़फोड़ करने समेत अन्य धाराओं में केस दर्ज किया है।

कुंडा में राजा भैया के पिता नजरबंद

मुहर्रम से पहले शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए यूपी के कुंडा में पूर्व कैबिनेट मंत्री राजा भैया के पिता राजा उदय प्रताप सिंह समते 13 लोगों को नजरबंद किया गया।

उन्हें शनिवार (05 जुलाई 2025) सुबह 5 बजे से लेकर रविवार (06 जुलाई 2025) रात 9 बजे तक हाउस अरेस्ट किया गया है। कुंडा प्रशासन साल 2016 से यह कार्रवाई कर रहा है।

रेलवे स्टेशनों पर सुरक्षा जाँच

मुहर्रम के मद्देनजर RPF, GRP और LIU की टीमों ने रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था की जाँच की। आनंदनगर रेलवे स्टेशन पर डेमू ट्रेन नंबर 75117 में यात्रियों के सामान और संदिग्ध वस्तुओं की तलाशी ली गई।

सुरक्षाबलों ने संदिग्ध लोगों से पूछताछ भी की और यात्रियों से किसी भी संदिग्ध वस्तु की सूचना तुरंत देने की अपील की है।

महाराजगंज में बीजेपी नेता से मारपीट

यूपी के महाराजगंज में मुहर्रम के जुलूस के दौरान बीजेपी नेता शिवभूषण चौबे से मारपीट की गई। घर लौटते समय जुलूस की भीड़ ने उन्हें घेर लिया और गाली-गलौज कर हाथापाई की।

सूचना पर पहुँची पुलिस ने बीजेपी नेता को सुरक्षित निकाला और तीन लोगों को हिरासत में लिया है।

फिलीस्तीन की टीशर्ट पहने दिखे इस्लामी कट्टरपंथी

इसके अलावा पहले श्रीनगर से मामला सामने आया था कि मोहर्रम जुलूस के नाम पर फिलीस्तीन के झंडे लेकर घूमते लोग देखे गए हैं लेकिन अब खबर है कि देवरिया में भी जुलूस के नाम पर एक कट्टरपंथी जुलूस में फिलीस्तीन की टीशर्ट पहने नजर आया, जिसके बाद पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया है।

आजमगढ़ में जुलूस में आपस में भिड़े मुस्लिम

आजमगढ़ के भुजी गाँव में मुहर्रम जुलूस के दौरान मुस्लिम युवक आपस में भिड़ गए। एक तरफ शहाबुद्दीन और दूसरी तरफ साहिल, समीर उर्फ सद्दाम, महबूब, साजिद, सोनू उर्फ शेर अली, अफजल और अज्ञात लोगों के बीच लाठी-डंडे चले और धारदार हथियारों से वार किया गया। इसमें 7 लोग घायल हुए हैं।

पुलिस का कहना है कि एक दूसरे के खिलाफ नारेबाजी के बाद विवाद शुरू हुआ। पुलिस ने मौके पर पहुँचकर विवाद शांत कराया। शहाबुद्दीन की शिकायत के बाद मामले में दोनों पक्षों के 6 लोगों को हिंसा फैलाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।

कोलकाता में सियालदह रेलवे स्टेशन पर खूनी संघर्ष

कोलकाता के सियालदह रेलवे स्टेशन पर कई मुस्लिम युवक तलवारों से लैस होकर लोकल ट्रेन में चढ़ गए। उन्होंने हथियार लहराते हुए एक व्यक्ति को गंभीर रूप से घायल कर दिया। घटना के वीडियो में व्यक्ति को खून से लथपथ देखा जा सकता है। वहीं, रेलवे स्टेशन पर भी जगह-जगह खून पड़ा दिखा।

यह घटना मुहर्रम से पहले हुई, जिसमें शिया मुसलमान कर्बला की लड़ाई की याद में तलवारें और अन्य घातक हथियार लहराते हैं।

यह पहली बार नहीं है जब ऐसी स्थिति देखी गई हो। मुहर्रम में हर साल खून-खराबा और पथराव की खबरें सामने आती हैं। हिंदू त्योहार को भी मुस्लिमों की उग्र भीड़ निशाना बनाती है।

तिरंगा लहराए, मोदी-मोदी चिल्लाए, लगाते रहे ‘भारत माता की जय’ के नारे: प्रधानमंत्री के ब्राजील पहुँचते ही खुशी से झूमे भारतीय प्रवासी, ऑपरेशन सिंदूर को याद करके दिया सम्मान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी विदेश यात्रा के चौथे चरण में रविवार (6 जुलाई 2025) को ब्राजील पहुँच गए हैं। गैलेओ इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर पीएम मोदी का राष्ट्रीय सम्मान के साथ स्वागत हुआ।

रियो डी जनेरियो में भारतीयों प्रवासी ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की थीम पर नृत्य किय। ये थीम भारत के आतंकवाद-रोधी प्रयासों को दर्शाता है। इस दौरान कलाकारों ने ‘ये देश नहीं मिटने दूँगा’ गाने पर शानदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन देखकर प्रधानमंत्री मोदी भावुक हो गए।

प्रधानमंत्री मोदी के होटल पहुँचते ही माहौल बदल गया। वहाँ सैकड़ों भारतीय समुदाय के लोग थे। उन्होंने ‘भारत माता की जय’ के नारे लगाए। सबने तिरंगे लहराए और पीएम का जोरदार स्वागत किया।

BRICS सम्मेलन में भागीदारी

पीएम मोदी 17वें BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए ब्राजील गए हैं। यह सम्मेलन राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला डी सिल्वा के निमंत्रण पर हो रहा है। BRICS में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के अलावा अब मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और यूएई भी शामिल हो गए हैं।

प्रधानमंत्री 6 और 7 जुलाई 2025 को इस सम्मेलन में भाग लेंगे। उम्मीद जताई जा रही है कि वह इन देशों के नेताओं के साथ द्विपक्षीय बातचीत भी करेंगे। पीएम मोदी शांति, सुरक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, जलवायु परिवर्तन, स्वास्थ्य और फाइनेंस जैसे बड़े मुद्दे उठा सकते हैं।

ब्रासीलिया और नामीबिया का दौरा

ब्राजील में चार दिन रुकने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ब्रासीलिया की राजकीय यात्रा पर जाएँगे। यह छह दशकों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली ब्रासीलिया यात्रा होगी। अपनी यात्रा के आखिरी चरण में पीएम मोदी 9 जुलाई 2025 को नामीबिया जाएँगे।

वहाँ पीएम मोदी नामीबिया की संसद को भी संबोधित करेंगे। इससे पहले, पीएम मोदी घाना, त्रिनिदाद एंड टोबैगो और अर्जेंटीना का दौरा कर चुके हैं।

कोलकाता लॉ कॉलेज की छात्रा को नोचने के बाद मोनोजीत ने जमकर पी थी शराब, ढाबे पर दोस्तों संग खाना भी खाया: अगले दिन खबरें देख उड़े होश, जान बचाने पूरा शहर घूमा

कोलकाता लॉ कॉलेज गैंगरेप मामले में मुख्य आरोपित मोनोजित मिश्रा ने वारदात के बाद अपने साथियों के साथ घंटों शराब पी थी। जब यह खबर फैलने लगी तो वह डर गया और मदद माँगने भटकता रहा।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, गैंगरेप के बाद मोनोजित मिश्रा, जैब अहमद और प्रमित मुखर्जी ने गार्ड रूम में खूब शराब पी। फिर उन्होंने ढाबे पर खाना खाया और अपने-अपने घर चले गए। अगले दिन गैंगरेप की खबर सामने आने पर मोनोजित घबरा गया।

मोनोजित ने कई प्रभावशाली लोगों से मदद माँगी, लेकिन किसी ने उसकी मदद नहीं की। सबने उसे सरेंडर करने की सलाह दी।

दर-दर भटका मोनोजित

मोनोजित ने शहर के अलग-अलग इलाकों में घूमकर मदद की भीख माँगी। मोनोजित देशप्रिय पार्क, रासबिहारी एवेन्यू, गरियाहाट और बल्लीगंज स्टेशन रोड भी गया। पुलिस ने उसके मोबाइल की लोकेशन से यह जानकारी निकाली।

कॉलेज के सिक्योरिटी गार्ड पिनाकी बनर्जी को भी गिरफ्तार किया गया है। गार्ड ने बताया कि मोनोजित ने उससे कमरे में पानी और साफ चादर रखने को कहा था। मोनोजित ने उसे धमकी भी दी गई थी कि मेन गेट बंद करके चाबियाँ दे दे और कहीं और ड्यूटी करे।

गार्ड ने बताया कि गार्ड रूम में अक्सर शराब पार्टियाँ होती थीं, इसलिए उसे शक नहीं हुआ कि इतनी बड़ी घटना होगी।

क्राइम सीन रीक्रिएट

पुलिस ने शुक्रवार (04 जुलाई 2025) को घटनास्थल पर जाकर क्राइम सीन को रीक्रिएट किया। इस दौरान सभी आरोपित और पीड़िता मौजूद थे। पूरे घटनाक्रम की वीडियोग्राफी और 3डी मैपिंग की गई।

क्या था मामला?

25 जून 2025 को कोलकाता लॉ कॉलेज में एक छात्रा से गैंगरेप हुआ था। आरोपितों ने तीन घंटे तक रेप किया और उसका वीडियो भी बनाया। पुलिस ने मोनोजित मिश्रा, जैब अहमद, प्रमित मुखर्जी और सिक्योरिटी गार्ड पिनाकी बनर्जी को गिरफ्तार किया है।

CCTV फुटेज में छात्रा को घसीटते हुए दिखाया गया है। पीड़िता के मेडिकल टेस्ट में भी रेप की पुष्टि हुई है। पुलिस को आरोपितों से घटना का वीडियो भी मिल गया है।

ब्राह्मण-क्षत्रिय लड़कियों को फँसाने पर मिलेंगे ₹15-16 लाख, दलित बच्चियों का रेट ₹10-12 लाख: UP-ATS ने धर्मांतरण रैकेट चलाने वाले ‘छांगुर पीर’ को किया गिरफ्तार, विदेश से पा चुका ₹100 करोड़ तक की फंडिग

उत्तर प्रदेश में एक बड़े अवैध धर्मांतरण नेटवर्क का खुलासा हुआ है। यूपी ATS ने इस मामले में जलालुद्दीन उर्फ छांगुर पीर को बलरामपुर के उटरौला कस्बे से गिरफ्तार किया है। जलालुद्दीन उर्फ छांगुर पीर पर हिंदू लड़कियों को बहला-फुसलाकर जबरन धर्मांतरण कराने का आरोप है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मामले में नीतू रोहरा उर्फ नसरीन को भी गिरफ्तार किया गया है। यह गिरोह बलरामपुर के उटरौला में लंबे समय से सक्रिय था। जाँच एजेंसियों के मुताबिक, इस नेटवर्क को विदेशों से ₹100+ करोड़ की फंडिंग मिली है।

छांगुर पीर और उसका नेटवर्क

जलालुद्दीन खुद को हाजी पीर जलालुद्दीन बताता था। वह अपने एजेंटों के जरिए हिंदू लड़कियों को धर्मांतरण के लिए उकसाता था। जानकारी के अनुसार, इस काम के लिए लड़कियों की जाति के हिसाब से फीस तय थी।

ब्राह्मण, क्षत्रिय, सरदार लड़कियों के लिए 15-16 लाख रुपए, पिछड़ी जाति की लड़कियों के लिए 10-12 लाख रुपए और अन्य जातियों के लिए 8-10 लाख रुपए मिलते थे।

विदेशी फंडिंग और संपत्तियाँ

ADGP (लॉ एंड ऑर्डर) ने बताया कि छांगुर पीर ने 40 से 50 बार इस्लामिक देशों की यात्रा की है। जाँच में पता चला है कि बलरामपुर में उसने कई संपत्तियाँ खरीदी हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, फंडिंग से जलालुद्दीन पीर ने लग्जरी गाड़ियाँ, बंगले और शोरूम की खरीदारी की है।

गिरोह के पास 40+ बैंक खाते हैं। इनमें ₹100 करोड़ से अधिक का लेन-देन हुआ है। यह पैसा कथित तौर पर धर्मांतरण के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था। खासकर खाड़ी देशों से फंडिंग आने की बात सामने आई है।

ब्रेनवॉश कर करवाया इस्लाम कबूल

जलालुद्दीन पीर का नेटवर्क गरीब और असहाय लोगों को निशाना बनाता था। उन्हें पैसों और विदेश में नौकरी का लालच दिया जाता था। अगर कोई बात नहीं मानता तो उसे मुकदमे में फँसाने की धमकी दी जाती थी।

इस्लाम का प्रचार-प्रसार करने और ब्रेनवॉश करने के लिए जलालुद्दीन पीर ने ‘शिजर-ए-तैय्यबा‘ नाम से किताब भी छपवाई थी। वह खुद को पीर या हजरत पीर नाम से बुलवाना पसंद करता था।

मुंबई के एक सिंधी परिवार का ब्रेनवाश कर इस्लाम कबूल करवाया गया था। परिवार में नवीन घनश्याम रोहरा, उनकी पत्नी नीतू और बेटी का नाम बदलकर जलालुद्दीन, नसरीन और सबीहा रख दिए गया था।

लखनऊ की एक गुंजा गुप्ता हिंदू लड़की को एक मुस्लिम लड़के ने ‘अमित’ बनकर प्रेमजाल में फँसाया। फिर छांगुर पीर की दरगाह ले जाकर उसका ब्रेनवॉश किया और उसे अलीना अंसारी बना दिया गया था।

नेटवर्क के दो लोग गिरफ्तार

फिलहाल दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है। ATS का कहना है कि यह नेटवर्क पूरे भारत में फैला हुआ है। पुलिस इस मामले को राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक सौहार्द से जोड़कर देख रही है।

जाँच एजेंसियाँ इस पूरे नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी हैं। ADGP ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में और भी गिरफ्तारियाँ हो सकती हैं।