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राहुल-सोनिया को खुश करने के लिए बयानबाजी कर रहे तेलंगाना के सीएम रेवंत रेड्डी, बीजेपी ने बताया पाकिस्तान समर्थक: सेना के अपमान का लगाया आरोप

तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार की आलोचना की, तो भाजपा की तेलंगाना इकाई ने कड़ा जवाब दिया। भाजपा ने रेड्डी के बयानों को अजीब और गैर-जिम्मेदार बताया, जो पाकिस्तान के प्रचार से मिलते-जुलते हैं।

भाजपा के तेलंगाना प्रमुख प्रवक्ता एनवी सुभाष ने शनिवार (31 मई 2025) को कहा कि मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी जानबूझकर ऐसे बयान दे रहे हैं, जो भारतीयों की भावनाओं को ठेस पहुँचाते हैं। उन्होंने रेड्डी की पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) पर टिप्पणी की निंदा की और कहा कि यह सेना का अपमान है।

सुभाष ने कहा, “रेड्डी वही झूठे दावे दोहरा रहे हैं, जो एक अखबार ने छापे थे, लेकिन रक्षा मंत्रालय के खंडन के बाद वापस लिए गए। फिर भी, रेड्डी इन्हें दोहरा रहे हैं, शायद कॉन्ग्रेस के राहुल गाँधी और सोनिया गाँधी को खुश करने के लिए।”

सवाल किया कि क्या रेड्डी को भारतीय सेना पर भरोसा नहीं है। सुभाष ने AIMIM नेता असदुद्दीन ओवैसी का जिक्र करते हुए कहा कि भले ही ओवैसी भाजपा के आलोचक हैं, लेकिन वे पाकिस्तान के धोखे को समझते हैं। मगर रेड्डी का रवैया पाकिस्तान के दावों का समर्थन करता दिखता है।

सुभाष ने रेड्डी पर राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे गंभीर मुद्दों को नजरअंदाज कर सुर्खियों में रहने का आरोप लगाया। उन्होंने तंज कसा, “रेड्डी देश के साथ एकजुटता दिखाने की बजाय मिस वर्ल्ड के साथ अखबार के पहले पन्ने पर छपना ज्यादा जरूरी समझते हैं।”

दरअसल, कॉन्ग्रेस की ‘जय हिंद यात्रा’ में रेड्डी ने कहा था कि मोदी अब ‘अमान्य 1000 रुपये के नोट’ जैसे हैं और देश को राहुल गाँधी जैसे नेता की जरूरत है। उन्होंने दावा किया कि राहुल अगर प्रधानमंत्री होते, तो इंदिरा गाँधी से प्रेरणा लेकर पीओके वापस ले चुके होते। उन्होंने यह भी पूछा था कि ऑपरेशन सिंदूर में कितने पाकिस्तानी लड़ाकू विमान मारे गए।

रेड्डी ने कहा कि मोदी सरकार बलूचिस्तान को आजाद कराने और पीओके पर कब्जा करने में नाकाम रही। भाजपा ने इन बयानों को गैर-ज़िम्मेदाराना कहते हुए, राष्ट्रविरोधी करार दिया है।

सीमावर्ती राज्यों में ‘ऑपरेशन शील्ड’ को दिया गया अंजाम, दुश्मन हुआ पसीना-पसीना: कश्मीर से गुजरात तक अलर्ट

भारत सरकार ने शनिवार (31 मई 2025) को जम्मू-कश्मीर से लेकर गुजरात तक पाकिस्तान सीमा से सटे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ऑपरेशन शील्ड के तहत मॉक ड्रिल का आयोजन किया। इस अभ्यास का उद्देश्य युद्ध जैसी आपातकालीन परिस्थितियों में नागरिक सुरक्षा उपायों की प्रभावशीलता का परीक्षण करना था।

गुजरात, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, और कश्मीर में नागरिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए मॉक ड्रिल और ब्लैकआउट अभ्यास किए गए। ये अभ्यास ‘ऑपरेशन शील्ड’ के तहत आयोजित किया गया, जिनका उद्देश्य आपातकाल या युद्ध जैसी स्थिति में तेजी से और सही ढंग से प्रतिक्रिया देना है।

राजस्थान और हरियाणा में मुख्य सचिव सुधांश पंत ने सायरन प्रणाली को ठीक रखने और प्रतिक्रिया समय को कम करने के निर्देश दिए। बारामुला में हुई मॉक ड्रिल में एसडीआरएफ, सिविल डिफेंस, स्वास्थ्य विभाग, अग्निशमन विभाग और एनसीसी कैडेट्स ने भाग लिया। इन गतिविधियों का मुख्य उद्देश्य आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई की तैयारी करना है।

ऑपरेशन सिंदूर के बाद की पहली मॉक ड्रिल

ऑपरेशन शील्ड  मॉक ड्रिल, ऑपरेशन सिंदूर  के बाद की पहली नागरिक सुरक्षा अभ्यास है। ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने पाकिस्तान और पीओके में स्थित आतंकवादी ठिकानों पर कार्रवाई की थी, जिसके बाद यह मॉक ड्रिल आयोजित की गई है।

नागरिकों से सहयोग की अपील

सरकार ने नागरिकों से मॉक ड्रिल के दौरान संयम बनाए रखने और अधिकारियों के निर्देशों का पालन करने की अपील की है। यह अभ्यास नागरिक सुरक्षा उपायों की प्रभावशीलता का परीक्षण करने और आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है। इस मॉक ड्रिल के माध्यम से भारत ने सीमावर्ती क्षेत्रों में नागरिक सुरक्षा उपायों की तैयारी और प्रभावशीलता की जाँच की गई, जिससे भविष्य में किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए बेहतर रणनीतियाँ विकसित की जा सकें।

CDS अनिल चौहान ने किया साफ, ऑपरेशन सिंदूर के दूसरे दौर में भारत के ‘सभी जेट्स’ ने पाकिस्तान पर बोले हमले: सवाल उठाते कॉन्ग्रेसियों की ‘कुटिल मुस्कान’ से पूरा देश हैरान

भारत और पाकिस्तान के बीच हुए चार दिन के तनावपूर्ण संघर्ष, जिसे दुनिया ऑपरेशन सिंदूर के नाम से जानती है। उसने भारतीय सेना का जौहर देखा। इस संघर्ष में भारत ने पहली बार आधिकारिक तौर पर माना कि थोड़ा-बहुत नुकसान हुआ। हालाँकि भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने साफ किया कि नुकसान की संख्या से ज्यादा जरूरी है ये समझना कि गलतियाँ कहाँ हुईं और उन्हें कैसे सुधारा गया।

इस लेख में हम ब्लूमबर्ग के साथ उनकी बातचीत, पाकिस्तान के दावों, विपक्ष के सवालों, और इस ऑपरेशन की असल जीत को समझने की कोशिश करेंगे। साथ ही उन लोगों की सोच को भी साफ करने की कोशिश करेंगे, जो भारत की इस जीत को छोटा करने की कोशिश कर रहे हैं।

सिंगापुर में शांगरी-ला डायलॉग के दौरान जनरल अनिल चौहान ने ब्लूमबर्ग टीवी को दिए इंटरव्यू में ऑपरेशन सिंदूर पर खुलकर बात की। उन्होंने माना कि मई में हुए इस संघर्ष में भारत को कुछ नुकसान हुआ। लेकिन उन्होंने जोर देकर कहा, “महत्वपूर्ण ये नहीं कि जेट्स गिरे, बल्कि ये है कि वे क्यों गिरे।” उनके मुताबिक, भारत ने अपनी टैक्टिकल गलतियाँ समझीं, उन्हें सुधारा और सिर्फ दो दिन बाद अपने ‘सारे जेट्स’ फिर से उड़ाए। इन जेट्स ने लंबी दूरी के टारगेट्स पर सटीक हमले किए।

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट का स्क्रीनशॉट

जनरल चौहान ने बताया कि भारत ने पाकिस्तान के अंदर, 300 किलोमीटर गहराई तक, भारी हवाई रक्षा वाले एयरफील्ड्स पर शानदार एक्यूरेसी के साथ हमले किए। ये भारत की सैन्य ताकत और उसकी तकनीकी क्षमता का सबूत है। उन्होंने ये भी कहा कि पाकिस्तान के साथ संचार के चैनल हमेशा खुले रहे, जिससे स्थिति को नियंत्रित करने में मदद मिली। न्यूक्लियर युद्ध की आशंका पर उन्होंने कहा कि ये सोचना ‘बहुत दूर की बात’ है कि दोनों में से कोई देश न्यूक्लियर हथियारों का इस्तेमाल करने की कगार पर था। उनके मुताबिक, पारंपरिक युद्ध और न्यूक्लियर थ्रेशोल्ड के बीच काफी स्पेस है, जिसमें कई ‘स्तर’ हैं, इनका इस्तेमाल करके हालात को संभाला जा सकता है।

बता दें कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने पहले दावा किया था कि उनकी फौज ने छह भारतीय फाइटर जेट्स को मार गिराया। लेकिन उनके इस दावे को जनरल चौहान ने ‘एकदम गलत’ बताकर खारिज कर दिया। उन्होंने साफ कहा कि जेट्स की संख्या से ज्यादा जरूरी है गलतियों को समझना और सुधारना।

पाकिस्तान ने ये भी दावा किया कि उसने चीन और अन्य देशों से मिले हथियारों का इस्तेमाल किया, जो बहुत प्रभावी रहे। जनरल चौहान ने इन दावों को भी खारिज करते हुए कहा कि ये हथियार ‘काम के ही नहीं’ थे। भारत के डिफेंस मिनिस्ट्री के एक रिसर्च ग्रुप ने भी पुष्टि की कि चीन ने पाकिस्तान को हवाई रक्षा और सैटेलाइट सपोर्ट दिया था, लेकिन भारत ने फिर भी उनके एयरफील्ड्स पर सटीक हमले किए।

जनरल चौहान के बयान के बाद सोशल मीडिया पर सवालों की बौछार शुरू हो गई। कुछ लोग पूछने लगे कि आखिर कितने जेट्स खोए गए? क्या भारत की सेना ने कोई बड़ी गलती की? विपक्ष, खासकर कॉन्ग्रेस, ने इस मौके को भुनाने की कोशिश की और सरकार पर सवालों की झड़ी लगा दी। लेकिन सवाल ये है कि क्या सिर्फ जेट्स के नुकसान पर फोकस करना सही है? ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने अपने मकसद हासिल किए – आतंकी ठिकाने नष्ट किए, पाकिस्तानी एयरबेस तबाह हुए और 100 से ज्यादा आतंकी और पाकिस्तानी फौजी मारे गए। फिर भी कुछ लोग भारत की इस जीत को छोटा करने की कोशिश कर रहे हैं।

ऑपरेशन सिंदूर से भारत को मिली असली जीत

युद्ध में नुकसान होना कोई नई बात नहीं है। दुनिया की कोई भी सेना, चाहे वो कितनी भी ताकतवर हो, युद्ध में नुकसान से बच नहीं सकती। लेकिन ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने जो हासिल किया, वो इस नुकसान से कहीं बड़ा है। आइए इसे कुछ प्वॉइंट्स में आपको समझाते हैं-

आतंकी ठिकानों का खात्मा: भारत ने पाकिस्तान के अंदर मस्जिदों में छिपे आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया। ये ठिकाने आतंकियों के लिए सुरक्षित पनाहगाह थे, लेकिन भारत ने उन्हें ध्वस्त कर दिया। ये ऑपरेशन 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर में हुए आतंकी हमले का जवाब था, जिसमें 26 नागरिक मारे गए थे।

पाकिस्तानी एयरबेस को नुकसान: भारत ने 11 पाकिस्तानी एयरबेस को निशाना बनाया। ये भारत की सैन्य रणनीति और तकनीकी क्षमता का सबूत है।

100+ आतंकी और पाक फौजी हुए ढेर: भारत ने न सिर्फ आतंकियों को मारा, बल्कि पाकिस्तानी फौज को भी भारी नुकसान पहुँचाया। ये भारत की जीत का साफ संदेश है।

सभी पायलट सुरक्षित: सबसे बड़ी बात, भारत के सारे पायलट सुरक्षित घर लौट आए। ये अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है।

ये नतीजे दिखाते हैं कि भारत ने न सिर्फ अपने मकसद पूरे किए, बल्कि दुनिया को बता दिया कि वो अपनी जनता की सुरक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकता है। फिर कुछ नुकसान पर इतना हंगामा क्यों?

कॉन्ग्रेस ने पूछे सवाल, लेकिन इरादों पर उठ रहे सवाल

कॉन्ग्रेस ने सीडीएस के बयान के बाद इस मुद्दे पर प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान कॉन्ग्रेस के प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कई सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “कॉन्ग्रेस लगातार सवाल पूछ रही है कि पहलगाम हमले के आतंकी कब पकड़े जाएँगे? पुलवामा में RDX किसने लाया? पाकिस्तान के साथ सीजफायर की शर्तें क्या थीं? सीजफायर किसके दबाव में हुआ? पहलगाम में अपने पति खोने वाली महिलाओं को न्याय मिला या नहीं? ऑपरेशन सिंदूर से क्या सबक सीखा गया, जैसा कि CDS ने भी कहा? अब कम से कम बीजेपी हमें सवाल पूछने वालों को देशद्रोही नहीं कहेगी।” इसके अलावा मल्लिकार्जुन खड़गे भी सवाल उठाने वाले नेताओं में शामिल हो गए।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पवन खेड़ा की कुटिल मुस्कान पर भी नजर डालना चाहिए।

पवन खेड़ा के इस बयान से लगता है कि कॉन्ग्रेस को भारत की इस जीत से ज्यादा खुशी नहीं है। उनके सवालों का लहजा और उनकी बॉडी लैंग्वेज ये बताती है कि वो जेट्स के नुकसान को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करना चाहते हैं। लेकिन जनरल चौहान ने साफ कहा कि गलतियाँ सुधारी गईं और दो दिन बाद भारत के सारे जेट्स फिर से उड़ान भर रहे थे। ‘सारे’ का मतलब साफ है, फिर भी कॉन्ग्रेस इस बात को नजरअंदाज कर रही है। ऐसा लगता है कि वो जानबूझकर भारतीय सेना की ताकत पर सवाल उठाना चाहती है।

वैसे, खुद पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ मान चुके हैं कि भारत-पाकिस्तान के इस 4 दिनी जंग में पाकिस्तान को बहुत नुकसान हुआ। पाकिस्तान खुद भारत पर हमले करना चाहता था, लेकिन उससे पहले ही भारत ने पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों पर हमला बोलकर उसे पंगु कर दिया और पाकिस्तानी फौज जवाबी कार्रवाई तक में सक्षम नहीं रह गई। शरीफ ने अजरबैजान में साफ कहा कि भारत ने ब्रह्मोस से हमले किए, जिसने उसकी क्षमताओं को नष्ट कर दिया।

इजरायल की जीत से लें उदाहरण

साल 1967 की सिक्स-डे वॉर में इजरायल ने 250 लड़ाकू जेट्स के साथ सिर्फ 352 उड़ानों (Sorties) में 600 विमानों वाली दुश्मन सेनाओं को हरा दिया। उन्होंने दुश्मनों के 452 जेट्स को नष्ट किया, जिसमें से 79 फाइटर जेट्स को डॉग फाइट में ढेर कर दिए गए। इस दौरान इजरायल ने अपने 46 फाइटर जेट्स खोए। इजरायल ने इस युद्ध में शानदार जीत दर्ज की, भले ही उसे 46 फाइटर जेट्स का नुकसान हुआ। लेकिन क्या कभी किसी इजरायली ने सवाल उठाया कि ‘हमने कितने जेट्स खोए?’ नहीं! क्योंकि एक राष्ट्रवादी के लिए जीत मायने रखती है, न कि छोटे-मोटे नुकसान।

भारत के मामले में भी यही बात लागू होती है। ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने अपने मकसद पूरे किए। आतंकी ठिकाने, एयरबेस, और दुश्मन सैनिकों को नुकसान पहुँचाया। यह जीत नहीं तो और क्या है? जो लोग भारत के जेट्स के नुकसान पर सवाल उठा रहे हैं, वे देश की ताकत और सेना के शौर्य को कमजोर करने की कोशिश क्यों कर रहे हैं? क्या वे नहीं चाहते कि भारत आतंकियों को सबक सिखाए? क्या वे चाहते हैं कि पाकिस्तान के झूठे दावों को सच माना जाए?

जो लोग भारत की सेना पर सवाल उठा रहे हैं, उनसे एक सीधा सवाल: आपके लिए देश की सुरक्षा और सम्मान ज्यादा जरूरी है या फिर सियासत और विदेशी फंडिंग से चलने वाला एजेंडा? अगर भारत ने आतंकी ठिकानों को तबाह किया, पाकिस्तान को सबक सिखाया और अपने सैनिकों को सुरक्षित वापस लाया, तो क्या यह जीत नहीं है? आप क्यों सिर्फ नुकसान की बात कर रहे हैं? क्या आप चाहते हैं कि भारत चुप रहे और आतंकी हमले सहता रहे? देश की सेना पर उंगली उठाने से पहले अपने इरादों पर सवाल उठाइए।

ऑपरेशन सिंदूर भारत की सैन्य ताकत और उसकी दृढ़ता का प्रतीक है। ये ऑपरेशन एक साफ संदेश है कि भारत अपनी जनता की सुरक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकता है। जो लोग इस जीत को छोटा करने की कोशिश कर रहे हैं, उनके लिए ये उपलब्धि दिल तोड़ने वाली हो सकती है। लेकिन राष्ट्रवादियों के लिए ये गर्व का पल है।

पहले पाकिस्तान के प्रति संवेदना, फिर भारत का समर्थन: देश की कूटनीति से कैसे बदला कोलंबिया ने अपना पलड़ा, जानिए शशि थरूर वाले प्रतिनिधिमंडल की क्या रहीं खासियतें

कोलंबिया ने शुक्रवार (30 मई 2025) को भारत के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में पाकिस्तानी जनहानि पर अपनी संवेदना वाले विवादास्पद बयान को वापस लिया। यह फैसला कॉन्ग्रेस सांसद शशि थरूर के वरिष्ठ कोलंबियाई अधिकारियों से आतंकवाद और आत्मरक्षा पर भारत की स्थिति स्पष्ट करने के बाद हुआ। इसके बाद कोलंबिया ने भारत के प्रति समर्थन का संदेश जारी किया।

कोलंबिया के पहले का बयान निराशाजनक

कॉन्ग्रेस सांसद शशि थरूर के नेतृत्व में भारतीय प्रतिनिधिमंडल बहु-राष्ट्रीय यात्रा के तहत पनामा और गुयाना होते हुए कोलंबिया पहुँचा। गौरतलब है कि कोलंबिया ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए 22 अप्रैल 2025 को आतंकियों द्वारा किए गए हिंदूओं के नरसंहार पर चुप्पी साधे रखी थी जबकि इसके जवाबी एक्शन में ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान में हुए नुकसान पर संवेदना जताई थी। इसे लेकर थरूर ने बोगोटा पहुँचकर कोलंबिया की इस प्रतिक्रिया पर निराशा जताई।

भारत के मजबूत खंडन और तथ्यों से सामने आया अंतर

इस भारतीय प्रतिनिधिमंडल में भाजपा और कॉन्ग्रेस के सांसद शामिल थे। उन्होंने कोलंबियाई अधिकारियों को बताया कि ऑपरेशन सिंदूर पहलगाम में 26 हिंदुओं की हत्या वाले आतंकी हमले के जवाब में किया गया था। प्रतिनिधिमंडल ने पाकिस्तानी सैन्य अधिकारियों की मौजूदगी वाली वे फोटोज भी दिखाई, जो मारे गए आतंकवादियों के अंतिम संस्कार में शामिल थे। सांसद शशि थरूर ने कहा, “हम आत्मरक्षा के अधिकार का प्रयोग कर रहे हैं। आतंकवादियों और उनका विरोध करने वालों की तुलना नहीं की जा सकती।”

कोलंबिया की उप-विदेश मंत्री रोसा योलांडा विलाविसेनियो से बैठक के बाद सांसद शशि थरूर ने कहा कि कोलंबिया का भारत पर दिया गया विवादास्पद बयान वापस ले लिया है। थरूर ने कहा, “यह अच्छी खबर है, उन्होंने अपना बयान वापस ले लिया है और हमारे रुख के समर्थन में एक सकारात्मक बयान जारी किया है।” एएनआई से बात करते हुए कोलंबिया की मंत्री ने कहा कि भारतीय प्रतिनिधिमंडल के विस्तृत स्पष्टीकरण के बाद कोलंबिया को अब साफ तौर पर स्थिति का अंदाजा हो रहा है। इस पर आगे भी संवाद जारी रहेगा।

कोलंबिया के रुख में आए बदलाव ने दोनों देशों की कूटनीति को प्रभावी ढंग से पेश किया है। भाजपा नेता और पूर्व राजदूत तरनजीत सिंह संधू ने कहा कि कोलंबिया ने भारत-विरोधी बयान वापस लेकर आतंकवाद पर भारत के रुख को स्वीकार किया है। भाजपा सांसद शशांक मणि ने कोलंबिया को उसके आतंकवाद प्रभावित इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि वह भारत की स्थिति को बेहतर समझ सकता है। उन्होंने कहा, “हम शांति का संदेश लेकर आए हैं, लेकिन हर आतंकी हमले का ठोस जवाब देंगे।”

कोलंबिया, जो जल्द ही संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का सदस्य बनेगा, अब पाकिस्तान की बजाय भारत के साथ खड़ा है। भारतीय प्रतिनिधिमंडल अपना अगला दौरा ब्राजील और अमेरिका में करेगा। यह भारत की कूटनीतिक सफलता और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आतंकवाद के खिलाफ उसके कड़े रुख को स्पष्ट करता है।

जिस 22 साल की शर्मिष्ठा की Video देख इस्लामी कट्टरपंथी हुए खफा, उसे पकड़ने 1500KM दूर गुरुग्राम पहुँची कोलकाता पुलिस: पाकिस्तान को गरियाने पर पहले से लड़की को मिल रही थी धमकियाँ

हिंदू सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर शर्मिष्ठा को शुक्रवार (30 मई 2025) को कोलकाता पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। यह गिरफ्तारी तब हुई जब शर्मिष्ठा को इस्लामी कट्टरपंथियों की भीड़ ऑनलाइन ‘डॉक्सिंग’ का शिकार बना रही थी और उनके साथ रेप करने से लेकर ‘सर तन से जुदा’ की भी धमकियाँ मिल रही थी।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, शर्मिष्ठा को ‘सर तन से जुदा’ जैसी धमकियाँ देने वाले इस्लामी कट्टरपंथी सोशल मीडिया यूजर्स के खिलाफ कार्रवाई करने की बजाय ममता बनर्जी की पुलिस ने शर्मिष्ठा को ही पकड़ लिया। कोलकाता पुलिस इसके लिए 1500 किलोमीटर का सफर तय करके गुरुग्राम तक पहुँच गई।

सोशल मीडिया एक्टिविस्ट सुनैना होले का कहना है कि पुलिस के पास कोई उचित दस्तावेज या वारंट नहीं था, लेकिन वे मजिस्ट्रेट का आदेश लेने में कामयाब रहे।

यही नहीं, शर्मिष्ठा को कोलकाता पुलिस अपने साथ ले गई और शनिवार (31 मई 2025) को उन्हें कोलकाता की अलीपुर कोर्ट में पेश किया। इस दौरान कोर्ट से शर्मिष्ठा को बेल नहीं मिली और उन्हें जेल भेज दिया गया।

यह विवाद 14 मई को शुरू हुआ जब एक पाकिस्तानी मुस्लिम हैंडल ने पहलगाम आतंकी हमले में 24 हिंदुओं के नरसंहार को छिपाने की कोशिश की। इस हमले में इस्लामी आतंकवादियों ने पीड़ितों की धार्मिक पहचान की पुष्टि करने के बाद उनकी हत्या की थी।

शर्मिष्ठा ने गुस्से में उस पाकिस्तानी हैंडल का मजाक उड़ाया और पूछा कि क्या उन्हें पहलगाम और अन्य पाकिस्तान प्रायोजित आतंकी हमलों की जानकारी है। उन्होंने यह भी सवाल किया कि क्या भारतीय सेना को इन हमलों के खिलाफ कुछ नहीं करना चाहिए। इसके बाद कुछ पाकिस्तानी और भारतीय मुस्लिम यूजर्स ने शर्मिष्ठा के वीडियो को गलत संदर्भ में लेकर इस्लाम और पैगंबर मुहम्मद के अपमान का आरोप लगाया।

शर्मिष्ठा को मिल रही धमकियों के स्क्रीनशॉट

इसके बाद दोनों देशों के कुछ मुस्लिम यूजर्स ने शर्मिष्ठा को बलात्कार, मौत और ‘सर तन से जुदा’ की धमकियाँ देना शुरू कर दिया। भारतीय मुस्लिम यूजर्स ने पुलिस को टैग करके शर्मिष्ठा की गिरफ्तारी की माँग की।

शर्मिष्ठा ने दबाव में आकर अपना वीडियो डिलीट कर दिया और बिना शर्त माफी भी माँगी। लेकिन कोलकाता पुलिस ने धमकी देने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने की बजाय शर्मिष्ठा को गिरफ्तार करने के लिए गुरुग्राम तक का सफर तय करना ज्यादा पसंद किया। ऐसे में शर्मिष्ठा के खिलाफ कोलकाता पुलिस की ये कार्रवाई कई सवाल भी खड़े कर रही है, जो समय के साथ सामने आते जाएँगे।

लोकमाता अहिल्याबाई के सम्मान में PM मोदी ने ₹300 का सिक्का किया जारी, नारी शक्ति का भी बखान: ऑपरेशन सिंदूर पर बोले- बहादुर महिला सिपाहियों ने की देश की रक्षा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने लोकमाता देवी अहिल्याबाई महिला सशक्तिकरण महासम्मेलन में हिस्सा लिया, जो जंबूरी मैदान में आयोजित हुआ। जंबूरी मैदान में जनसभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर को याद किया।

पीएम मोदी ने कहा, “लोकमाता अहिल्याबाई का नाम सुनते ही मन में श्रद्धा का भाव उमड़ पड़ता है। उनके महान व्यक्तित्व के बारे में बोलने के लिए शब्द कम पड़ जाते हैं। 250-300 साल पहले, जब देश गुलामी की जंजीरों में जकड़ा था, तब उन्होंने न सिर्फ अपने राज्य को समृद्ध किया, बल्कि देश की संस्कृति और परंपराओं को भी बचाया।”

पीएम ने बताया कि अहिल्याबाई ने काशी विश्वनाथ मंदिर सहित देश के कई मंदिरों और तीर्थ स्थलों का पुनर्निर्माण करवाया। उन्होंने कहा, “यह मेरा सौभाग्य है कि जिस काशी में लोकमाता ने इतने विकास कार्य किए, वहाँ मुझे भी सेवा का मौका मिला। आज अगर आप काशी विश्वनाथ मंदिर जाएँगे, तो वहाँ आपको अहिल्याबाई की मूर्ति भी दिखेगी।”

प्रधानमंत्री ने इस मौके पर लोकमाता अहिल्याबाई को समर्पित एक स्मारक डाक टिकट और 300 रुपये का विशेष सिक्का भी जारी किया। इस सिक्के पर अहिल्याबाई होलकर का चित्र अंकित है। साथ ही उन्होंने आदिवासी, लोक और पारंपरिक कलाओं में योगदान देने वाली महिला कलाकारों को राष्ट्रीय देवी अहिल्याबाई पुरस्कार से सम्मानित किया।

ऑपरेशन सिंदूर को बताया भारत की बहादुरी का प्रतीक

पीएम मोदी ने अपने भाषण में ऑपरेशन सिंदूर की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा, “पहलगाम में आतंकियों ने न सिर्फ भारतीयों का खून बहाया, बल्कि हमारी संस्कृति और समाज को बाँटने की कोशिश की। लेकिन ऑपरेशन सिंदूर भारत के इतिहास का सबसे बड़ा और सफल ऑपरेशन है। हमारी सेना ने उन आतंकी ठिकानों को मिट्टी में मिला दिया, जहाँ पाकिस्तानी फौज ने सोचा भी नहीं था।”

उन्होंने जोर देकर कहा, “अब भारत का हर नागरिक कह रहा है कि अगर तुम गोली चलाओगे, तो गोली का जवाब गोले से दिया जाएगा।” पीएम ने सिंदूर को नारी शक्ति और भारत की बहादुरी का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा, “हमारी संस्कृति में सिंदूर का विशेष महत्व है। हनुमान जी इसे लगाते हैं, शक्ति पूजा में इसका इस्तेमाल होता है। आज ऑपरेशन सिंदूर के जरिए यह भारत की ताकत का प्रतीक बन गया है।”

पीएम मोदी ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान महिला शक्ति की अप्रतिम बहादुरी का भी बखान किया। उन्होंने बताया कि पाकिस्तानी फौज की भारी गोलाबारी के बीच भी बीएसएफ की बहादुर महिला सिपाहियों ने देश की रक्षा की।

पीएम मोदी ने कहा, “स्कूल से लेकर युद्ध के मैदान तक…. आज देश अपनी बेटियों के शौर्य पर अभूतपूर्व भरोसा कर रहा है। नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन हों या फिर सीमापार का आतंक हो… आज हमारी बेटियाँ भारत की सुरक्षा की ढाल बन रही हैं।”

महिला सशक्तिकरण पर सरकार का जौर

पीएम मोदी ने अपने भाषण में महिला सशक्तिकरण पर खास जोर दिया। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने तीन करोड़ बहनों को लखपति दीदी बनाने का संकल्प लिया है, जिसमें से डेढ़ करोड़ से ज्यादा बहनें इस लक्ष्य को हासिल कर चुकी हैं। उन्होंने बताया कि गाँवों में बैंक सखियां और बीमा सखियाँ लोगों को बैंकिंग और बीमा की सुविधाओं से जोड़ रही हैं।

उन्होंने कहा, “आज हमारी बहनें और बेटियाँ हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं। पहले नई टेक्नोलॉजी से महिलाओं को दूर रखा जाता था, लेकिन अब स्थिति बदल गई है। हमारी सरकार महिलाओं को टेक्नोलॉजी में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। आज महिलाएँ वैज्ञानिक, डॉक्टर, इंजीनियर और पायलट बन रही हैं।”

पीएम ने ‘नमो ड्रोन दीदी’ अभियान का जिक्र करते हुए कहा कि इससे गाँव की महिलाओं को नई पहचान और कमाई का जरिया मिल रहा है। उन्होंने चंद्रयान-3 मिशन का उदाहरण देते हुए बताया कि इसमें 100 से ज्यादा महिला वैज्ञानिकों और इंजीनियरों ने अहम भूमिका निभाई।

लोकमाता अहिल्याबाई के मूल्यों पर चल रही सरकार

पीएम ने कहा कि उनकी सरकार लोकमाता अहिल्याबाई के मूल्यों पर चल रही है। उन्होंने बताया कि अहिल्याबाई ने गवर्नेंस का ऐसा मॉडल अपनाया, जिसमें गरीबों और वंचितों को प्राथमिकता दी गई। उन्होंने खेती को बढ़ावा देने के लिए नहरों का जाल बिछाया और कुटीर उद्योगों को प्रोत्साहित किया। पीएम ने कहा, “आज हमारी सरकार भी ‘नागरिक देवो भवः’ के मंत्र के साथ काम कर रही है। हमारी हर योजना में महिलाएँ केंद्र में हैं।”

उन्होंने बताया कि उनकी सरकार ने लाखों महिलाओं को पहली बार अपने घर का मालिक बनाया है। साथ ही, स्टार्टअप और स्पेस मिशनों में भी महिलाएं अहम योगदान दे रही हैं।

मुख्यमंत्री मोहन यादव का बयान

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा, “प्रधानमंत्री का यह दौरा लोकमाता अहिल्याबाई को समर्पित है। हम उनके दिखाए रास्ते पर चलकर महिला सशक्तिकरण के संकल्प को पूरा कर रहे हैं। पीएम मोदी जिस तरह से काम कर रहे हैं, वह अहिल्याबाई के आदर्शों को जीवंत कर रहा है।”

महिलाओं ने संभाली आयोजन की कमा

इस आयोजन की एक और खास बात थी कि इसकी पूरी जिम्मेदारी महिलाओं ने संभाली। दतिया से भोपाल तक पीएम के विमान को महिला पायलट ने उड़ाया। इंदौर में मेट्रो की पहली ट्रिप में सिर्फ महिलाएँ सवार थीं। भोपाल में सुरक्षा, मंच संचालन और अन्य सभी काम महिलाओं ने बखूबी निभाए।

इस कार्यक्रम में हजारों की संख्या में महिलाएँ, बहनें और बेटियाँ शामिल हुईं, जिन्होंने पीएम मोदी का जोरदार स्वागत किया। भोपाल की सड़कों पर पीएम का भव्य रोड शो हुआ, जिसमें सिंदूरी रंग की साड़ियों में सजी महिलाओं ने उनका अभिवादन किया। इस दौरान पूरे शहर में तिरंगे लहराए और ऑपरेशन सिंदूर से जुड़े पोस्टर लगे दिखे।

प्रधानमंत्री भोपाल पहुँचते ही एक शानदार रोड शो शुरू हुआ। उनके साथ मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव भी मौजूद थे। सड़कों के दोनों ओर खड़ी भीड़ ने तालियों और नारों के साथ पीएम का स्वागत किया। खास बात यह थी कि इस रोड शो में 15,000 से ज्यादा महिलाओं ने सिंदूर रंग की साड़ियाँ पहनकर पीएम का स्वागत किया। यह स्वागत ऑपरेशन सिंदूर के प्रति आभार जताने का एक अनोखा तरीका था। पूरे शहर में ऑपरेशन सिंदूर से जुड़े पोस्टर लगाए गए थे, जो भारत की बहादुरी और महिला शक्ति का प्रतीक बने।

रोड शो का समापन जंबूरी मैदान में हुआ, जहाँ पीएम ने विशाल जनसभा को संबोधित किया। इस आयोजन की सबसे खास बात यह थी कि इसकी पूरी जिम्मेदारी महिलाओं ने सँभाली। सुरक्षा से लेकर मंच संचालन, साइट मैनेजमेंट और हेलीपैड तक हर काम महिला अधिकारियों और कर्मचारियों ने बखूबी निभाया। यह नजारा महिला सशक्तिकरण का एक जीता-जागता उदाहरण था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भोपाल दौरा न सिर्फ एक राजनैतिक आयोजन था, बल्कि यह महिला सशक्तिकरण और भारत की ताकत का एक मजबूत संदेश भी था। ऑपरेशन सिंदूर की सफलता और लोकमाता अहिल्याबाई के योगदान को याद करते हुए पीएम ने देश की महिलाओं को प्रेरित किया। भोपाल की सड़कों पर लहराते तिरंगे और सिंदूरी रंग में सजी महिलाओं ने इस आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया। यह दौरा नारी शक्ति और भारत की एकता का प्रतीक बनकर उभरा।

‘जो 27 साल में नहीं हुआ, वो BJP ने 100 दिन में कर दिखाया’: दिल्ली में रेखा सरकार ने जारी की अपनी ‘वर्कबुक’, जानें अब तक क्या-क्या हुए बदलाव

दिल्ली में सीएम रेखा गुप्ता के नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार ने 20 फरवरी 2025 को शपथ ग्रहण करने के बाद अपने पहले 100 दिन पूरे कर लिए हैं। 27 साल बाद राष्ट्रीय राजधानी में भाजपा ने पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाई, विधानसभा चुनाव में 48 सीटें जीतकर आम आदमी पार्टी (आप) को विपक्ष में धकेल दिया।

इस मौके पर सरकार ने एक रिपोर्ट (जिसे ‘वर्कबुक’ कहा गया) जारी की है, जिसमें बताया गया है कि इन 100 दिनों में सरकार ने क्या-क्या काम किए हैं। इसमें खास तौर पर स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़कें, रोशनी और गरीबों की भलाई से जुड़ी योजनाओं पर ध्यान दिया गया है।

सीएम रेखा गुप्ता और उनके कैबिनेट मंत्रियों आशीष सूद और कपिल मिश्रा द्वारा जारी ‘वर्कबुक’ में सरकार की कई महत्वपूर्ण लोक कल्याणकारी पहलों का विस्तृत विवरण दिया गया है।

स्वास्थ्य से जुड़े काम

  • आयुष्मान भारत योजना- गरीब परिवारों को मुफ्त इलाज दिलाने के लिए इस योजना को दिल्ली में लागू किया गया है।
  • आयुष्मान आरोग्य मंदिर- अच्छे इलाज की सुविधा देने के लिए ऐसे स्वास्थ्य केंद्र बनाए जा रहे हैं।

जन-कल्याण योजनाएँ

  • महिला सम्मान योजना- गरीब महिलाओं को हर महीने आर्थिक मदद देने के लिए 51,000 करोड़ रुपये का बजट तय किया गया है।
  • वाय वंदना योजना- 70 साल से ऊपर के बुजुर्गों को 10 लाख रुपए तक का मुफ्त इलाज मदद और सुरक्षा देने के लिए यह योजना शुरू की गई है।
  • DEVI बसों को हरी झंडी- महिलाओं की सुरक्षा और सुविधा के लिए DEVI (Delhi Express Van for Improved Safety) बसों को हरी झंडी दिखाई गई है।
  • यमुना सफाई- यमुना नदी को साफ करने का बड़ा अभियान शुरू किया गया है।
  • स्ट्रीट लाइटें- दिल्ली की सड़कों पर ज्यादा और बेहतर स्ट्रीट लाइटें लगाई जा रही हैं, जिससे रात में रोशनी और सुरक्षा बेहतर हो।

मुख्यमंत्री का बयान

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि उन्हें खुशी है कि सरकार जनता के हक के लिए मेहनत कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि दिल्ली भी विकसित भारत के साथ आगे बढ़ेगी। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के नारे ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ को दोहराया।

वहीं दिल्ली के कैबिनेट मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि उनकी सरकार ने 27 साल में जो नहीं हुआ, वो 100 दिन में कर दिखाया है। उन्होंने स्वास्थ्य, शिक्षा, उद्योग और इंफ्रास्ट्रक्चर में ‘ऐतिहासिक काम’ का दावा किया, जिससे दिल्ली की जनता ‘बहुत खुश’ है।

रेखा गुप्ता की राजनीतिक पृष्ठभूमि

रेखा गुप्ता ने राजनीति की शुरुआत छात्र संगठन ABVP से की थी। वो दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्र संघ अध्यक्ष भी रह चुकी हैं। बाद में पार्षद बनीं और कई सामाजिक काम किए। हालांकि 2023 में वह आम आदमी पार्टी की शैली ओबेरॉय से महापौर का चुनाव हार गई थीं।

नक्सल चीफ बसवराजू के मरने पर छूटा तुर्की के वामपंथियों का रोना, श्रद्धांजलि देकर की भारत की निंदा: वीडियो में बोले नकाबपोश- ‘वो क्रांतिकारी योद्धा’, फिलीपींस के ‘कम्युनिस्ट गुरिल्ला’ भी तड़पे

नक्सल चीफ बसवराजू की मौत के बाद एक चौंकाने वाली घटना सामने आई। तुर्की के एक वामपंथी उग्रवादी संगठन ने भारत सरकार की निंदा करते हुए एक वीडियो बयान जारी किया, जिसमें एक नकाबपोश ने बसव राजू को ‘क्रांतिकारी योद्धा’ बताते हुए श्रद्धांजलि दी।

भारत सरकार के ऑपरेशन को ‘राज्य प्रायोजित हिंसा’ करार दिया गया। वीडियो ने यह स्पष्ट कर दिया कि भारतीय नक्सलियों और तुर्की के वामपंथी उग्रवादियों के बीच वैचारिक और नैरेटिव कनेक्शन मौजूद हैं।

इसके अतिरिक्त, तुर्की के राजनयिक कदम भी भारत के लिए चिंता का विषय बने। तुर्की के राजदूत ने पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार से मुलाकात कर भारत के खिलाफ एकजुटता जताई। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर को पाकिस्तान की संप्रभुता का उल्लंघन बताया और कथित निर्दोष नागरिकों की मौत पर शोक व्यक्त किया।

तुर्की के विदेश मंत्री हकान फिदान ने भी पाकिस्तानी उप प्रधानमंत्री से बात कर कश्मीर पर संयुक्त राष्ट्र प्रस्तावों के आधार पर हल निकालने की बात कही।

अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएँ

तुर्की के अलावा, फिलीपींस के कुछ वामपंथी समूहों द्वारा भी बसवराजू को श्रद्धांजलि दी गई है। सोशल मीडिया पर फिलीपींस के कम्युनिस्ट गुरिल्ला संगठनों और कुछ मानवाधिकार समूहों ने भी भारत की कार्रवाई की आलोचना की है।

जानकारी के अनुसार, दक्षिण अमेरिका, यूरोप और दक्षिण-पूर्व एशिया में सक्रिय कई लेफ्ट विंग उग्रवादी संगठनों ने भी बसव राजू के समर्थन में बयान दिए हैं। इससे यह पुष्टि होती है कि भारतीय माओवादी संगठनों के अंतरराष्ट्रीय विचारधारात्मक और नैरेटिव कनेक्शन मौजूद हैं।

बसवराजू कौन था?

नम्बाला केशव राव उर्फ बसवराजू उर्फ गगन्ना, आंध्र प्रदेश का रहने वाला था। उसने इंजीनियरिंग (B.TECH) की पढ़ाई की थी, लेकिन युवावस्था में वामपंथी विचारधारा से प्रभावित होकर CPI (माओवादी) से जुड़ गया।

2018 में, उसने संगठन के तत्कालीन महासचिव गणपति की जगह ली और नक्सल संगठन का महासचिव बन गया, जो संगठन में सबसे बड़ा पद होता है। वह संगठन की सेंट्रल कमेटी और पॉलिट ब्यूरो का प्रमुख सदस्य था।

बसवराजू को ताड़मेटला, झीरम घाटी, बुरकापाल और जेल ब्रेक जैसे कई बड़े नक्सली हमलों का मास्टरमाइंड माना जाता है। बसवराजू पर छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से 1.5 करोड़, और केंद्र सरकार की ओर से 10 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था।

वह माओवादी नेटवर्क का रणनीतिकार था और न केवल भारत में बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर विचारधारा, हथियारों की आपूर्ति और फंडिंग जैसे मसलों पर भी सक्रिय भूमिका निभा रहा था।

बसवराजू की मौत और मुठभेड़ की जानकारी

21 मई 2025, बुधवार को छत्तीसगढ़ के अबूझमाड़ के जंगलों में DRG (District Reserve Guard) और सुरक्षाबलों ने एंटी नक्सल ऑपरेशन में बड़ी सफलता हासिल की। मुठभेड़ में करीब 30 नक्सली ढेर किए गए, जिनमें कई शीर्ष नेता भी शामिल थे। इस ऑपरेशन में बसवराजू की भी मौत हो गई, जिसकी पुष्टि बाद में हुई।

यह ऑपरेशन नक्सली आंदोलन के इतिहास में एक निर्णायक मोड़ माना जा रहा है। इसे उसी तरह का ऑपरेशन बताया जा रहा है जैसे अमेरिका द्वारा ओसामा बिन लादेन या श्रीलंका द्वारा प्रभाकरन के खिलाफ चलाया गया था।

भारत में बसवराजू की गतिविधियाँ

भारत के कई राज्यों जैसे छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, झारखंड, ओडिशा आदि में नक्सली हमलों की साजिश और संचालन में उसकी भूमिका रही है। 2010 से लेकर अब तक हुए कई बड़े नक्सली हमलों की योजना और नेतृत्व उसी ने किया। वह लंबे समय से भूमिगत था और कहा जाता है कि वह जंगलों में घूम-घूमकर रणनीति बनाता था, जिससे उसे पकड़ना बेहद मुश्किल था।

बसवराजू की मौत, भारत की सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक ऐतिहासिक सफलता है। इससे न केवल नक्सल नेटवर्क का शीर्ष नेतृत्व ध्वस्त हुआ है, बल्कि इससे संगठन के वैचारिक मनोबल को भी भारी नुकसान पहुँचा है।

लेकिन, जिस प्रकार तुर्की, फिलीपींस और अन्य देशों में बसवराजू की मौत पर प्रतिक्रियाएँ आई हैं, उससे यह स्पष्ट होता है कि नक्सल आंदोलन अब केवल भारत की आंतरिक चुनौती नहीं है। यह एक अंतरराष्ट्रीय वैचारिक नेटवर्क का हिस्सा बन चुका है, जिसमें वामपंथी उग्रवादियों, मानवाधिकार संगठनों और राजनीतिक विरोधियों का समर्थन मौजूद है।

आने वाले समय में भारत को इस अंतरराष्ट्रीय नैरेटिव को चुनौती देने के लिए राजनयिक मोर्चे पर सख्त नीति, सोशल मीडिया पर निगरानी, और विचारधारात्मक काउंटर नैरेटिव विकसित करने की आवश्यकता होगी।

धर्म, शासन और सेवा का दुर्लभ संगम लोकमाता अहल्याबाई होल्कर: काशी से केदारनाथ तक जिनकी छाप, आत्ममंथन माँगती है 300वीं जयंती

भारतीय इतिहास में जब-जब लोक कल्याण की बात आती है, तब-तब कुछ व्यक्तित्व नक्षत्रों की भाँति चमकते हैं – ऐसे ही एक तेजस्वी नक्षत्र थीं लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर, जिनका जन्म 31 मई, 1725 को महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले के चौड़ी गांव में हुआ था। उनके पिता माणकोजी शिंदे एक सामान्य कृषक थे, लेकिन अत्यंत धार्मिक और संस्कारी व्यक्ति थे। माता सुशीला बाई ने बचपन से ही अहिल्याबाई को धर्म, तप, सेवा और सहनशीलता के संस्कार दिए, जो उनके पूरे जीवन की आधारशिला बने।

एक असाधारण जीवन की शुरुआत

सामाजिक रीतियों से अलग, अहिल्याबाई को बाल्यकाल में ही होलकर राजवंश के अधिपति मल्हारराव होलकर की दृष्टि में आने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। मल्हारराव ने उनके संस्कार, बुद्धिमत्ता और व्यवहार से प्रभावित होकर उन्हें अपने पुत्र खांडेराव से विवाह के लिए वरण किया। इस प्रकार वे इंदौर स्थित होलकर राजघराने की बहू बनीं।

अहिल्याबाई का जीवन प्रारंभ से ही संघर्ष से भरा रहा। पति खांडेराव की युद्ध में असमय मृत्यु (1754), फिर ससुर मल्हारराव होलकर का निधन (1766), और उसके बाद अपने इकलौते पुत्र मालेराव की मृत्यु – ये सारे आघात किसी भी सामान्य स्त्री को तोड़ सकते थे। लेकिन अहिल्याबाई, सहनशीलता, धैर्य और शासन-प्रबंधन में अपनी विलक्षण क्षमता के बल पर न केवल स्वयं को संभाल पाईं, बल्कि पूरे होलकर साम्राज्य को भी।

त्याग और तपस्या का प्रतीक नेतृत्व: 1767 में अहिल्याबाई ने होलकर साम्राज्य की बागडोर संभाली। उन्होंने प्रशासनिक खर्च में कटौती कर व्यक्तिगत जीवन को अत्यंत साधारण रखा। उनकी सबसे बड़ी विशेषता थी कि वे कभी भी राज्य कोष का दुरुपयोग नहीं करती थीं। उन्होंने आमजन की भलाई को ही शासन का मूल उद्देश्य माना और यही दृष्टिकोण उन्हें ‘लोकमाता’ की उपाधि तक ले गया।

उनके शासनकाल में महेश्वर को राजधानी बनाया गया, जहाँ उन्होंने एक सादगीपूर्ण जीवन बिताया। उनका निवास आज भी वहाँ मौजूद है जो नेताओं, प्रशासकों और न्याय व्यवस्था से जुड़े लोगों के लिए एक आदर्श जीवनशैली का प्रतीक बन सकता है।

न्यायप्रियता और प्रजावत्सलता का आदर्श

अहिल्याबाई की न्याय प्रणाली इतनी पारदर्शी और त्वरित थी कि उनकी तुलना प्राचीन काल के राजा हरिश्चन्द्र से की जाती है। वे व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में बैठकर मामलों की सुनवाई करती थीं। उनका दृष्टिकोण था, “राजा का पहला कर्तव्य प्रजा का पालन है, अपने लाभ का नहीं।”

उन्होंने सैनिकों की उचित वेतन व्यवस्था, कृषकों की सहायता हेतु करों में कटौती, और व्यापारिक सुविधाओं का विस्तार करके समाज के सभी वर्गों को सशक्त किया।

भारतीय संस्कृति की संरक्षिका थीं लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर

देवी अहिल्याबाई केवल एक कुशल प्रशासिका ही नहीं, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक पुनरुत्थान की एक प्रमुख प्रेरणा भी थीं। उन्होंने देश भर में सैकड़ों मंदिरों, घाटों, कुओं, धर्मशालाओं, यात्रियों की सहायता हेतु सदाव्रत (निःशुल्क भोजनालयों) का निर्माण कराया। उनके द्वारा बनवाए गए धार्मिक स्थलों की सूची इतनी विस्तृत है कि उसका संकलन स्वयं में एक शोध का विषय हो सकता है।

काशी, अयोध्या, मथुरा, वृंदावन, सोमनाथ, द्वारका, रामेश्वरम, बद्रीनाथ, केदारनाथ, त्र्यंबकेश्वर, उज्जैन, गंगासागर, तिरुपति, जगन्नाथ पुरी – भारत का शायद ही कोई प्रमुख तीर्थस्थल हो जहाँ देवी अहिल्याबाई के योगदान की छाप न हो।

विशेष रूप से काशी विश्वनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण (1780) उनकी धार्मिक चेतना और सांस्कृतिक प्रतिबद्धता का प्रतीक है। जब 1669 में औरंगज़ेब ने इस मंदिर को ध्वस्त किया था, तब लंबी अवधि तक यह उपेक्षित पड़ा रहा। अहिल्याबाई ने न केवल इसका पुनर्निर्माण कराया, बल्कि वहाँ के पुजारियों, यात्रियों, धर्मशालाओं और तीर्थयात्रियों के समुचित प्रबंधन की संपूर्ण व्यवस्था भी की।

एक आधुनिक दृष्टिकोण युक्त शासिका

उन्होंने सड़कों, जल प्रबंधन, आवागमन, सुरक्षा और संचार व्यवस्था में भी नवाचार किया। उनके शासनकाल में काशी से कलकत्ता तक सड़क बनाई गई, ताकि तीर्थयात्री सुविधापूर्वक यात्रा कर सकें। ब्रिटिश अधिकारी सर जॉन माल्कम ने अपनी पुस्तक Memoirs of Central India (1823) में देवी अहिल्याबाई की तारीफ़ करते हुए लिखा कि उनके सहायक कप्तान डी.टी. स्टुअर्ट ने केदारनाथ और देवप्रयाग जैसे दुर्गम तीर्थों में देवी द्वारा निर्मित धर्मशालाएँ और कुएँ देखे।

सनातन संस्कृति में नारी की महिमा: भारतीय संस्कृति में नारी शक्ति को जगद्जननी, अर्धनारीश्वर, शक्ति-स्वरूपा माना गया है। देवी अहिल्याबाई उसी परंपरा की मूर्त प्रतिमा थीं। वे एक साथ माँ, विधवा, प्रशासक, न्यायाधीश, दानी, योगिनी, शास्त्रज्ञ और सत थीं। उन्होंने अपने जीवन से सिद्ध कर दिया कि धर्म और सत्ता का समन्वय संभव है, जब उद्देश्य लोकमंगल हो।

आज के युग में क्यों प्रासंगिक हैं अहिल्याबाई? आज जब राजनीति, प्रशासन और धर्म – तीनों में नैतिक मूल्यों का क्षरण हो रहा है, तब अहिल्याबाई जैसी विभूतियाँ प्रेरणा देती हैं कि ईमानदारी, त्याग और सेवा भाव से भी शासन चलाया जा सकता है।

उनके जीवन का प्रत्येक पहलू आधुनिक सार्वजनिक जीवन के लिए एक पाठशाला है कि कैसे सीमित साधनों में भी जनकल्याण किया जा सकता है, कैसे सत्ता का उपयोग स्वहित की बजाय राष्ट्रहित में किया जाना चाहिए, और कैसे नारी होते हुए भी सर्वोच्च नेतृत्व की कसौटियों पर खरा उतरा जा सकता है।

त्रिशताब्दी जयंती: केवल उत्सव नहीं, आत्ममंथन का अवसर

शनिवार (31 मई, 2025) को देवी अहिल्याबाई होलकर के धरती पर अवतरण के 300 वर्ष पूरे हो रहे हैं। यह केवल एक तथ्य नहीं, बल्कि एक राष्ट्र के लिए आत्ममंथन का अवसर है।

यह सोचने का समय है कि:
● क्या हम उनके न्याय और प्रशासनिक आदर्शों से कुछ सीख पा रहे हैं?
● क्या हमने उनकी प्रजावत्सलता को अपने व्यवहार में उतारा है?
● क्या हम धार्मिक स्थलों और सांस्कृतिक विरासत के प्रति वैसी ही श्रद्धा और सेवा भाव रखते हैं?
● क्या आज के नेताओं और प्रशासकों में उनका आदर्श प्रेरणा बन सकता है?

जब तक इन प्रश्नों का उत्तर ‘हाँ’ नहीं बनता, तब तक देवी अहिल्याबाई की त्रिशताब्दी जयंती का उत्सव केवल रस्म अदायगी बन कर रह जाएगा।

एक युगद्रष्टा का अमर संदेश

अहिल्याबाई का सम्पूर्ण जीवन एक ग्रंथ है, जिसमें त्याग है, धर्म है, नीति है, नेतृत्व है और सबसे बढ़कर है लोकमंगल की भावना। उनके लिए सत्ता सेवा का माध्यम थी, न कि भोग का।

आज आवश्यकता है कि हम अपने बच्चों को उनके जीवन की गाथा सुनाएँ, अपने नेताओं को उनके सिद्धांतों से अवगत कराएँ, और अपने समाज को उनके जीवन से जोड़ें। तभी ‘लोकमाता’ की यह विरासत यथार्थ में जीवित रह पाएगी।

(लेखक हरिश्चन्द्र श्रीवास्तव सामाजिक एवं राजनीतिक चिंतक हैं)

ज्योति मल्होत्रा और मोहम्मद कासिम एक ही थैली के चट्टे-बट्टे, दोनों भारत से निकाले गए दानिश के इशारे पर कर रहे थे काम: बड़ा भाई हसीन भी पाकिस्तान जाकर ले चुका है ट्रेनिंग

राजस्थान के भरतपुर जिले के डीग से पाकिस्तानी जासूस मोहम्मद कासिम को पकड़ा गया है। मोहम्मद कासिम भी ज्योति मल्होत्रा से जुड़े पाकिस्तानी एंबेसी में तैनात ISI एजेंट एहसान-उर-रहमान उर्फ दानिश के संपर्क में था। वो दानिश को सेना से जुड़ी जानकारियाँ देता था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ISI के ज्योति मल्होत्रा जासूसी नेटवर्क से जुड़ा कासिम 2 बार पाकिस्तान जा चुका है। कासिम पर पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के लिए जासूसी करने, भारतीय सेना के ठिकानों की जानकारी देने और भारतीय सिम कार्ड पाकिस्तान भेजने के आरोप है। कासिम का बड़ा भाई हसीन पुराना पाकिस्तानी एजेंट है। वो पाकिस्तान में ट्रेनिंग ले चुका है। बाद में उसके वीजा से जुड़ी दिक्कतें आई, इसलिए उसने छोटे भाई कासिम को ट्रेनिंग के लिए पाकिस्तान भेजा था।

पाकिस्तान जाकर ली जासूसी की ट्रेनिंग

मोहम्मद कासिम अगस्त 2024 और मार्च 2025 में दो बार पाकिस्तान गया। वहाँ उसने लाहौर के एक सैन्य अड्डे पर आईएसआई से जासूसी की ट्रेनिंग ली। वह करीब 90 दिन पाकिस्तान में रहा और वहाँ ‘शाह जी’, ‘ताऊ जी’ और वकास जैसे आईएसआई हैंडलर्स से मिला।

जाँच में पता चला कि कासिम ने भारतीय सिम कार्ड पाकिस्तान भेजे। इन सिम कार्ड का इस्तेमाल पाकिस्तानी जासूसों ने व्हाट्सएप के जरिए भारतीय लोगों से संपर्क करने और सेना व सरकार की गोपनीय जानकारी इकट्ठा करने के लिए किया।

कासिम का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड भी है। वह दिल्ली में अपहरण के एक मामले में पाँच साल तिहाड़ जेल में सजा काट चुका है। जेल से छूटने के बाद वह अपने गाँव गँगौरा में झाड़-फूँक और तंत्र-मंत्र के बहाने अपनी हरकतों को अंजाम देता था।

कासिम की गिरफ्तारी के बाद उसके तीन भाई हसीन, अफजल मौलाना और इश्तियाक फरार हैं। सूत्रों के मुताबिक, हसीन भी पाकिस्तान जाकर आईएसआई से जासूसी की ट्रेनिंग ले चुका है। वह दोबारा पाकिस्तान जाना चाहता था, लेकिन वीजा की दिक्कतों की वजह से नहीं जा सका। इसके बाद उसने अपने छोटे भाई कासिम को पाकिस्तान भेजा।

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान गिरफ्तार

कासिम को ‘ऑपरेशन सिंदूर‘ के दौरान पकड़ा गया है। जो अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद शुरू किया गया है। इस अभियान के दौरान ही देशभर में कई जासूसी नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है। अब तक हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश से 11 लोगों को पाकिस्तान के लिए जासूसी करने के आरोप में पकड़ा जा चुका है।