Home Blog Page 3874

गुल्लक तोड़कर PM CARES FUND में दान करने वाली बच्ची स्वस्थ, लगातार एक जैसे ट्वीट कर फैलाई गई थी उसके मौत की झूठी खबर

यूपी पुलिस ने बुधवार (अप्रैल 28, 2021) को ट्विटर पर जानकारी दी कि गाजियाबाद की एक लड़की की मौत के बारे में किए सभी ट्वीट्स फर्जी थे। बता दें कि हाल ही में, कई ट्वीट वायरल हुए थे, जिसमें यह दावा किया गया था कि एक लड़की ने अपने गुल्लक को तोड़ कर पीएम केयर्स फंड को 5,000 रुपए का दान दिया, लेकिन ऑक्सीजन नहीं मिलने के कारण उसकी मृत्यु हो गई।

इस तरह के कुछ ट्वीट्स में यह भी दावा किया गया कि लड़की गाजियाबाद की थी। हालाँकि, यह सच नहीं है। यूपी पुलिस ने बुधवार को मामलों के बारे में जानकारी देने के लिए ट्विटर का सहारा लिया।

उत्तर प्रदेश के आधिकारिक ट्विटर अकाउंट से ट्वीट करते हुए बताया गया कि कोविड महामारी के बीच, कुछ निहित स्वार्थ प्रशासन को बदनाम करने के लिए त्रासदियों से संबंधित फेक न्यूज फैला रहे हैं।

क्लिप में, लड़की के पिता का कहना है कि उनकी 18 साल की बेटी स्वस्थ है और फिलहाल वह अस्पताल से डिस्चार्ज हो चुकी है।

यूपी पुलिस ने आरोप लगाया है कि बदमाशों द्वारा अफवाह फैलाने और COVID-19 के फैलने के बीच दहशत पैदा करने के लिए ‘टूल किट ट्वीट’ का इस्तेमाल किया जा रहा था। एक अन्य ट्वीट में, पुलिस ने कहा कि नोएडा पुलिस के बारे में ऐसे ही ’टूल किट ट्वीट’ का इस्तेमाल कर कई लोगों ने प्रशासन को बदनाम करने के लिए त्रासदियों के बारे में फर्जी खबरें पोस्ट कीं। इसमें यह भी कहा गया है कि इंटरनेट पर अफवाह फैलाने के लिए जिम्मेदार दोषियों के खिलाफ मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई है।

यूपी पुलिस सोशल मीडिया यूजर्स के खिलाफ दर्ज किया एफआईआर

पिछले शनिवार को, उत्तर प्रदेश पुलिस ने यूपी सरकार और नोएडा पुलिस की छवि को धूमिल करने के लिए फर्जी एकाउंट्स का उपयोग करके अफवाह फैलाने और कोविड -19 के प्रकोप के बीच दहशत पैदा करने की कोशिश के लिए सोशल मीडिया यूजर्स के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की।

बता दें कि जिन ट्विट्स के लिए प्राथमिकी दर्ज की गई, उसमें सोशल मीडिया यूजर्स ने जोर देकर महामारी के कारण उनके प्रियजनों की मौत का दोष प्रशासन पर लगाया था। ट्वीट में यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ, पीएम मोदी और कई अन्य प्रमुख हस्तियों का जिक्र किया गया था। पुलिस ने कॉपी-पेस्ट किए गए संदेशों के स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया वेबसाइटों पर भी शेयर किए। स्क्रीनशॉट में महामारी के कारण अपने प्रियजनों के नुकसान पर शोक व्यक्त करते हुए कई यूजर्स के ट्वीट अक्षरश: एक जैसे थे।

पीएम केयर्स से 1 लाख पोर्टेबल ऑक्सीजन कॅान्संट्रेटर के लिए PM मोदी ने जारी किया फंड, नाइट्रोजन टैंकर बदले जाएँगे ऑक्सीजन टैंकर में

देश में कोरोनावायरस संक्रमण की दूसरी लहर के बीच कई राज्यों से ऑक्सीजन की आपूर्ति और उसके परिवहन से संबंधित टैंकरों की कमी सामने आ रही है। ऐसे में ऑक्सीजन की इन समस्याओं से निपटने के लिए दो प्रमुख फैसले लिए गए हैं। पहला फैसला पीएम केयर्स फंड से 1 लाख पोर्टेबल ऑक्सीजन कॅान्संट्रेटर की खरीद और ऑक्सीजन संयंत्रों की स्थापना का है और दूसरा फैसला यह है कि लिक्विड नाइट्रोजन गैस के टैंकरों को लिक्विड ऑक्सीजन टैंकरों में बदलने की अनुमति दे दी गई है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार (28 अप्रैल) को पीएम केयर्स फंड से 1 लाख पोर्टेबल ऑक्सीजन कॅान्संट्रेटर की खरीद को अनुमति दे दी है। पीएम मोदी ने यह भी कहा है कि यह पोर्टेबल ऑक्सीजन कॅान्संट्रेटर शीघ्रता से खरीदे जाएँ और जिन राज्यों में संक्रमित मरीजों की संख्या अधिक है उन्हें उपलब्ध कराया जाए।

इससे पहले पीएम केयर्स फंड से 713 प्रेशर स्विंग एडसॉरप्शन (PSA) ऑक्सीजन प्लांट लगाने के लिए फंड जारी किया गया था लेकिन आज 500 ऐसे ही PSA ऑक्सीजन प्लांट्स के लिए फिर से फंड जारी किया गया है।

ऑक्सीजन के संयंत्रों की स्थापना के साथ ही उनके त्वरित परिवहन के लिए भी सरकार लगातार प्रयास कर रही है। ऑक्सीजन के परिवहन में उपयोगी टैंकरों की कमी को दूर करने के लिए निर्णय लिया गया है कि लिक्विड नाइट्रोजन गैस (LNG) टैंकरों को लिक्विड ऑक्सीजन टैंकरों में बदल दिया जाएगा।

हालाँकि, यह प्रक्रिया संवेदनशील और खतरनाक है, ऐसे में भारत सरकार ने LNG टैंकरों को ऑक्सीजन टैंकर में परिवर्तित करने की प्रक्रिया के लिए कुछ विशेष स्टैन्डर्ड प्रोसीजर ऑपरेशन (SOP) जारी किए हैं। पेट्रोलियम एण्ड एक्सप्लोसिव सेफ्टी ऑर्गनाइजेशन (PESO) ने जानकारी देते हुए बताया है कि LNG टैंकरों को ऑक्सीजन टैंकर में बदलने की प्रक्रिया खतरनाक तो है लेकिन वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए यह प्रक्रिया अपनाने का निर्णय लिया गया है। PESO के अनुसार वर्तमान में देश में 138 ऐसे टैंकर हैं। LNG टैंकरों को ऑक्सीजन सेवा के लिए सहज बनाने के लिए PESO द्वारा जारी किए गए SOP की संक्षिप्त जानकारी यहाँ दी जा रही है :

  • SOP में कहा गया है कि सबसे पहले टैंकरों को गरम करके हइड्रोकार्बन फ्री नाइट्रोजन से शुद्ध किया जाएगा।
  • इसके बाद यह सुनिश्चित किया जाएगा कि टैंकर का एक छोटा से छोटा हिस्सा भी हइड्रोकार्बन रहित हो जाए।
  • इस पूरी प्रक्रिया में दक्ष एवं अनुभवी व्यक्तियों को ही जिम्मेदारी दी जाएगी।
  • टैंकर के वॉल्व, पाइप और अन्य भागों को ऑक्सीजन के अनुकूल बनाया जाएगा अथवा ऐसे उपकरणों का उपयोग किया जाएगा जो ऑक्सीजन के अनुकूल हैं।
  • SOP में यह भी कहा गया है कि LNG टैंकरों को ऑक्सीजन टैंकर में बदलने की प्रक्रिया की जानकारी PESO को उपलब्ध करानी होगी। आवेदक को PESO के द्वारा जारी की गई SOP के अनुसार ही प्रक्रिया को अंजाम देना होगा।

PESO के द्वारा जारी की गई SOP की जानकारी विस्तृत रूप से PESO की अधिकारिक वेबसाइट से प्राप्त की जा सकती है।

भारत में 27 अप्रैल को 3,62,913 नए संक्रमित मरीज मिले जिसके बाद कुल संक्रमितों की संख्या बढ़कर 1,79,88,793 हो गई है। देश में वर्तमान में 29,71,959 सक्रिय मरीज हैं। हालाँकि 27 अप्रैल को ही देश भर में 2,62,539 मरीज स्वस्थ हुए।

क्लबहाउस चर्चा में पत्रकार साक्षी जोशी ने माना- ‘बीजेपी ने बंगाल में जमीन पर किया है बहुत काम, हासिल कर सकती है बढ़त’

हाल ही में प्रशांत किशोर के साथ क्लबहाउस चर्चा के दौरान पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बॉथरूम ब्रेक और टॉयलेट रूटीन पूछने वाली पत्रकार साक्षी जोशी ने माना है कि बंगाल चुनावों में बीजेपी को बढ़त मिल सकती है और ऐसा इसलिए है क्योंकि उसने जमीन पर सच में काफी काम किया है।

ट्विटर पर वायरल हो रही उनकी एक बातचीत में साक्षी जोशी कहती हैं, ”जिस तरह से उन्होंने पश्चिम बंगाल में जगह बनाई है। सोचिए जिस पार्टी की राज्य में कोई जगह नहीं थी से उस जगह पहुँचना जहाँ वे आज हैं। आपको इसका श्रेय बीजेपी को देना ही होगा। उन्होंने लेफ्ट को किनारे लगा दिया है, राज्य में कोई भी कॉन्ग्रेस पार्टी के बारे में बात नहीं कर रहा है।”

साक्षी ने बंगाल विधानसभा चुनावों से पहले बीजेपी द्वारा जमीन पर किए गए काम की तारीफ करते हुए कहा, आप लोगों को बीजेपी के बारे में बात करते हुए पाते हैं। लड़ाई बीजेपी और टीएमसी के बीच है। यह सब उनकी कड़ी मेहनत के कारण है। उनका कैडर बहुत मजबूत है।

जोशी ने कॉन्ग्रेस पार्टी की भी आलोचना की, कुछ ट्वीट पोस्ट करने से जमीन पर काम नहीं होता है। उन्होंने कहा कि बीजेपी को जमीन पर लोगों से समर्थन मिल रहा है क्योंकि उन्होंने उनके लिए काम किया है।

बीजेपी की कट्टर आलोचक रहीं साक्षी जोशी की पार्टी के लिए ये तारीफ भरे शब्द, एक और ऑडियो बातचीत के कुछ दिनों बाद आए हैं, जिसका वह हिस्सा थी पर लीक हो गया था। उस ऑडियो बातचीत में, चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने कथित तौर पर स्वीकार किया था कि उनके द्वारा किए गए एक आंतरिक सर्वेक्षण में सामने आया कि पश्चिम बंगाल में बीजेपी जीत रही है।

7 अप्रैल को, लुटियंस के पत्रकारों और चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर के बीच एक क्लब हाउस की बातचीत के ऑडियो क्लिप ट्विटर पर वायरल हुए थे। सत्तारूढ़ टीएमसी के लिए काम कर रहे किशोर ने स्वीकार किया था कि उनके आंतरिक सर्वेक्षण के नतीजे पश्चिम बंगाल राज्य विधान सभा चुनावों में भाजपा की आरामदायक जीत का संकेत दे रहे थे।

जैसे-जैसे बातचीत का ऑडियो जंगल की आग की तरह फैला, किशोर और उस चर्चा में हिस्सा लेने वाले साक्षी जोशी समेत सभी पत्रकार यह कहते हुए डैमेज कंट्रोल में जुट गए कि उन्होंने बीजेपी की जीत की भविष्यवाणी नहीं की थी।

साक्षी जोशी ने पूछी थी ममता बनर्जी की टॉयलेट रूटीन

उस बातचीत का सबसे मजेदार पल तब आया जब साक्षी जोशी ने चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर से पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी की टॉयलेट रूटीन के बारे में पूछा। जोशी टॉयलेट पर नियंत्रण करने की ममता बनर्जी की क्षमता से प्रभावित दिखीं।

उन्होंने पूछा, “मैं एक महिला के रूप में सोच रही थी। ममता बनर्जी हेलीकॉप्टर में आती हैं, एक घंटे मंच पर बोलती हैं, अपने हेलीकॉप्टर में लौटती हैं और फिर एक अलग जगह पर लैंड करती हैं। वहाँ भी वह मंच पर एक घंटे तक बोलती है। वह वॉशरूम कब जाती हैं? वह अपने लिए कब समय निकालती हैं? यही मेरा सवाल है।”

जोशी ने कहा, ”मैं सोच रही थी कि हमें (पत्रकारों को) अधिक गर्मी और अधिक मात्रा में पानी के सेवन के कारण (बार-बार वॉशरूम) जाना होता है। हमें कहीं न कहीं जाना होता है। मैंने उन्हें कभी कोई ब्रेक लेते नहीं देखा।” साक्षी के इस सवाल पर शर्मिंदा प्रशांत किशोर ने मजाक में पूछा, “क्या मुझसे इसका भी जवाब देने की उम्मीद है?”

मनोचिकित्सकों ने मीडिया को दी सकारात्मक रहने की सलाह: भय के माहौल और लाशों के बीच रिपोर्टिंग पर जताई चिंता

भारत में तेज गति से बढ़ रहे संक्रमण के बीच मीडिया समूहों द्वारा की जा रही ‘गिद्ध रिपोर्टिंग’ पर संज्ञान लेते हुए मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित चिकित्सकों के एक समूह ने न्यूज मीडिया आउटलेट्स को ओपन लेटर लिखा है। इसमें चिकित्सकों ने मीडिया समूहों से अपील की है कि वह नकारात्मक रिपोर्टिंग छोड़कर लोगों पर बेहतर प्रभाव डालने वाली रिपोर्टिंग करें। उन्होंने मीडिया आउटलेट्स से अपील की है कि वे सकरात्मकता की कहानियाँ लोगों के सामने लेकर आएँ।

ओपन लेटर लिखने वाले इस समूह में नई दिल्ली के नेशनल मेडिकल कमीशन के एथिक्स एण्ड मेडिकल रजिस्ट्रेशन बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. बीएन गंगाधर, बैंगलोर की NIMHANS में मनश्चिकित्सा (Psychiatry) की HOD एवं प्रोफेसर प्रतिमा मूर्ति, भारतीय मनश्चिकित्सा सोसायटी के अध्यक्ष गौतम साहा और दिल्ली एम्स में मनश्चिकित्सा के प्रोफेसर राजेश सागर शामिल हैं।

मीडिया की संवेदनशीलता मुद्दों पर रिपोर्टिंग :

इस ओपन लेटर में कहा गया है कि मीडिया एक समय में कई करोड़ों लोगों के साथ संपर्क स्थापित करने की क्षमता रखता है। मीडिया के द्वारा पेश की गई रिपोर्ट टेलीविजन, मोबाईल और समाचारपत्रों के माध्यम से लगातार लोगों तक पहुँचती रहती है। ऐसे में श्मशानों में जलती हुई लाशों को दिखाकर, रोते-बिलखते लोगों की तस्वीरों और वीडियो दिखाकर, संवेदनशील क्षणों को कैमरा में कैद करके कुछ समय के लिए सनसनी पैदा की जा सकती है और इससे लोगों का ध्यान भी खींचा जा सकता है लेकिन ऐसी रिपोर्टिंग की कीमत भारी हो सकती है।

लेटर में यह भी कहा गया है कि जबकि देश के अधिकांश लोग विभिन्न प्रकार के प्रतिबंधों के कारण अपने घरों में है ऐसे में वो टेलीविजन और अपने मोबाईल के माध्यम से बाहरी दुनिया की खबरों से जुड़े हैं। लोग इस समय पहले से ही अवसाद और महामारी की कठिनाईयों से जूझ रहे हैं लेकिन संवेदनशील मुद्दों पर सनसनीखेज रिपोर्टिंग और निराशा एवं भय के विजुअल देखने से लोग और भी अवसाद में जा सकते हैं।

लेटर में उदाहरण दिया गया है कि यदि कोई Covid-19 संक्रमित मरीज ऐसी रिपोर्टिंग के माध्यम से निराशा भरी खबरों को देखेगा तो उसके भीतर से सकरात्मकता जाती रहेगी और जलती चिताओं को देखकर उसके मन में चिंता का भाव ही उत्पन्न होगा।

तर्क, तथ्य और उचित परिस्थितियों पर आधारित रिपोर्टिंग की सलाह :

इस ओपन लेटर में डॉक्टरों के समूह द्वारा यह बताया गया है कि किसी भी वस्तु की कमी को उजागर करना सही है ताकि उस पर कार्रवाई हो सके किन्तु यह बताना कि उस वस्तु की कमी हर जगह है, गलत है। जिस स्थान पर वस्तु की कमी है उसे दिखाना चाहिए लेकिन जहाँ कमी नहीं है उसे भी बराबर महत्व देते हुए दिखाना चाहिए।

लेटर में माँग तथा आपूर्ति के चक्र का उदाहरण दिया गया है और उसे मानवीय व्यवहार से जोड़ा गया है। मनोचिकित्सकों ने बताया कि मानव की प्रवृत्ति ही यही है कि वो जिस वस्तु की कमी के बारे में जितना सुनता है उतना ही उस वस्तु को संग्रहित करना शुरू कर देता है भले ही वह वस्तु उसके काम की हो या न हो। इसी प्रवृत्ति के कारण एक चक्र बन जाता है और अधिक संग्रह करने के कारण वस्तु की कमी बढ़ती जाती है।

क्या दिखाना है क्या नहीं :

डॉक्टरों के समूह द्वारा लिखे गए इस ओपन लेटर में कहा गया है कि मीडिया को यह दिखाना चाहिए कि मरीज को किस प्रकार से दवाई लेनी है, अस्पताल की जरूरत कब है, ऑक्सीजन की जरूरत कब है, कितने लोग Covid-19 से संक्रमण के बाद भी घर में ही ठीक हुए, संस्थाएँ किस प्रकार से महामारी के इस दौर में लोगों की मदद कर रही हैं। ऐसा करने से लोग सकारात्मक व्यवहार करेंगे और महामारी का यह पहलू भी सबके सामने आएगा।

मीडिया आउटलेट्स से निवेदन करते हुए इस लेटर में मनोचिकित्सकों द्वारा कहा गया है कि पत्रकारों को यह महसूस करना चाहिए कि जब रिपोर्टिंग करते समय उन पर ही नकारात्मकता हावी हो सकती है तो आम आदमी जो दिन भर यही खबरें देखता है उसके जीवन पर इन खबरों का कैसा प्रभाव होगा।

लेटर में अंत में मीडिया कर्मियों और न्यूज समूहों से प्रार्थना की गई है कि मीडिया इस महामारी में एक महत्वपूर्ण किरदार निभा सकता है लेकिन डर और लाशों की रिपोर्टिंग करके नहीं बल्कि सकरात्मक और विश्वसनीय खबरों को दिखाकर।

हाल ही में कई ऐसी खबरें आई थीं जहाँ मीडिया समूहों ने जलती लाशों और श्मशान की रिपोर्टिंग की, फेक खबरें चलाईं। इस पर ही संज्ञान लेते हुए डॉ. बीएन गंगाधर एवं अन्य ने मीडिया समूहों को अपनी रिपोर्टिंग पर ध्यान देने और सकारात्मक व्यवहार करने की सलाह दी है।

Scroll ने योगी सरकार को बदनाम करने के लिए दिया भ्रामक शीर्षक, अमेठी में ऑक्सीजन की झूठी कमी का मामला

जहाँ देश में एक ओर Covid-19 महामारी लगातार बढ़ती जा रही है वहीं दूसरी ओर वामपंथी और लिबरल न्यूज समूह फेक न्यूज और प्रोपेगंडा फैलाने से बाज नहीं आ रहे हैं। हाल ही में वामपंथी न्यूज वेबसाइट स्क्रॉल ने उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार को बदनाम करने के लिए एक भ्रामक शीर्षक प्रकाशित किया। स्क्रॉल का शीर्षक कुछ ऐसा था कि उससे यही प्रतीत होता कि उत्तर प्रदेश में सहायता माँगने पर एक आदमी के ऊपर एफआईआर दर्ज हो गई।

स्क्रॉल के द्वारा प्रकाशित लेख का शीर्षक था, ‘FIR filed against man who sought Twitter help for oxygen for grandfather in Uttar Pradesh’. स्क्रॉल के शीर्षक से यही लग रहा था कि ट्विटर के माध्यम से ऑक्सीजन की सहायता माँगने वाले व्यक्ति पर उत्तर प्रदेश में एफआईआर दर्ज कर दी गई है।

स्क्रॉल के लेख का स्क्रीनशॉट जहाँ भ्रामक शीर्षक दिखाई दे रहा है

स्क्रॉल के लेख में बताया गया है कि ट्विटर पर ऑक्सीजन के लिए सहायता माँगने वाले शशांक यादव पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है। हालाँकि उस पर ऑक्सीजन की कमी की अफवाह फैलाने और झूठा ट्वीट करने का आरोप है।

The Indian Express के हवाले से स्क्रॉल ने कहा कि पुलिस ने बताया है कि यादव अपने ट्वीट के माध्यम से भ्रामक जानकारी दी थी। स्क्रॉल के लेख में एक पुलिस अधिकारी का भी जिक्र था जिसने बताया कि यादव ने ऑक्सीजन की आपूर्ति और कोरोनावायरस पर भ्रामक जानकारी दी। हालाँकि इतनी जानकारी होने के बाद भी स्क्रॉल ने अपने शीर्षक को भ्रामक ही बनाए रखा।

स्क्रॉल के लेख का एक हिस्सा जहाँ इंडियन एक्स्प्रेस के हवाले से खबर दी गई है

शशांक ने पुलिस को किया गुमराह, न तो उसका कोई संबंधी कोविड-19 था न ही उसे ऑक्सीजन की जरूरत थी:

पुलिस ने बताया कि शशांक ने अपने ट्वीट में जिस मरीज का जिक्र किया था वह शशांक के नाना थे ही नहीं बल्कि उसके किसी चचेरे भाई के नाना थे। उनकी उम्र 88 वर्ष थी और वह न तो कोविड-19 से संक्रमित थे और न ही उन्हें ऑक्सीजन की जरूरत थी। उनकी मृत्यु हार्ट अटैक से हुई।

पुलिस ने यह भी बताया कि सनसनी और ऑक्सीजन की कमी का डर फैलाने के उद्देश्य से किए गए इस ट्वीट के बाद शशांक यादव सो गया और पुलिस के फोन लगाने पर कोई भी जवाब नहीं दिया। पुलिस ने इस चिंता से कि हो सकता है कोई आपात स्थिति हो, यादव का फोन ट्रेस किया और उस तक पहुँची।

शशांक यादव के ऊपर एपिडेमिक अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया और सीआरपीसी की धारा 41 के अंतर्गत उसे नोटिस दिया गया। हालाँकि, अमेठी पुलिस ने बताया कि शशांक को नोटिस और भविष्य के लिए चेतावनी देकर छोड़ दिया गया है।

इस पूरे मामले पर द वायर की पत्रकार आरफा खानम शेरवानी ने केन्द्रीय मंत्री और अमेठी सांसद स्मृति ईरानी से मदद करने की अपील की। जिस पर संज्ञान लेते हुए स्मृति ईरानी ने अमेठी पुलिस और जिलाधिकारी को शशांक की मदद का निर्देश दिया।

इस पूरे मामले को देखने के बाद यही प्रतीत होता है कि स्क्रॉल ने जानबूझकर भ्रामक शीर्षक दिया जिससे शीर्षक देखने पर ही यह प्रतीत हो कि उत्तर प्रदेश में मदद माँगने पर भी एफआईआर हो रही है।

कोरोना वैक्सीन कीमतों पर मची रार के बीच SII ने घटाया कोविशील्ड टीके का दाम, जानें कितनी हुई कीमत

सीरम इंस्टीट्यूट ने राज्यों को दी जाने वाली कोविशील्ड वैक्सीन की कीमत 100 रुपए घटा दी है। पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII) ने अपने कोविड-19 टीके ‘कोविशील्ड’ की राज्य सरकारों के लिए कीमत 400 रुपए प्रति खुराक तय की थी। अब इसे 300 रुपए प्रति खुराक कर दिया गया है। खुद एसआईआई के सीईओ अदार पूनावाला ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी है।

उन्होंने कहा, ”सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की तरफ से राज्य को दी जाने वाली वैक्सीन की कीमत 400 रुपए से घटाकर 300 रुपए प्रति डोज करता हूँ और यह तत्काल प्रभाव से लागू होगा। इससे राज्य के हजारों करोड़ रुपए की बचत होगी। इससे और ज्यादा वैक्सीनेशन हो पाएगा और अनगिनत जिंदगियाँ बचाई जा सकेंगी।”

दरअसल, 1 मई से देश में कोरोना वैक्सीनेशन का अगला चरण शुरू हो रहा है। इसके तहत 18 साल से ऊपर के लोग भी कोरोना से बचाव की वैक्सीन लगवा सकेंगे जिसके लिए आज से ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन भी शुरू हो चुका है। इस चरण के लिए केंद्र ने राज्यों और प्राइवेट अस्पतालों को सीधे वैक्सीन बनाने वाली कंपनियों से वैक्सीन खरीदने की छूट दी है। सीरम इंस्टिट्यूट ने ऐलान किया था कि वह राज्यों को 400 रुपए प्रति डोज के हिसाब से कोविशील्ड की सप्लाई करेगी। प्राइवेट अस्पतालों के लिए यह कीमत 600 रुपए प्रति डोज है। अब राज्यों के लिए यह कीमत 400 रुपए से घटकर 300 रुपए प्रति डोज हो गई है।

कोविशील्ड की कीमत पर सवाल भी उठे थे। सोशल मीडिया पर तमाम यूजर इस बात को उठा रहे थे कि एस्ट्राजेनेका की जिस वैक्सीन को सीरम ने बनाया है, वह भारत में सबसे महँगी क्यों है जबकि अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों में इसकी कीमत भारत के मुकाबले आधे या उससे भी कम रखी गई है। इसके अलावा, केंद्र सरकार ने भी सीरम और भारत बायोटेक से वैक्सीनों की कीमत घटाने की अपील की थी। अब सीरम ने राज्यों के लिए कोविशील्ड की कीमत घटा दी है। हालाँकि, प्राइवेट अस्पतालों को यह 600 रुपए प्रति डोज के हिसाब से ही मिलेगी।

दिल्ली के 4 आलीशान होटल रिजर्व: जजों के बाद CM केजरीवाल ने अब सरकारी अफसरों के लिए भी किया VIP कोविड इंतजाम

कोरोना के बढ़ते संक्रमण के बीच अरविंद केजरीवाल सरकार ने जजों के बाद अब सरकारी अधिकारियों के लिए वीआईपी इंतजाम किया है। दिल्ली सरकार ने मंगलवार (अप्रैल 27, 2021) को दिल्ली के चार बड़े होटलों को अस्पतालों से लिंक करने का आदेश दिया है ताकि सरकारी अधिकारियों और उनके परिवार के लोगों का इलाज किया जा सके। बता दें कि दिल्ली उच्च न्यायालय पहले ही जजों के लिए वीआईपी इंतजाम करने को लेकर दिल्ली सरकार को जमकर फटकार लगा चुकी है।

दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने विवेक विहार में होटल जिंजर, शाहदरा में होटल पार्क प्लाजा, कड़कड़डूमा के पास होटल लीला एंबियंस, हरि नगर में होटल गोल्डन ट्यूलिप एसेंशियल को सरकारी अधिकारियों और उनके परिवार वालों के लिए रिजर्व किया है। मंगलवार को जारी किए गए आदेश के अनुसार इन होटलों को राजीव गाँधी सुपरस्पेशलिटी अस्पताल और दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल से जोड़ा जाएगा ताकि दिल्ली सरकार, स्वायत्त संस्थाओं और निगम के अधिकारियों और उनके परिवार वालों का इलाज किया जा सके।

दिल्ली सरकार के द्वारा जारी किए गए आदेश में लिखा गया है कि राजीव गाँधी अस्पताल और दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल के निदेशकों को निर्देशित किया जाता है कि वे रिजर्व किए गए होटलों में कोविड पॉजिटिव अधिकारियों और उनके परिवार वालों के लिए स्वास्थ्य व्यवस्था मुहैया करवाएँ। साथ ही इस आदेश में यह भी कहा गया है कि रिजर्व किए गए होटलों में दिल्ली सरकार के कोविड पॉजिटिव अधिकारी और उनके परिवार के सदस्य क्वारंटाइन भी कर सकेंगे।

बीजेपी नेता कपिल मिश्रा ने आदेश की कॉपी शेयर करते हुए ट्वीट किया, “SHAME: अब केजरीवाल सरकार के अफसरों के लिए चार बड़े होटलों के 250 कमरें बुक करने का आर्डर। सरकारी अस्पताल को मरीज छोड़ कर इन होटलों में डॉक्टर ,ऑक्सीजन, दवाएँ भेजने का आर्डर। जनता एक एक बेड, एक ऑक्सीजन सिलेंडर के लिए तड़प तड़प कर मर रही है। ये कैसे बर्दाश्त किया जाएगा?”

बता दें कि पिछले दिनों दिल्ली सरकार ने एक आदेश जारी कर अशोका होटल के कमरों को कोविड केयर सेंटर्स में बदलने के लिए कहा था। अशोका होटल में इस सुविधा के लिए प्राइमस अस्पताल को भी लगाया गया था। हालाँकि मंगलवार को दिल्ली सरकार के इस आदेश पर ऑक्सीजन संकट की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने जमकर फटकार लगाई थी।

हाई कोर्ट ने फटकार लगाते हुए कहा था कि हमने कभी ऐसा कोई आग्रह नहीं किया था। साथ ही कोर्ट ने दिल्ली सरकार को कहा था कि आप सोचिए कि इस महामारी के दौरान ऐसा हम कैसे कह सकते हैं। यहाँ लोगों को अस्पताल में बेड और ऑक्सीजन नहीं मिल रहे हैं और हम आपसे लग्जरी होटल में बेड माँगेंगे? ऐसा आदेश कैसे जारी किया जा सकता है। सुनवाई के दौरान ही हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार को इस आदेश को तुरंत वापस लेने को कहा था। जिसके बाद सरकार ने साफ़ कर दिया कि इस आदेश को तुरंत वापस ले लिया जाएगा।

‘प्रियंका चोपड़ा की वजह से मुझे कोई काम नहीं मिला’: एक्ट्रेस की बहन मीरा चोपड़ा ने सुनाई स्ट्रगल की कहानी

बॉलीवुड सुपरस्टार प्रियंका चोपड़ा की कजिन मीरा चोपड़ा इन दिनों काफी चर्चा में आ गईं हैं। साल 2014 में फिल्‍म ‘गैंग ऑफ घोस्‍ट्स’ से बॉलीवुड डेब्‍यू करने वाली मीरा हिंदी सिनेमा के अलावा तमिल और तेलुगु फिल्मों में भी काम कर चुकी हैं। मीरा चोपड़ा ने 2014 में फिल्‍म ‘गैंग ऑफ घोस्‍ट्स’ से बॉलीवुड डेब्‍यू किया था। 

साउथ इंडियन फिल्‍मों में वह 2005 से ही काम कर रही थीं, बावजूद इसके उनका हिंदी फिल्‍मी करियर बहुत अच्‍छा नहीं रहा। मीरा चोपड़ा का कहना है कि उन्‍हें आज तक कोई भी फिल्‍म या काम प्रियंका चोपड़ा के कारण नहीं मिली है। उन्होंने जितना भी काम किया है, अपने बूते किया है।

‘प्रियंका ने नहीं की कभी कोई मदद’

मीरा चोपड़ा ने अपने एक्‍ट‍िंग करियर की शुरुआत तमिल और तेलुगु फिल्‍मों से की थी। ‘1920 लंदन’ जैसी बॉलीवुड फिल्‍मों में नजर आने वाली मीरा कहती हैं, “जैसे ही मैंने बॉलीवुड में एंट्री की, हर तरफ यही चर्चा रही कि प्रियंका चोपड़ा की बहन आ रही है। जबकि ईमानदारी से कहूँ तो मुझे प्रियंका की वजह से कभी कोई काम नहीं मिला। उन्‍होंने कभी रोल दिलवाने में मेरी कोई मदद नहीं की।”

‘प्रियंका की बहन होने का सिर्फ एक फायदा मिला’

Zoom TV Digital से स्‍ट्रगल को लेकर बात करते हुए मीरा कहती हैं, “यदि मुझे कभी किसी प्रोड्यूसर की जरूरत भी हुई, तो उन लोगों ने मुझे कास्‍ट नहीं किया क्‍योंकि मैं प्रियंका चोपड़ा की बहन हूँ। सच यही है कि प्रियंका से रिश्‍ता होना, मेरे करियर में किसी भी रूप में मददगार साबित नहीं हुआ। हाँ, इतना जरूर हुआ कि लोगों ने मुझे गंभीरता से लिया।”

मीरा आगे कहती हैं, “बॉलीवुड ने मुझे कभी ग्रांटेड नहीं लिया। ऐसा इसलिए था कि उन्हें पता था कि मैं तमिल फिल्मों में काम करके आई हूँ। लोगों को यह भी पता था कि मैं फिल्मी परिवार से हूँ। मुझे प्रियंका की बहन होने का बस यही फायदा हुआ। बाकी मुझे भी करियर में खूब स्ट्रगल करना पड़ा है।”

दोनों बहनों से कभी नहीं हुई तुलना

प्रियंका चोपड़ा के अलावा परिणीति चोपड़ा भी मीरा की बहन हैं। मीरा कहती हैं, “मैं इस मामले में भाग्‍यशाली रही हूँ कि मेरे काम की कभी मेरी दोनों से तुलना नहीं की गई है।” प्रियंका चोपड़ा अब जहाँ बॉलीवुड के साथ ही हॉलीवुड में भी नाम कमा रही हैं, वहीं परिणीति चोपड़ा हाल ही ‘साइना’ और ‘द गर्ल ऑन द ट्रेन’ और ‘संदीप और पिंकी फरार’ जैसी फिल्‍मों में नजर आई हैं।

पुलिसवाली के रोल में OTT पर डेब्‍यू

मीरा चोपड़ा आखिरी बार बॉलीवुड फिल्म ‘सेक्शन 375’ में नजर आई थीं। इस फिल्म में उनके साथ अक्षय खन्ना और रिचा चड्ढा भी थे। मीरा चोपड़ा ने अब ओटीटी प्लेटफॉर्म पर भी डेब्यू किया है। वह ‘कमाठीपुरा (द टैटू मर्डर्स)’ में लीड रोल प्ले कर रही हैं। जबकि आगे अर्जुन रामपाल के साथ उनकी फिल्‍म ‘नास्तिक’ भी आने वाली है।

राज्यों के उपयोग के लिए रेल मंत्रालय ने लगभग 64000 बेड और 4000 कोविड केयर कोच उपलब्ध कराए

देश कोरोना वायरस की दूसरी लहर से जूझ रहा है। इस संकट से निपटने के लिए कई मंत्रालय, निगम और संगठन एक साथ आए हैं। इस बीच रेल मंत्रालय की तरफ से लगभग 64,000 बेड और 4000 कोविड केयर कोच विभिन्न राज्यों के उपयोग के लिए उपलब्ध कराए गए हैं।

रेल मंत्रालय की एक विज्ञप्ति के अनुसार, लगभग 169 कोच पहले ही कोविड केयर के लिए विभिन्न राज्यों को सौंप दिए गए हैं। रेलवे को अब नागपुर से कोविड केयर की डिमांड हुई है, जहाँ लगभग 6000 नए कोरोना वायरस के मामले रोजाना सामने आ रहे हैं।

समझौते को जल्द से जल्द पूरा करने के लिए मंडल रेल प्रबंधक, नागपुर और नागपुर नगर निगम के आयुक्त के बीच एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं। रेलवे 11 कोचों के साथ एक कोविड केयर रेक तैनात करने के लिए तैयार है, जिसमें प्रत्येक कोच में कम से कम 16 मरीजों को समायोजित करने की क्षमता वाले संशोधित स्लीपर्स शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, कोच में राज्य स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा प्रदान की जाने वाली सभी आवश्यक चिकित्सा बुनियादी सुविधाएँ उपलब्ध होंगी। महाराष्ट्र राज्य ने भी अजनी ICD क्षेत्र में अलगाव के कोच जुटाने की माँग रखी है।

नंदुरबार में अप्रैल के मध्य में लगभग 94 कोचों के साथ रेलवे कोविड केयर फैसिलिटी उपलब्ध कराई गई थी, जहाँ वर्तमान में 57 मरीजों के लिए सुविधा उपलब्ध है।

राज्यों की माँग के अनुसार, नागपुर, भोपाल, अजनी ICD, तिवारी (निकट इंदौर) में कोविड केयर कोच की भी व्यवस्था की गई है।

रेलवे कोविड केयर कोच डेटा (साभार: My Gov Twitter handle)

इंदौर के पास टिही में 20 कोविड केयर कोच में ऑक्सीजन सिलेंडरों से सुसज्जित लगभग 320 बिस्तरों की व्यवस्था भारतीय रेलवे द्वारा की गई है।

कोविड -19 उपचार की आवश्यकता वाले रोगियों के प्रबंधन के लिए दिल्ली की क्षमता को बढ़ाते हुए, रेलवे ने दिल्ली के सरकार की 75 कोविड केयर कोचों की माँग को पूरा किया है, जिसमें शकूरबस्ती में 50 कोच और आनंद विहार स्टेशनों पर 25 कोच लगाकर 1200 बेड की क्षमता है।

SC ने UAPA आरोपित सिद्दीकी कप्पन को मथुरा जेल से दिल्ली लाने का दिया आदेश, यूपी के वहीं ईलाज की अपील को ठुकराया

यूपी के हाथरस में दलित लड़की के साथ हुई रेप और हत्या के मामले में दंगों की साजिश रचने के आरोप में उत्तर प्रदेश पुलिस ने केरल के पत्रकार सिद्दीकी कप्पन पर UAPA के तहत चार्जशीट दायर की थी। अब सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को आदेशित किया है कि सिद्दीकी कप्पन को मथुरा जेल से दिल्ली के किसी सरकारी अस्पताल में ईलाज के लिए शिफ्ट किया जाए।

भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एनवी रमन, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एएस बोपन्ना की पीठ ने केरल यूनियन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट (KUWJ) की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश जारी किया है। न्यायालय ने कहा कि केरल के पत्रकार सिद्दीकी कप्पन को मथुरा जेल से दिल्ली के एम्स, राम मनोहर लोहिया अथवा किसी अन्य सरकारी अस्पताल में शिफ्ट किया जाए।

लाइव लॉ के अनुसार उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पक्ष रखते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि एक कोविड-19 निगेटिव व्यक्ति को विशेष सुविधा देते हुए दिल्ली के सरकारी अस्पताल में शिफ्ट करना न्यायसंगत नहीं है जबकि हजारों कोविड-19 संक्रमित मरीज पहले से ही अस्पतालों में बिस्तरों की कमी से जूझ रहे हैं।

सिद्दीकी कप्पन जिस मथुरा जेल में बंद है, वहाँ का उदाहरण देते हुए सॉलिसिटर जनरल मेहता ने कहा कि मथुरा जेल में ही लगभग 50 कोविड-19 संक्रमित मरीज हैं जिनका ईलाज मथुरा अस्पताल में ही चल रहा है। सिद्दीकी कप्पन के ईलाज के विषय में राज्य का पक्ष रखते हुए मेहता ने कहा कि राज्य सरकार यह सुनिश्चित करती है कि किसी भी चिकित्सकीय आपात स्थिति में मथुरा अस्पताल त्वरित कार्रवाई करते हुए कप्पन की जाँच करेगी।  

हालाँकि सिद्दीकी कप्पन को मथुरा जेल से दिल्ली के अस्पतालों में शिफ्ट किए जाने के विरोध में सॉलिसिटर जनरल मेहता के द्वारा दी गई दलीलों को नजर अंदाज करते हुए मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने कहा कि न्यायालय ने कप्पन की वर्तमान परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए यह आदेश दिया है। न्यायालय ने कहा कि जेल में दुर्घटनावश कप्पन चोटिल हुआ है और उसके स्वास्थ्य की रक्षा करना उस राज्य की जिम्मेदारी है जहाँ उसे गिरफ्तार किया गया है।

आपको बात दें कि यूपी के हाथरस में दलित लड़की के साथ हुई रेप और हत्या के मामले में दंगों की साजिश रचने के आरोप में उत्तर प्रदेश पुलिस ने केरल के पत्रकार सिद्दीकी कप्पन पर UAPA के तहत चार्जशीट दायर की थी। यूपी के हाथरस में हुए रेप और हत्या के मामले में यूपी एसटीएफ की एक टीम दंगों की साजिश की जाँच कर रही थी जिसको लेकर टीम ने मथुरा कोर्ट में UAPA के तहत एक चार्टशीट फाइल की थी। 

PFI और उस से जुड़े संगठन के 8 आरोपितों के खिलाफ दाखिल की गई 5000 पन्नों की चार्जशीट में यूपी एसटीएफ ने हाथरस में दंगों की साजिश का खुलासा किया था और इसमें सिद्दीकी कप्पन, अतीकुर्रहमान, मसूद अहमद, रउफ शरीफ, अंसद बदरूद्दीन, फिरोज, दानिश का नाम शामिल था। उत्तर प्रदेश पुलिस की ओर से दायर की गई चार्जशीट में कहा गया था कि गिरफ्तार किए गए सभी आरोपित हाथरस में दंगा भड़काना चाहते थे और उसकी साजिश रच रहे थे। चार्जशीट के अनुसार केरल के पत्रकार सिद्दीकी कप्पन ने ही दंगों की साजिश रची थी और PFI मेंबर रउफ शरीफ इन दंगों की फंडिंग के लिए काम कर रहा था।