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‘तेरा कृष्णा कैसा रंगीला था देख’, जिस वजाहत कादरी ने करवाई शर्मिष्ठा पर FIR, वो लगातार करता है हिन्दू देवी-देवताओं का अपमान: दर्ज हुए अब 3 केस, लेकिन कोलकाता पुलिस नहीं ले रही कोई एक्शन

पश्चिम बंगाल पुलिस ने जिस वजाहत खान कादरी रशीदी की शिकायत पर लॉ स्टूडेंट शर्मिष्ठा पनोली को गिरफ्तार किया है, अब उसकी घिनौनी हरकतें सामने आ रही हैं। हिंदू देवी-देवताओं के अपमान, अभद्र टिप्पणियों और उसके सोशल मीडिया पर उगले गए जहर को लेकर वजाहत खान कादरी रशीदी के खिलाफ 3 एफआईआर दर्ज हुई हैं। 2 एफआईआर दिल्ली में और एक एफआईआर गुवाहाटी में दर्ज किए जाने की खबरें सामने आ रही हैं।

हालाँकि, अब वज़ाहत खान खुद मुश्किलों में घिर गया है। इंटरनेट यूजर्स की जाँच में यह तथ्य सामने आया कि वज़ाहत खान कादरी रशीदी नाम का जो व्यक्ति पैगंबर मोहम्मद और इस्लाम के कथित अपमान से नाराज़ होकर शर्मिष्ठा पनोली के खिलाफ़ कार्रवाई की माँग कर रहा था, वह खुद सोशल मीडिया पर हिंदू धर्म और हिंदू देवी-देवताओं का बार-बार अपमान करता रहा है।

बता दें कि शर्मिष्ठा ने जिस टिप्पणी के लिए माफ़ी माँग ली थी, उसी को आधार बनाकर रशीदी फ़ाउंडेशन के सह-संस्थापक वज़ाहत खान कादरी रशीदी ने कोलकाता पुलिस में उसके खिलाफ़ शिकायत दर्ज कराई थी और कोलकाता पुलिस ने शर्मिष्ठा को 1500 किमी दूर गुरुग्राम से गिरफ्तार कर लिया था। वज़ाहत ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर शर्मिष्ठा की गिरफ्तारी की माँग की थी, शिकायत दर्ज कराने की जानकारी साझा की थी और बाद में उनकी गिरफ्तारी का जश्न भी मनाया था।

लेकिन अब उस वजाहत के कई आपत्तिजनक पोस्ट सामने आए हैं, जिनमें वो हिंदू देवी-देवताओं के लिए अभद्र भाषा का प्रयोग करता था। इन पोस्ट्स में से कई को वज़ाहत ने बाद में डिलीट भी कर दिया। उसने अपनी पोस्ट में हिंदू देवी-देवताओं और सनातन धर्म के खिलाफ अपमान जनक भाषा का प्रयोग किया। उसके कुछ पोस्ट इस प्रकार हैं..

“एक हिंदू अपनी साली को अंग अंग पर रंग लगाते हुए और अपने दोस्तों को भी उसके साथ ऐसा करने का निमंत्रण देते हुए… सी हिंदुओं… यहीं है इनकी असलियत… बलात्कारी संस्कृति”

“नहीं वो उसकी बात कर रहा है जिसकी 16108 राखेलो के साथ रंग रसिया मनाता था…या चुपके-चुपके लड़कियों को नहाते हुए देखता था…”

“मेरे पास आपके लिए कुछ है… पहले अपने धर्म के बारे में पढ़ो। मूत्र पीने वाले मैल हैं।”

“तुझ जैसी &^$^&* पेट की औलाद रसूल के बारे में बारे में बात करे ये जेब नहीं देता…तू इसकी बात कर, तेरा कृष्णा कैसा रंगीला था देख…सच्चाई देख, वहम में मत जी… $%टू साले, तूने जो भी कहा वो सब तो झूठ और बहुत है लेकिन ये तेरे ही किताब का है सच पढ़, सुवर के पिल्ले”

वज़ाहत खान के ट्विटर पोस्ट का स्क्रीनशॉट

इन आपत्तिजनक पोस्ट्स के आधार पर एडवोकेट विनीत जिंदल ने वज़ाहत खान के खिलाफ़ दिल्ली पुलिस और साइबर क्राइम यूनिट में आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने वज़ाहत पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 194, 195, 356 और आईटी एक्ट की धाराओं 66, 67, 69 के तहत एफआईआर दर्ज करने की माँग की है।

उन्होंने ऑनलाइन शिकायत में लिखा, “मैं सोशल मीडिया पर वज़ाहत खान कादरी रशीदी नामक व्यक्ति द्वारा प्रसारित की जा रही बेहद आपत्तिजनक, घृणित और अपमानजनक पोस्ट की एक सीरीज के बारे में एक औपचारिक शिकायत दर्ज करने के लिए लिख रहा हूँ, जिनके प्रोफ़ाइल और पोस्ट ट्विटर (अब एक्स) जैसे प्लेटफ़ॉर्म पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हैं।

उन्होंने आगे कहा की व्यक्ति ने हिंदू समुदाय, उसकी मान्यताओं, प्रथाओं और भगवान कृष्ण सहित पूजनीय व्यक्तियों को निशाना बनाते हुए अभद्र भाषा वाले बार-बार पोस्ट किए हैं। पवित्र ग्रंथों और देवताओं का मज़ाक उड़ाते हुए यौन रूप से स्पष्ट और अश्लील भाषा का इस्तेमाल किया है। सामाजिक सद्भाव को बिगाड़ने के उद्देश्य से सांप्रदायिक उकसावे की कार्रवाई की गई है। धार्मिक भावनाओं का उपहास करने और उन्हें भड़काने के उद्देश्य से ग्राफ़िक गलत सूचना और मॉर्फ़ की गई तस्वीरें।

एडवोकेट विनीत जिंदल के आनुसार सामग्री में बलात्कारी संस्कृति, मूत्र पीने वाले और हिंदू त्योहारों, देवताओं और मंदिरों (जैसे, कामाख्या देवी मंदिर) पर अपमानजनक टिप्पणी जैसे अपमानजनक शब्द शामिल हैं। ये पोस्ट धार्मिक समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने का एक स्पष्ट और जानबूझकर किया गया प्रयास प्रतीत होता है, जो 194,195,356 बीएनएस और आईटी अधिनियम की धारा 66,67,69 के तहत दंडनीय अपराध है। इसलिए उपरोक्त व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के लिए मैं तैयार हूँ। मैं आगे कोई भी जानकारी देने या आवश्यकतानुसार जाँच प्रक्रिया में सहयोग करने के लिए भी तैयार हूँ”।

अधिवक्ता अमिता सचदेवा ने कोलकाता में रहने वाले वजाहत खान के खिलाफ दिल्ली में साकेत पुलिस के साइबर अपराध में दूसरी शिकायत दर्ज कराई है।

उन्होंने लिखा कि कोलकाता स्थित रशीदी फाउंडेशन के सह-संस्थापक वज़ाहत खान कादरी रशीदी के खिलाफ़ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर हिंदू धर्म, देवी-देवताओं, त्योहारों और संस्कृति को निशाना बनाकर आपत्तिजनक, अपमानजनक और भड़काऊ सामग्री पोस्ट करने के आरोप में शिकायत दर्ज की गई है। जिंदल ने कहा कि इन पोस्टों से हिंदू समुदाय की धार्मिक भावनाएँ आहत हुई हैं, जिसमें वह स्वयं भी शामिल हैं, और इनसे सांप्रदायिक तनाव भड़कने की आशंका है।

इस बीच, वजाहत के खिलाफ तीसरी एफआईआर भी दर्ज हुई है। वजाहत के खिलाफ तीसरी एफआईआर गुवाहाटी में दर्ज कराई गई है। वायस ऑफ असम और सांतनु सैकिया ने ये एफआईआर दर्ज कराई है। इसमें कामाख्य मंदिर पर दिए उसके घृषित पोस्ट को आधार बनाया गया है।

कथित रूप से, वज़ाहत खान ने अब अपने सोशल मीडिया अकाउंट से ऐसे कई आपत्तिजनक पोस्ट डिलीट कर दिए हैं। इसी तरह, शर्मिष्ठा पनोली ने भी अपने कथित आपत्तिजनक वीडियो को डिलीट कर दिया था और सार्वजनिक रूप से माफ़ी माँगी थी। इसके बावजूद, पश्चिम बंगाल पुलिस ने शर्मिष्ठा पनोली को गिरफ्तार करने के लिए 1500 किलोमीटर दूर चली गई और कोलकाता की अलीपुर कोर्ट ने उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया जबकि वज़ाहत खान जो वही कोलकाता में मौजूद है उसके खिलाफ बंगाल पुलिस ने अब तक कोई कार्रवाई नहीं की।

शेख हसीना का किया तख्तापलट, आतंकी भी छोड़े… नरसंहार करने वाले भी हुए रिहा: अब बांग्लादेश में जमात-ए-इस्लामी पर से भी बैन हटा, ‘इस्लामी प्रोजेक्ट’ की तरफ एक और कदम

बांग्लादेश में इस्लामी कट्टरपंथ के वापस पैर पसारने की प्रक्रिया लगभग पूरी हो गई है। शेख हसीना को सत्ता से हटाने के बाद आई मोहम्मद यूनुस की सरकार लगातार इन तत्वों को शह दे रही है। इसी कड़ी में बांग्लादेश में इस्लामी कट्टरपंथी संगठन जमात-ए-इस्लामी को चुनाव लड़ने की मंजूरी मिल गई है।

यह मंजूरी बांग्लादेश के सुप्रीम कोर्ट ने दी है। सुप्रीम कोर्ट ने जमात के चुनावी पंजीकरण को दर्ज किए जाने का आदेश दिया है। जमात को शेख हसीना की सरकार ने बैन कर दिया था। बांग्लादेश के सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला रविवार (1 जून, 2025) को दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से कहा है कि वह जमात का दोबारा पंजीकरण करके उसे चुनाव चिन्ह भी दे। यह फैसला जमात द्वारा दायर एक याचिका के बाद लिया गया है। इस याचिका पर सुनवाई करते हुए बांग्लादेश के सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले को पलट दिया।

बांग्लादेश में 2013 में जमात के चुनाव लड़ने पर रोक लगाई गई थी। इस फैसले को हाई कोर्ट ने तब बरकरार रखा था। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का सीधा असर बांग्लादेश के आगामी चुनावों पर होने वाला है। बांग्लादेश में वर्तमान में अंतरिम सरकार मोहम्मद यूनुस चला रहा है और उस पर राजनीतिक दबाव है।

बांग्लादेश में 2025-26 में कभी भी चुनाव हो सकते हैं। वर्तमान में बांग्लादेश नेशनल पार्टी (BNP) भी चुनाव की जल्द माँग कर रही है। आवामी लीग को बांग्लादेश में पहले ही बैन किया जा चुका है। ऐसे में BNP और जमात के बीच अब सीधी टक्कर होगी।

ध्यान देने वाली बात है कि जमात-ए-इस्लामी वहीं संगठन है, जिसने 1971 में बांग्लादेश के मुक्ति युद्ध के समय अपने लोगों की जगह पाकिस्तान का समर्थन किया था। इसके रजाकारों ने पाकिस्तानी फ़ौज के साथ मिलकर बांग्लादेश के लोगों और हिन्दुओं की हत्याओं, रेप और नरसंहार में हिस्सा लिया था।

जमात-ए-इस्लामी पर 1971 के बाद भी बैन लगा दिया गया था। इसी इस्लामी कट्टरपंथी संगठन ने जुलाई, 2024 के बाद शेख हसीना की सत्ता के खिलाफ खूब हिंसा की थी तख्तापलट में अहम रोल निभाया था।

बांग्लादेश में इस्लामी कट्टरपंथ के समर्थन में उठाया गया यह कोई पहला कदम नहीं है। वर्तमान में बांग्लादेश का सुप्रीम कोर्ट, यूनुस सरकार और बाकी अंग लगातार इसी दिशा में काम कर रहे हैं। हाल ही में बांग्लादेश के सुप्रीम कोर्ट ने जमात के एक ऐसे आतंकी को रिहा किया था, जिसे 1200 से अधिक लोगों की हत्याओं के मामले में मौत की सजा सुनाई गई थी।

उस पर रेप, नरसंहार और अपहरण जैसे गंभीर दोष सिद्ध हो चुके थे। इस रिहा होने वाले नेता का नाम ATM अजहरुल इस्लाम है। यह कोई अकेला ऐसा मामला नहीं है। बांग्लादेश में जबसे यूनुस की सरकार आई है, तब से जमात के नेताओं के साथ ही आतंकियों तक को छोड़ा जा रहा है।

बांग्लादेश में मोहम्मद यूनुस की सत्ता आने के बाद जसीमुद्दीन रहमानी को छोड़ा गया था। वह इस्लामी आतंकी संगठन अंसारुल बांग्ला का मुखिया है। उसने रिहा होने के कुछ ही घंटे के भीतर भारत के खिलाफ जहर उगला था। यहाँ तक कहा गया है कि बांग्लादेश में कई आतंकी तो बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के ही छोड़ दिए जा रहे हैं।

इस्लामी कट्टरपंथ की दिशा में कदम बढ़ाने वाली यूनुस सरकार सिर्फ आतंकियों को ही नहीं छोड़ रही है, वह बांग्लादेश के संविधान को बदलने की तरफ भी कदम बढ़ा चुकी है। बांग्लादेश में संविधान सुधार के नाम पर बनाए गए एक आयोग ने यह सिफारिश की थीं कि संविधान में से सेक्युलर शब्द को हटा दिया जाए।

इसके अलावा ‘राष्ट्रवाद’ शब्द हटाने की बात भी कही गई थी। यह बदलाव बांग्लादेश को इस्लामी कट्टरपंथ की तरफ धकेलने का एक और कदम था। बांग्लादेश में पूरी तरह से यह अभियान चल रहा है कि उसकी 1971 के बाद बनी बंगाली राष्ट्रवाद की छवि मिटा कर पाकिस्तान जैसे एक इस्लामी मुल्क की छवि गढ़ी जाए।

इसी के चलते बांग्लादेश अपने यहाँ हिन्दुओं पर होने वाले अत्याचारों को लेकर एकदम गंभीर नहीं दिखता। मोहम्मद यूनुस तक हिन्दुओं के खिलाफ हुई हिंसा को झुठलाने का प्रयास करते हैं। हाल ही में हिन्दुओं खिलाफ हुई हिंसा की एक घटना को मोहम्मद यूनुस ने झूठा करार देने का प्रयास किया था।

यह खबर ऑपइंडिया ने प्रकाशित की थी। लेकिन इसे झूठा साबित करने की कोशिश में मोहम्मद यूनुस को मुँह की खानी पड़ी और उसे अपना ट्वीट डिलीट करना पड़ा। इससे पहले भी यूनुस हिन्दुओं के खिलाफ हिंसा को ‘राजनीतिक हिंसा’ बताता रहा है। बांग्लादेश में हो रही यह सभी कोशिशें उसे इस्लामी मुल्क बनने की तरफ ले जा रही हैं।

bangladesh supreme court lifts ban from jamat e islami to fight election

कॉन्ग्रेस समर्थकों ने महिला पत्रकार के फाड़े कपड़े, तोड़ा हाथ… पुलिस से भी मारपीट और बदसलूकी: असम में गौरव गोगोई के प्रदेश अध्यक्ष बनते ही गुंडागर्दी, Videos आए सामने

असम के जोरहाट में शनिवार (31 मई 2025) को महिला पत्रकारों, पुलिसकर्मियों के साथ कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने बदतमीजी और मारपीट की, जिससे वह घायल हो गईं। इस दौरान महिला पत्रकार के कपड़े भी फट गए, वहीं मारपीट के दौरान उनका हाथ टूट गया। यह घटना जोरहाट के रवरिया हवाई अड्डे पर हुई, जहाँ कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता अपने नए प्रदेश अध्यक्ष गौरव गोगोई का स्वागत करने के लिए जमा हुए थे।

जानकारी के मुताबिक, जोरहाट कॉन्ग्रेस ने नवनियुक्त प्रदेश कॉन्ग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई के स्वागत समारोह को कवर करने के लिए मीडिया को आमंत्रित किया था। इसके लिए कई पत्रकार रवरिया हवाई अड्डे पर पहुँचे थे। लेकिन जब गौरव गोगोई हवाई अड्डे पर उतरे, तो कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने वहाँ भारी हंगामा शुरू कर दिया। उन्होंने न केवल पत्रकारों को, बल्कि वहाँ मौजूद पुलिसकर्मियों को भी धक्का-मुक्की की।

बता दें कि लोकसभा में कॉन्ग्रेस के डिप्टी लीडर गौरव गोगोई असम के पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई के बेटे हैं। उन्हें भूपेन कुमार बोरा की जगह असम प्रदेश कॉन्ग्रेस कमेटी का नया अध्यक्ष बनाया गया है। प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद वो पहली बार अपनी संसदीय सीट जोरहाट के दौरे पर पहुँचे थे। इस दौरान ये सारा घटनाक्रम हुआ।

गौरव गोगोई के स्वागत के दौरान मारपीट और बदतमीजी की शिकार हुई असमिया पत्रकार प्रियंका सेनापति ने पूरा घटनाक्रम साझा किया। वो असम के एनडी24 न्यूज चैनल की पत्रकार हैं। उन्होंने गौरव गोगोई को निशाने पर लेते हुए फेसबुक पर लिखा, “आज मुझे कुछ कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं का व्यवहार देखकर शर्मिंदगी महसूस हुई। आज का माहौल देखकर यह साफ हो गया कि अगर आप सत्ता में आए, तो क्या करेंगे। गौरव गोगोई के असम कॉन्ग्रेस अध्यक्ष बनने की खुशी सभी को है, यह समझ में आता है। लेकिन रवरिया एयरपोर्ट पर उनके आने के बाद कुछ कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने जिस तरह महिला पत्रकारों के साथ बदतमीजी की, वह बिल्कुल स्वीकार्य नहीं है।”

प्रियंका ने आगे लिखा, “कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने मेरे कपड़े तक फाड़ दिए। मैं ऐसी स्थिति कभी नहीं चाहती। कार्यकर्ताओं की धक्का-मुक्की की वजह से लोग गिर गए। अगर आप नहीं चाहते कि खबरें कवर की जाएँ, तो कृपया आगे से पत्रकारों को न बुलाएँ। हम आपसे इससे ज्यादा की उम्मीद नहीं कर सकते।”

प्रियंका ने अपनी घायल हाथ की तस्वीर भी फेसबुक पर पोस्ट की, जिसमें उनकी उँगलियों पर प्लास्टर बँधा हुआ दिख रहा है। उन्होंने एक वीडियो भी साझा किया, जिसमें साफ देखा जा सकता है कि गौरव गोगोई के हवाई अड्डे से बाहर आने के बाद कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने कैसे हंगामा मचाया और वहाँ मौजूद लोगों को धक्का-मुक्की की।

घटना के बाद सामने आए एक वीडियो में गौरव गोगोई को अपने समर्थकों की हरकत के लिए माफी माँगते हुए सुना जा सकता है। उन्होंने कहा कि किसी को इतनी बड़ी भीड़ की उम्मीद नहीं थी।

प्रियंका ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका किसी भी राजनीतिक पार्टी से कोई संबंध नहीं है और वे केवल कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं की बदतमीजी के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर कर रही हैं।

घटना के वीडियो में दिख रहा है कि सुरक्षाकर्मी कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं को नियंत्रित करने की कोशिश में जूझ रहे थे। एक वीडियो में एक महिला की आवाज सुनाई दे रही है, जो कार्यकर्ताओं की बदतमीजी की शिकायत कर रही है।

विडंबना यह रही कि असम कॉन्ग्रेस ने खुद ही अपने आधिकारिक एक्स (पूर्व ट्विटर) अकाउंट पर वह तस्वीरें साझा कीं, जिनसे यह खुलासा हुआ कि पार्टी कार्यकर्ताओं ने अपने नए अध्यक्ष गौरव गोगोई का स्वागत करते हुए एयरपोर्ट पर अफरा-तफरी मचा दी। इन तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि समर्थक गोगोई के पीछे भीड़ में धक्का-मुक्की करते हुए सभी को पीछे छोड़ते जा रहे हैं।

एक तस्वीर में एक महिला पुलिसकर्मी गौरव गोगोई के ठीक पीछे खड़ी दिख रही है, जिसके चेहरे पर असहजता साफ झलक रही है, क्योंकि कार्यकर्ता उसे पीछे से धक्का दे रहे हैं।

शर्मिष्ठा पर जिस मुस्लिम संगठन ने करवाई FIR, उसके पाकिस्तान में लिंक: हिन्दू कार्यकर्ता का दावा, बताया- कराची में भी है ऑफिस

ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान के खिलाफ टिप्पणी करने वाली शर्मिष्ठा पनोली को पश्चिम बंगाल पुलिस ने गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी पश्चिम बंगाल के एक मुस्लिम संगठन ने करवाई है। शर्मिष्ठा पनोली पर इस्लाम के खिलाफ बोलने का आरोप कथित तौर पर लगाया गया है। इस बीच शर्मिष्ठा की मदद को एक हिन्दू संगठन आगे आया है।

श्री राम स्वाभिमान परिषद नाम के इस हिंदू संगठन ने 22 वर्षीय इन्फ्लुएंसर का समर्थन किया है। मीडिया से बात करते हुए इस संगठन के सचिव सूरज कुमार सिंह ने कहा कि जिस मुस्लिम संगठन ने शर्मिष्ठा के खिलाफ FIR दर्ज करवाई है, उसका एक कार्यालय पाकिस्तान के कराची शहर में है।

सिंह ने दावा किया है कि स्काई फाउंडेशन नामक संगठन के कुछ सदस्यों ने कोलकाता में शर्मिष्ठा के खिलाफ FIR दर्ज कराई और उनकी गिरफ्तारी की माँग की थी। उन्होंने कहा कि फाउंडेशन के सदस्यों ने यह भी धमकी दी थी कि अगर पुलिस शर्मिष्ठा के खिलाफ कार्रवाई नहीं करती है तो वे कानून अपने हाथ में ले लेंगे और उन्हें मार डालेंगे।

सूरज सिंह ने एक वीडियो दिखा कर यह भी दावा किया है कि स्काई फाउंडेशन के लोगों ने शर्मिष्ठा के गिरफ्तार होने के बाद कोर्ट में जश्न मनाया। उन्होंने शर्मिष्ठा के साथ कुछ होने का जिम्मेदार ममता सरकार को करार दिया है।

गौरतलब है कि शर्मिष्ठा के खिलाफ लगातार इस्लामी कट्टरपंथी सोशल मीडिया पर अभियान चला रहे थे। इसके बाद कोलकाता में दर्ज एक FIR के चलते उन्हें गुरुग्राम से 30 मई, 2025 को पश्चिम बंगाल पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। शर्मिष्ठा को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया है।

शर्मिष्ठा को गिरफ्तार किए जाने की आलोचना आंध्र प्रदेश के डिप्टी सीएम पवन कल्याण और कॉन्ग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने भी की है। गौरतलब है कि शर्मिष्ठा ने अपने वीडियो के बाद माफ़ी भी माँग ली थी, इसके बाद भी पश्चिम बंगाल पुलिस उन्हें गिरफ्तार कर ले गई।

जितनी नफरत पाकिस्तान से, उतनी ही RSS से… दरभंगा की कॉन्ग्रेस नेता और डिप्टी मेयर नाजिया हसन ने उगला जहर: हिंदू संगठन के भड़कने पर पहले माँगी माफी, बाद में बोली- ये तो प्रशासन के दबाव में किया

दरभंगा की डिप्टी मेयर और बिहार कॉग्रेस अल्पसंख्यक मोर्चा की उपाध्यक्ष नाजिया हसन के विरोध में जमकर प्रदर्शन हुआ। इस दौरान उनके कार्यालय का घेराव भी किया गया। दरअसल, कॉन्ग्रेस नेता ने आरएसएस और पाकिस्तान की तुलना करते हुए दोनों से नफरत करने की बात कही थी। इसके बाद उनका विरोध बढ़ गया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, दरभंगा की डिप्टी मेयर नाजिया हसन ने अपने फेसबुक अकाउंट पर एक पोस्ट में लिखा, “हम लोग हिंदू भाई से उतनी ही स्नेह रखते हैं जितनी मुस्लिम भाई से, हम लोग पाकिस्तान से उतनी ही नफरत करते हैं जितनी आरएसएस से क्योंकि दोनों ‘टू नेशन थ्योरी’ के समर्थक रहे हैं।” इस बयान के बाद लोगों में गुस्सा भड़क गया और उन्होंने इसका जोरदार विरोध शुरू कर दिया।

पोस्ट के वायरल होने के बाद शनिवार (31 मई 2025) को दरभंगा नगर निगम कार्यालय के बाहर बीजेपी और आरएसएस समर्थकों ने जमकर हंगामा किया। उन्होंने नाजिया हसन के खिलाफ नारेबाजी की और उनका पुतला जलाया। गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने नगर निगम ऑफिस में जबरन घुसने की कोशिश की, जहाँ उस वक्त नाजिया अपने चेंबर में मौजूद थीं। दरवाजा बंद होने की वजह से प्रदर्शनकारी अंदर नहीं घुस पाए, लेकिन उन्होंने ऑफिस के बाहर लगी नाजिया की नेमप्लेट को उखाड़कर तोड़ दिया और तोड़फोड़ की।

मामला बिगड़ता देख कई थानों की पुलिस मौके पर पहुँची। सदर एसडीपीओ अमित कुमार के नेतृत्व में पुलिस ने हालात को काबू में किया और दोनों पक्षों से बातचीत की। प्रशासन के दबाव में नाजिया हसन ने अपने बयान के लिए सार्वजनिक रूप से माफी माँग ली। हालाँकि, मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें प्रशासन के दबाव में माफी माँगनी पड़ी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अगर किसी को उनके बयान से आपत्ति थी, तो उसे कानूनी रास्ता अपनाना चाहिए था। साथ ही, उन्होंने प्रशासन पर समय पर मदद न देने का भी आरोप लगाया।

दूसरी तरफ, बीजेपी और आरएसएस कार्यकर्ताओं ने नाजिया हसन पर पाकिस्तान और ISI से संबंध होने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने माँग की कि नाजिया को डिप्टी मेयर के पद से हटाया जाए और उनके खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा दर्ज किया जाए। उनका कहना है कि सिर्फ माफी माँगने से मामला खत्म नहीं होगा और अगर प्रशासन ने कार्रवाई नहीं की तो उनका आंदोलन जारी रहेगा।

सदर एसडीपीओ अमित कुमार ने बताया कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है। अगर कोई लिखित शिकायत देता है, तो जाँच के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन सतर्क है और मामले की बारीकी से निगरानी कर रहा है।

बता दें कि दरभंगा की मेयर अंजुम आरा भी विवादों में रही हैं। उन्होंने होली और नमाज को लेकर विवादित बयान दिया था, जिसके बाद उन्हें माफी माँगनी पड़ी थी।

सीजफायर की गुहार लेकर इजरायल के झुका आतंकी संगठन हमास: गिड़गिड़ा कर बोला- ‘हम वापस कर देंगे सारे बंधक, IDF रोक दे बमबारी’

गाजा पर कब्जा जमाए बैठे फिलिस्तीनी आतंकी संगठन हमास ने अमेरिका के एक प्रस्ताव के जवाब में बड़ा बयान दिया है। उसने कहा कि वह 10 जिंदा बंधकों को रिहा करने और 18 मृत इजरायली बंधकों के शव सौंपने को तैयार है। लेकिन इसके बदले उसकी दो बड़ी माँगें हैं: पहला – गाजा पट्टी से इजरायली सेना की पूरी तरह वापसी, और दूसरा – युद्ध का स्थाई अंत। यह जवाब शनिवार (31 मई 2025) को आया, जब हमास ने अमेरिका के प्रस्ताव पर अपनी प्रतिक्रिया दी।

अमेरिका का प्रस्ताव इजरायल के सामरिक मामलों के मंत्री और प्रमुख वार्ताकार रॉन डेरमर की सहमति से तैयार किया गया था। इस प्रस्ताव में 60 दिनों के युद्धविराम की बात थी, जिसके बाद इजरायल को फिर से युद्ध शुरू करने का विकल्प दिया गया था। इसके अलावा, इस दौरान गाजा में संयुक्त राष्ट्र के नेतृत्व में मानवीय सहायता को बहाल करने की योजना भी शामिल थी। इजरायल ने इस प्रस्ताव को पहले ही स्वीकार कर लिया था।

हमास ने अपने जवाब में साफ किया कि वह 28 बंधकों की रिहाई के लिए तैयार है, जिनमें 10 जीवित हैं और 18 मृत। उसने यह भी कहा कि वह इजरायली जेलों में बंद फिलिस्तीनी कैदियों की रिहाई के बदले इन बंधकों को छोड़ेगा। हमास का कहना है कि उसका लक्ष्य सिर्फ अस्थाई राहत नहीं, बल्कि स्थाई युद्धविराम और गाजा से इजरायली सेना की पूरी तरह वापसी है। संगठन ने एक अलग बयान में जोर दिया कि यह प्रस्ताव युद्ध को हमेशा के लिए खत्म करने की दिशा में एक कदम होना चाहिए।

इस बीच, एक और घटनाक्रम में तनाव बढ़ गया। जॉर्डन, सऊदी अरब, मिस्र और बहरीन के विदेश मंत्रियों के साथ-साथ अरब लीग के महासचिव को रविवार (1 जून 2025) को वेस्ट बैंक के रामल्लाह में फिलिस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास से मिलने जाना था। इस मुलाकात को गाजा संकट के समाधान और क्षेत्र में बढ़ते तनाव को कम करने के लिए बहुत अहम माना जा रहा था। लेकिन इजरायल ने इस यात्रा पर रोक लगा दी। इजरायल का कहना है कि वेस्ट बैंक की सीमाएँ और हवाई क्षेत्र उसके नियंत्रण में हैं, इसलिए वह इस यात्रा में कोई सहयोग नहीं करेगा।

बता दें कि फिलीस्तीन के गाजा पर हमास का करीब 2 दशकों से नियंत्रण है। गाजा पर हमास कब्जेदार की तरह है, क्योंकि फिलिस्तीनी अथॉरिटी ने ही उसे कभी मान्यता नहीं दी। इजरायल हमास के संपूर्ण विनाश की प्रक्रिया में जुटा हुआ है, जबकि अपने शीर्ष कमांडरों के बारे जाने के बाद अब वो सिर्फ अपने अस्तित्व को बचाने की कोशिश कर रहा है।

BJP बनाएगी कर्नल कुरैशी- विंग कमांडर सिंह को चेहरा: TOI में छपी फर्जी खबर की भाजपा ने खोली पोल, बताया- कैसे मीडिया ने तोड़-मरोड़ के पेश किया बयान

भारतीय जनता पार्टी ने कर्नल सोफिया कुरैशी और विंग कमांडर व्योमिका सिंह को अपने अभियान का चेहरा बनाने की खबरें खारिज की हैं। भाजपा ने इन्हें फर्जी खबर करार दिया है। पार्टी ने कहा है कि वह ऐसी कोई योजना पर काम नहीं कर रही है। मीडिया में चलाया गया था कि ऐसा भाजपा महिलाओं में पैठ बढ़ाने के लिए करेगी।

भाजपा के आईटी सेल के मुखिया अमित मालवीय ने एक्स (पहले ट्विटर) पर यह दावा करने वाली खबरों को लेकर लिखा। उन्होंने कहा, “यह फेक न्यूज है। भाजपा की कर्नल सोफिया कुरैशी या विंग कमांडर व्योमिका सिंह को अभियान का चेहरा बनाने की कोई योजना नहीं है।”

आगे उन्होंने बताया, “भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष जमाल सिद्दीकी के बयान को गलत तरीके से पेश किया गया है। उन्होंने कर्नल कुरैशी को समुदाय के भीतर एक सशक्त मुस्लिम महिला के उदाहरण के रूप में दिखाने को लेकर बात कही थी।”

यह खबर Times मीडिया समूह के अखबारों ने प्रमुखता से छापी थी। टाइम्स ऑफ़ इंडिया में छपी इस खबर में बताया गया था कि 9 जून, 2025 को भाजपा को मोदी सरकार के 11 वर्ष पूरे होने पर भाजपा महिलाओं को केंद्र में रख कर यह अभियान चलाएगी।

खबर में बताया गया था कि इस काम की जिम्मेदारी भाजपा के अल्पसंख्यक मोर्चा को सौंपी गई है। इस खबर में बताया गया था कि मोर्चा को मस्जिदों, दरगाहों और बाकी जगहों पर ऐसी चौपालें आयोजित करने का आदेश भाजपा की तरफ से दिया गया है।

टाइम्स ऑफ़ इंडिया की खबर में यह भी दावा किया गया था कि पार्टी इससे अल्पसंख्यक समुदाय में अपनी पैठ बढ़ाना चाहती है। हालाँकि, भाजपा ने इस खबर को पूरी तरह फर्जी बताया है। गौरतलब है कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान विश्व के सामने जानकारी देने वाला चेहरा कर्नल सोफिया कुरैशी और विंग कमांडर व्योमिका सिंह ही थीं।

इससे पहले भाजपा ने दैनिक भास्कर की उस रिपोर्ट को खारिज किया था जिसमे पार्टी के घर-घर सिंदूर भेजने के अभियान चलाने का दावा किया गया था। भाजपा ने बताया था कि उसकी ऐसी कोई योजना नहीं है।

रेजिमेंट के मंदिर-गुरुद्वारे में जाने से ईसाई अफसर ने किया मना, सेना ने नौकरी से निकाला: दिल्ली HC ने भी नहीं दी राहत, कहा- सैनिक वर्दी से एकजुट

भारतीय सेना में ईसाई कमांडिंग अफसर सैमुअल कमलेसन की सेवा बहाल नहीं की जाएगी। दिल्ली हाई कोर्ट ने अफसर की सेवा में बहाली की माँग वाली याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि कमांडिंग अफसर का काम उदाहरण पेश करना होता है, विभाजन नहीं।

बता दें कि सैमुअल कमलेसन ने पेंशन और ग्रेच्युटी के बिना सेना से निरस्त किए जाने के आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। साथ ही माँग की थी कि उनकी सेवा फिर से बहाल की जाए, लेकिन हाई कोर्ट ने बर्खास्तगी के आदेश को बरकरार रखने का फैसला लिया है।

जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस शलिंदर कौर की बेंच ने अफसर की याचिका पर सुनवाई की। बेंच ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि सशस्त्र बलों में रेजिमेंटों के नाम अक्सर धर्म या क्षेत्र से जुड़े होते हैं, लेकिन इससे सेना की धर्मनिरपेक्षता और इन रेजिमेंटों में तैनात सैनिकों की छवि पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।

आगे कहा, “हमारे सशस्त्र बलों में सभी धर्मों, जातियों, पंथों, क्षेत्रों और आस्थाओं के कर्मी शामिल हैं, जिनका एकमात्र उद्देश्य देश को बाहरी आक्रमणों से बचाना है और इसलिए वे अपने धर्म, जाति या क्षेत्र से विभाजित होने के बजाय अपनी वर्दी से एकजुट हैं।”

कोर्ट ने अफसर को फटकारते हुए कहा, “कमांडिंग अधिकारी का काम विभाजन नहीं बल्कि उदाहरण पेश करना होता है। यूनिट में धार्मिक गतिविधियों को सबसे ऊपर रखना चाहिए। खासकर जब वे सैनिकों की कमान संभालते हैं, जिनका नेतृत्व वे युद्ध की स्थितियों और युद्ध में करेंगे।”

धार्मिक परेड में शामिल होने से किया था इनकार

सैमुअल कमलेसन मार्च 2017 में भारतीय सेना की 3 कैवलरी रेजिमेंट में लेफ्टिनेंट के तौर पर नियुक्त किया गया था। इस यूनिट में सिख, जाट और राजपूत सैनिकों के 3 स्क्वाड्रन शामिल होते हैं। उन्हें स्क्वाड्रन बी का ट्रूप लीडर बनाया गया था, जिसमें अधिकतर सिख जवान शामिल थे। कमलेसन ने कहा कि उनकी रेजिमेंट में केवल मंदिर और गुरद्वारे में धार्मिक परेड होती है। परिसर में कोई सर्व धर्म स्थल नहीं है और न ही उनकी आस्था अनुसार कोई चर्च है।

कमलेसन का कहना था कि उन्होंने मंदिर के गर्भग्रह में प्रवेश करने से छूट माँगी थी। इस पर दूसरी ओर के वकीलों ने तर्क दिया कि रेजिमेंट में शामिल होने के बाद से ही अफसर परेड में शामिल नहीं होते थे। उन्हें कमांडेट और अन्य अधिकारियों ने भी समझाया, लेकिन उन्होंने किसी की न सुनी।

कोर्ट में दलील दी गई कि कमलेसन को समझाने के बावजूद उनका व्यवहार ठीक नहीं हुआ। उनका आचरण सेना के अनुशासन और रेजिमेंट के हिसाब का नहीं था। जब सारे विकल्प समाप्त हो गए थे, तब उनके कदाचार के कारण उन्हें सेवा से बर्खास्त किया गया।

रावण की एक गलती और भगवान विष्णु का बालक रूप… जानें कच्छ के कोटेश्वर मंदिर की क्यों है इतनी मान्यता, विराजमान हैं यहाँ स्वयं ‘संपत्ति के ईश्वर’

गुजरात के कच्छ जिले में रेगिस्तान के रास्ते जब थकने लगते हैं तब समुद्र की गोद में बैठा एक प्राचीन शिव मंदिर दिखता है। जिसका नाम है कोटेश्वर महादेव मंदिर। यहाँ भगवान शिव स्वयं कोटेश्वर रूप में विराजमान हैं, जिन्हें ‘संपत्ति के ईश्वर’ भी कहा जाता है। कोटेश्वर मंदिर भारत की आखिरी सीमा पर स्थित है। इसके आगे सिर्फ पानी है और पाकिस्तान की सरहद।

गुजरात कोटेश्वर मंदिर कच्छ
कोटेश्वर मंदिर का गर्भग्रह (साभार : Gujarat Tourism)

मान्यताओं के अनुसार, कोटेश्वर मंदिर का संबंध रावण से भी है। कहा जाता है कि रावण ने भगवान शिव से खुश होकर शिवलिंग माँगा था, जिसे वह लंका ले जाना चाहता था। शिव जी ने उसे एक शर्त के साथ शिवलिंग दिया कि रास्ते में उसे कहीं भी ज़मीन पर नहीं रखना है, लेकिन रावण रास्ते में थक गया और उसने एक चरवाहे बालक (जो स्वयं भगवान विष्णु थे) से मदद माँगी। उस बालक ने शिवलिंग को ज़मीन पर रख दिया। फिर वो बालक भी वहीं बैठ गया। आज उसी स्थान को कोटेश्वर मंदिर के नाम से जाना जाता है।

मंदिर का इतिहास

  • कोटेश्वर मंदिर का जिक्र सबसे पहले ‘स्कंद पुराण’ में मिलता है। मंदिर का विस्तार मौर्यकाल (लगभग तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व) में हुआ। इतिहासकारों के अनुसार, ये स्थान पहले बौद्ध धर्म का केंद्र भी रहा है, लेकिन धीरे-धीरे यह शिव उपासना का बड़ा स्थल बन गया। 10वीं शताब्दी में सोलंकी वंश के शासकों ने मंदिर का पुनर्निर्माण करवाया और इसे गुजरात के प्रमुख तीर्थस्थलों में शामिल किया। वहीं, 1819 में आए भूकंप से इस क्षेत्र को काफी नुकसान हुआ था लेकिन इसके बाद ब्रिटिश शासन में मंदिर का आंशिक पुनर्निर्माण किया गया।

मंदिर की संरचना

मंदिर की संरचना बहुत ही साधारण लेकिन प्रभावशाली है। यह पूरी तरह से पत्थरों से बना हुआ है और इसकी बनावट पारंपरिक नागर शैली में है। जो गुजरात के मंदिरों की खास पहचान होती है। मंदिर का गर्भगृह छोटा है लेकिन बेहद पवित्र माना जाता है। इसके ऊपर ऊँचा शिखर है जो दूर से ही दिखाई देता है।

गुजरात कोटेश्वर मंदिर कच्छ
कोटेश्वर मंदिर का मुख्य द्वार और मंदिर के भीतर स्थापित नंदी की मूर्ति (साभार : Gujarat Tourism)

मंदिर की दीवारों पर नजर आने वाली सादगी ही इस मंदिर की सबसे बड़ी खूबसूरती है। समुद्र के किनारे स्थित होने के कारण यहाँ हमेशा ठंडी हवा बहती रहती है जो मंदिर के वातावरण को और भी पवित्र बना देती है।

मंदिर तक कैसे पहुँचे ?

गुजरात कोटेश्वर मंदिर कच्छ
समुद्र तट पर स्थापित कोटेश्वर महादेव मंदिर (साभार : kiaayo)
  • कोटेश्वर मंदिर तक पहुँचने के लिए पहले भुज आना होगा। भुज से यहाँ की दूरी करीब 150 किलोमीटर है, जिसे सड़क के रास्ते से आराम से तय किया जा सकता है। भुज रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट से यहाँ के लिए टैक्सी और बसें उपलब्ध हैं। मंदिर तक जाने वाली सड़कें अब काफी बेहतर हो चुकी हैं। रास्ते में नारायण सरोवर और लखपत जैसे अन्य धार्मिक और ऐतिहासिक स्थल भी पड़ते हैं, जिनका दर्शन करते हुए कोटेश्वर पहुँचा जा सकते है।

वामपंथियों, लिबरल वोक ब्रिगेड और हिन्दू-विरोधी ताकतों से सवाल: तुम्हारे दोहरे मापदंड अब छिप क्यों नहीं पा रहे हैं?

जब भी ‘अभिव्यक्ति की आज़ादी’ और ‘धर्मनिरपेक्षता’ की बात आती है, तथाकथित उदारवादी सेक्युलर गिरोह और वोक लिबरल्स सबसे पहले सामने आते हैं। नैतिकता का चश्मा पहनकर ये लोग बाकी दुनिया को भाषण देने में माहिर हैं।

लेकिन जब बात हिन्दू भावनाओं और हिन्दू समाज पर हमलों की आती है, तब ना तो इन्हें ‘बलात्कार की धमकियाँ’ दिखाई देती है, न ‘सर तन से जुदा’ जैसे नारे सुनाई देते हैं। ऐसा क्या होता है कि जब भी बात हिंदुओं पे आती है तो ये मौन व्रत धारण कर लेते हैं? क्या ये वही ‘सहिष्णुता’ है, जिसकी दुहाई इन नकली उदारवादियों द्वारा दिन-रात दी जाती है?

ज़रा सोचिए, भारत में आज भी ऐसे सैकड़ों कट्टरपंथी और हिन्दू-विरोधी तत्व रोज़ खुलेआम ज़हर उगल रहे हैं, हिन्दू देवी-देवताओं का अपमान कर रहे हैं, देश और राष्ट्र की संस्कृति पर हमला कर रहे हैं, सेना को गालियाँ दे रहे हैं, लेकिन उन पर किसी प्रकार की कोई कार्रवाई नहीं होती।

ना ही कोई गिरफ़्तारी, ना ही कोई पूछताछ। बल्कि इन लोगों को बचाया जाता है, क्योंकि इनकी पीठ पर राजनीति की छाया है, वो भी तुष्टिकरण की राजनीति की, जो इन्हें संरक्षण देती है।
अगर 22 साल की शर्मिष्ठा के साथ कोई अनहोनी होती है तो उसका ज़िम्मेदार कौन होगा?

अब आइए शर्मिष्ठा पनौली की कहानी पर। पुणे के सिम्बायोसिस लॉ कॉलेज की 22 वर्षीय छात्रा शर्मिष्ठा को 30 मई 2025 को कोलकाता पुलिस ने गुरुग्राम से गिरफ्तार कर लिया। वजह? ऑपरेशन सिंदूर पर एक इंस्टाग्राम वीडियो, जिसे उसने बाद में डिलीट कर दिया था।

पाकिस्तान की ट्रोल आर्मी की तरफ से मिलने वाली धमकियों और गाली-गलौज का जवाब देते हुए शर्मिष्ठा ने एक टिप्पणी की, जिसके बाद उसे भारत में बैठे इस्लामिक कट्टरपंथियों ने बलात्कार, हत्या और ‘सर तन से जुदा’ जैसे नारों के साथ भयानक धमकियाँ देनी शुरू कर दी। सोशल मीडिया पर ऐसी खतरनाक और जानलेवा धमकियों की लाइन लग गई।

इस्लामिक कट्टरपंथियों द्वारा हुई इस घिनौनी साइबर लिंचिंग के बाद शर्मिष्ठा ने न केवल वीडियो डिलीट किया बल्कि सार्वजनिक रूप से बिना किसी शर्त माफी भी माँगी। लेकिन इसके बावजूद बंगाल पुलिस, जिसकी मुर्शिदाबाद दंगों में अपनी संदिग्ध भूमिका के लिए कठोर आलोचना हुई है। वो पुलिस 1500 किलोमीटर दूर कोलकाता से गुरुग्राम आई और शर्मिष्ठा को गिरफ्तार कर अपने साथ बंगाल ले गई।

शनिवार (31 जून 2025) दोपहर अलीपुर कोर्ट में हुई सुनवाई के बाद कोर्ट के आदेश पर शर्मिष्ठा को 13 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। जबकि, जिन सैंकड़ों इस्लामिक कट्टरपंथियों ने शर्मिष्ठा को जान से मारने, और उसका बलात्कार करने की धमकियां दीं हुई हैं, वो सभी के सभी आज़ाद घूम रहे हैं।

अब सवाल उठता है: जो सच में ज़हर फैला रहे हैं, उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई क्यों नहीं होती?

आज भारत में जो तत्व असली ज़हर फैला रहे हैं, वे खुद को ‘साहित्यकार’, ‘एक्टिविस्ट’, या “तथाकथित पत्रकार” के चोले में छिपाए बैठे हैं। एक ओर मोहम्मद जुबैर जैसे लोग हैं, जो हिन्दू देवी-देवताओं के खिलाफ अपमानजनक मीम्स फैलाते हैं और झूठे नैरेटिव गढ़ते हैं। फिर भी उन्हें ‘फैक्ट चेकर’ कहा जाता है।

उधयनिधि स्टालिन जैसे नेता सनातन धर्म को खुलेआम ‘कैंसर’ कहते हैं, लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं होती। लीना मणिमेकलई जैसी फिल्ममेकर माँ काली को सिगरेट और LGBTQ झंडे के साथ दिखा कर कला की आड़ में अपमान करती हैं।

ये सभी नाम किसी न किसी रूप में हिन्दू-विरोध का एजेंडा फैलाने में जुटे हैं और विडंबना यह है कि इनके पीछे तथाकथित सेक्युलर ताकतों, अंतरराष्ट्रीय NGO नेटवर्क और कुछ राजनीतिक दलों का खुला समर्थन भी है।

मुर्शिदाबाद हिंसा में बंगाल पुलिस कहाँ गायब थी? और, किसके कहने पर?

अब बात करें मुर्शिदाबाद दंगों की, जहाँ हिन्दू घरों को जलाया गया, मंदिरों को अपवित्र किया गया और निर्दोष लोगों की जानें ली गईं। हरगोबिंद दास और उनके बेटे चंदन की निर्मम हत्या कर दी गई। 400 से ज़्यादा लोगों ने कुछ ही घंटों में वहाँ से पलायन कर लिया। 300 से ज़्यादा गिरफ़्तारियाँ हुईं। लेकिन असली मास्टरमाइंड आज भी कानून के शिकंजे से बाहर हैं।

कोलकाता पुलिस, जो एक 22 साल की छात्रा को गिरफ्तार करने में तेज़ी दिखाती है। वो धार्मिक मंचों से नफरत फैलाने वाले कट्टरपंथी मौलानाओं को पकड़ने में असहाय क्यों दिखती है?
क्या यही तुम्हारा लोकतंत्र है?

एक ऐसा सिस्टम जो एक 22 वर्षीय छात्रा को सोशल मीडिया पोस्ट के लिए अपराधी बना देता है, लेकिन सैंकड़ों गरीब-मासूम लोगों की ज़िंदगी से खिलवाड़ करने वालों और दंगों के सूत्रधारों को हाथ तक नहीं लगाता?

वामपंथियों, लिबरल वोक ब्रिगेड और हिन्दू-विरोधी ताकतों से सीधा सवाल है: जब शर्मिष्ठा को बलात्कार और ‘सर तन से जुदा’ की धमकियाँ मिल रही थीं, तब तुम्हारी नैतिकता कहाँ सो रही थी? क्या सिर्फ़ हिन्दू देवी-देवताओं को गालियाँ देना ही तुम्हारा लोकतंत्र है?

क्या सनातनी भावनाओं को कुचलना ही तुम्हारी आज़ादी है? क्या भारत को गालियाँ देना और कोसना ही तुम्हारी अभिव्यक्ति है? क्या यही तुम्हारी ‘सेलेक्टिव डेमॉक्रेसी’ है?

तुम लोगों का ‘जेंडर जस्टिस’, ‘फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन’, और ‘सेफ स्पेस’ का चोला तब कहाँ उतर जाता है, जब पीड़ित कोई हिन्दू होता है?

भारत अब जाग चुका है और तुम्हारा दोगलापन अब सब देख रहे हैं। शर्मिष्ठा भारत की ज़िम्मेदारी है, भारत के हिंदुओं की ज़िम्मेदारी है…